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SECL दौरे में कोयला उत्पादन, डिजिटलीकरण और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ सीएम से हुई अहम चर्चा

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार, सतीश चंद्र दुबे ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का एक दिवसीय दौरा किया, जिसके दौरान उन्होंने कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, बुनियादी ढांचा पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की, जिसमें कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और राज्य में औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने, प्रमुख विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, संचालन को सुगम बनाने और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र के विकास में दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण राज्य की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान को और मजबूत करेगा।

SECL मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कोयला उत्पादन, डिस्पैच, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटलीकरण, पर्यावरणीय स्थिरता उपायों, कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं, माइन क्लोजर गतिविधियों, CSR पहलों और कंपनी की भविष्य की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में SECL के सीएमडी हरिश दुहन, कार्यकारी निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और SECL के अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री ने सुरक्षित और सतत खनन प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि SECL भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और उत्पादन, गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण प्रबंधन में कंपनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि CSR गतिविधियों को कोयला क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर SECL के सीएमडी हरिश दुहन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में SECL ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य में 26.86 मिलियन टन का सर्वाधिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

SECL की डिजिटल परिवर्तन पहल के तहत मंत्री ने ई-डैडास (e-DADAS – Design and Drawings Approval in SECL) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डैडास पोर्टल प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिज़ाइन और ड्रॉइंग के ऑनलाइन मूल्यांकन, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा। वहीं HMIS पोर्टल अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड और प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा।

दौरे के दौरान दुबे ने बिलासपुर स्थित इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइज़र यूनिट का भी उद्घाटन किया। यह उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमता से युक्त मशीन तेज और अधिक सटीक रक्त परीक्षण सुनिश्चित करेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निदान दक्षता को बढ़ाएगी। मंत्री ने स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं की समीक्षा भी की और SECL द्वारा चिकित्सा अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।



कोयला मंत्रालय ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की

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नई दिल्ली: विक्रम देव दत्त  सचिव, कोयला मंत्रालय   ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार, कोल कंट्रोलर सजीश कुमार एन सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

इस दौर में कुल 11 कोयला ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है, जिनमें 7 पूरी तरह से अन्वेषित और 4 आंशिक रूप से अन्वेषित खदानें शामिल हैं। इनमें से 3 खदानें कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 2015 के तहत और 8 खदानें माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत पेश की गई हैं। इसके अलावा 13वें दौर के दूसरे प्रयास में 6 खदानें भी शामिल की गई हैं।

ये खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थित हैं, जिससे निवेश बढ़ने, घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

अब तक कोयला मंत्रालय 13 दौरों में 135 कोयला खदानों की सफल नीलामी कर चुका है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 325 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।

अपने संबोधन में विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र में किए गए सुधार प्रधानमंत्री Narendra Modi के पारदर्शिता और दक्षता के विजन के अनुरूप हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक खदान बंद करने (माइन क्लोजर) पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने CSR गतिविधियों के माध्यम से कोयला क्षेत्रों में सामुदायिक विकास को मजबूत करने की बात कही।



अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने भी सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक हितों के संतुलन पर जोर देते हुए कोयला क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान तकनीक, नवाचार, कोयला गैसीकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। हितधारकों ने मिलकर एक आधुनिक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर कोयला क्षेत्र के निर्माण की दिशा में विचार-विमर्श किया।

कोयला मंत्रालय का यह कदम देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और कोयला क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


कोयला मंत्रालय की डिजिटल पहल: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने ‘कोयला शक्ति’ डैशबोर्ड और ‘CLAMP’ पोर्टल किया लॉन्च

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कोयला मंत्रालय के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “कोयला शक्ति (Koyla Shakti) डैशबोर्ड” और “कोल लैंड एक्विज़िशन, मैनेजमेंट एंड पेमेंट (CLAMP) पोर्टल” का शुभारंभ किया। यह पहल कोयला क्षेत्र में दक्षता, पारदर्शिता और डेटा-आधारित प्रशासन की दिशा में मंत्रालय की एक और बड़ी उपलब्धि है।

कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, अतिरिक्त सचिव एवं नामित प्राधिकरण  रुपिंदर बरार, अतिरिक्त सचिव सनोत कुमार झा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और कोयला क्षेत्र के प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे।

जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि कोयला शक्ति डैशबोर्ड कोयला मूल्य श्रृंखला के सभी घटकों को एकीकृत करने वाला एक अभिनव डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो रीयल-टाइम समन्वय, पारदर्शिता और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक डिजिटल रीढ़ के रूप में कार्य करेगी, जो आत्मनिर्भर भारत और “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की भावना को सशक्त बनाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि CLAMP पोर्टल पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह पोर्टल कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाएगा, जिससे पुनर्वास और मुआवज़े की प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि कोयला शक्ति डैशबोर्ड और CLAMP पोर्टल मंत्रालय के सुधारोन्मुख और दूरदर्शी दृष्टिकोण के उदाहरण हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, देरी को कम करना और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

रुपिंदर बरार, अतिरिक्त सचिव एवं नामित प्राधिकरण ने “स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड (SCAD)” पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल कोयला उत्पादन से लेकर उपभोग तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को एकीकृत करता है — जिसमें कोयला कंपनियां, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा उपयोगकर्ता और राज्य विभाग शामिल हैं। यह प्रणाली कोयला उत्पादन, परिवहन और वितरण की रीयल-टाइम निगरानी सक्षम बनाती है और बेहतर मांग अनुमान तथा आपूर्ति श्रृंखला योजना के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद करती है।

कोयला शक्ति (Koyla Shakti) डैशबोर्ड

  • कोयला मूल्य श्रृंखला को एकीकृत करने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

  • रीयल-टाइम डेटा एकीकरण से पारदर्शिता और दक्षता में सुधार

  • नीति निर्माण और संसाधन प्रबंधन के लिए डेटा-आधारित निर्णय

  • कोयला कंपनियों, रेलवे, बंदरगाह और उपभोक्ताओं के बीच सहज समन्वय

  • आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को मजबूत करने वाला डिजिटल निर्णय समर्थन तंत्र

CLAMP पोर्टल

  • कोयला क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, प्रबंधन और भुगतान प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण

  • भूमि अभिलेखों का केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस

  • पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि

  • मुआवज़े और पुनर्वास प्रक्रियाओं में समयबद्धता और सरलता

  • कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के बीच समन्वय और दक्षता में सुधार

यह पहल न केवल कोयला क्षेत्र में डिजिटलीकरण को गति देगी बल्कि पारदर्शी और जिम्मेदार प्रशासन को भी सशक्त करेगी, जिससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र को एक सुरक्षित, सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

कोयला मंत्रालय के नामित प्राधिकारी ने तीन वाणिज्यिक कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग आदेश जारी किए

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23 अक्टूबर 2025 को कोयला मंत्रालय के नामित प्राधिकारी ने तीन वाणिज्यिक कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग आदेश (Vesting Orders) जारी किए हैं। इन खदानों के लिए कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते (CMDPA) पहले ही 21 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित किए जा चुके थे।

जिन कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग आदेश जारी किए गए हैं, वे हैं —

  1. राजगामर डिपसाइड (देवन्हारा)

  2. टंगरडीही नॉर्थ, और

  3. महुागढ़ी

इनमें से दो खदानें आंशिक रूप से खोजी गई (Partially Explored) हैं, जबकि एक खदान पूर्णतः खोजी गई (Fully Explored) है, जिसकी पीक रेटेड क्षमता (PRC) लगभग 1.00 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। इन तीनों खदानों के कुल भूवैज्ञानिक भंडार (Geological Reserves) लगभग 1,484.41 मिलियन टन हैं।

इन खदानों से प्रति वर्ष लगभग ₹189.77 करोड़ का राजस्व (Annual Revenue) प्राप्त होने की उम्मीद है और लगभग ₹150 करोड़ का पूंजी निवेश (Capital Investment) आकर्षित होगा। इससे लगभग 1,352 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

इन तीन नए वेस्टिंग आदेशों के साथ, अब तक 130 वाणिज्यिक कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग/आवंटन आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिनकी कुल पीक रेटेड क्षमता (PRC) लगभग 267.244 MTPA है। इससे प्रतिवर्ष लगभग ₹37,700 करोड़ का राजस्व उत्पन्न होने और लगभग 3,61,301 लोगों को रोजगार (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) मिलने की संभावना है।

कोयला मंत्रालय ने जारी किए 5 कोयला खदानों के वेस्टिंग ऑर्डर, रोजगार और निवेश में होगी बड़ी बढ़ोतरी

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कोयला मंत्रालय ने अपने नामित प्राधिकरण (Nominated Authority) के माध्यम से आज 5 कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग ऑर्डर (Vesting Orders) जारी किए हैं। इन खदानों के लिए कोल माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट्स (CMDPA) 21 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित किए गए थे।

जिन कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग ऑर्डर जारी किए गए हैं, वे हैं —

तांदसी-III और तांदसी-III एक्सटेंशन, सेंदुरी, वेस्ट ऑफ ट्यूब्ड, चितरपुर (संशोधित), और फुटामुरा।
इनमें से चार खदानें आंशिक रूप से अन्वेषित हैं, जबकि एक खदान पूर्ण रूप से अन्वेषित है। इनकी पीक रेटेड क्षमता (PRC) लगभग 3.45 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है तथा इनका भूवैज्ञानिक भंडार लगभग 1,556.31 मिलियन टन (MT) है।

इन खदानों से प्रति वर्ष लगभग ₹360 करोड़ का राजस्व उत्पन्न होने की संभावना है और लगभग ₹517 करोड़ का पूंजी निवेश आकर्षित होगा। इसके साथ ही, ये खदानें लगभग 4,664 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।

इन वेस्टिंग ऑर्डर्स के जारी होने के साथ, अब तक 125 कोयला खदानें वाणिज्यिक कोयला नीलामी के तहत आवंटित या वेस्ट की जा चुकी हैं। सामूहिक रूप से, इन खदानों की कुल PRC लगभग 265.844 MTPA है, जिनसे प्रति वर्ष लगभग ₹37,463 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने और लगभग 3,59,400 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और निवेश आधारित कोयला क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की दिशा में कोयला मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। पारदर्शिता, सतत खनन और निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर मंत्रालय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और ‘विकसित भारत’ की राष्ट्रीय दृष्टि को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

कोयला मंत्रालय का विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय सरकार के कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों के निस्तारण के उद्देश्य से विशेष अभियान 5.0 के लिए व्यापक तैयारियाँ कर रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर स्वच्छता बढ़ाना, सतत् प्रथाओं को अपनाना और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है।

वर्तमान में चल रहा तैयारी चरण 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा। इस दौरान 26.08.2025, 04.09.2025 और 19.09.2025 को नोडल व संबंधित अधिकारियों के साथ तीन तैयारी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, ताकि अभियान के उद्देश्यों के प्रति जागरूकता को मजबूत किया जा सके।

मंत्रालय, अपनी सीपीएसई (CPSEs), सीसीओ (CCO) और सीएमपीएफओ (CMPFO) के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान स्थलों की पहचान कर रहा है, कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान कर रहा है, लंबित संदर्भों, शिकायतों और अपीलों का समाधान कर रहा है। इसके साथ ही कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग, अभिलेख प्रबंधन, दक्षता और पारदर्शिता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

18.09.2025 को मंत्रालय अधिकारियों ने लोक नायक भवन स्थित रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। यहाँ फाइलों की व्यापक समीक्षा और व्यवस्थित श्रेणीकरण पर जोर दिया गया। अनुपयोगी और अप्रासंगिक अभिलेखों की समय पर छंटाई की जा रही है, जिससे कार्यालय में उपयोगी स्थान मुक्त होगा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

विशेष अभियान 5.0 के तहत कोयला मंत्रालय व सीपीएसई द्वारा की गई प्रमुख पहलें:

  • सीआईएल (CIL) ने कोलकाता के कुमारटुली में नुक्कड़ नाटक आयोजित किया, जिसका उद्देश्य स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक जिम्मेदारी पर संदेश देना था।

  • एनसीएल (NCL) झिंगुरदा क्षेत्र में सफाई मित्र सुरक्षा शिविर आयोजित हुआ, जिससे सफाई मित्रों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को बढ़ावा मिला।

  • बीसीसीएल (BCCL, झारखंड) के कुसुंडा क्षेत्र, एसईसीएल मुख्यालय (छत्तीसगढ़), डब्ल्यूसीएल (WCL) नागपुर के मंजरी क्षेत्र में रंगोली प्रतियोगिता और मजरी एवं वानी क्षेत्रों में बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। इन रचनात्मक पहलों ने समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दिया और "स्वच्छ भारत" के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

24 सितम्बर 2025 तक की उपलब्धियाँ:

  • स्वच्छता के लिए चिन्हित स्थल – 1165

  • कबाड़ निपटान की मात्रा – 7091 मीट्रिक टन

  • समीक्षा हेतु भौतिक फाइलें – 1,10,026

  • समीक्षा हेतु ई-फाइलें – 28,211

तैयारी चरण 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा, इसलिए इन संख्याओं में और वृद्धि की उम्मीद है।

कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह विशेष अभियान 5.0 के माध्यम से बेहतर स्वच्छता, सुचारु अभिलेख प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।



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