Media24Media.com: "विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र-राज्य सहयोग, जनभागीदारी और तकनीक आधारित सुशासन पर जोर

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"विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र-राज्य सहयोग, जनभागीदारी और तकनीक आधारित सुशासन पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्रामीण परिवर्तन के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS) 2026 का दो दिवसीय आयोजन 29 जून 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का समापन "विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को केंद्र-राज्य समन्वय, समुदाय आधारित विकास तथा तकनीक-संचालित सुशासन के माध्यम से तेज़ी से आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के सफल अनुभवों के आदान-प्रदान तथा ग्रामीण परिवर्तन के अगले चरण की रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच बना।

सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान भी उपस्थित रहे।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों के विशेषज्ञ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के प्रतिनिधि तथा विकास सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया।

सम्मेलन का प्रमुख विषय VB-GRAMG अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसी प्रमुख योजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई।

चर्चाओं में ग्रामीण विकास योजनाओं को और सशक्त बनाने, ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने, महिलाओं की आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण आवास एवं सड़क संपर्क को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही वर्ष 2029 तक 6 करोड़ 'लखपति दीदी' तैयार करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न राज्यों के नवाचारों को देशभर में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

वर्तमान में DAY-NRLM के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने के लिए उद्यम वित्त, डिजिटल नवाचार, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन में सरस आजीविका पहल की निरंतर बढ़ती सफलता को भी रेखांकित किया गया। वर्ष 1999 में आयोजित पहले सरस मेले से शुरू हुई यह पहल आज 25 से अधिक राज्य ब्रांडों के साथ एक राष्ट्रीय विपणन मंच बन चुकी है, जो प्रतिवर्ष 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार करती है।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 'सरस शक्ति कलेक्शन' का शुभारंभ किया तथा 'सरस शक्ति कॉफी टेबल बुक' का विमोचन किया। सरस शक्ति कलेक्शन में देशभर के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों का विशेष संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जबकि कॉफी टेबल बुक में इन महिला उद्यमों की विविधता, गुणवत्ता और बाजार में उनकी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना और प्रीमियम बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाना है।

गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मेघालय, बिहार, केरल, तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने सरस आजीविका गैलरी का अवलोकन किया। इस गैलरी में हथकरघा, वस्त्र, गृह सज्जा, वेलनेस उत्पाद और पारंपरिक खाद्य सामग्री का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसमें पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना की इकट एवं तेलिया वस्त्र कला, मिजोरम की पौंचेई के साथ-साथ मीनाकारी, ढोकरा कला, पीतल शिल्प और लकड़ी की उत्कृष्ट हस्तकलाओं को भी प्रदर्शित किया गया।

गैलरी में विभिन्न राज्यों की लखपति दीदियों ने भी अपने सफल उद्यमों का प्रदर्शन किया और बताया कि किस प्रकार ब्रांडिंग, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर एवं सफल उद्यमी बन रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 ने समुदाय आधारित संस्थाओं को मजबूत बनाने, सतत आजीविका के अवसरों का विस्तार करने तथा ग्रामीण उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही समावेशी, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव है।


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