Media24Media.com: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया भारत का नया जलवायु लक्ष्य (NDC 2031-35)

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया भारत का नया जलवायु लक्ष्य (NDC 2031-35)

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भारत की जलवायु कार्रवाई को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा सतत विकास और जलवायु न्याय के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

2031-35 के लिए भारत का NDC “विकसित भारत” के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जो केवल 2047 का लक्ष्य नहीं, बल्कि आज से ही एक समृद्ध और जलवायु-सक्षम भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत के ये नए जलवायु लक्ष्य पूर्व प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं, जिनमें से कई को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। ये पांच गुणात्मक लक्ष्य सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, जलवायु-लचीले विकास को प्रोत्साहित करने और समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्धारित किए गए हैं।

प्रारंभिक उपलब्धि से उच्च लक्ष्य तक

भारत ने 2015 में अपने पहले NDC के तहत 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 33–35% कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा था, जिसे क्रमशः 11 वर्ष और 9 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया। 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है, जिसे अब 2035 तक 47% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी पहले ही 52.57% (फरवरी 2026) तक पहुंचकर हासिल किया जा चुका है, जिसे अब 2035 तक 60% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से कार्बन सिंक को 3.5–4.0 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास

भारत बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, स्वच्छ विनिर्माण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के माध्यम से जलवायु रणनीति को लागू कर रहा है। प्रमुख योजनाओं में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर योजना, PLI योजना, पीएम-कुसुम, CCUS और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस और Lead-IT जैसी पहल के माध्यम से सहयोग बढ़ा रहा है।

जलवायु अनुकूलन पर जोर

भारत केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुकूलन (Adaptation) पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसमें तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, चक्रवात चेतावनी प्रणाली, हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, हीट एक्शन प्लान और सामुदायिक आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

जन-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत की जलवायु नीति “LiFE – Lifestyle for Environment” पर आधारित है, जो सतत जीवनशैली को जन आंदोलन बना रही है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल भी जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।

NDC (2031-35) की रूपरेखा

इस NDC को तैयार करते समय ग्लोबल स्टॉकटेक, CBDR-RC सिद्धांत और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। नीति आयोग के तहत विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों और संगठनों से व्यापक परामर्श किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ व्यवहारिक भी हों।

निष्कर्ष

भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी और देश को हरित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करेंगी। यह निर्णय भारत को कम-कार्बन और जलवायु-सक्षम भविष्य की दिशा में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

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