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आधार सेवा केंद्र बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का आधार

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वर्षों से बंद पड़ी सुविधाएं हुईं बहाल,आयते को फिर मिलने लगा योजनाओं का लाभ

रायपुर- राज्य शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए संचालित आधार सेवा केंद्र अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम तोयलंका की निवासी आयते की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है, जिनकी वर्षों पुरानी आधार संबंधी समस्या का समाधान होने से उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ फिर से मिलने लगा है।

आयते लंबे समय से आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण परेशान थीं। आधार निष्क्रिय होने से उन्हें पेंशन, राशन और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार प्रयास करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाने से वे निराश हो चुकी थीं।

इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आधार सेवा केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां आधार संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। जानकारी मिलते ही वे सेवा केंद्र पहुंचीं और अपनी समस्या अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताई।

जांच में पता चला कि लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं होने के कारण उनका आधार निष्क्रिय हो गया था। सेवा केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई और आधार को पुनः सक्रिय कर दिया। पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की गई।

आधार पुनः सक्रिय होने के बाद आयते को अब पेंशन, राशन और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्र के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा ने उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

राज्य शासन की मंशा है कि हर नागरिक को बिना अनावश्यक परेशानी के शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिले। आधार सेवा केंद्रों के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर अपडेट और आधार सक्रियण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो रही है और डिजिटल सेवाओं पर उनका भरोसा मजबूत हो रहा है।

गांवों के समग्र विकास से ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री साय  ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए विकास के स्पष्ट मंत्र

विकसित भारत जी राम जी योजना, लखपति दीदी, पीएम आवास और पीएम सूर्यघर योजना को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, यही सुशासन की कसौटी - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।

विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए।

इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।

बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोरमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।

एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है

मुख्यमंत्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत

कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

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1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर- देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान

योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना

वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

"विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र-राज्य सहयोग, जनभागीदारी और तकनीक आधारित सुशासन पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्रामीण परिवर्तन के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS) 2026 का दो दिवसीय आयोजन 29 जून 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का समापन "विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को केंद्र-राज्य समन्वय, समुदाय आधारित विकास तथा तकनीक-संचालित सुशासन के माध्यम से तेज़ी से आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के सफल अनुभवों के आदान-प्रदान तथा ग्रामीण परिवर्तन के अगले चरण की रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच बना।

सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान भी उपस्थित रहे।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों के विशेषज्ञ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के प्रतिनिधि तथा विकास सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया।

सम्मेलन का प्रमुख विषय VB-GRAMG अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसी प्रमुख योजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई।

चर्चाओं में ग्रामीण विकास योजनाओं को और सशक्त बनाने, ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने, महिलाओं की आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण आवास एवं सड़क संपर्क को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही वर्ष 2029 तक 6 करोड़ 'लखपति दीदी' तैयार करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न राज्यों के नवाचारों को देशभर में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

वर्तमान में DAY-NRLM के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने के लिए उद्यम वित्त, डिजिटल नवाचार, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन में सरस आजीविका पहल की निरंतर बढ़ती सफलता को भी रेखांकित किया गया। वर्ष 1999 में आयोजित पहले सरस मेले से शुरू हुई यह पहल आज 25 से अधिक राज्य ब्रांडों के साथ एक राष्ट्रीय विपणन मंच बन चुकी है, जो प्रतिवर्ष 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार करती है।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 'सरस शक्ति कलेक्शन' का शुभारंभ किया तथा 'सरस शक्ति कॉफी टेबल बुक' का विमोचन किया। सरस शक्ति कलेक्शन में देशभर के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों का विशेष संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जबकि कॉफी टेबल बुक में इन महिला उद्यमों की विविधता, गुणवत्ता और बाजार में उनकी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना और प्रीमियम बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाना है।

गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मेघालय, बिहार, केरल, तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने सरस आजीविका गैलरी का अवलोकन किया। इस गैलरी में हथकरघा, वस्त्र, गृह सज्जा, वेलनेस उत्पाद और पारंपरिक खाद्य सामग्री का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसमें पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना की इकट एवं तेलिया वस्त्र कला, मिजोरम की पौंचेई के साथ-साथ मीनाकारी, ढोकरा कला, पीतल शिल्प और लकड़ी की उत्कृष्ट हस्तकलाओं को भी प्रदर्शित किया गया।

गैलरी में विभिन्न राज्यों की लखपति दीदियों ने भी अपने सफल उद्यमों का प्रदर्शन किया और बताया कि किस प्रकार ब्रांडिंग, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर एवं सफल उद्यमी बन रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 ने समुदाय आधारित संस्थाओं को मजबूत बनाने, सतत आजीविका के अवसरों का विस्तार करने तथा ग्रामीण उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही समावेशी, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव है।


केन्द्रीय सरकार ने राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग अनुदान जारी किया

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को सशक्त बनाने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अनुदान जारी किए हैं।

राजस्थान में, FY 2025–26 के लिए पहली किस्त के बिना बंधन (Untied) अनुदान की राशि ₹303.0419 करोड़ जारी की गई है, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, FY 2024–25 की पहली और दूसरी किस्तों के रोके गए हिस्से के ₹145.24 करोड़ अतिरिक्त पात्र ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी किए गए हैं।

झारखंड राज्य के लिए, Union Government ने FY 2025–26 की पहली किस्त के बिना बंधन अनुदान के रूप में ₹275.1253 करोड़ जारी किए हैं, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 253 ब्लॉक पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं।

भारत सरकार, मंत्रालय पंचायती राज और मंत्रालय जल शक्ति (पीने के पानी और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में सिफारिश और जारी किए जाते हैं। बिना बंधन (Untied) अनुदान का उपयोग PRIs/ RLBs द्वारा स्थानीय स्तर की आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा, जो संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों में आता है, सिवाय वेतन और अन्य स्थायी खर्चों के।

बंधित (Tied) अनुदान का उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:
(a) स्वच्छता और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मानव मल और फेकल स्लज प्रबंधन विशेष रूप से शामिल है, और
(b) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

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