Media24Media.com: #JalSanchay

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #JalSanchay. Show all posts
Showing posts with label #JalSanchay. Show all posts

मोर गांव – मोर पानी महाअभियान से मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी बना जल संरक्षण का मॉडल जिला

No comments Document Thumbnail

मनरेगा एवं विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मिली नई मजबूती

रायपुर- राज्य शासन के “मोर गांव – मोर पानी” महाअभियान अंतर्गत मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले ने जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से जिले में जल संवर्धन, भू-जल स्तर सुधार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए हैं।  

जिले में बनीं 17 सौ से अधिक आजीविका डबरी

 “जल संरक्षण हमारी जिम्मेदारी” की थीम पर संचालित इस अभियान के तहत जिले में 1700 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण किया गया। प्रत्येक पंचायत में औसतन 9 डबरी विकसित कर जल संरक्षण को आजीविका संवर्धन से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया गया है। सामुदायिक सहभागिता और जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

पीएम आवासों में बने 2541 सोखता गड्ढे, 87 तलाबों का नवीनीकरण  

वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रेरित कर 2541 सोख्ता गड्ढे  का निर्माण कराया गया। इसके अलावा श्रमदान एवं जनसहभागिता से 175 बोरी बंधान, 3600 कंटूर ट्रेंच तथा 87 तालाबों का नवीनीकरण कर जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत किया गया। अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए जिले में रैली, कलश यात्रा, शपथ एवं दीपदान जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।  

जल स्तर में 2.19 मीटर की हुई वृद्धि

जलदूत ऐप से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। प्री मानसून 2024 की तुलना में प्री मानसून 2025 में जल स्तर में 1.81 मीटर तथा पोस्ट मानसून 2024 की तुलना में पोस्ट मानसून 2025 में 2.19 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े अभियान की प्रभावशीलता और जिले में किए गए जल संरक्षण कार्यों की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।  

जिले के तीन विकासखण्ड अब सेफ कैटेगरी में

अभियान के सकारात्मक परिणामों के फलस्वरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 23 सितम्बर 2025 के अनुसार जिले के तीनों विकासखंड, जो पूर्व में सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में शामिल थे, अब “सेफ ब्लॉक” की श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले में सामूहिक प्रयास, जनसहभागिता और प्रभावी जल प्रबंधन की एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी है।


जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेला जैसे गांव जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत इन गांवों में सामुदायिक भागीदारी से वर्षा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाए गए, जिससे जल संकट की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पहले इन गांवों में अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल फेल होने जैसी समस्याओं के कारण पानी की भारी कमी थी, जिससे खेती और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कला जत्था, कार्यशालाओं और फील्ड डेमो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल बजटिंग, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसी पहल अपनाई, जिससे सामुदायिक स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

इन गांवों ने ‘रिज-टू-वैली’ (ऊंचाई से निचले क्षेत्रों तक) दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण के कई उपाय किए। इनमें परकोलेशन टैंक, खेत तालाब, स्टैगर्ड ट्रेंच, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • मुरुगुम्मी: 71 जल संरचनाओं का निर्माण, लगभग 8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता, 264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा।

  • मरेल्ला: 53 जल संरचनाएं, लगभग 10.04 लाख घन मीटर क्षमता, 220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि सुदृढ़; साथ ही तालाबों के पुनर्निर्माण से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण।

  • थंगेला: 71 संरचनाएं, लगभग 5.89 लाख घन मीटर क्षमता, 185.3 हेक्टेयर भूमि को लाभ; पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल संग्रह।

प्रभाव:

  • करीब 5,900 लोगों को घरेलू और कृषि उपयोग के लिए बेहतर जल उपलब्धता

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार

  • डेयरी गतिविधियों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त आय के अवसर

  • मिट्टी की नमी में सुधार, जिससे स्थिर और टिकाऊ खेती संभव

  • रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पलायन में कमी

सम्मान:

मुरुगुम्मी गांव को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत पुरस्कार मिला। मरेल्ला को शीर्ष 30 गांवों में स्थान मिला, जबकि थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

इन गांवों का परिवर्तन ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। यह पहल दिखाती है कि सामुदायिक भागीदारी और सही रणनीति के माध्यम से जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक और अपनाने योग्य है।

जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने पेश किया सामुदायिक जल संरक्षण का अनूठा मॉडल

No comments Document Thumbnail

जब जल संकट दुनिया के सामने सबसे बड़ी जलवायु चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है, ऐसे समय में कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि सबसे प्रभावी समाधान बड़े बांधों या भारी मशीनरी से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से शुरू होते हैं।

जल संचय जन भागीदारी की भावना के साथ जिले ने एक साधारण लेकिन क्रांतिकारी विचार को अपनाया—
क्या होगा अगर हर किसान अपनी जमीन का केवल 5% हिस्सा पानी के लिए समर्पित कर दे?

5% मॉडल: छोटी प्रतिबद्धता, बड़ा प्रभाव

आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत किसानों ने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5% हिस्सा छोटे-छोटे रीचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे (टेर्रेस पिट) बनाने के लिए अलग रखा। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को सीधे खेतों में ही रोकना और उसे जमीन में समाहित करना है।

इस पहल के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए—

  • जो वर्षा जल पहले बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल को रिचार्ज कर रहा है

  • मिट्टी का कटाव काफी कम हुआ है

  • सूखे के दौरान भी फसलों में नमी बनी रहती है

  • भूजल स्तर में स्थिर और निरंतर सुधार हुआ है

यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए बड़े निवेश या विस्थापन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सामूहिक इच्छा शक्ति ही सबसे बड़ा संसाधन है।

जनभागीदारी से मिला आंदोलन को बल

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

  • महिलाओं ने “नीर नायिका” बनकर घर-घर जागरूकता फैलाने और सोक पिट निर्माण का नेतृत्व किया।

  • युवाओं ने “जल दूत” के रूप में ट्रेंच मैपिंग, नालों की सफाई और नुक्कड़ नाटक तथा वॉल आर्ट के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश फैलाया।

  • सामूहिक श्रमदान से जिले में 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों को पुनर्जीवित किया गया।

  • Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से अधिक लाभार्थियों ने अपने घरों के पास सोक पिट बनाकर इस अभियान को एक साझा सामाजिक जिम्मेदारी में बदल दिया।

भागीदारी से स्वामित्व की ओर

इस 5% मॉडल की सफलता केवल संरचनाओं में नहीं, बल्कि समुदाय के स्वामित्व की भावना में छिपी है।

  • 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन पर 5% रिचार्ज प्रणाली अपनाई

  • पूरे जिले में 2,000 से अधिक सोक पिट बनाए गए

  • ग्रामीण आवास योजनाओं के लाभार्थियों ने भी स्वेच्छा से अपने घरों के पास सोक पिट बनाए

सामूहिक प्रयास का एक ऐतिहासिक उदाहरण तब देखने को मिला जब समुदायों ने सिर्फ तीन घंटे में 660 सोक पिट का निर्माण कर दिया।

पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ

इस पहल के प्रभाव स्पष्ट और मापनीय रहे—

  • कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ा

  • 17 दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से जीवित हो गए

  • मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ

  • आजीविका स्थिर होने से मौसमी पलायन में लगभग 25% कमी आई

इस प्रकार जल सुरक्षा ने आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत किया है।

विज्ञान और जनभागीदारी का संगम

जिला प्रशासन ने माइक्रो-वाटरशेड मैपिंग, हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस पहल को वैज्ञानिक आधार दिया। इससे हर संरचना को अधिकतम जल पुनर्भरण के लिए रणनीतिक रूप से बनाया गया।

जिले के कलेक्टर ने कहा,

“यह पहल केवल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य किसानों के भविष्य को सुरक्षित करना, पलायन को कम करना और हर गांव में भरोसेमंद जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।”

पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल

कोरिया का 5% मॉडल यह दर्शाता है कि जलवायु अनुकूलन विकेंद्रीकृत, कम लागत वाला और जनभागीदारी आधारित हो सकता है।

सिर्फ 5% भूमि समर्पित करके समुदायों ने अपने पानी के भविष्य को 100% सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय जल संरक्षण के लिए एकजुट होते हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार: जल संरक्षण में जनभागीदारी को बताया अनिवार्य

No comments Document Thumbnail

भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 नवंबर 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Awards) और जल संचय–जन भागीदारी पुरस्कार (Jal Sanchay–Jan Bhagidari Awards) प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मानव सभ्यता का इतिहास, नदी घाटियों, समुद्री तटों और विभिन्न जल स्रोतों के आसपास बसने का इतिहास है। भारत की परंपरा में नदियों, झीलों और जल स्रोतों को पूजनीय माना गया है। हमारे राष्ट्रगीत में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने पहला शब्द लिखा है— ‘सुजलाम’—जिसका अर्थ है “प्रचुर जल संसाधनों से सम्पन्न।” यह दर्शाता है कि हमारे देश में जल का कितना महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जल का कुशल उपयोग आज वैश्विक आवश्यकता है, और भारत में यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हमारी जनसंख्या की तुलना में जल संसाधन सीमित हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि जल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे समय में सरकार और जनता दोनों को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



राष्ट्रपति ने खुशी व्यक्त की कि पिछले वर्ष शुरू की गई जल संचय–जन भागीदारी पहल के तहत 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ (groundwater recharge structures) बनाई जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि सर्कुलर वाटर इकॉनमी (Circular Water Economy) मॉडल अपनाकर उद्योग और अन्य हितधारक जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कई औद्योगिक इकाइयों ने जल उपचार और पुनर्चक्रण के साथ शून्य तरल अपशिष्ट (Zero Liquid Discharge) का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है, जो जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समूह और गैर-सरकारी संगठन भी जल संरक्षण के प्रयासों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को कम जल उपयोग में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी।



राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समझना चाहिए कि हम जल जैसे अनमोल संसाधन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय जल सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों को अत्यंत सम्मान के साथ देखते हैं—यह सोच सभी नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जल संरक्षण के प्रति सतर्क रहने और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी संभव है जब हर व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार मिलकर काम करे।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का उद्देश्य लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जल संचय–जन भागीदारी पहल सामुदायिक सहभागिता से भूजल पुनर्भरण के विविध, स्केलेबल और अनुकरणीय मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.