Media24Media.com: शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को सरल और किसान हितैषी बनाने पर दिया जोर

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शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को सरल और किसान हितैषी बनाने पर दिया जोर

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को साहूकारी प्रथाओं, ऊँची ब्याज दरों, जटिल ऋण प्रक्रियाओं और असंवेदनशील व्यवस्था से राहत मिलनी चाहिए।

ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण आवश्यक

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण प्राप्त करना अभी भी आसान नहीं है। किसानों को कई स्तरों की कागजी कार्रवाई, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना अत्यंत जरूरी है।

संवेदनशील और संतुलित व्यवस्था की जरूरत

मंत्री चौहान ने कहा कि व्यवस्था में संवेदनशीलता और संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान किसी के सामने याचक नहीं हैं, बल्कि वे अधिकार और गरिमा के साथ सिस्टम के पास आते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान का ₹18 लाख का ऋण ब्याज बढ़ने से ₹40 लाख हो गया। ऐसे मामलों में वन-टाइम सेटलमेंट जैसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसे सोच-समझकर लागू किया जाना चाहिए। कई बार सैटेलाइट आधारित सत्यापन में त्रुटियां होने से किसानों को परेशानी होती है। इसलिए कृषि विभाग, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक,भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थानों को मिलकर व्यावहारिक और विश्वसनीय प्रणाली विकसित करनी चाहिए।

ग्रामीण बैंकों में मानव संसाधन की कमी

उन्होंने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मनरेगा, पीएम-किसान जैसी योजनाओं के कारण काम का बोझ बढ़ा है, लेकिन स्टाफ सीमित है। किसान कई बार 8-10 किलोमीटर दूर बैंक पहुंचते हैं और लंबी कतारों में समय गंवाते हैं। इसलिए वर्तमान जरूरतों के अनुसार पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रगतिशील किसानों के लिए अधिक वित्तीय सहायता

मंत्री चौहान ने कहा कि केवल किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। आधुनिक खेती जैसे बागवानी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई आदि में अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहायता और ज्ञान उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

एकीकृत खेती को बढ़ावा

उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम जमीन वाले किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को अपनाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के समन्वय की आवश्यकता है।

व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर

उन्होंने वेयरहाउस रसीद वित्त योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। यदि किसानों को संग्रहित उपज के बदले आसान ऋण मिल सके, तो वे उचित समय पर बेहतर कीमत मिलने तक इंतजार कर सकते हैं।

आत्ममंथन और नवाचार का आह्वान

मंत्री चौहान ने सिविल सेवकों से आत्ममंथन करने, क्रियान्वयन में सुधार लाने और नवाचारी सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवा और परिणामों के लिए अधिकारियों को अपनी क्षमता और विचारों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए, ताकि किसानों और देश को अधिक लाभ मिल सके।

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