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भारतीय कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की कई प्रमुख कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल–जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुज़ुकी जैसी अग्रणी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती को दर्शाया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों की बेहतर आय और मजबूत कारोबारी प्रदर्शन ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और आने वाले समय में निवेश गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भारत में कारोबार करना हुआ आसान: डिजिटल सुधारों और सुशासन से बदला व्यापारिक परिदृश्य

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नई दिल्ली- पिछले एक दशक में भारत ने कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। डिजिटल गवर्नेंस, नियमों के सरलीकरण और विश्वास-आधारित प्रशासन की बदौलत देश का व्यावसायिक वातावरण अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल बना है। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव निवेशकों के बढ़ते विश्वास और वैश्विक रैंकिंग में भारत की बेहतर स्थिति के रूप में सामने आया है।

विश्व बैंक की Doing Business Report 2020 के अनुसार भारत की रैंकिंग 2014 में 142वें स्थान से बढ़कर 2019 में 63वें स्थान पर पहुंच गई। वहीं IMD World Competitiveness Ranking 2025 में भारत 2021 के 43वें स्थान से सुधरकर 2025 में 41वें स्थान पर पहुंचा है।

स्टार्टअप और एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन

जनवरी 2016 में शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल ने देश में उद्यमिता को नई गति दी है। मार्च 2026 तक 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है, जिन्होंने 23.3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इनमें लगभग 48 प्रतिशत स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल हैं।

इसके अलावा, SPICe+ और MCA21 Version 3 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने कंपनी पंजीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाया है। उद्यम पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई के लिए पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन, निःशुल्क और कागज रहित हो गया है।

भूमि और संपत्ति पंजीकरण में डिजिटल क्रांति

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत देश के 97 प्रतिशत से अधिक कैडस्ट्रल नक्शों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। ULPIN और NGDRS जैसी प्रणालियों ने भूमि रिकॉर्ड और संपत्ति पंजीकरण को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया है, जिससे विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाएं कम हुई हैं।

व्यापार अनुमतियों और लाइसेंस प्रक्रियाओं में सरलीकरण

सरकार ने श्रम कानूनों के एकीकरण, सिंगल विंडो सिस्टम और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के माध्यम से व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) अब 32 केंद्रीय विभागों और 34 राज्यों की स्वीकृतियों को एक मंच पर उपलब्ध कराता है।

बाजार पहुंच और लॉजिस्टिक्स में सुधार

GeM, ONDC, PM गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पोर्टल और लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक 2.0 जैसी पहलों ने व्यवसायों को नए बाजारों से जोड़ने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग 2014 के 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है।

आसान हुआ ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त करना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, क्रेडिट गारंटी योजनाएं और क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (CAM) जैसी योजनाओं ने छोटे उद्यमियों और एमएसएमई को बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराना आसान बनाया है। मुद्रा योजना के तहत अब तक 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।

कर प्रणाली में पारदर्शिता और सरलता

वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद देश की कर व्यवस्था अधिक एकीकृत और पारदर्शी हुई है। GST के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के लगभग 60 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ से अधिक हो गई है। फेसलेस असेसमेंट और नए ई-फाइलिंग पोर्टल ने कर अनुपालन को और आसान बनाया है।

निर्यात और वैश्विक व्यापार को मिला बढ़ावा

जिलों को निर्यात हब बनाने की पहल, ICEGATE, Trade Connect और Export Promotion Mission जैसी योजनाओं ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद की है। इससे स्थानीय उद्यमों और निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

विश्वास-आधारित प्रशासन की ओर कदम

जन विश्वास अधिनियम और अनुपालन बोझ कम करने की पहलों के तहत हजारों नियमों को सरल बनाया गया है तथा कई छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक श्रेणी में रखा गया है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में अनावश्यक कानूनी बाधाएं कम हुई हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल बुनियादी ढांचे, नियामकीय सुधारों और पारदर्शी प्रशासन के संयोजन ने भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। इन सुधारों ने न केवल उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा दिया है, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य भी बनाया है।

संरचनात्मक सुधारों से छत्तीसगढ़ में निवेश को नई रफ्तार: 7.83 लाख करोड़ के 219 प्रस्ताव, तेज़ क्रियान्वयन से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश आकर्षित नहीं कर रहा उन्हें तेज़ी से ज़मीन पर भी उतार रहा है। नवंबर 2024 से अब तक राज्य ने 18 क्षेत्रों में 7.83 लाख करोड़ रूपए के 219 निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। इनमें सेमीकंडक्टर और एआई से लेकर सीमेंट, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग तक शामिल हैं। ये परियोजनाएँ राज्य के अन्य जिलों में फैली हैं, जिनसे 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे और यह पूरे राज्य में संतुलित विकास की ओर एक बड़ा संकेत है। प्रेस वार्ता में  सी एस आई डी  सी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, सचिव उद्योग रजत कुमार, संचालक  उद्योग प्रभात मालिक,  सी एस आई डी सी के प्रबंध संचालक विश्वेष कुमार मौजूद थे.

अब निवेश केवल रायपुर तक सीमित नहीं हैं। प्रश्तवित निवेशों की विशेष बात ये है कि हर 5 में से। निवेश (21 प्रतिशत) आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में हैं। 33 प्रतिशत रायपुर संभाग में और 46 प्रतिशत बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में।

क्षेत्रीय विविधता ने मजबूती दी है। लगभग 50 प्रतिशत निवेश प्राथमिक (थ्रस्ट) क्षेत्रों में हैं जैसे सेमीकंडक्टर और एआई डेटा सेंटर पार्क वहीं सीमेंट और बिजली जैसे पारंपरिक उद्योग भी मजबूत बने हुए हैं। कुल निवेश प्रस्तावों में 57 परियोजनाएँ 1,000 करोड़ रूपए से अधिक की है और 34 परियोजनाएँ 1,000 से ज्यादा रोजगार देने वाली हैं।

असल कहानी है तेज़ क्रियान्वयन की। 6.063 करोड़ रूपए की 9 बड़ी परियोजनाएँ चालू हो चुकी हैं, जिनसे उत्पादन शुरू हो गया है और 5,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा 109 परियोजनाएँ यानी लगभग आधी उन्नत चरण में हैं। ये या तो निर्माणाधीन हैं या भूमि आवंटन के बाद आगे बढ़ चुकी हैं। ये 24 जिलों और 16 क्षेत्रों में फैली हैं और जल्द ही 87,132 रोजगार सृजित करेंगी। खास बात यह है कि इनमें से 58 प्रतिशत परियोजनाएँ आतिथ्य एवं स्वास्थ्य, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फार्मा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

प्रमुख परियोजनाएँ इस रफ्तार को साफ दिखाती हैं। पोलिमेटेक की 10,000 करोड़ रूपए से अधिक की सेमीकंडक्टर फेक्ट्री जो छत्तीसगढ़ की पहली हे को सिर्फ 45 दिनों में भूमि आवंटित हुआ और काम तेज़ी से शुरू हुआ। रेकबैंक का 1,000 करोड़ रूपए का एआई डेटा सेंटर पार्क- देश का पहला-अब लगभग पूरा होने वाला है। ड्रल्स का 625 करोड़ रूपए का पेट फूड विस्तार प्रोजेक्ट ट्रायल प्रोडक्शन में है और इससे 3,000 रोजगार मिलेंगे। वी-राइज़ का तीसरा भारत कार्यालय एक आईटी यूनिट निर्माणाधीन है। अल्ट्राटेक सीमेंट का 1,600 करोड़ रूपए का निवेश चालू हो चुका है। आदित्य बिड़ला समूह का 67.5 मेगावाट का सोलर प्लांट मई में शुरू हो गया। वहीं बस्तर में रापपुर स्टोन क्लिनिक का 350-बेड अस्पताल लगभग तैयार है, जिससे आदिवासी परिवारों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, ‘जो राज्य कभी मुख्य रूप से लोह और इस्पात के लिए जाना जाता था. वह अब सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर पार्क, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों का केंद्र बन रहा है। कंपनियाँ सिर्फ निवेश का निर्णय नहीं ले रहीं, बल्कि जल्द से जल्द काम शुरू करना बाहती हैं। हमारी सरकार हर उद्यमी के लिए व्यापार को आसान बनाने और हर चरण में पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।‘

मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा, ‘सुधारों ने विवेकाधिकार की जगह पारदर्शिता लाई है. जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसका असर साफ दिखता है सरल प्रक्रियाएँ और बड़े पैमाने पर जमीन पर उतरती परियोजनाएँ। यह साबित करता है कि संवेदनशील शासन उद्योग को गति देता है।‘

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने कहा  हमारा फोकस यह सुनिश्चित करता है कि निवेश प्रस्ताव के बाद निवेशकों की गति न रुके। तेज़ भूमि आवंटन, डिजिटल स्वीकृतियों ओर बेहतर समन्वय से कंपनियों बिना देरी के इरादे से निर्माण तक पहुंच पा रही है।

इस तेज़ उछाल के पीछे कई अग्रणी सुधार हैं-132 स्वीकृतियों के लिए वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम जन विश्वास अधिनियम के तहत 279 छोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण (दो जन विश्वास अधिनियम लागू करने वाला पहला राज्य), स्वचालित भूमि म्यूटेशन लागू करने वाला पहला राज्य; एफएआर और ग्राउंड कवरेज में वृद्धि और सेटबेक में कमी, डिजिटल भूमि विवरण (रजिस्ट्री. आरओआर, टैक्स बकाया, न्यायालय प्रकरण); लेआउट और भवन 

स्वीकृति के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर, 24X7 संचालन और विस्तारित फायर एनओसी। इन सुधारों के चलते डीपीआईआईटी से चार श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर‘ की मान्यता मिली।

ये सभी पहल केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि गति, जवाबदेही और ज़मीनी परिणामों पर केंद्रित प्रशासनिक संस्कृति को दर्शाती हैं। निवेश की विविधता और क्रियान्वयन की रफ्तार एक बात साफ कर देती है-छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा, बल्कि वास्तविक परियोजनाएँ बना रहा है, वास्तविक रोजगार पैदा कर रहा है और वास्तविक बदलाव ला रहा है।


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