Media24Media.com: भारत में कारोबार करना हुआ आसान: डिजिटल सुधारों और सुशासन से बदला व्यापारिक परिदृश्य

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भारत में कारोबार करना हुआ आसान: डिजिटल सुधारों और सुशासन से बदला व्यापारिक परिदृश्य

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नई दिल्ली- पिछले एक दशक में भारत ने कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। डिजिटल गवर्नेंस, नियमों के सरलीकरण और विश्वास-आधारित प्रशासन की बदौलत देश का व्यावसायिक वातावरण अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल बना है। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव निवेशकों के बढ़ते विश्वास और वैश्विक रैंकिंग में भारत की बेहतर स्थिति के रूप में सामने आया है।

विश्व बैंक की Doing Business Report 2020 के अनुसार भारत की रैंकिंग 2014 में 142वें स्थान से बढ़कर 2019 में 63वें स्थान पर पहुंच गई। वहीं IMD World Competitiveness Ranking 2025 में भारत 2021 के 43वें स्थान से सुधरकर 2025 में 41वें स्थान पर पहुंचा है।

स्टार्टअप और एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन

जनवरी 2016 में शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल ने देश में उद्यमिता को नई गति दी है। मार्च 2026 तक 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है, जिन्होंने 23.3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इनमें लगभग 48 प्रतिशत स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल हैं।

इसके अलावा, SPICe+ और MCA21 Version 3 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने कंपनी पंजीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाया है। उद्यम पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई के लिए पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन, निःशुल्क और कागज रहित हो गया है।

भूमि और संपत्ति पंजीकरण में डिजिटल क्रांति

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत देश के 97 प्रतिशत से अधिक कैडस्ट्रल नक्शों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। ULPIN और NGDRS जैसी प्रणालियों ने भूमि रिकॉर्ड और संपत्ति पंजीकरण को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया है, जिससे विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाएं कम हुई हैं।

व्यापार अनुमतियों और लाइसेंस प्रक्रियाओं में सरलीकरण

सरकार ने श्रम कानूनों के एकीकरण, सिंगल विंडो सिस्टम और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के माध्यम से व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) अब 32 केंद्रीय विभागों और 34 राज्यों की स्वीकृतियों को एक मंच पर उपलब्ध कराता है।

बाजार पहुंच और लॉजिस्टिक्स में सुधार

GeM, ONDC, PM गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पोर्टल और लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक 2.0 जैसी पहलों ने व्यवसायों को नए बाजारों से जोड़ने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग 2014 के 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है।

आसान हुआ ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त करना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, क्रेडिट गारंटी योजनाएं और क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (CAM) जैसी योजनाओं ने छोटे उद्यमियों और एमएसएमई को बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराना आसान बनाया है। मुद्रा योजना के तहत अब तक 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।

कर प्रणाली में पारदर्शिता और सरलता

वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद देश की कर व्यवस्था अधिक एकीकृत और पारदर्शी हुई है। GST के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के लगभग 60 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ से अधिक हो गई है। फेसलेस असेसमेंट और नए ई-फाइलिंग पोर्टल ने कर अनुपालन को और आसान बनाया है।

निर्यात और वैश्विक व्यापार को मिला बढ़ावा

जिलों को निर्यात हब बनाने की पहल, ICEGATE, Trade Connect और Export Promotion Mission जैसी योजनाओं ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद की है। इससे स्थानीय उद्यमों और निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

विश्वास-आधारित प्रशासन की ओर कदम

जन विश्वास अधिनियम और अनुपालन बोझ कम करने की पहलों के तहत हजारों नियमों को सरल बनाया गया है तथा कई छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक श्रेणी में रखा गया है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में अनावश्यक कानूनी बाधाएं कम हुई हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल बुनियादी ढांचे, नियामकीय सुधारों और पारदर्शी प्रशासन के संयोजन ने भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। इन सुधारों ने न केवल उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा दिया है, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य भी बनाया है।

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