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‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की

जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। 

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

 इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।

'कैच द रेन' अभियान में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव बना मिसाल, मिशन जल रक्षा से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

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नई दिल्ली/राजनांदगांव- मानसून के आगमन के साथ देशभर में 'कैच द रेन' अभियान तेज़ी पकड़ रहा है। इस अभियान के तहत विभिन्न जिले वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्रोतों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक प्रयास कर रहे हैं। इन्हीं में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला अपनी अभिनव 'मिशन जल रक्षा' पहल के कारण देशभर में एक मिसाल बनकर उभरा है। वैज्ञानिक तकनीकों, जनभागीदारी और प्रभावी जल प्रबंधन के माध्यम से जिले ने यह सुनिश्चित किया है कि बारिश की हर बूंद को संरक्षित कर भूजल भंडार तक पहुंचाया जाए।

राजनांदगांव ने मानसून शुरू होने से पहले ही जल संरक्षण की व्यापक तैयारी कर ली थी। मिशन जल रक्षा के तहत ऐसा वैज्ञानिक और सामुदायिक ढांचा विकसित किया गया है, जिससे वर्षा जल बहकर व्यर्थ न जाए, बल्कि उसे धरती के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।

इस अभियान में जीआईएस मैपिंग (GIS Mapping), रिमोट सेंसिंग, एक्वीफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई। इसके साथ ही बंद पड़े बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया तथा मिनी परकोलेशन टैंक और डीप इंजेक्शन वेल जैसी संरचनाएं विकसित की गईं, जिससे कठोर चट्टानी क्षेत्रों में भी वर्षा जल गहरे भूजल स्रोतों तक पहुंच सके।

मिशन जल रक्षा की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह केवल सरकारी योजना न रहकर जन आंदोलन बन गया। किसान, महिलाएं, युवा, ग्राम पंचायतें और स्थानीय समुदाय जल बजट, जागरूकता अभियान और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल हुए। जनभागीदारी के कारण जल संरक्षण को व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।

कृषि क्षेत्र में भी इस पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। गर्मी के मौसम में होने वाली लगभग 70 प्रतिशत धान की खेती को कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित किया गया, जिससे भूजल पर दबाव कम हुआ और कृषि अधिक टिकाऊ बनी।

मिशन के परिणाम भी बेहद उत्साहजनक रहे हैं। जिले की 662 ग्राम पंचायतों में 60 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बनाई गई हैं। 500 से अधिक बंद पड़े बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट में परिवर्तित किए गए हैं। 600 से अधिक इंजेक्शन वेल को 1,700 से अधिक मिनी परकोलेशन टैंकों से जोड़ा गया है तथा 2,500 से अधिक जलाशयों का जियो-टैगिंग किया गया है।

इन प्रयासों से 51 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित हुए हैं और जिले में औसतन 2.04 मीटर भूजल स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सिंचाई और पेयजल सुरक्षा दोनों को मजबूत आधार मिला है।

'कैच द रेन' अभियान के तहत राजनांदगांव यह साबित कर रहा है कि वैज्ञानिक योजना, समय पर तैयारी और जनभागीदारी के माध्यम से मानसून को स्थायी जल सुरक्षा के अवसर में बदला जा सकता है। मिशन जल रक्षा यह संदेश देता है कि वर्षा जल संरक्षण केवल मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि जल स्रोतों की सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और जल-सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक सतत संकल्प है।

राजनांदगांव अब बारिश का इंतजार नहीं करता, बल्कि बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए पूरी तरह तैयार है।


जल संचय जन भागीदारी : ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण को मिल रही नई गति

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28 जून 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से वर्षा की प्रत्येक बूंद को बचाने और जल संरक्षण के जन आंदोलन को निरंतर गति देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के इस आह्वान के अनुरूप 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशभर में एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण तथा जनभागीदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा—

"कैच द रेन अभियान के माध्यम से हमें वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सामूहिक रूप से संरक्षित करना है। मैं सभी देशवासियों से वर्षा जल की हर एक बूंद को बचाने का विशेष आग्रह करता हूं।"

अभियान के प्रमुख कार्य

  • प्रत्येक घर, आवासीय परिसर एवं कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन प्रणाली (Rain Water Harvesting System) अपनाना।

  • उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण तथा अनुपयोगी बोरवेलों को पुनर्जीवित कर भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित करना।

  • बावड़ियों, कुओं एवं पारंपरिक जलाशयों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।

  • आसपास के तालाबों एवं जलाशयों से गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाना, ताकि मानसून के अधिकतम जल का संरक्षण हो सके।

  • जल संरक्षण क्षेत्रों में अधिकाधिक वृक्षारोपण कर हरित आवरण का विस्तार करना।

जल संचय जन भागीदारी 1.0 (6 सितंबर 2024)

जल संरक्षण में जनसहभागिता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह अभियान समुदाय (Community), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और लागत प्रभावशीलता (Cost) अर्थात 3Cs के सिद्धांत पर आधारित है। इसके माध्यम से सामुदायिक सहभागिता, संस्थागत सहयोग, सीएसआर योगदान तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय से जल संरक्षण को गति प्रदान की गई।

इस पहल का उद्देश्य कम लागत वाले भूजल पुनर्भरण एवं जल संचयन ढांचों का निर्माण, अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक समाधान अपनाना है।

1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 के बीच संचालित इस अभियान ने कम-से-कम 10 लाख भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के लक्ष्य को पार करते हुए देशभर में 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण दर्ज किया।

जल संचय जन भागीदारी 2.0 (2025)

पहले चरण की सफलता के बाद 1 जून 2025 को JSJB 2.0 प्रारंभ किया गया। इसका विशेष फोकस अत्यधिक दोहन (Over-Exploited) एवं गंभीर (Critical) श्रेणी वाले जिलों में कम लागत वाले स्थानीय उपायों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना था।

31 मई 2026 तक एक करोड़ भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जबकि देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं निर्मित होने की सूचना प्राप्त हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से 50 प्रतिशत अधिक है। इन संरचनाओं का वर्तमान में भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।

JSJB 1.0 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों एवं संस्थाओं को नवंबर 2025 में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार के दौरान सम्मानित किया गया।

जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन (2026)

1 जून 2026 को ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन’ (JSJB: CTR) अभियान का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से जल संचय जन भागीदारी (JSJB) और जल शक्ति अभियान : कैच द रेन (JSA: CTR) का एकीकरण किया गया।

यह अभियान वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण तथा जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य प्रत्येक वर्षा को जल संरक्षण के अवसर में बदलना तथा कम लागत वाले स्थानीय समाधानों के माध्यम से जल सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलन को मजबूत करना है।

यह अभियान अनेक केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं के समन्वय से संचालित किया जा रहा है, जिनमें—

  • विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)

  • जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन (RRR)

  • CAMPA

  • वित्त आयोग अनुदान

  • विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाएं

शामिल हैं।

इस अभियान का मूल आधार जन भागीदारी है, जिसके अंतर्गत पंचायती राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, महिला समूह, युवा, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन एवं स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जल शक्ति अभियान : कैच द रेन

विश्व जल दिवस (22 मार्च 2021) के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "कैच द रेन—जहां वर्षा हो, वहीं और उसी समय जल का संचयन करें" थीम के साथ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन का शुभारंभ किया।

यह अभियान वर्ष 2019 के जल शक्ति अभियान की सफलता पर आधारित है, जिसके अंतर्गत 256 जिलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त विकास खंडों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलागम विकास, जलाशयों के पुनर्जीवन एवं वृक्षारोपण को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया गया।

इसके बाद यह अभियान प्रत्येक वर्ष नई थीम एवं प्राथमिकताओं के साथ संचालित किया जा रहा है।

2021 – कैच द रेन : जहां वर्षा हो, वहीं जल संचयन

  • वर्षा जल संचयन

  • जल संरक्षण

  • जल निकायों की जियो-टैगिंग

  • वैज्ञानिक योजना निर्माण

  • जल शक्ति केंद्र एवं जन-जागरूकता

2022 – जल संरक्षण गतिविधियों का विस्तार

  • पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन

  • भूजल पुनर्भरण

  • जलागम विकास

  • आर्द्रभूमि एवं नदियों का संरक्षण

  • झरनों के जलग्रहण क्षेत्रों का विकास

2023 – पेयजल स्रोतों की स्थिरता

  • 150 जल-संकटग्रस्त जिलों पर विशेष फोकस

  • पेयजल स्रोतों का सुदृढ़ीकरण

  • भूजल पुनर्भरण

  • जनभागीदारी एवं निगरानी

2024 – नारी शक्ति से जल शक्ति

  • महिलाओं के नेतृत्व में जल संरक्षण

  • जलाशयों की सफाई एवं गाद निकालना

  • अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन

  • वृक्षारोपण एवं स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण

महिलाओं के नेतृत्व में संचालित इन पहलों को स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है।

जल शक्ति केंद्र

देशभर के जिलों में स्थापित जल शक्ति केंद्र (JSKs) जल संरक्षण संबंधी ज्ञान एवं तकनीकी सहायता के प्रमुख केंद्र हैं। ये केंद्र वर्षा जल संचयन तकनीकों का प्रचार-प्रसार करते हैं, स्थानीय प्रशासन एवं समुदायों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं तथा जल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देते हैं।

वर्षा जल संचयन से ग्रामीण समृद्धि तक

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में जल संरक्षण आज राष्ट्रीय प्राथमिकता और जन आंदोलन बन चुका है। कैच द रेन तथा जल संचय जन भागीदारी जैसे अभियानों ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनसहभागिता, वैज्ञानिक योजना और संसाधनों के समन्वय पर आधारित व्यापक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप प्रदान किया है।

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलाशयों का पुनर्जीवन तथा जल के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देना कृषि, ग्रामीण आजीविका, जलवायु अनुकूलन और भावी पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्थानीय भागीदारी, वैज्ञानिक योजना एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से यह अभियान ग्रामीण भारत में टिकाऊ जल परिसंपत्तियों का निर्माण कर रहा है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल मांग के वर्तमान दौर में वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण ही देश की जल सुरक्षा का आधार बनेगा तथा कृषि और सतत ग्रामीण विकास को नई मजबूती प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ सहित विभिन्न मंचों से जल संरक्षण पर दिया गया सतत संदेश आज देश के नागरिकों, संस्थाओं एवं सरकारों को एकजुट होकर जल सुरक्षा की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

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नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेला जैसे गांव जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत इन गांवों में सामुदायिक भागीदारी से वर्षा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाए गए, जिससे जल संकट की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पहले इन गांवों में अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल फेल होने जैसी समस्याओं के कारण पानी की भारी कमी थी, जिससे खेती और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कला जत्था, कार्यशालाओं और फील्ड डेमो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल बजटिंग, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसी पहल अपनाई, जिससे सामुदायिक स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

इन गांवों ने ‘रिज-टू-वैली’ (ऊंचाई से निचले क्षेत्रों तक) दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण के कई उपाय किए। इनमें परकोलेशन टैंक, खेत तालाब, स्टैगर्ड ट्रेंच, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • मुरुगुम्मी: 71 जल संरचनाओं का निर्माण, लगभग 8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता, 264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा।

  • मरेल्ला: 53 जल संरचनाएं, लगभग 10.04 लाख घन मीटर क्षमता, 220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि सुदृढ़; साथ ही तालाबों के पुनर्निर्माण से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण।

  • थंगेला: 71 संरचनाएं, लगभग 5.89 लाख घन मीटर क्षमता, 185.3 हेक्टेयर भूमि को लाभ; पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल संग्रह।

प्रभाव:

  • करीब 5,900 लोगों को घरेलू और कृषि उपयोग के लिए बेहतर जल उपलब्धता

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार

  • डेयरी गतिविधियों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त आय के अवसर

  • मिट्टी की नमी में सुधार, जिससे स्थिर और टिकाऊ खेती संभव

  • रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पलायन में कमी

सम्मान:

मुरुगुम्मी गांव को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत पुरस्कार मिला। मरेल्ला को शीर्ष 30 गांवों में स्थान मिला, जबकि थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

इन गांवों का परिवर्तन ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। यह पहल दिखाती है कि सामुदायिक भागीदारी और सही रणनीति के माध्यम से जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक और अपनाने योग्य है।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय ने केंद्र के साथ सुधार-आधारित MoU पर किए हस्ताक्षर

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ग्रामीण जल आपूर्ति को परिणाम-आधारित और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मेघालय, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाला 12वां राज्य बन गया है। यह कदम राज्य के JJM 2.0 के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक प्रवेश को दर्शाता है, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की वर्चुअल उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ।

बैठक में मेघालय सरकार के पीएचई मंत्री मार्कुइज़ एन. मराक, आयुक्त एवं सचिव प्रवीण बक्शी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के सचिव अशोक के. के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना ने कहा कि यह MoU केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सतत जल सेवाओं को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों और गांव जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और प्रबंधन में सशक्त बनाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने मेघालय की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि राज्य ने 83% से अधिक ग्रामीण नल जल कवरेज हासिल कर लिया है और जल्द ही 100% लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, और इसके लिए अतिरिक्त ₹1.51 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2025–26 के बजट में लगभग ₹67,300 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर घर तक स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन पर भी जोर दिया तथा मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से जल स्रोतों को मजबूत करने की बात कही।

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय, जो पहले ग्रामीण नल जल कवरेज में पिछड़े राज्यों में था, अब 83.59% कवरेज तक पहुंच गया है। उन्होंने राज्य की जल नीति (2019) और क्लाइमेट काउंसिल जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न विभाग मिलकर जल प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।

यह सुधार-आधारित MoU सुनिश्चित करेगा कि हर ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता के साथ नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणालियों का सतत संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

करमरी में ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का दिया संदेश

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आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर- आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-  ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।    

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और      

आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। 

कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा

करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।


77वें गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रनिर्माताओं का सम्मान, 10 हजार विशेष अतिथि होंगे शामिल

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नई दिल्ली- 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड इस बार जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों के सम्मान का भव्य उदाहरण बनेगी। इस अवसर पर देशभर से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों (पति/पत्नी सहित) को आमंत्रित किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इन विशेष अतिथियों में किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप उद्यमी, शोधकर्ता, खिलाड़ी, महिला स्वयं सहायता समूह, कारीगर, श्रमिक, छात्र, स्वयंसेवक और समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों से जुड़े वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनका चयन राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को सम्मानित करने और राष्ट्रीय आयोजनों में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

विशेष अतिथियों की सूची में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के विजेता, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान, ‘पल्सेज आत्मनिर्भरता मिशन’ के अंतर्गत उत्कृष्ट किसान, पीएम-स्माइल योजना के तहत पुनर्वासित ट्रांसजेंडर और भिक्षुक, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना (ग्रामीण), पीएम फसल बीमा योजना, पीएम स्वनिधि, मुद्रा योजना, एनआरएलएम की ‘लखपति दीदी’, पीएम विश्वकर्मा योजना, खादी विकास योजना, महिला कॉयर योजना सहित कई योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं।

इसके अलावा इसरो, डीआरडीओ, डीप ओशन मिशन, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, नवाचार एवं स्टार्ट-अप क्षेत्र के उत्कृष्ट प्रदर्शनकर्ता, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के विजेता, अटल टिंकरिंग लैब के प्रतिभाशाली छात्र, ‘वीर गाथा’ परियोजना के विजेता तथा ‘मन की बात’ के प्रतिभागी भी परेड के साक्षी बनेंगे।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कलाकार, कारीगर, खिलाड़ी, आदिवासी उद्यमी, सीमा सड़क संगठन (BRO) के निर्माण श्रमिक, स्वच्छ गंगा मिशन के ‘जल योद्धा’, एनडीएमए के स्वयंसेवक, माय भारत वॉलंटियर्स, सर्वश्रेष्ठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह आयोजन विशेष रहेगा, जहां यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम-2026 के विदेशी प्रतिनिधि, दूसरे वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में शामिल अंतरराष्ट्रीय व भारतीय भिक्षु प्रतिनिधिमंडल तथा खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी ओलंपियाड 2025 के पदक विजेता छात्र भी शामिल होंगे।

गणतंत्र दिवस समारोह के साथ-साथ इन विशेष अतिथियों के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्रहालय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थलों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। उन्हें संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से संवाद का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

यह पहल न केवल भारत की विविध उपलब्धियों को मंच पर लाएगी, बल्कि ‘जन भागीदारी से जन सशक्तिकरण’ के संकल्प को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगी।

आईबी शताब्दी व्याख्यान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा से विकसित भारत का निर्माण’

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (23 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में “People-Centric National Security: Community Participation in Building Viksit Bharat” (जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक सहभागिता) विषय पर आयोजित आईबी शताब्दी एंडॉवमेंट व्याख्यान को संबोधित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि स्वतंत्रता के बाद से ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा देश की एकता और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस व्याख्यान का विषय देश के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईबी सहित सभी संबंधित संस्थानों को यह जागरूकता फैलानी चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। सजग नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सरकारी प्रयासों को मजबूत सहयोग प्रदान कर सकते हैं। जब नागरिक समुदाय के रूप में संगठित होते हैं, तो वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार की पहलों को प्रभावी समर्थन दे सकते हैं। संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से कई राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक आयामों से जुड़े हैं। छात्र, शिक्षक, मीडिया, आवासीय कल्याण संघ, नागरिक समाज संगठन तथा अन्य अनेक समुदाय इन कर्तव्यों के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाती है। अनेक उदाहरण हैं, जब सजग नागरिकों ने समय पर सूचना देकर सुरक्षा संकट को टालने में पेशेवर बलों की मदद की है। राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तारित परिभाषा और रणनीति में जनता को केंद्र में रखा जाना चाहिए। नागरिकों को केवल मूक दर्शक नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आसपास और उससे आगे के क्षेत्रों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। ‘जन भागीदारी’ जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है।

राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिक पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को जनता की सेवा की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। यही सेवा भावना लोगों के बीच विश्वास पैदा करेगी, जो जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के विकास के लिए अनिवार्य है, जिसमें सामुदायिक सहभागिता एक प्रमुख तत्व होगी।

उन्होंने कहा कि भारत को बहु-आयामी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा क्षेत्रों में तनाव, आतंकवाद और उग्रवाद, विद्रोह और साम्प्रदायिक कट्टरता पारंपरिक सुरक्षा चिंताएँ रही हैं। हाल के वर्षों में साइबर अपराध एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में उभरे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षा की कमी का आर्थिक प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। सुरक्षा आर्थिक निवेश और विकास के प्रमुख कारकों में से एक है। ‘सुरक्षित भारत’ का निर्माण ‘समृद्ध भारत’ के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि आंतरिक सुरक्षा से जुड़े बलों और एजेंसियों की गहन कार्रवाई इसके पीछे प्रमुख कारण रही है। साथ ही, समुदायों का विश्वास जीतने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देना उग्रवादी और विद्रोही समूहों द्वारा लोगों के शोषण के खिलाफ प्रभावी सिद्ध हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना और संचार की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। इसमें सृजन और विनाश—दोनों की क्षमता है। गलत सूचना से लोगों की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे निरंतर और प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय हित में तथ्य-आधारित विमर्श प्रस्तुत करने वाले सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक समुदाय तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे जटिल चुनौतियाँ गैर-पारंपरिक और डिजिटल प्रकृति की हैं, जिनमें से अधिकांश अत्याधुनिक तकनीकों से उत्पन्न होती हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से सक्षम समुदायों का विकास आवश्यक है। डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती समस्या के लिए घर, संस्थान और समुदाय—तीनों स्तरों पर सतर्कता जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को फिशिंग, डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने में सक्षम बना सकते हैं और संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध करा सकते हैं। इस डेटा के विश्लेषण से पूर्वानुमानात्मक पुलिसिंग मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। सजग और सक्षम नागरिक समुदाय न केवल साइबर अपराधों के प्रति कम संवेदनशील होंगे, बल्कि इनके खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि यदि नागरिक कल्याण और जन सहभागिता को रणनीति के केंद्र में रखा जाए, तो नागरिक प्रभावी खुफिया और सुरक्षा स्रोत बन सकते हैं। जन भागीदारी से प्रेरित यह परिवर्तन 21वीं सदी की जटिल और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सार्वजनिक सहभागिता के माध्यम से हम सभी मिलकर एक सजग, शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

दूरसंचार धोखाधड़ी पर सख्त प्रावधान, ‘संचार साथी’ से नागरिकों की भागीदारी बढ़ी: डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर

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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(e) के तहत धोखाधड़ी, छल या व्यक्ति-भेषण (Personation) के माध्यम से सिम कार्ड या अन्य दूरसंचार पहचानकर्ता प्राप्त करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं।

मंत्री ने बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(c) और 42(3)(f) के अंतर्गत दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ करना तथा यह जानते हुए भी ऐसे रेडियो उपकरणों को रखना या उपयोग करना, जिनमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए पहचानकर्ता हों, अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त, टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर दूरसंचार उपकरण की विशिष्ट पहचान संख्या को हटाने, बदलने या उसमें छेड़छाड़ करने तथा ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर को रखने या उपयोग करने पर रोक लगाते हैं, जिनके बारे में जानकारी हो कि वे अवैध रूप से कॉन्फ़िगर किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने लाइसेंस शर्तों के माध्यम से यह अनिवार्य किया है कि सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाता (TSPs) किसी भी ग्राहक को सब्सक्राइबर के रूप में जोड़ने से पहले उसकी उचित पहचान और सत्यापन सुनिश्चित करें।

डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि DoT ने नागरिक-केंद्रित ‘संचार साथी’ पोर्टल और ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) के जरिए जांच सकते हैं। दूरसंचार धोखाधड़ी को रोकने और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘संचार साथी’ पहल के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। IMEI सत्यापन से जुड़े व्याख्यात्मक वीडियो और इन्फोग्राफिक्स DoT के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही, ‘संचार मित्र’ योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत छात्र स्वयंसेवकों को डिजिटल सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और संचार साथी पोर्टल व ऐप के उपयोग के बारे में नागरिकों को जागरूक करने के लिए जोड़ा गया है। स्थानीय भाषाओं में संवाद के माध्यम से यह पहल जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रही है।

नागरिकों तक पहुंच के लिए बहुभाषी समाचार लेख, विज्ञापन, सार्वजनिक स्थलों पर डिजिटल स्क्रीन और होर्डिंग्स, टीवी और रेडियो संदेश, DoT की फील्ड इकाइयों द्वारा स्थानीय गतिविधियां, टेलीकॉम कंपनियों के साथ एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ‘संचार साथी’ जनभागीदारी को भी बढ़ावा देता है, जिसके तहत नागरिक साइबर धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दुरुपयोग की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे अधिकारी और टेलीकॉम ऑपरेटर संदिग्ध नंबरों और फर्जी कनेक्शनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर पाते हैं, जिससे दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और निर्दोष उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

“हमारा शौचालय, हमारा भविष्य” अभियान: स्वच्छता, स्वास्थ्य और गरिमा के लिए सामूहिक पहल

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19 नवंबर को शुरू हुआ “हमारा शौचालय, हमारा भविष्य” अभियान 10 दिसंबर – मानवाधिकार दिवस पर सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। यह तीन सप्ताह का अभियान केवल स्वास्थ्य, गरिमा और समाजिक समृद्धि के लिए स्वच्छता और सफाई के महत्व पर केंद्रित नहीं था, बल्कि ग्रामीण शौचालयों (IHHLs) और सामुदायिक शौचालय परिसरों (CSCs) के कार्यात्मक मूल्यांकन, मरम्मत, सौंदर्यीकरण और स्वीकृति पर भी जोर देता था। अभियान ने संचालन एवं रखरखाव (O&M) को मजबूत करने और मल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन एवं रेट्रोफिटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियां

  • 1 लाख से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (IHHLs) और 5,500 से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों (CSCs) की मरम्मत और सौंदर्यीकरण किया गया।

  • 49,000 से अधिक IEC/BCC कार्यक्रमों में 32.70 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। सबसे अधिक भागीदारी तमिलनाडु (4.86 लाख) और गुजरात (4.50 लाख) में रही।

  • फिकल स्लज प्रबंधन (FSM) और रेट्रोफिटिंग पर 10,800 से अधिक जागरूकता सत्रों में 6.43 लाख लोग शामिल हुए।

  • स्कूलों में 9,800 से अधिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 6.8 लाख लोग शामिल हुए।

  • 5,600 से अधिक चौपालें आयोजित की गईं।

  • 3,800 से अधिक वॉल पेंटिंग/वॉल आर्ट की गई।

समुदाय और भागीदारी

अभियान ने जन भागीदारी (Jan Bhagidari) के माध्यम से समुदायों, स्कूलों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और संस्थाओं में स्वच्छता को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया। अभियान ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण, रखरखाव और सामुदायिक जागरूकता को सुदृढ़ किया।

संचालन और प्रभाव

  • अभियान को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जल शक्ति मंत्रालय, जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आयोजित किया।

  • सोशल मीडिया पर #HumaraShauchalayHumaraBhavishaya ने 3.2K उल्लेख, 35K इंप्रेशन और 1 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई।

अभियान ने एक मजबूत आधार तैयार किया है और यह दर्शाता है कि भारत की संपूर्ण स्वच्छता (Sampoorna Swachhata) की यात्रा जारी है। सामूहिक प्रयास और जन भागीदारी आगे भी मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

टीबी मुक्त भारत अभियान: उन्मूलन की दिशा में सशक्त पहल

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टीबी मुक्त भारत अभियान (राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम) पूरे देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत लागू किया जा रहा है।

टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत, अनिर्धारित टीबी मामलों की पहचान करने, टीबी से होने वाली मौतों को कम करने और नए संक्रमणों को रोकने के लिए एक नए दृष्टिकोण को लागू किया गया है। इसमें संवेदनशील आबादी की पहचान, छाती का एक्स-रे द्वारा स्क्रीनिंग, सभी संभावित टीबी मामलों के लिए शुरुआती न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT), त्वरित और उचित उपचार आरंभ करना, उच्च-जोखिम वाले टीबी मामलों के प्रबंधन के लिए विभेदित टीबी देखभाल, पोषण सहायता तथा घर के संपर्कों और पात्र संवेदनशील आबादी को निवारक उपचार शामिल है। निक्षय पोर्टल का उपयोग पूरे देश में सभी टीबी रोगियों का विवरण दर्ज करने के लिए किया जाता है।

समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) द्वारा प्रदान की जाने वाली समग्र प्राथमिक देखभाल सेवाओं के माध्यम से किया जाता है। जनसामान्य को शिक्षित करने और लक्षणों, टीबी की रोकथाम तथा समय पर उपचार के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए गहन सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। जनभागीदारी गतिविधियाँ विद्यालयों, पंचायती राज संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और सिविल सोसायटी संगठनों की भागीदारी से लागू की जाती हैं।

पोषण सहायता के लिए, 1 नवंबर 2024 से सरकार ने निक्षय पोषण योजना (NPY) के तहत टीबी रोगियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 500 रुपये से 1,000 रुपये प्रति माह प्रति रोगी कर दिया है, जो संपूर्ण उपचार अवधि के लिए लागू होगा।

निक्षय पोषण योजना के तहत, अप्रैल 2018 से अब तक 4,322 करोड़ रुपये 1.35 करोड़ टीबी रोगियों को वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, निक्षय मित्र पहल के तहत, सितंबर 2022 से अब तक 20.3 लाख टीबी रोगियों को कुल 45.66 लाख फूड बास्केट वितरित की गई हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


कोहिमा में राज्य स्तरीय वाटरशेड महोत्सव 2025 और मिशन ‘वाटरशेड पुनरुत्थान’ का शुभारंभ

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भारत की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सतत ग्रामीण विकास को तेज़ गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मसानी चंद्र शेखर ने आज कोहिमा के नगा सॉलिडेरिटी पार्क में राज्य स्तरीय वाटरशेड महोत्सव 2025 का शुभारंभ किया।

यह कार्यक्रम जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों को जल-सुरक्षित और जलवायु-लचीले परिदृश्यों में परिवर्तित करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण चरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्र के विकास पथ के केंद्र में रखा गया है, और यह पहल उसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।

मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान (Mission Watershed PUNARUTTHAN) की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है। यह मिशन पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, क्षरित भूमि को पुनर्स्थापित करने, जल संचयन तंत्र को मजबूत करने और एमजीएनआरईजीए जैसी योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से समुदाय-आधारित आजीविकाओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।

मंत्री ने कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो अपनी प्राकृतिक नींवों को सुरक्षित रखते हैं। वाटरशेड विकास केवल जल प्रबंधन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की पारिस्थितिकी रीढ़ को पुनर्गठित करने, आजीविका सृजन करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि सुनिश्चित करने का प्रयास है।

नागालैंड: समुदाय-आधारित जल प्रबंधन का अग्रणी उदाहरण

डॉ. शेखर ने कहा कि नागालैंड अपनी समृद्ध पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ समुदाय-आधारित वाटरशेड प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
झरनों का पुनर्जीवन, जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण और भूमि संसाधनों का पुनरुत्थान सिर्फ पर्यावरणीय प्रयास नहीं—बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनरेखा है।

उन्होंने कहा कि नागालैंड मानवीय संवेदना और सांस्कृतिक दृढ़ता का सशक्त प्रतीक है। इसकी विविध भाषाएँ, संगीत, शिल्प और उत्सव इसकी विरासत, साहस और गरिमा को दर्शाते हैं। नागालैंड यह बताता है कि कैसे एक समाज अपनी पहचान को संजोते हुए खुले मन से विश्व से जुड़ सकता है।

बीते दशकों में उत्तर-पूर्व को मुख्यधारा से दूर क्षेत्र माना गया था। आज के विकास दृष्टिकोण ने नागालैंड को भारत की विकास यात्रा का केंद्रबिंदु बना दिया है। बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत अवसंरचना और डिजिटल पहुंच ने इसे पर्यटन, व्यापार, कृषि और सांस्कृतिक आदान–प्रदान का उभरता केंद्र बना दिया है।

नागालैंड में पीएमकेएसवाई एवं वाटरशेड विकास की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • राज्य में 14 वाटरशेड परियोजनाएँ स्वीकृत

  • ₹140 करोड़ स्वीकृत, जिनमें से ₹80 करोड़ जारी

  • 555 जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण

  • 6,500 से अधिक किसान लाभान्वित

  • 120 झरनों का पुनर्जीवन — विशेषकर पहाड़ी एवं जनजातीय क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण

मंत्री ने बताया कि अन्य राज्यों के विपरीत, जहाँ केंद्र–राज्य फंडिंग अनुपात 60:40 है, वहीं पूर्वोत्तर राज्यों, जिनमें नागालैंड भी शामिल है, को 90% केंद्रीय सहायता मिलती है, जो सरकार के विशेष फोकस को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्व के नवीकरणीय ताजे जल का केवल 4% है, जबकि वैश्विक जनसंख्या का 18% यहाँ निवास करता है। ऐसे में व्यवस्थित जल संरक्षण और संसाधन प्रबंधन अनिवार्य है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और वाटरशेड कार्यक्रमों ने कृषि आय बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और बहु-फसल चक्र संभव बनाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।

राज्य नेतृत्व की सराहना

डॉ. शेखर ने नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो के नेतृत्व की सराहना की और अधिकारियों — डॉ. जी. हुकुघा सेमा (IRS) तथा जी. इकटो झिमोमी — के कार्यों की प्रशंसा की, जिन्होंने जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय परिणाम सुनिश्चित किए।

जन भागीदारी का आह्वान

मंत्री ने जन भागीदारी के महत्व पर बल देते हुए नागरिकों से जल और भूमि संसाधनों की सुरक्षा और सतत उपयोग में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

यह कार्यक्रम केंद्र और राज्य के बीच सहकारी संघवाद की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो प्रधानमंत्री के जल-सुरक्षित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्पष्टीकरण: संचार साथी ऐप पूरी तरह वैकल्पिक, सुरक्षित और उपभोक्ता केंद्रित

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संचार साथी ऐप को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) है। उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार ऐप को सक्रिय कर सकते हैं और चाहें तो कभी भी इसे निष्क्रिय या हटा सकते हैं।

उपभोक्ता केंद्रित, सुरक्षित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म

सिंधिया ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संचार साथी ऐप हर मोबाइल उपयोगकर्ता को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा:

“संचार साथी एक ऐप और पोर्टल दोनों है, जो नागरिकों को पारदर्शी और आसान टूल्स के माध्यम से खुद को सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है। यह जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें नागरिक अपने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।”

संचार साथी के प्रभाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

लॉन्च के बाद से संचार साथी ने बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला है:

  • 21.5 करोड़+ पोर्टल विज़िट

  • 1.4 करोड़+ ऐप डाउनलोड

  • 1.43 करोड़+ मोबाइल कनेक्शन नागरिकों द्वारा “Not My Number” चुनने पर डिस्कनेक्ट

  • 26 लाख खोए/चोरी हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए गए

    • इनमें से 7.23 लाख फोन सफलतापूर्वक लौटाए गए

  • 40.96 लाख फर्जी कनेक्शन नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर डिस्कनेक्ट

  • 6.2 लाख फ्रॉड-लिंक्ड IMEI ब्लॉक

  • ₹475 करोड़ की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी रोकी गई Financial Fraud Risk Indicator (FRI) के माध्यम से

साइबर सुरक्षा और नागरिक संरक्षण सर्वोपरि

संचार साथी में उपयोगकर्ताओं को कॉल लॉग से सीधे संदिग्ध धोखाधड़ी रिपोर्ट करने की सुविधा है, जिससे नागरिक स्वयं और दूसरों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रख सकते हैं।

 सिंधिया ने कहा:

“हर नागरिक की डिजिटल सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। संचार साथी स्वैच्छिक, पारदर्शी और पूरी तरह नागरिक सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसे कभी भी सक्रिय, निष्क्रिय या हटाया जा सकता है—सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गोपनीयता से समझौता किए बिना।”


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार: जल संरक्षण में जनभागीदारी को बताया अनिवार्य

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 नवंबर 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Awards) और जल संचय–जन भागीदारी पुरस्कार (Jal Sanchay–Jan Bhagidari Awards) प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मानव सभ्यता का इतिहास, नदी घाटियों, समुद्री तटों और विभिन्न जल स्रोतों के आसपास बसने का इतिहास है। भारत की परंपरा में नदियों, झीलों और जल स्रोतों को पूजनीय माना गया है। हमारे राष्ट्रगीत में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने पहला शब्द लिखा है— ‘सुजलाम’—जिसका अर्थ है “प्रचुर जल संसाधनों से सम्पन्न।” यह दर्शाता है कि हमारे देश में जल का कितना महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जल का कुशल उपयोग आज वैश्विक आवश्यकता है, और भारत में यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हमारी जनसंख्या की तुलना में जल संसाधन सीमित हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि जल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे समय में सरकार और जनता दोनों को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



राष्ट्रपति ने खुशी व्यक्त की कि पिछले वर्ष शुरू की गई जल संचय–जन भागीदारी पहल के तहत 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ (groundwater recharge structures) बनाई जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि सर्कुलर वाटर इकॉनमी (Circular Water Economy) मॉडल अपनाकर उद्योग और अन्य हितधारक जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कई औद्योगिक इकाइयों ने जल उपचार और पुनर्चक्रण के साथ शून्य तरल अपशिष्ट (Zero Liquid Discharge) का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है, जो जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समूह और गैर-सरकारी संगठन भी जल संरक्षण के प्रयासों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को कम जल उपयोग में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी।



राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समझना चाहिए कि हम जल जैसे अनमोल संसाधन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय जल सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों को अत्यंत सम्मान के साथ देखते हैं—यह सोच सभी नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जल संरक्षण के प्रति सतर्क रहने और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी संभव है जब हर व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार मिलकर काम करे।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का उद्देश्य लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जल संचय–जन भागीदारी पहल सामुदायिक सहभागिता से भूजल पुनर्भरण के विविध, स्केलेबल और अनुकरणीय मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





30 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ का राष्ट्रीय शुभारंभ: युवाओं में लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा

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पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय (स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 30 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा (Model Youth Gram Sabha - MYGS)’ नामक एक अनोखी पहल का राष्ट्रीय शुभारंभ करेगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय एवं मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

इस कार्यक्रम के दौरान मॉडल यूथ ग्राम सभा पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल और MYGS पोर्टल का भी शुभारंभ किया जाएगा। ये डिजिटल उपकरण इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और छात्रों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। यह पहल देशभर के 1,000 से अधिक विद्यालयों में लागू की जाएगी, जिनमें जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVs), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRSs) और राज्य सरकार के विद्यालय शामिल हैं।

कार्यक्रम में पंचायती राज, शिक्षा और जनजातीय कार्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, लगभग 650 प्रतिनिधि, जिनमें छात्र, शिक्षक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के पंचायती राज संस्थानों (PRIs) के निर्वाचित प्रतिनिधि और राज्य पंचायत राज विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, भाग लेंगे।

मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) एक अभिनव पहल है जिसका उद्देश्य जनभागीदारी को सशक्त बनाना और सहभागितापूर्ण स्थानीय शासन को बढ़ावा देना है। इसमें छात्रों को ग्राम सभा के मॉडल सत्रों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और इसका लक्ष्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्य, नागरिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है, ताकि वे पारदर्शिता, जवाबदेही और विकसित भारत (Viksit Bharat) के दृष्टिकोण के प्रति समर्पित नागरिक बन सकें।

देशभर के सिनेमा घरों में आज से दिखाई जाएगी “जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास” पर दो मिनट की जनजागरूकता फिल्म

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आज, 24 अक्टूबर 2025 से लेकर 6 नवंबर 2025 तक, देशभर के सिनेमा घरों में “जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास” पर आधारित दो मिनट की सार्वजनिक जागरूकता (PSA) फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। यह पहल प्रधानमंत्री के जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इस अभियान का उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए पंचायत विकास योजनाओं के निर्माण में जन-जागरूकता और लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्रत्येक नागरिक स्थानीय स्तर पर विकास की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फिल्म सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले और इंटरवल के अंतिम पाँच मिनटों के दौरान प्रदर्शित की जाएगी। इसे सार्वजनिक सेवा जागरूकता फिल्मों के प्रदर्शन के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिखाया जाएगा, उन राज्यों को छोड़कर जहाँ वर्तमान में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है।

जन योजना अभियान (People’s Plan Campaign - PPC) 2025–26 को 2 अक्टूबर 2025 को देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया था। इस अभियान के माध्यम से पंचायतों को साक्ष्य-आधारित और समावेशी पंचायत विकास योजनाएँ (Panchayat Development Plans) तैयार करने में सक्षम बनाया जा रहा है, जो स्थानीय प्राथमिकताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी मेल खाती हैं। ये योजनाएँ विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से तैयार की जाती हैं।

2018 में शुरू हुआ जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास, अब एक प्रमुख पहल (flagship initiative) के रूप में विकसित हो चुका है। इसने ग्राम स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त करने, भागीदारीपूर्ण योजना प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने, और स्वशासन की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के अनुसार, 2019–20 से अब तक 18.13 लाख से अधिक पंचायत विकास योजनाएँ — जिनमें ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDPs), ब्लॉक पंचायत विकास योजनाएँ (BPDPs) और जिला पंचायत विकास योजनाएँ (DPDPs) शामिल हैं — अपलोड की जा चुकी हैं। इनमें से 2.52 लाख योजनाएँ वर्तमान 2025–26 चक्र के अंतर्गत अपलोड की गई हैं।

इस सार्वजनिक जागरूकता फिल्म के माध्यम से, ग्रामीण विकास मंत्रालय का उद्देश्य नागरिकों की पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के साथ संलग्नता को और गहरा करना तथा उन्हें स्थानीय शासन और ग्रामीण विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

🎥 लघु फिल्म देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

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