Media24Media.com: भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के दावणगेरे स्थित यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लैटिनम जुबली समारोह में भाग लिया और युवाओं से भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियरिंग संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक, नैतिक नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र-निर्माता तैयार करें, जो भारत को तकनीकी प्रगति और वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की ओर अग्रसर कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में तकनीक, नवाचार और युवाशक्ति से प्रेरित एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के योगदान पर काफी हद तक निर्भर करेगी। संस्थान द्वारा अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला तथा कॉलेज द्वारा विकसित उन्नत शोध अवसंरचना जैसी पहलों की प्रशंसा की।

उन्होंने प्लैटिनम जुबली को विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि संस्थान के 75 वर्ष दूरदृष्टि, दृढ़ता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समाज सेवा का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट संस्थानों का निर्माण कई पीढ़ियों के दूरदर्शी संस्थापकों, समर्पित शिक्षकों, निष्ठावान प्रशासकों, मेहनती विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के योगदान से होता है।

संस्थान की स्थापना में ब्रह्मप्पा देवेंद्रप्पा तवनप्पनावर की दूरदर्शी परोपकारिता और महामहिम जयचामराजेंद्र वोडेयार के आशीर्वाद को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संस्थान शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे ज्ञान का उपयोग विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने का आग्रह किया। नवाचार के नैतिक पक्ष पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा के लिए होनी चाहिए,” और इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक प्रगति सदैव जनकल्याण और मानवीय मूल्यों से प्रेरित होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्ति के संबंध में भी सशक्त संदेश देते हुए विद्यार्थियों और समाज से “नशे को ना” कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने मन पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी हानिकारक पदार्थ को अपने जीवन पर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए।

संस्थान के भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का केंद्र बनकर भारत की नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत; निर्मलानंदनाथ स्वामीजी; कर्नाटक के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर; सांसद यदुवीर वाडियार; सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन; कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं जिला प्रभारी एस.एस. मल्लिकार्जुन; बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, निफ्टेम के अध्यक्ष डॉ. टी.जी. सीताराम; वीटीयू के कुलपति डॉ. एस. विद्याशंकर; वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र भी उपस्थित थे।

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