Media24Media.com: 12 वर्षों में बदली भारत की आतंकवाद-रोधी तस्वीर: जीरो टॉलरेंस नीति से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र

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12 वर्षों में बदली भारत की आतंकवाद-रोधी तस्वीर: जीरो टॉलरेंस नीति से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नई दिशा देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। केंद्र सरकार की "आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance)" नीति के तहत कानूनी सुधार, संस्थागत सशक्तीकरण, खुफिया समन्वय, सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में आतंकवादी घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है।

2014 में चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिदृश्य

वर्ष 2014 में देश को आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियां और पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। वहीं, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार भी नई चुनौती बनकर उभरा था।

कानूनी सुधारों से मिली नई ताकत

सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन किए।

  • यूएपीए (UAPA) संशोधन 2019 के तहत व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान किया गया।

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) संशोधन अधिनियम 2019 से एजेंसी की जांच शक्तियों का विस्तार हुआ।

  • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) को मजबूत कर आतंकियों की वित्तीय आपूर्ति पर शिकंजा कसा गया।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में पहली बार आतंकवाद और संगठित अपराध की स्पष्ट परिभाषा दी गई।

  • आर्म्स संशोधन अधिनियम 2019 के जरिए अवैध हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया।

NIA और खुफिया तंत्र हुआ और मजबूत

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का बजट 2014-15 के ₹91 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹394 करोड़ से अधिक हो गया। देशभर में विशेष NIA अदालतों की स्थापना की गई तथा 21 शाखा कार्यालय खोले गए।

वहीं, मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC), NATGRID और CCTNS जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई। हाल ही में साइबर खतरों से निपटने के लिए Cyber Multi Agency Centre (CyMAC) की भी स्थापना की गई है।

आतंकवाद के खिलाफ बदली रणनीति

पिछले दशक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक और जवाबी बनाया।

  • 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकियों के लॉन्च पैड पर सीधा प्रहार किया।

  • 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।

  • 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के स्रोत पर कार्रवाई की गई।

इन अभियानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब आतंकवादी हमलों का जवाब निर्णायक तरीके से देगा।

वैश्विक मंच पर भी बढ़ी भारत की भूमिका

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया है। FATF, संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न द्विपक्षीय मंचों पर भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और संरक्षण के खिलाफ प्रभावी आवाज उठाई। 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाना और 2025 में तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियां रहीं।

जम्मू-कश्मीर में दिखा सकारात्मक बदलाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2004-2014 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, जबकि 2014-2024 के बीच यह संख्या घटकर 2,242 रह गई।

  • पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

  • आतंकवादी हमलों में नागरिक और सुरक्षा बलों की हताहतों की संख्या में भारी कमी आई है।

  • 2024 में जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

  • निवेश और विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सुरक्षित और आत्मविश्वासी भारत की ओर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में अपनाई गई व्यापक और बहुआयामी रणनीति ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ अधिक सक्षम, आधुनिक और सशक्त बनाया है। कानूनी सुधारों, तकनीकी नवाचारों, मजबूत संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बल पर देश की आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिली है और नागरिकों का विश्वास भी बढ़ा है।

आतंकवाद के खिलाफ यह परिवर्तन केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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