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साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उर्वरकों की कालाबाजारी पर राज्य सरकार का जीरो टॉलरेंस

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बेमेतरा में अवैध उर्वरक भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 275 बोरी यूरिया जब्त; किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार सजग

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर, उचित मूल्य पर और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 275 बोरी यूरिया जब्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश तथा कृषि विभाग के उप संचालक मोरध्वज डडसेना के मार्गदर्शन में गठित जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा जिलेभर में लगातार औचक निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर अनुचित लाभ कमाने के प्रयासों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

इसी अभियान के तहत प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल ने ग्राम जानो, तहसील देवकर में अँजोर वर्मा के परिसर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 275 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। मौके पर संपूर्ण उर्वरक को विधिवत जब्त कर लिया गया तथा संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कृषि विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरक ही उपलब्ध कराए जाएं और किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री बाजार में न पहुंचे।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। यदि कोई निजी कृषि केंद्र, उर्वरक विक्रेता अथवा सहकारी संस्था इस प्रकार की अनियमितता करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जाएगा।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत प्राप्त होते ही बिना पूर्व सूचना के तत्काल जांच एवं छापामार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता तथा कृषि आदानों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। प्रदेश में चल रही इस तरह की सतत कार्रवाई न केवल कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी कि सरकार उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की 

12 वर्षों में बदली भारत की आतंकवाद-रोधी तस्वीर: जीरो टॉलरेंस नीति से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नई दिशा देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। केंद्र सरकार की "आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance)" नीति के तहत कानूनी सुधार, संस्थागत सशक्तीकरण, खुफिया समन्वय, सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में आतंकवादी घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है।

2014 में चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिदृश्य

वर्ष 2014 में देश को आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियां और पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। वहीं, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार भी नई चुनौती बनकर उभरा था।

कानूनी सुधारों से मिली नई ताकत

सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन किए।

  • यूएपीए (UAPA) संशोधन 2019 के तहत व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान किया गया।

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) संशोधन अधिनियम 2019 से एजेंसी की जांच शक्तियों का विस्तार हुआ।

  • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) को मजबूत कर आतंकियों की वित्तीय आपूर्ति पर शिकंजा कसा गया।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में पहली बार आतंकवाद और संगठित अपराध की स्पष्ट परिभाषा दी गई।

  • आर्म्स संशोधन अधिनियम 2019 के जरिए अवैध हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया।

NIA और खुफिया तंत्र हुआ और मजबूत

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का बजट 2014-15 के ₹91 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹394 करोड़ से अधिक हो गया। देशभर में विशेष NIA अदालतों की स्थापना की गई तथा 21 शाखा कार्यालय खोले गए।

वहीं, मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC), NATGRID और CCTNS जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई। हाल ही में साइबर खतरों से निपटने के लिए Cyber Multi Agency Centre (CyMAC) की भी स्थापना की गई है।

आतंकवाद के खिलाफ बदली रणनीति

पिछले दशक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक और जवाबी बनाया।

  • 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकियों के लॉन्च पैड पर सीधा प्रहार किया।

  • 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।

  • 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के स्रोत पर कार्रवाई की गई।

इन अभियानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब आतंकवादी हमलों का जवाब निर्णायक तरीके से देगा।

वैश्विक मंच पर भी बढ़ी भारत की भूमिका

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया है। FATF, संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न द्विपक्षीय मंचों पर भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और संरक्षण के खिलाफ प्रभावी आवाज उठाई। 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाना और 2025 में तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियां रहीं।

जम्मू-कश्मीर में दिखा सकारात्मक बदलाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2004-2014 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, जबकि 2014-2024 के बीच यह संख्या घटकर 2,242 रह गई।

  • पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

  • आतंकवादी हमलों में नागरिक और सुरक्षा बलों की हताहतों की संख्या में भारी कमी आई है।

  • 2024 में जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

  • निवेश और विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सुरक्षित और आत्मविश्वासी भारत की ओर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में अपनाई गई व्यापक और बहुआयामी रणनीति ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ अधिक सक्षम, आधुनिक और सशक्त बनाया है। कानूनी सुधारों, तकनीकी नवाचारों, मजबूत संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बल पर देश की आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिली है और नागरिकों का विश्वास भी बढ़ा है।

आतंकवाद के खिलाफ यह परिवर्तन केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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दाढ़ी (बेमेतरा) सीसी रोड प्रकरण पर सख्त रुख: कलेक्टर को मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है।

मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने  निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है - जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।

एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर सख्त संदेश, भारत ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई

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राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को Shanghai Cooperation Organisation (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में बिश्केक में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के केंद्र अब दंड से अछूते नहीं रहेंगे। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद किसी भी देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है और इस पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने SCO से अपील की कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने, शरण देने या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद से बिना किसी अपवाद के मुकाबला करना क्षेत्रीय सुरक्षा को शांति और समृद्धि का आधार बना सकता है। उन्होंने पिछले वर्ष की “टियांजिन घोषणा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख और जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या धर्म नहीं होता और सभी देशों को इसके खिलाफ एकजुट और सुसंगत रुख अपनाना चाहिए। SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया को एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है जहां सह-अस्तित्व, सहयोग और करुणा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है” और हमें शांति, संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि SCO के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, समानता और सहयोग को मजबूत कर इस संगठन को शांति और आशा का प्रतीक बनाया जा सकता है। भारत इस दिशा में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, वर्ष 2026 में SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो संगठन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में 16 नवंबर तक अवैध धान परिवहन पर कड़ी निगरानी, 19,320 क्विंटल धान जब्त

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रायपुर-छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर तक लगभग 19 हजार 320 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है। 

मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर के अवधि में सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान में सर्वाधिक महासमुंद जिले में 4266 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार बलरामपुर जिले में 4139 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 1750 क्विंटल, रायगढ़ जिले में 1201 क्विंटल, जशपुर जिले में 1157 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 967 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 869 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 687 क्विंटल, राजनांदगांव 607 क्विंटल, मुंगेली में 490 क्विंटल, बलौदाबाजार में 386 क्विंटल, बिलासपुर में 273 क्विंटल, कोरिया में 253 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 250 क्विंटल, सरगुजा में 240 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 228 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 220 क्विंटल, बस्तर जिले में 218 क्विंटल, सक्ती में 137 क्विंटल, सुकमा में 130 क्विंटल, बालोद में 123 क्विंटल, गरियाबंद में 122 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 119 क्विंटल, कवर्धा में 90 क्विंटल, कोरबा में 85 क्विंटल, रायपुर में 84 क्विंटल, धमतरी में 72 क्विंटल, नारायणपुर में 53 क्विंटल, दुर्ग में 38 क्विंटल, बेमेतरा में 32 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 27 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं। 

उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के पूर्व प्रदेश में अवैध धान परिवहन और संग्रहण पर सख्त निगरानी जारी रखते हुए आज दो महत्वपूर्ण कार्रवाईयाँ की गईं। मार्कफेड के इंटीग्रेटेड कंट्रोल सिस्टम से प्राप्त 600 बैग (231.5 क्विंटल) अवैध धान संबंधी अलर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कोंडागांव जिले की टीम ने मौके पर पहुंचकर धान जप्त किया। सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।

इसी क्रम में, रात्री गश्त के दौरान ग्राम त्रिशूली, थाना सनवाल क्षेत्र में अशोक सिंह पिता रामचरित्र के घर के बाहर बने शेड में दो अलग-अलग स्थानों पर कुल 222 कट्टा धान पाया गया। विवाद की स्थिति को देखते हुए दिन में पुनः तहसीलदार रामचंद्रपुरपुर, थाना प्रभारी सनवाल, महिला पुलिस, तथा मंडी कर्मचारियों की मौजूदगी में विस्तृत जांच की गई और धान की विधिवत जप्ती की कार्रवाई पूरी की गई। शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।

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