Media24Media.com: कोयला मंत्रालय ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की

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कोयला मंत्रालय ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की

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नई दिल्ली: विक्रम देव दत्त  सचिव, कोयला मंत्रालय   ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार, कोल कंट्रोलर सजीश कुमार एन सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

इस दौर में कुल 11 कोयला ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है, जिनमें 7 पूरी तरह से अन्वेषित और 4 आंशिक रूप से अन्वेषित खदानें शामिल हैं। इनमें से 3 खदानें कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 2015 के तहत और 8 खदानें माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत पेश की गई हैं। इसके अलावा 13वें दौर के दूसरे प्रयास में 6 खदानें भी शामिल की गई हैं।

ये खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थित हैं, जिससे निवेश बढ़ने, घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

अब तक कोयला मंत्रालय 13 दौरों में 135 कोयला खदानों की सफल नीलामी कर चुका है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 325 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।

अपने संबोधन में विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र में किए गए सुधार प्रधानमंत्री Narendra Modi के पारदर्शिता और दक्षता के विजन के अनुरूप हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक खदान बंद करने (माइन क्लोजर) पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने CSR गतिविधियों के माध्यम से कोयला क्षेत्रों में सामुदायिक विकास को मजबूत करने की बात कही।



अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने भी सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक हितों के संतुलन पर जोर देते हुए कोयला क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान तकनीक, नवाचार, कोयला गैसीकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। हितधारकों ने मिलकर एक आधुनिक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर कोयला क्षेत्र के निर्माण की दिशा में विचार-विमर्श किया।

कोयला मंत्रालय का यह कदम देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और कोयला क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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