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कर्नाटक में सरकारी भर्ती पर बड़ा सवाल: KPSC में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की जांच

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बेंगलुरु-कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती से जुड़ा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य की Karnataka Public Service Commission (KPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित पेपर लीक, उम्मीदवारों के साथ अनुचित व्यवहार, पैसों के लेन-देन और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है।

The Karnataka Public Service Commission office in Bengaluru.

मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि KPSC राज्य में महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया से जुड़ी संवैधानिक संस्था है। हालिया मामलों में 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती, KPSC अध्यक्ष के परिवार से जुड़ी नियुक्ति और KAS भर्ती प्रक्रिया से संबंधित शिकायतें जांच के दायरे में हैं।

400 Veterinary Officer पदों के पेपर लीक का मामला

सबसे गंभीर आरोप 400 Veterinary Officer पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़े हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 उम्मीदवारों पर सवाल उठे हैं और जांच में यह आरोप सामने आया है कि कुछ उम्मीदवारों ने बिचौलियों के माध्यम से प्रश्नपत्र हासिल किया था।

CID की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों से ₹40 लाख से ₹80 लाख तक रकम ली गई और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले होटल या रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इन आरोपों की जांच जारी है।

पैसों के लेन-देन की भी जांच

मामले में सिर्फ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि कथित रिश्वत और पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

CID ने अदालत में बताया कि कुछ उम्मीदवारों से कथित रूप से पैसे एक बिचौलिए के जरिए लिए गए। जांच में एक कथित money trail भी सामने आया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों से प्राप्त रकम का कुछ हिस्सा सोने और हीरे की करीब ₹52 लाख की ज्वेलरी खरीदने में इस्तेमाल हुआ। यह मामला एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े व्यक्ति तक पैसों के कथित प्रवाह की जांच से जुड़ा है।

KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति पर भी सवाल

विवाद का दूसरा बड़ा हिस्सा KPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर की बेटी की सरकारी नौकरी से जुड़ा है।

FIR के अनुसार, उनकी बेटी को राज्य के Industries and Commerce Department में Industrial Extension Officer के पद पर OBC कोटे के तहत चयनित किया गया था।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि आवेदन के दौरान परिवार की आय से संबंधित प्रमाणपत्र में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई और अदालत में मामला विचाराधीन है।

साहूकर को 25 अगस्त 2026 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ चल रही जांच में पेपर लीक और नियुक्ति से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।

पहले भी उठ चुके थे सवाल?

Indian Express की जांच के अनुसार, KPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर 2019 से कई बार अधिकारियों द्वारा चिंता जताई गई थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया और संस्था के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बावजूद विवादित मामलों की जांच और सुधारों को लेकर सवाल बने रहे।

हालांकि, इन दावों की अलग-अलग स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इन्हें अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

KAS भर्ती भी जांच के दायरे में

जांच का दायरा केवल Veterinary Officer भर्ती तक सीमित नहीं है।

CID की जांच 384 Karnataka Administrative Service (KAS) Gazetted Probationers की भर्ती तक भी पहुंची है। इस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गिरफ्तार बिचौलियों से जुड़े दस्तावेजों में कुछ उम्मीदवारों की जानकारी मिलने के बाद इस भर्ती प्रक्रिया की भी जांच शुरू की है।

इसके अलावा KAS के एक उम्मीदवार को इंटरव्यू में कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप की अलग जांच भी चल रही है।

हाईकोर्ट में भी मामला

इन मामलों पर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई है।

Veterinary Officer भर्ती से जुड़े मामले में अदालत के सामने शिकायत रखी गई कि यदि आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो इससे सरकारी नौकरियों में मेरिट आधारित चयन और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

KPSC अध्यक्ष से जुड़े मामलों में भी अदालत ने अलग-अलग याचिकाओं और जमानत अर्जियों पर सुनवाई की है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप भी ले लिया है।

विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच जारी है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

सरकारी नौकरी की परीक्षा लाखों युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण रास्ता होती है।

अगर किसी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक या पैसे के बदले चयन जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता। इससे:

  • उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

  • पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

  • चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों की दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है।

  • परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग हो सकती है।

अभी तक की स्थिति

KPSC से जुड़े मामलों में CID की जांच जारी है।

  • Veterinary Officer भर्ती में पेपर लीक के आरोपों की जांच

  •  कथित पैसों के लेन-देन और money trail की जांच

  •  KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति से जुड़ा मामला

  •  KAS भर्ती प्रक्रिया की भी जांच

  •  कई मामले कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने

  •  KPSC के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; अंतिम कानूनी दोषसिद्धि अभी अलग विषय है।


कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को अहम सुनवाई, तमिलनाडु ने मांगा अपने हिस्से का पानी

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नई दिल्ली- कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होने वाली है। तमिलनाडु सरकार ने अदालत से कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी जल तत्काल जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु का दावा—26.954 TMC पानी की कमी

तमिलनाडु सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा के अनुसार कावेरी का पानी जारी नहीं किया है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि उसके हिस्से में 26.954 TMC (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की कमी है। इसी आधार पर तमिलनाडु ने अदालत से कर्नाटक को आवश्यक मात्रा में पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कावेरी का पानी राज्य के कृषि क्षेत्र और डेल्टा जिलों की सिंचाई के लिए बेहद अहम है। पानी की कमी का सीधा असर किसानों और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

कर्नाटक की अपनी दलील

दूसरी ओर, कर्नाटक लगातार यह तर्क देता रहा है कि राज्य को भी अपने पेयजल, सिंचाई और कृषि जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता है। हालिया घटनाक्रम में कर्नाटक सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने को लेकर आगे का फैसला किया जाएगा।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री ने यह भी कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश राज्य के लिए बहुत अधिक है और मौजूदा परिस्थितियों में इसका पालन करना चुनौतीपूर्ण है।

विवाद फिर क्यों बढ़ा?

कावेरी जल विवाद नया नहीं है। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कावेरी जल बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था और उसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) तथा कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के माध्यम से पानी छोड़ने और उसकी निगरानी की व्यवस्था की गई।

सितंबर 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विनियमन समिति के कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। उस समय समिति ने 5,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।

किसानों पर पड़ सकता है सीधा असर

कावेरी का पानी दोनों राज्यों के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए नदी पर बड़ी निर्भरता है। वहीं कर्नाटक में भी कावेरी बेसिन के किसानों और शहरों की पानी की जरूरतें इसी जल संसाधन से जुड़ी हैं।

ऐसे में मानसून, बांधों में जल भंडारण और कृषि जरूरतों के बीच संतुलन बनाना दोनों राज्यों के लिए बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में कावेरी जल को लेकर कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। 13 अगस्त को कावेरी जल छोड़ने के मुद्दे पर राज्यव्यापी बंद भी आयोजित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सभी की नजरें 17 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। तमिलनाडु चाहता है कि उसे उसके हिस्से का पानी जल्द से जल्द मिले, जबकि कर्नाटक अपने जल भंडार और राज्य की जरूरतों को देखते हुए पानी छोड़ने की मात्रा पर आपत्ति जता रहा है।

इस सुनवाई में अदालत का रुख दोनों राज्यों के बीच मौजूदा जल विवाद की दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। खासकर 26.954 TMC की कथित कमी और 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के मुद्दे पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

क्या है कावेरी विवाद का मूल मुद्दा?

कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके पानी के इस्तेमाल और बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जल बंटवारे को लेकर अपना महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जल प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया गया।

फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है। 17 अगस्त की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि तमिलनाडु को उसके दावे के अनुसार पानी उपलब्ध कराने और कर्नाटक की जल जरूरतों के बीच अदालत किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

एपीडा ने कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप मालदीव भेजी, किसानों को मिला 50% से अधिक लाभ

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नई दिल्ली- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक से नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप सफलतापूर्वक मालदीव भेजकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 30 जुलाई 2026 को रवाना की गई यह खेप कर्नाटक की देर से पकने वाली आम की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस खेप को एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव (आईएएस) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने निर्यातक, किसान उत्पादक कंपनी (FPC), किसानों और इस पहल से जुड़े सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय आमों के लिए नए वैश्विक बाजार खोलने, देर से पकने वाली किस्मों के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह निर्यात खेप एक मीट्रिक टन नीलम और तोतापुरी आमों की थी, जिसे कर्नाटक के कोलार जिले के केजीएफ तालुक स्थित एम/एस प्रकृतिमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़े किसानों से सीधे खरीदा गया। इस खेप का निर्यात एम/एस अहल्या देवी वेंचर्स की निदेशक अश्विनी ए. द्वारा किया गया, जो एक नवपंजीकृत महिला उद्यमी एवं निर्यातक हैं। यह भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।

नीलम आम अपने मीठे, रसीले गूदे, सुगंध और डेजर्ट, स्मूदी तथा पेय पदार्थों में उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। वहीं तोतापुरी आम अपनी विशिष्ट आकृति, मीठे-खट्टे स्वाद और ताजा सेवन के साथ-साथ प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त होने के कारण लोकप्रिय है। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के अंत तक उपलब्ध रहने वाली ये किस्में भारत के आम निर्यात सीजन को आगे बढ़ाने और वैश्विक मांग को पूरा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

यह हवाई निर्यात कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को दर्शाता है। साथ ही यह भी साबित करता है कि किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) संगठित संग्रहण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यातोन्मुख आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस पहल के माध्यम से किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रत्यक्ष खरीद, निर्यात बाजारों से जुड़ाव और संगठित विपणन व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करती है तथा किसानों को निर्यातोन्मुख खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

यह निर्यात कर्नाटक के आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है और इससे किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान उत्पादक कंपनियां (FPC), निर्यातक तथा कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम बागवानी उत्पादों के निर्यात के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।

एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाने तथा भारत के उच्च गुणवत्ता वाले फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयास भारत के कृषि निर्यात में विविधता लाने के साथ-साथ किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए स्थायी आर्थिक अवसर भी सृजित कर रहे हैं।


भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के दावणगेरे स्थित यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लैटिनम जुबली समारोह में भाग लिया और युवाओं से भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियरिंग संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक, नैतिक नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र-निर्माता तैयार करें, जो भारत को तकनीकी प्रगति और वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की ओर अग्रसर कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में तकनीक, नवाचार और युवाशक्ति से प्रेरित एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के योगदान पर काफी हद तक निर्भर करेगी। संस्थान द्वारा अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला तथा कॉलेज द्वारा विकसित उन्नत शोध अवसंरचना जैसी पहलों की प्रशंसा की।

उन्होंने प्लैटिनम जुबली को विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि संस्थान के 75 वर्ष दूरदृष्टि, दृढ़ता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समाज सेवा का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट संस्थानों का निर्माण कई पीढ़ियों के दूरदर्शी संस्थापकों, समर्पित शिक्षकों, निष्ठावान प्रशासकों, मेहनती विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के योगदान से होता है।

संस्थान की स्थापना में ब्रह्मप्पा देवेंद्रप्पा तवनप्पनावर की दूरदर्शी परोपकारिता और महामहिम जयचामराजेंद्र वोडेयार के आशीर्वाद को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संस्थान शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे ज्ञान का उपयोग विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने का आग्रह किया। नवाचार के नैतिक पक्ष पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा के लिए होनी चाहिए,” और इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक प्रगति सदैव जनकल्याण और मानवीय मूल्यों से प्रेरित होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्ति के संबंध में भी सशक्त संदेश देते हुए विद्यार्थियों और समाज से “नशे को ना” कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने मन पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी हानिकारक पदार्थ को अपने जीवन पर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए।

संस्थान के भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का केंद्र बनकर भारत की नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत; निर्मलानंदनाथ स्वामीजी; कर्नाटक के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर; सांसद यदुवीर वाडियार; सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन; कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं जिला प्रभारी एस.एस. मल्लिकार्जुन; बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, निफ्टेम के अध्यक्ष डॉ. टी.जी. सीताराम; वीटीयू के कुलपति डॉ. एस. विद्याशंकर; वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र भी उपस्थित थे।

कर्नाटक और केरल के राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता व रखरखाव की समीक्षा, नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश

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नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा सहित National Highways Authority of India (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और परियोजना ठेकेदारों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान गडकरी ने कर्नाटक में 7,926 किलोमीटर और केरल में 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने समय पर कार्य पूर्ण करने, उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि राजमार्ग बुनियादी ढांचा टिकाऊ और प्रभावी बन सके। साथ ही, जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने और आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने मानसून से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात के सुचारू संचालन के लिए निवारक उपायों और मजबूत प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों को मानसून के लिए अग्रिम योजना बनाने के निर्देश भी दिए, जिसमें जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण उपाय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना शामिल है, ताकि बाधाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्री शिवकुमार महास्वामीजी की 119वीं जयंती समारोह में किया संबोधन

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 अप्रैल, 2026) कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार महास्वामीजी की 119वीं जयंती एवं गुरुवंदना महोत्सव में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि श्री शिवकुमार स्वामीजी जैसे संत हमारे समाज और राष्ट्र की आत्मा का स्वरूप होते हैं। वर्ष 2019 में उनका भौतिक शरीर भले ही परम तत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनकी आध्यात्मिक धारा सदैव समाज और देश का पोषण करती रहेगी। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से मानवता को समृद्ध किया। गरीबों और वंचितों की सेवा के लिए समर्पित उनका जीवन, कल्याणकारी कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने श्री सिद्धगंगा मठ द्वारा स्वामीजी के महान कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सराहना की। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मठ प्राथमिक स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन की उच्च शिक्षा तक की सुविधाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्री सिद्धा-गंगा अस्पताल, जो स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित किया गया था, आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि श्री सिद्धगंगा मठ वर्तमान युग में सेवा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में ज्ञानदान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्ञान और शिक्षा व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की आधारशिला हैं। शिक्षा ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है। समाज के वंचित वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा प्रदान करके मठ समावेशी समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, लोकसेवा और राष्ट्रसेवा आपस में जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता, लोकसेवा और राष्ट्रसेवा दोनों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। कर्नाटक इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां लोकसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति के अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं। इसके लिए कर्नाटक के परिश्रमी और प्रतिभाशाली नागरिकों की सराहना की जानी चाहिए। कर्नाटक के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में निरंतर अग्रणी योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कर्नाटक आगे भी राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलकर ही हम वास्तव में श्री शिवकुमार स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: तैराकी में कर्नाटक का दबदबा, महिला वर्ग में ओडिशा चैंपियन, छत्तीसगढ़ 6वें स्थान पर

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हुआ, जिसमें देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता, जबकि असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। वहीं महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा।

प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया।

उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की, जिससे राज्य की पदक स्थिति और मजबूत हुई।

प्रतियोगिता में आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण, असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत तथा कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक जीता। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण, कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

इसी प्रकार पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक हासिल किया, जबकि महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4×100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4×100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक (1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य) अपने नाम किए हैं और राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, वहीं छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: तैराकी में कर्नाटक का दबदबा, महिला वर्ग में ओडिशा बनी चौंपियन

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छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत का शानदार प्रदर्शन, राज्य को दिलाया लगातार चौथा रजत 

कुल 8 पदकों के साथ छत्तीसगढ़ 6वें स्थान पर

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हो गया। प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चौंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। वहीं असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चौंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा।

प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की पदक स्थिति मजबूत हुई है और राज्य के खिलाड़ियों में उत्साह का संचार हुआ है।

आज आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत और कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक प्राप्त किया। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं उनकी ही राज्य की कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक जीता। महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4Û100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4Û100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया।

खेलो इंडिया खेलो ट्राइबल प्रतियोगिता 2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक 1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य अपने नाम किए हैं और इसी के साथ राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।


कर्नाटक के तैराक मणिकांता ने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने जीता दूसरा पदक

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ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक ने चोट के बावजूद वेटलिफ्टिंग में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर- कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं।

मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।

मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2ः25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2ः34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2ः36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2ः53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2ः59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3ः06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।

मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।”

मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में आयोजित राजगोपुरम उद्घाटन, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह कार्यक्रम कर्नाटक के बेलगावी जिले के श्री क्षेत्र यादुर में आयोजित हुआ।

मुख्य बातें

  • उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आध्यात्मिक पुनर्जागरण और सभ्यतागत पुनः पुष्टि का क्षण बताया।

  • उन्होंने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं बल्कि एक जीवंत सभ्यता है, जो सिंधु घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक चेतना की निरंतर धारा के रूप में बहती आई है।

  • उन्होंने बताया कि यही वह पवित्र भूमि है जहाँ वेदों का ज्ञान पहली बार सुना गया और जहाँ भगवद् गीता का संदेश आज भी मानवता को साहस से कर्म करने, धर्मपूर्वक जीवन जीने और श्रद्धा से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

हिंदू दर्शन पर विचार

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू चेतना केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है।
उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् – पूरी दुनिया एक परिवार है” के सिद्धांत को भारत की आध्यात्मिक दृष्टि का आधार बताया, जो प्रकृति और हर मानव में दिव्यता देखती है।

वीरशैव-लिंगायत परंपरा

उन्होंने वीरशैव लिंगायत परंपरा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस परंपरा ने कर्नाटक और पड़ोसी महाराष्ट्र में आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संतों को श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कादसिद्धेश्वर स्वामीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने इस पवित्र स्थल को पुनः खोजकर और पुनर्जीवित कर सनातन धर्म की ज्योति को फिर से प्रज्ज्वलित किया।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म समय की परीक्षा से गुजर सकता है, लेकिन कभी मिट नहीं सकता।

विकास और विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न “विकास भी, विरासत भी” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक रूप से प्रभावशाली राष्ट्र बन रहा है, लेकिन साथ ही अपनी सभ्यतागत जड़ों से भी जुड़ा हुआ है।

अन्य गणमान्य लोग

इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं:

  • थावरचंद गहलोत – कर्नाटक के राज्यपाल

  • एम. बी. पाटिल – कर्नाटक सरकार में मंत्री

  • श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी

  • इरन्ना कडाडी– राज्यसभा सांसद

साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धार्मिक नेता भी इस समारोह में उपस्थित रहे।



कर्नाटक के चित्रदुर्ग में दुर्घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक, मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में हुई दुर्घटना में लोगों की जान जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मोदी ने दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की है।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री ने एक्स (X) पर पोस्ट किया:

“कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में हुई दुर्घटना में लोगों की जान जाने से अत्यंत दुखी हूँ। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। घायल लोग शीघ्र स्वस्थ हों, यही कामना है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे

कर्नाटक और महाराष्ट्र को SDRF की दूसरी किस्त के रूप में 1,950.80 करोड़ रुपये जारी — केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ और आपदा राहत में समर्थन

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 2025-26 के लिए केंद्र द्वारा SDRF की दूसरी किस्त के तहत 1,950.80 करोड़ रुपये कर्नाटक और महाराष्ट्र को अग्रिम जारी करने को मंजूरी दी है। इसमें से कर्नाटक के लिए 384.40 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र के लिए 1,566.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि इन राज्यों में इस वर्ष की दक्षिण-पश्चिम मानसून में अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान की जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, केंद्र सरकार बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों को सम्पूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस वर्ष, केंद्र ने पहले ही 27 राज्यों को SDRF के तहत 13,603.20 करोड़ रुपये और 15 राज्यों को NDRF के तहत 2,189.28 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) से 21 राज्यों को 4,571.30 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (NDMF) से 09 राज्यों को 372.09 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से प्रभावित राज्यों को सभी लॉजिस्टिक सहायता, जिसमें आवश्यक NDRF टीमें, सेना की टीमें और वायु सेना का समर्थन शामिल है, भी प्रदान किया है। इस वर्ष की मानसून में, 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 199 NDRF टीमों को बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया।

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