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Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: न्याय विभाग की स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत की पहल

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न्याय विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पखवाड़े के दौरान 02.04.2026 को सभी के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिससे कर्मचारियों को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।

09.04.2026 को विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और स्वच्छ जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

10.04.2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात नीरज वर्मा, सचिव (न्याय) के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को अपने आसपास भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

इसी दिन अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्वच्छता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

13.04.2026 को विभाग द्वारा iGOT Mission LiFE (Lifestyle for Environment) पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में सतत आदतों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस सत्र में ‘यूज़ एंड डिस्पोज़’ अर्थव्यवस्था के स्थान पर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को अपनाने और ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यस्थलों और समाज में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


न्याय विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी स्वच्छता एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल, अभियान और गतिविधियाँ जारी रखेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया भारत का नया जलवायु लक्ष्य (NDC 2031-35)

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भारत की जलवायु कार्रवाई को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा सतत विकास और जलवायु न्याय के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

2031-35 के लिए भारत का NDC “विकसित भारत” के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जो केवल 2047 का लक्ष्य नहीं, बल्कि आज से ही एक समृद्ध और जलवायु-सक्षम भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत के ये नए जलवायु लक्ष्य पूर्व प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं, जिनमें से कई को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। ये पांच गुणात्मक लक्ष्य सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, जलवायु-लचीले विकास को प्रोत्साहित करने और समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्धारित किए गए हैं।

प्रारंभिक उपलब्धि से उच्च लक्ष्य तक

भारत ने 2015 में अपने पहले NDC के तहत 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 33–35% कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा था, जिसे क्रमशः 11 वर्ष और 9 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया। 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है, जिसे अब 2035 तक 47% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी पहले ही 52.57% (फरवरी 2026) तक पहुंचकर हासिल किया जा चुका है, जिसे अब 2035 तक 60% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से कार्बन सिंक को 3.5–4.0 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास

भारत बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, स्वच्छ विनिर्माण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के माध्यम से जलवायु रणनीति को लागू कर रहा है। प्रमुख योजनाओं में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर योजना, PLI योजना, पीएम-कुसुम, CCUS और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस और Lead-IT जैसी पहल के माध्यम से सहयोग बढ़ा रहा है।

जलवायु अनुकूलन पर जोर

भारत केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुकूलन (Adaptation) पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसमें तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, चक्रवात चेतावनी प्रणाली, हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, हीट एक्शन प्लान और सामुदायिक आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

जन-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत की जलवायु नीति “LiFE – Lifestyle for Environment” पर आधारित है, जो सतत जीवनशैली को जन आंदोलन बना रही है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल भी जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।

NDC (2031-35) की रूपरेखा

इस NDC को तैयार करते समय ग्लोबल स्टॉकटेक, CBDR-RC सिद्धांत और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। नीति आयोग के तहत विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों और संगठनों से व्यापक परामर्श किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ व्यवहारिक भी हों।

निष्कर्ष

भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी और देश को हरित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करेंगी। यह निर्णय भारत को कम-कार्बन और जलवायु-सक्षम भविष्य की दिशा में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) का 10वां प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 2 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत वर्ष 2012 से अब तक कुल 148 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

यह विशेष कोर्स उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन इस विषय में गहरी रुचि रखते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों—जैसे सशस्त्र बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, मीडिया, शिक्षा और छात्र समुदाय—से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चार दिनों तक विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय जैव-भूगोल, वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियां, बड़े स्तनधारियों का प्रबंधन, वन्यजीवों की अवैध तस्करी, फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिक विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को लैंसडाउन वन प्रभाग (उत्तराखंड) में पांच दिवसीय फील्ड विजिट पर ले जाया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें जंगल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों और स्थानीय समुदायों की वन संसाधनों पर निर्भरता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन 11 मार्च को हुआ, जिसमें रमेश कुमार पांडे, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), ने प्रतिभागियों से संवाद किया और भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।

मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नई दिल्ली में अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन: अरावली ग्रीन वॉल को मजबूत करना” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन” शीर्षक से संकला फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का विमोचन भी किया।

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना

भूपेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और भारत की UNCCD के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप शुरू की है।

इस पहल के तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि की पहचान की गई है, और 2.7 मिलियन हेक्टेयर में हरियाली कार्य प्रारंभ किया गया है, जो गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में फैला हुआ है। परियोजना का कार्य 29 अरावली जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल हों।

हरियाणा में संरक्षण और पुनर्वनीकरण

मंत्री ने बताया कि हरियाणा में नौरंगपुर से नूह तक लगभग 97 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि, जो अत्यधिक अपक्षयग्रस्त है, वनरोपण के लिए चिन्हित की गई है और इसे बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया गया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता के बाद अरावली की सुरक्षा और पुनर्वनीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और तब के हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सक्रिय समर्थन से संभव हुआ।

अरावली की पारिस्थितिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता

मंत्री ने कहा कि अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जिसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है। अरावली पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा चार टाइगर रिज़र्व्स और 18 संरक्षित क्षेत्रों द्वारा सुनिश्चित की जा रही है, जबकि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त हरित हस्तक्षेप भी किए जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत ने वन्यजीवन संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। देश में दुनिया की सात बड़ी बिल्लियों में से पांच प्रजातियाँ और विश्व की करीब 70% बाघ जनसंख्या पाई जाती है, जो लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया गया है और सरकार इस कार्य को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन और रिपोर्ट

सम्मेलन में नीति निर्माता, वन अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रैक्टिशनर और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग लेते हुए अरावली की पारिस्थितिक महत्ता और पुनर्स्थापन के मार्गों पर विचार-विमर्श किया।

विमोचित रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिक, समुदाय-केंद्रित और पैमाने पर लागू होने योग्य ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया है कि पुनर्स्थापन कार्य क्षेत्रीय पैमाने पर, डेटा-संचालित, समुदाय-केंद्रित और बहु-विषयक होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल अलग-थलग प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि क्षेत्र में व्यापक अपक्षय और पारिस्थितिक दबाव विद्यमान हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

उद्घाटन सत्र में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तनमय कुमार, महानिदेशक वनों सुशील कुमार अवस्थी, भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और संकला फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

यह सम्मेलन अरावली क्षेत्र की सुरक्षा, हरित पहल और पारिस्थितिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना की, रचनात्मकता और जन-भागीदारी को बताया प्रेरणादायी

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना करते हुए इसे रचनात्मकता, सततता और जन-भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर की जीवंत भावना और प्रकृति के प्रति उसके गहरे प्रेम को सुंदरता से प्रदर्शित करता है।

फ्लावर शो के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों के साथ अपने स्वरूप, भव्यता और कल्पनाशीलता में निरंतर विस्तार करता गया है और आज यह अहमदाबाद की सांस्कृतिक समृद्धि तथा पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बन चुका है।

गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“अहमदाबाद का फ्लावर शो हर किसी का मन मोह लेने वाला है! यह क्रिएटिविटी के साथ-साथ जन भागीदारी का अद्भुत उदाहरण है। इससे शहर की जीवंत भावना के साथ ही प्रकृति से उसका लगाव भी खूबसूरती से प्रदर्शित हो रहा है। यहां यह देखना भी उत्साह से भर देता है कि कैसे इस फ्लावर शो की भव्यता और कल्पनाशीलता हर साल निरंतर बढ़ती जा रही है। इस फ्लावर शो की कुछ आकर्षक तस्वीरें…”

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी अहमदाबाद फ्लावर शो की बढ़ती लोकप्रियता, रचनात्मक प्रस्तुति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को रेखांकित करती है।





राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हैदराबाद के राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा की

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 दिसंबर 2025) हैदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव के दूसरे संस्करण के उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा की।

उद्यान उत्सव आम जनता के लिए 3 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। अंतिम प्रवेश शाम 7:00 बजे तक होगा।

इस उत्सव में प्रवेश सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क रहेगा।

नौ दिवसीय यह कृषि एवं उद्यानिकी महोत्सव टिकाऊ कृषि, उद्यानिकी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह भारत की हरित परंपराओं, सतत प्रथाओं और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव होगा।

उत्सव में पुष्प एवं अपुष्प दोनों प्रकार के आकर्षण देखने को मिलेंगे, जिनमें उन्नत मौसमी फूलों की क्यारियाँ, सुसज्जित पुष्प स्थापना, सेल्फी पॉइंट और उन्नत उद्यान क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा आगंतुक कृषि एवं उद्यानिकी विषयक स्टॉल, लाइव प्रदर्शन, इको-क्राफ्ट कार्यशालाएँ और इंटरैक्टिव ज्ञान क्षेत्र भी देख सकेंगे।

NITI Aayog और HUL ने भारत में सर्कुलर इकॉनमी के लिए स्टार्टअप एक्सेलेरेशन प्रोग्राम लॉन्च किया

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निति आयोग की अटल इनोवेशन मिशन (AIM) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने भारत में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर का स्टार्टअप एक्सेलेरेशन प्रोग्राम लॉन्च किया

यह पहल, HUL के प्रमुख प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के अंतर्गत, अगले तीन वर्षों में 50 उच्च-क्षमता वाले सर्कुलर इकॉनमी स्टार्टअप्स को पहचानने और समर्थन देने के लिए आयोजित की जाएगी। यह प्रोग्राम विशेष रूप से उन स्टार्टअप्स को प्राथमिकता देगा जो प्लास्टिक सर्कुलैरिटी में नवाचार कर रहे हैं, जैसे कि प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, रीयूज़ और रिफिल मॉडल, और अगली पीढ़ी की पैकेजिंग सामग्री। प्लास्टिक के अलावा, यह प्रोग्राम उन स्टार्टअप्स का भी समर्थन करेगा जो टेक्सटाइल, ई-वेस्ट जैसी अन्य पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट स्ट्रीम में मटेरियल रिकवरी के समाधान विकसित कर रहे हैं।

प्रोग्राम में चयनित स्टार्टअप्स को बिजनेस लीडर्स, नीति विशेषज्ञों और निवेशकों से क्यूरेटेड मेंटरशिप मिलेगी। चयनित स्टार्टअप्स को अनुदान (ग्रांट) और पायलट अवसर भी प्रदान किए जा सकते हैं ताकि बाजार में उनके समाधानों का मूल्यांकन हो सके। यह साझेदारी AIM और NITI Aayog की नीति और नवाचार पोषण विशेषज्ञता, HUL के व्यापक उद्योग नेटवर्क और Xynteo की रणनीतिक विशेषज्ञता को जोड़कर भारत में सर्कुलर इकॉनमी के लिए तेजी से समाधान विकसित करने का अवसर देती है।

HUL के कार्यकारी निदेशक और चीफ पिपल, ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, BP बिद्दाप्पा ने कहा:

“NITI Aayog और HUL के बीच यह साझेदारी भारत में प्लास्टिक के लिए सर्कुलर इकॉनमी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमारे दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि जो भारत के लिए अच्छा है, वह HUL के लिए भी अच्छा है। सरकार की ताकत, उद्योग विशेषज्ञता और उद्यमिता की ऊर्जा को मिलाकर हम अगली पीढ़ी के सस्टेनेबिलिटी स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना और व्यावहारिक समाधानों को तेजी से स्केल करना चाहते हैं।”

AIM, NITI Aayog के मिशन डायरेक्टर डॉ. दीपक बगला ने कहा:

“यह सहयोग उस दृष्टि और मूलभूत विचार पर आधारित है जिसे माननीय प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया है, कि ‘हमारे लिए सतत विकास केवल नारा नहीं बल्कि एक प्रतिबद्धता है।’

उन स्टार्टअप्स को सशक्त बनाकर जो भारत में संसाधनों के उपयोग और मूल्यांकन को फिर से परिभाषित कर रहे हैं, हम ऐसे समाधान उत्पन्न कर रहे हैं जो कचरे को कम कर सकते हैं, रीसाइक्लिंग को नए रूप में पेश कर सकते हैं और कल की ग्रीन इंडस्ट्रीज़ का निर्माण कर सकते हैं।”

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के बारे में

HUL भारत की सबसे बड़ी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियों में से एक है, जिसके उत्पाद देश के लगभग 9 में से 10 घरों तक पहुँचते हैं। HUL हर दिन एक बेहतर भविष्य बनाने का प्रयास करता है।

अटल इनोवेशन मिशन (AIM), NITI Aayog के बारे में

AIM, NITI Aayog भारत सरकार की प्रमुख पहल है जो देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देती है। यह ATL, AIC, ACIC जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करता है।

PM-KUSUM योजना के तहत किसानों और FPOs को मिली बड़ी सफलता

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पीएम-कुसुम योजना एक मांग आधारित योजना है। इसकी क्षमता आवंटन उन राज्यों को प्राप्त मांग और प्रगति के आधार पर किया जाता है। योजना में किसान, किसानों के समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (PACS) आदि भाग ले सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना की स्थापना प्रगति (Annexure-I) के अनुसार है।

योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या, जिसमें FPO शामिल हैं, Annexure-II में दी गई है।

30 नवंबर 2025 तक PM-KUSUM योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की जा चुकी है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता राज्यों की मांग, SIAs द्वारा रिपोर्ट की गई प्रगति और योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की जाती है। अब तक राज्यों से प्राप्त मांग के अनुसार ₹7,106 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए मंत्रालय ने 17 जनवरी 2024 को व्यापक संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

दिशानिर्देशों के अनुसार लघु और सीमांत किसानों तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करता है। इसमें राज्यों के साथ समीक्षा बैठक और मार्गदर्शन भी शामिल हैं।

यह जानकारी संयुक्त राज्य मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्रिपाद यसो नाइक द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

Annexure-II: PM-KUSUM योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या (30.11.2025 तक)

  • S.No   राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कुल लाभार्थी (FPO सहित)
    Arunachal Pradesh     616
    Assam 151
    Chhattisgarh 9
    Goa 859
    Gujarat 2,28,504
    Haryana 1,80,582
    Himachal Pradesh 1,193
    Jammu & Kashmir 3,601
    Jharkhand 43,693
    Karnataka 60,387
    Kerala 13,489
    Ladakh 102
    Madhya Pradesh 37,689
    Maharashtra 11,21,416
    Manipur 150
    Meghalaya 98
    Mizoram 40
    Nagaland 140
    Odisha 10,113
    Punjab 17,592
    Rajasthan 2,35,924
    Tamil Nadu 4,950
    Tripura 7,061
    Uttar Pradesh 72,417
    Uttarakhand 1,663
    West Bengal 20
  • कुल लाभार्थी: 20,42,459


प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी पर देहरादून में सम्मेलन आयोजित

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रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग (DCPC) ने आज देहरादून में फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) के सहयोग से पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक्स सेक्टर में रीसाइक्लिंग, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी पर एक सम्मेलन आयोजित किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना और भारत के पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योग के लिए एक स्थायी और सर्कुलर रोडमैप विकसित करना था। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

मुख्य भाषण में, रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग की सचिव, निवेदिता शुक्ला वर्मा ने प्रमुख सरकारी पहलों को उजागर किया, जिनमें कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) फ्रेमवर्क, नेशनल मिशन फॉर ग्रीन इंडिया, BioE3 पॉलिसी, मजबूत एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) मानदंड, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम और नीति आयोग का वेस्ट टू वेल्थ प्रोग्राम शामिल हैं।

निवेदिता शुक्ला वर्मा ने क्लीनर टेक्नोलॉजीज को बढ़ावा देने और उद्योग–अकादमी संबंधों को मजबूत करने में CIPET और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम (IIP) जैसी संस्थाओं की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने सर्कुलर मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज के तेजी से अपनाने, नवाचार-आधारित रीसाइक्लिंग तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि सेक्टर का भविष्य हरित और प्रतिस्पर्धी बन सके।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए, FICCI पेट्रोकेमिकल्स एंड प्लास्टिक्स कमेटी के चेयर, प्रभ दास ने कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग मैकेनिज्म को मजबूत करने का महत्व बताया। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (AIPMA) के अध्यक्ष, अरविंद मेहता ने जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और भारत से प्लास्टिक निर्यात की बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित किया।

बीसीजी के पार्टनर,  नितेश शर्मा ने प्रभावी EPR कार्यान्वयन के माध्यम से भारत की वैश्विक सर्कुलैरिटी मानकों में प्रगति पर प्रकाश डाला, जबकि DCPC के संयुक्त सचिव (पेट्रोकेमिकल्स), दीपक मिश्रा ने नवाचार और उद्योग साझेदारियों के माध्यम से सर्कुलर पेट्रोकेमिकल मार्गों को तेज करने और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ाने के उपाय साझा किए।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में FICCI लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन, उत्तराखंड की चेयरपर्सन, डॉ. गीता खन्ना और उद्योग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

यह सम्मेलन नीति निर्माता, उद्योग के नेता और अकादमी के बीच सार्थक संवाद के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, और भारत के पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक सेक्टर के लिए स्थायी और सर्कुलर इकोनॉमी बनाने में सामूहिक जिम्मेदारी की पुष्टि करता है।

भारत ने CoP30 में जलवायु कार्रवाई और साझा जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई

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07 नवंबर 2025 को ब्राजील के बेलें शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के 30वें पक्षकार सम्मेलन (CoP30) के नेताओं के शिखर सम्मेलन में भारत के राजदूत दिनेश भाटिया ने भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य (National Statement) प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की जलवायु कार्रवाई के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया, जो समानता (Equity), राष्ट्रीय परिस्थितियों (National Circumstances) और सामान्य किंतु विभेदित दायित्वों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांतों पर आधारित है।

भारत ने ब्राजील को CoP30 की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया और पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ तथा रियो सम्मेलन की 33वीं वर्षगांठ को याद किया। भारत के वक्तव्य में कहा गया कि यह अवसर वैश्विक ऊष्मीकरण की चुनौती पर वैश्विक प्रतिक्रिया की समीक्षा करने और रियो सम्मेलन की उस विरासत का उत्सव मनाने का है, जिसने समानता और CBDR-RC के सिद्धांतों को अपनाकर अंतरराष्ट्रीय जलवायु ढांचे की नींव रखी, जिसमें पेरिस समझौता भी शामिल है।

भारत ने ब्राजील की नई पहल Tropical Forests Forever Facility (TFFF) की सराहना की और इसे उष्णकटिबंधीय वनों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक और सतत कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। भारत ने इस पहल में पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में शामिल होने की घोषणा की।

भारत का सतत विकास और जलवायु नेतृत्व

भारत के वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाए गए कम-कार्बन विकास मार्ग (Low-Carbon Development Path) को रेखांकित किया गया।

  • 2005 से 2020 के बीच भारत ने GDP की उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) में 36% की कमी हासिल की।

  • भारत की स्थापित विद्युत क्षमता में अब 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों (Non-Fossil Sources) से आता है, जिससे भारत ने अपने संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य को 5 वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया।

वक्तव्य में यह भी बताया गया कि भारत ने वन और वृक्ष आवरण में निरंतर वृद्धि की है, जिससे 2005 से 2021 के बीच 2.29 अरब टन CO₂ समकक्ष का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया गया है। भारत अब लगभग 200 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक बन गया है।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से अब 120 से अधिक देश सस्ती सौर ऊर्जा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

साझा जिम्मेदारी और वैश्विक जलवायु न्याय

भारत ने कहा कि पेरिस समझौते के दस वर्ष बाद भी कई देशों के NDC लक्ष्य अपर्याप्त हैं। विकासशील देश निर्णायक जलवायु कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि वैश्विक महत्वाकांक्षा अभी भी अपेक्षाओं से कम है।

भारत ने जोर दिया कि कार्बन बजट की तीव्र कमी को देखते हुए विकसित देशों को अपने उत्सर्जन में तेजी से कमी लानी चाहिए और वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के लिए पूर्वानुमेय एवं पर्याप्त समर्थन प्रदान करना चाहिए।

भारत ने कहा कि न्यायसंगत, सस्ती और पूर्वानुमेय जलवायु वित्त (Climate Finance), वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति का मूल आधार है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह अन्य देशों के साथ मिलकर सततता, समावेशिता और समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाधान लागू करने के लिए तैयार है।

बहुपक्षवाद और सहयोग की पुनर्पुष्टि

भारत ने बहुपक्षवाद (Multilateralism) और पेरिस समझौते की संरचना को सुरक्षित रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी देशों से आह्वान किया कि आने वाला दशक केवल लक्ष्यों का नहीं, बल्कि क्रियान्वयन, लचीलापन और साझा जिम्मेदारी का दशक होना चाहिए — आपसी विश्वास और निष्पक्षता के आधार पर।


एनएचपीसी की स्वर्ण जयंती पर मनोहर लाल ने जारी किया 50 रुपये का स्मारक सिक्का और ‘छोटा भीम और बड़ा बांध’ कॉमिक बुक

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नई दिल्ली-केंद्रीय विद्युत, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज नई दिल्ली में एनएचपीसी (NHPC) के स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 50 रुपये मूल्य का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) उत्तम लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एनएचपीसी लिमिटेड, जो विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत भारत की प्रमुख हाइड्रो पावर नवरत्न कंपनी है, 7 नवम्बर 2025 को अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर रही है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनएचपीसी की 50 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पर बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी यह स्मारक सिक्का एनएचपीसी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में रणनीतिक भूमिका और योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह सिक्का संगठन की सहनशीलता, नवाचार और राष्ट्र सेवा की गौरवशाली यात्रा को सम्मानित करता है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने एनएचपीसी की विशेष प्रकाशन — कॉमिक बुक “छोटा भीम और बड़ा बांध” का भी विमोचन किया। ‘छोटा भीम’ और उसके साथियों पर आधारित यह कॉमिक बच्चों और आम जनता को जलविद्युत की महत्ता और लाभ के बारे में सरल और रोचक ढंग से जानकारी देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

एनएचपीसी के सीएमडी भूपेन्द्र गुप्ता ने इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्री का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी यह ₹50 का स्मारक सिक्का एनएचपीसी की स्वर्ण जयंती पर उसके गौरवशाली योगदान की सराहना करता है और संगठन के लिए आने वाले वर्षों में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने की प्रेरणा देगा।

पिछले पाँच दशकों में एनएचपीसी ने देश के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक जलविद्युत परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है। साथ ही कंपनी ने सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार करते हुए स्वयं को 100% हरित ऊर्जा कंपनी के रूप में स्थापित किया है।

वर्तमान में एनएचपीसी की 30 पावर स्टेशनों से 8333 मेगावाट की स्थापित क्षमता है, जबकि 14 परियोजनाएँ 9704 मेगावाट से अधिक क्षमता के साथ निर्माणाधीन हैं। एनएचपीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और देश को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने में अहम भूमिका निभा रही है।


जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और सतत विकास पर एशियन कॉन्फ्रेंस में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा – ‘भारत पर्यावरणीय स्थिरता का वैश्विक अग्रदूत’

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एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन ज्योग्राफी (ACG 2025) में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का संबोधन — जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और सतत संसाधन प्रबंधन पर गहन चर्चा

नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में आयोजित एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन ज्योग्राफी (ACG 2025) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन समयोचित और अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तीन परस्पर जुड़े वैश्विक मुद्दों—जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और सतत संसाधन प्रबंधन—पर केंद्रित है, जो हमारे साझा भविष्य की स्थिरता को निर्धारित करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता को साथ लेकर चलने वाला वैश्विक पथप्रदर्शक बन गया है। भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना और “लाइफ–लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट” आंदोलन के माध्यम से प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन शैली को बढ़ावा देना है।

डॉ. सिंह ने जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा इस प्रतिष्ठित सम्मेलन के पहले भारतीय संस्करण की मेजबानी के लिए कुलपति प्रो. मजहर अली और आयोजन टीम की सराहना की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्रों को एक साझा मंच पर लाकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि एशिया वर्तमान में वैश्विक परिवर्तन का केंद्र है, जो तीव्र औद्योगिक और आर्थिक प्रगति से तो आगे बढ़ रहा है, लेकिन यह क्षेत्र विश्व के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का आधे से अधिक योगदान देता है। आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्सर्जन की वर्तमान गति जारी रही, तो एशिया को अत्यधिक गर्मी, बाढ़ और जल संकट जैसी चरम मौसमी घटनाओं का सामना करना पड़ेगा।

डॉ. सिंह ने कहा कि दक्षिण एशिया के लगभग 75 करोड़ लोग गंभीर जलवायु खतरों से प्रभावित हैं—हिमालयी ग्लेशियर पिघलने से लेकर तटीय बाढ़ और शहरी गर्मी द्वीपों तक। उन्होंने बताया कि दिल्ली, ढाका, बैंकॉक और मनीला 2050 तक सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील महानगरों में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि शहरीकरण विकास का प्रतीक होने के साथ-साथ चुनौती भी बन गया है, क्योंकि अनियोजित विस्तार, बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण, भूजल का क्षय और प्रदूषण के बढ़ते स्तर गंभीर चिंता का विषय हैं।

डॉ. सिंह ने अपशिष्ट-से-धन (Waste-to-Wealth) तकनीकों और परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को भविष्य की कुंजी बताया, जहां ‘कचरे’ की अवधारणा ही समाप्त हो जाएगी। उन्होंने देहरादून में प्रयुक्त खाद्य तेल पुनर्चक्रण जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समुदाय स्तर पर आय सृजन भी होता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है — “जब तक यह सामाजिक आंदोलन नहीं बनता, तब तक कोई भी नीति या संगोष्ठी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकती।”

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत का सतत विकास के प्रति संकल्प विभिन्न सरकारी पहलों में परिलक्षित होता है — जैसे राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना और स्वच्छ भारत अभियान। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के “लाइफ” अभियान की भी प्रशंसा की, जिसने जिम्मेदार उपभोग और पर्यावरणीय जीवनशैली को जनांदोलन का रूप दिया।

उन्होंने कहा कि “भारत की ग्रीन हाइड्रोजन, बायो-इकोनॉमी, परिपत्र अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंडिया जैसी पहलें आर्थिक विकास और पारिस्थितिक संतुलन को साथ लेकर चलने का संकल्प दर्शाती हैं।”

डॉ. सिंह ने इस अवसर पर वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, और शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने एनईपी 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति छात्रों को अंतःविषय अध्ययन का अवसर देती है, जिससे वे भूगोल जैसे विषयों के माध्यम से पर्यावरणीय समझ विकसित कर सकें।

उन्होंने कहा कि “जलवायु कार्रवाई की भाषा युवाओं की भाषा होनी चाहिए — डिजिटल, रचनात्मक और प्रेरणादायक।” उन्होंने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में भी अग्रणी है — अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) जैसी पहलें इसका प्रमाण हैं।

सम्मेलन के अंत में उन्होंने कहा, “जलवायु केवल नीति-निर्माताओं या वैज्ञानिकों की चिंता का विषय नहीं है; यह हर नागरिक का व्यक्तिगत विषय है—हमारे स्वास्थ्य, हमारे कल्याण और हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए।”


पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत नई दिल्ली स्थित AQCS में स्वच्छता अभियान आयोजित

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मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 29 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज (AQCS) में स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत एक स्वच्छता अभियान आयोजित किया। इस अवसर पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव  नरेश पाल गंगवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रो. बघेल ने AQCS परिसर का निरीक्षण किया और उसकी स्वच्छता, सुव्यवस्थित रखरखाव तथा बेहतर प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि AQCS भारत का "स्वास्थ्यद्वार" है, जो पशुओं के आयात के दौरान वैज्ञानिक क्वारंटाइन और स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करता है।

स्वच्छता अभियान के दौरान AQCS के अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिसर की सफाई की, पुराने और अनुपयोगी सामानों का निपटान किया और कार्यस्थलों को पुनः व्यवस्थित किया।
स्पेशल कैंपेन 5.0 के अंतर्गत विभाग ने लंबित मामलों के निपटान, फाइल समीक्षा और स्वच्छता गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। पुराने और बेकार सामग्रियों की नीलामी से विभाग ने ₹5,54,753 का राजस्व अर्जित किया है।

नीचे विभिन्न मानकों पर विभाग की उपलब्धियां दी गई हैं:

  • पैरामीटर
  •   लक्ष्य                 
  • उपलब्धि
  • सांसद संदर्भ
  •    15
  • 11
  • संसदीय आश्वासन
  •     5
  • 3
  • राज्य सरकार संदर्भ
  •     8
  • 8
  • जन शिकायतें
  •   214
  • 214
  • पीएमओ संदर्भ
  •     3
  • 3
  • जन शिकायत अपीलें
  •    35
  • 27
  • नियम / प्रक्रियाओं में सरलीकरण
  •    1
  • 1
  • भौतिक फाइल समीक्षा
  • 24,645
  • 24,645
  • ई-फाइल समीक्षा
  •  680
  • 562
  • स्वच्छता स्थल
  •  221
  • 221

अभियान के दौरान #एक_पेड़_माँ_के_नाम पहल के तहत वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए एक पौधा लगाया गया।

अपने संबोधन में प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने वैश्विक तापमान वृद्धि की चुनौती और पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता को भी सुदृढ़ करती हैं।

भारत वैश्विक वन क्षेत्र में 9वें स्थान पर पहुंचा: पर्यावरण संरक्षण में बड़ी उपलब्धि

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भारत ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा बाली में जारी ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट (GFRA) 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब कुल वन क्षेत्र के मामले में दुनिया में 9वें स्थान पर पहुंच गया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

पिछले मूल्यांकन में भारत 10वें स्थान पर था। इसके अलावा, भारत ने वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भी दुनिया में अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है, जो सतत वन प्रबंधन और पारिस्थितिक संतुलन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह उल्लेखनीय प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करती है, जो वन संरक्षण, वृक्षारोपण और समुदाय आधारित पर्यावरणीय कार्रवाई पर केंद्रित हैं।

प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और पर्यावरण चेतना पर उनके लगातार जोर ने देशभर के लोगों को वृक्षारोपण और संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया है।

यह बढ़ती जनभागीदारी हरित और सतत भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर रही है। मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि मोदी सरकार की योजनाओं, नीतियों, वन संरक्षण और विस्तार के प्रयासों तथा राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रमों का परिणाम है।

NCL विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता, स्क्रैप पुनर्चक्रण और सतत पहल में सक्रिय भूमिका

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प्रधानमंत्री के आह्वान पर, कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में, सिंगरौली आधारित कोल इंडिया कंपनी की शाखा नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) विशेष अभियान 5.0 में सक्रिय रूप से भाग ले रही है इस अभियान में सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन, स्क्रैप निपटान और सतत पहल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

“वेस्ट टू ब्यूटी” विजन के तहत, खनन कार्यों के दौरान उत्पन्न लोहे के स्क्रैप से राष्ट्रीय पक्षी मोर और बारसिंगा की भव्य मूर्तियाँ बनाई जा रही हैं। यह कला कार्य NCL की पर्यावरण संरक्षण और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

पर्यावरण अनुकूल पहलें:

  • NCL ने अपने प्रोजेक्ट्स में पाँच बायो-टॉयलेट्स स्थापित किए हैं ताकि कर्मचारियों और आस-पास की समुदायों के लिए स्वच्छ और सतत शौचालय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।

  • ये बायो-टॉयलेट पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखते हुए स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों का समर्थन करते हैं।

सामुदायिक सहभागिता:

  • 17 अक्टूबर को केंद्रीय विद्यालय, सिंगरौली में “Waste to Art” प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने स्क्रैप सामग्री के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग पर रचनात्मक विचार प्रस्तुत किए।

  • इस प्रतियोगिता ने सतत कचरा प्रबंधन प्रथाओं में व्यापक भागीदारी और जागरूकता को प्रोत्साहित किया।

NCL विशेष अभियान 5.0:

  • सफाई अभियानों, जन सहभागिता कार्यक्रमों और कुशल रिकॉर्ड प्रबंधन के माध्यम से जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा दे रहा है।

  • कंपनी स्वच्छता, प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जागरूकता में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सरकार के स्वच्छ और हरित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

अभियान के लक्ष्य:

  • 75 स्थानों की सफाई

  • 85,000 वर्ग फीट क्षेत्र में स्वच्छता

  • 2,500 मीट्रिक टन स्क्रैप का निपटान

  • 350 भौतिक फाइलों की समीक्षा

  • 9,000 ई-फाइलों का परीक्षण

NCL की यह पहल न केवल संगठन के भीतर बल्कि समुदाय और पर्यावरण के प्रति सतत जागरूकता और जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

न्याय विभाग ने स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत ई-वेस्ट निपटान की पहल शुरू की

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दिल्ली- कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत आज पुराने और अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों — जैसे कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, फोटोकॉपी मशीन और अन्य आईटी हार्डवेयर — की पहचान और सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू की।

यह पहल जिम्मेदार ई-वेस्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय स्थिरता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी प्रबंधन के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्वच्छता की स्थिति का निरीक्षण किया और स्टोर रूम की भी समीक्षा की, जहां से पहचाने गए ई-वेस्ट को GeM पोर्टल के माध्यम से संबंधित नियमों का पालन करते हुए निपटाया जाएगा।

स्पेशल कैंपेन 5.0 का यह क्रियान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक चल रहा है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों — जैसे सांसदों के संदर्भ, प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रालयों के बीच पत्राचार, लोक शिकायतें और संसदीय आश्वासन — का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करना है।

नैतिकता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण – विकास के तीन स्तंभ: गडकरी

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज नई दिल्ली में आयोजित पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के 120वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए सभी हितधारकों का भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2027 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करने और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय विज़न को दोहराया।

गडकरी ने कहा कि भौतिक विकास के साथ-साथ नैतिकता (Ethics), अर्थव्यवस्था (Economy) और पर्यावरण (Ecology/Environment) – ये तीन स्तंभ राष्ट्र के समग्र विकास की दिशा तय करेंगे। उन्होंने बताया कि सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है और सभी क्षेत्रों में एकीकृत सोच, समन्वय और सहयोग की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग विश्व में सातवें स्थान पर थी, जिसका मूल्य लगभग ₹14 लाख करोड़ था। आज भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाज़ार बन गया है, जिसकी उद्योगिक क्षमता ₹22 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। गडकरी ने विश्वास जताया कि एथेनॉल, मेथेनॉल, बायो-डीजल, एलएनजी, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन ईंधन जैसे वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने और अनुसंधान व नवाचार के बल पर भारत अगले पाँच वर्षों में दुनिया का अग्रणी ऑटोमोबाइल विनिर्माण देश बन सकता है।

उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग से भारत को प्रतिवर्ष ₹22 लाख करोड़ के कच्चे तेल के आयात में कमी लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि एथेनॉल उत्पादन नीति में सुधार से किसानों की आय बढ़ी है—खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को ₹45,000 करोड़ का अतिरिक्त लाभ हुआ है। इससे देश में रोज़गार, उत्पादन और क्रय शक्ति में वृद्धि होगी।

गडकरी ने हरियाणा के सोनीपत में इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग की शुरुआत का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली से चलने वाले वाहनों की लागत डीज़ल की तुलना में काफी कम है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार के चलते भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 16% से घटकर अब एकल अंकों में, लगभग 9% तक आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता ही भारत की प्रगति के आधार हैं। “कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती और कोई भी व्यक्ति व्यर्थ नहीं होता,” इस विचार को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि मथुरा में सीवेज स्लज से बायो-एनर्जी और लेगेसी वेस्ट से सड़क निर्माण जैसे प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। अब तक लगभग 80 लाख टन कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा चुका है।

गडकरी ने कहा कि भारत को कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में संतुलित विकास की आवश्यकता है। उन्होंने उद्योग जगत से कृषि और सहायक क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने का आग्रह किया ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और पलायन कम हो।

उन्होंने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो रोज़गार, राजस्व और जीडीपी वृद्धि में बड़ा योगदान देता है। हर ₹100 के राष्ट्रीय राजमार्ग निवेश से ₹321 का आर्थिक योगदान होता है।

वित्तीय मॉडलों की चर्चा करते हुए गडकरी ने कहा कि इनविट (InvIT) और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के माध्यम से मंत्रालय ने पूंजी बाज़ार से सफलतापूर्वक धन जुटाया है। उन्होंने बताया कि पहला InvIT बांड इश्यू कुछ ही घंटों में सात गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धन के विकेंद्रीकरण से छोटे निवेशक और श्रमिक समृद्ध होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।

उन्होंने बताया कि देशभर में 25 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, ज़ोजिला टनल, दिल्ली-कटरा-अमृतसर एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट तेज़ी से निर्माणाधीन हैं, जो शहरों और बंदरगाहों को जोड़ेंगे। साथ ही बौद्ध सर्किट, केदारनाथ रोपवे जैसे प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन और राजस्व वृद्धि को बढ़ावा देंगे।

गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सुरक्षित, सुविधाजनक, टिकाऊ और आर्थिक रूप से समृद्ध अवसंरचना का निर्माण है, जो रोज़गार सृजन, निर्यात वृद्धि और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करेगी।

अंत में, मंत्री ने PHDCCI बिज़नेस प्रैक्टिसेज़ एंड अवॉर्ड्स 2025 वितरित किए, जिनके माध्यम से उद्योग जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को सम्मानित किया गया।


विशेष लेख :मिलाराबाद के किसान अंतर्यामी ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज में मिसाल पेश की

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हम गाय को नहीं, बल्कि गाय हमें पालती है: किसान अंतर्यामी प्रधान 

रायपुर-महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के ग्राम मिलाराबाद के किसान शिक्षित किसान अंतर्यामी प्रधान और उनके पुत्र लक्ष्मी नारायण प्रधान ने पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज के लिए मिसाल पेश की है। अंतर्यामी प्रधान बी.एससी. तक और लक्ष्मी नारायण प्रधान बैचलर इन फिजियोथेरेपी तथा बीजेएमसी की पढ़ाई की है। वे लगभग 29 एकड़ भूमि में ऑर्गेनिक खेती करते हुए इन्होंने यह साबित किया है कि कम लागत और स्वस्थ तरीके से भी किसान अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। 

गौरतलब है कि रासायनिक खेती के इस दौर में जहां किसान अधिक उपज की लालच में भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं। वहीं प्रधान परिवार ने तकरीबन सत्तर के दशक से रासायनिक खाद और जहरीली दवाइयों का उपयोग बंद कर ऑर्गेनिक खेती का आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। कम लागत, स्वस्थ उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त धान की किस्में उगाकर इन्होंने यह साबित किया है कि ऑर्गेनिक खेती ही भविष्य की सच्ची जरूरत है। आज इनके पास 29 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती चल रही है, जिनमें से 15 एकड़ का एपीईडीए (APEDA) से रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है।

विविध फसलें और खास किस्म का धान

किसान अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि उनके खेती में कई उन्नत किस्म की फसलें लगाई गई हैं जिनमें धान में जवाफुल, कलानमक नरेंद्र 01, शाही नमक, कालीमुच, चिनौर कालाजीरा, गंगा बालू, दुबराज और सुपर फाइन जैसे उन्नत किस्म के धान का उत्पादन कर रहें है। इससे अच्छी आमदनी मिल रही है। वहीं यह उत्पाद स्वास्थ्य वर्धक भी है। सुपरफाइन किस्म की धान का कीमत लगभग 75 रूपए से शुरू है। काला नमक नरेंद्र कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला चावल होने के कारण इसका कीमत 250 रूपए किलो के लगभग है। अवाम धान बीज 350 रूपए किलो तक बिकता है। उन्होंने बताया कि वे धान फसलों के साथ-साथ अपने खेतों में शरबती गेहूं C-306 किस्म के और अरहर का भी फसल लेते हैै।इसके साथ ही कोयंबतूर 86032 किस्म के गन्ना का फसल लेते है जो गुड़ बनाने में काफी अच्छा है। इसकी कीमत 120 रूपए किलो तक है। वे अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन मौसम में मूंगफली का फसल लेते है। चार एकड़ में टॉप-10 वैरायटी के आम का पेड़ लगाया हुआ है। जिससे प्रतिवर्ष  25-30 क्विंटल आम का उत्पादन होता है। नारियल  के 160 पौधे लगाए है,  जिनमें फल आना शुरू हो रहा है।

जैविक खेती का आधार - गाय

जैविक खेती कर रहे किसान प्रधान परिवार ने बताया कि उनके पास 60 देसी नस्ल की गायें हैं, जिनमें गिर नस्ल प्रमुख है। इनके गोबर और गोमूत्र से ही खाद, बीजामृत, जीवामृत और ‘ब्रह्मास्त्र’ जैविक दवा बनाई जाती है। किसान अंतर्यामी प्रधान का कहना है - “हम गाय को नहीं पालते, बल्कि गाय हमें और हमारे पूरे परिवार को पालती है।”

प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और (अरंडी) के पत्ते है ब्रह्मास्त्र

अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और आक (अरंडी) के पत्ते ब्रम्हास्त्र के रूप में काम करते है। इन पेड़ों के पत्तों की पेस्ट बनाकर गोमूत्र के साथ मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। इसे फसलों पर छिड़कने से कीट और रोगों से बचाव होता है। किसान अंतर्यामी ने बताया कि इसके अलावा गाय के गोबर से गैस संयंत्र से रसोई की जरूरत पूरी होती है। उन्हें राज्य शासन सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत बीज और तकनीकी मदद मिलती है।


स्वच्छता ही सेवा 2025 : कोयला मंत्रालय का ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण संकल्प

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स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान के तहत कोयला मंत्रालय ने आज इंद्रप्रस्थ पार्क, सराय काले खां में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ थीम पर एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। प्रधानमंत्री द्वारा मातृत्व और प्रकृति को समर्पित इस पहल से प्रेरित होकर, इस कार्यक्रम ने मंत्रालय की पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाया। राष्ट्रीय राजधानी के बीच स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल का चयन कर मंत्रालय का उद्देश्य नागरिकों और संस्थानों को हरित आवरण बढ़ाने और पारिस्थितिकीय कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करना था।

इस वृक्षारोपण अभियान में कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बराड़ ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। उनके साथ संयुक्त सचिव संजीव कुमार कासी, संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार असीम कुमार मोदी, उप महानिदेशक डॉ. चेतना शुक्ला तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय भागीदारी ने यह दर्शाया कि सरकार केवल नीतिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है। इस अवसर पर छायादार, फूलदार और फलदार पौधों सहित विविध प्रकार की प्रजातियों का रोपण किया गया, जिससे शहरी परिदृश्य में पारिस्थितिक संतुलन को नया आयाम मिलेगा।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ थीम मातृत्व और प्रकृति को समर्पित एक भावपूर्ण संदेश है, जो हर व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करता है। यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को प्रकट करती है, बल्कि स्वच्छता, हरियाली और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के मूल्यों को भी मजबूत बनाती है। यह व्यक्तिगत और भावनात्मक जुड़ाव प्रतिभागियों को पेड़ों की दीर्घकालिक देखभाल के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे वृक्षों की आयु और प्रभाव बढ़ सकेगा।

स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत, कोयला मंत्रालय ने 25 सितंबर 2025 को ‘श्रमदान – एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ का भी आयोजन किया। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बराड़, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों ने शास्त्री भवन परिसर के भीतर और आसपास सफाई अभियान चलाया। यह मंत्रालय की स्वच्छता ही सेवा के लक्ष्यों को हासिल करने की गंभीर और समर्पित भावना को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से कोयला मंत्रालय ने यह सशक्त संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतिगत उद्देश्य नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। वृक्षारोपण जैसी छोटी लेकिन प्रभावशाली पहलें भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और सतत भारत बनाने के संकल्प को मजबूत करती हैं।


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