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छत्तीसगढ़ राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक संपन्न

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45 अन्वेषण परियोजनाओं को दिया गया अंतिम रूप

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी में राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद की अध्यक्षता में रायपुर स्थित पुराना सर्किट हाउस में भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्वेषण कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज कार्यक्रमों व प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान विशेष सचिव एवं संचालक भौमिकी-खनिकर्म रजत बंसल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)  के उप महानिदेशक अमित धरवाड़कर सहित प्रमुख केंद्रीय, राज्य एजेंसियों व निजी उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

45 अन्वेषण परियोजनाओं पर मुहर

राज्य में कुल 45 नई व जारी अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 35 क्रिटिकल व स्ट्रेटेजिक खनिज ब्लॉक, 4 डीप-सीटेड (गहन स्तर) खनिज ब्लॉक तथा 6 बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल हैं।

GSI की प्रमुख भूमिका महत्वपूर्ण है, इनमें से 25 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (रायपुर इकाई) द्वारा किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क के संसाधनों की पहचान व स्थापना की गई। उन्होंने आगे बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की चार अन्वेषण परियोजनाएं चालू वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेंगी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म द्वारा राज्य में 11 अन्वेषण प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 1 ग्रेफाइट, 2 चूना पत्थर, 4 लौह अयस्क, 2 ग्लॉकोनाइट, 1 आरईई एवं रेयर मेटल्स तथा 1 बॉक्साइट एवं एल्युमिनस लेटराइट युक्त महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉक शामिल हैं।

रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण 

सचिव पी. दयानंद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को खनन रॉयल्टी एवं राजस्व से लगभग 16,738 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत एनपीईए की 9 अन्वेषण परियोजनाएं चालू वर्ष में भी जारी रहेंगी। इससे राज्य में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों के अन्वेषण को निरंतर गति मिलने के साथ-साथ राज्य के खनिज संसाधन आधार को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।  विशेष सचिव रजत बंसल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025 26 के दौरान संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ द्वारा 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर संसाधन तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इसे राज्य में खनिज अन्वेषण गतिविधियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रणनीतिक एवं दुर्लभ खनिजों पर जोर

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई (REE) एवं रेयर मेटल्स, ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के ब्लॉकों को शामिल किया गया है।

बैठक में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण को तेज करने तथा अधिक गहराई में मौजूद (Deep-seated) खनिजों के सटीक आकलन के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया गया।

पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे 

इस अवसर पर GSI द्वारा छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे गए। बैठक में खनिज खोज की संभावनाओं को बढ़ाने, विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और राज्य में खनिज-आधारित उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार एक मजबूत रोडमैप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रमुख भूवैज्ञानिक एवं खनिज क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थाओं और शासकीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, सीएमपीडीआईएल, एमओआईएल, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन शामिल थे। इसके अतिरिक्त सीजीसीओएसटी, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों तथा उद्योग जगत से जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड एवं माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा डीजीएम की एमसीटीए टीम ने भी बैठक में भाग लिया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

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राजनांदगांव, बालोद, बलरामपुर और सरगुजा में ताबड़तोड़ अभियान, वाहन जब्त और लाखों रुपये का अर्थदंड

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है तथा नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है।

इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।

बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेन (पीसी-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया।

सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

SECL दौरे में कोयला उत्पादन, डिजिटलीकरण और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ सीएम से हुई अहम चर्चा

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार, सतीश चंद्र दुबे ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का एक दिवसीय दौरा किया, जिसके दौरान उन्होंने कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, बुनियादी ढांचा पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की, जिसमें कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और राज्य में औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने, प्रमुख विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, संचालन को सुगम बनाने और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र के विकास में दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण राज्य की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान को और मजबूत करेगा।

SECL मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कोयला उत्पादन, डिस्पैच, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटलीकरण, पर्यावरणीय स्थिरता उपायों, कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं, माइन क्लोजर गतिविधियों, CSR पहलों और कंपनी की भविष्य की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में SECL के सीएमडी हरिश दुहन, कार्यकारी निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और SECL के अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री ने सुरक्षित और सतत खनन प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि SECL भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और उत्पादन, गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण प्रबंधन में कंपनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि CSR गतिविधियों को कोयला क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर SECL के सीएमडी हरिश दुहन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में SECL ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य में 26.86 मिलियन टन का सर्वाधिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

SECL की डिजिटल परिवर्तन पहल के तहत मंत्री ने ई-डैडास (e-DADAS – Design and Drawings Approval in SECL) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डैडास पोर्टल प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिज़ाइन और ड्रॉइंग के ऑनलाइन मूल्यांकन, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा। वहीं HMIS पोर्टल अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड और प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा।

दौरे के दौरान दुबे ने बिलासपुर स्थित इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइज़र यूनिट का भी उद्घाटन किया। यह उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमता से युक्त मशीन तेज और अधिक सटीक रक्त परीक्षण सुनिश्चित करेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निदान दक्षता को बढ़ाएगी। मंत्री ने स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं की समीक्षा भी की और SECL द्वारा चिकित्सा अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।



कोयला मंत्रालय ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की

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नई दिल्ली: विक्रम देव दत्त  सचिव, कोयला मंत्रालय   ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार, कोल कंट्रोलर सजीश कुमार एन सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

इस दौर में कुल 11 कोयला ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है, जिनमें 7 पूरी तरह से अन्वेषित और 4 आंशिक रूप से अन्वेषित खदानें शामिल हैं। इनमें से 3 खदानें कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 2015 के तहत और 8 खदानें माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत पेश की गई हैं। इसके अलावा 13वें दौर के दूसरे प्रयास में 6 खदानें भी शामिल की गई हैं।

ये खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थित हैं, जिससे निवेश बढ़ने, घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

अब तक कोयला मंत्रालय 13 दौरों में 135 कोयला खदानों की सफल नीलामी कर चुका है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 325 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।

अपने संबोधन में विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र में किए गए सुधार प्रधानमंत्री Narendra Modi के पारदर्शिता और दक्षता के विजन के अनुरूप हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक खदान बंद करने (माइन क्लोजर) पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने CSR गतिविधियों के माध्यम से कोयला क्षेत्रों में सामुदायिक विकास को मजबूत करने की बात कही।



अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने भी सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक हितों के संतुलन पर जोर देते हुए कोयला क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान तकनीक, नवाचार, कोयला गैसीकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। हितधारकों ने मिलकर एक आधुनिक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर कोयला क्षेत्र के निर्माण की दिशा में विचार-विमर्श किया।

कोयला मंत्रालय का यह कदम देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और कोयला क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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