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चरौदा में सीआरपीएफ जवानों और बच्चों ने मिलकर रोपे 250 पौधे, हरियाली बचाओ" का दिया संदेश

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आरंग- पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अजय कुमार सिंह उप महानिरीक्षक ग्रुप केंद्र भिलाई, रायपुर के दिशा-निर्देश में शुक्रवार को ग्रुप केंद्र भिलाई के सीआरपीएफ जवानों ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में वृहत् पौधरोपण अभियान चलाया। इस अभियान में जवानों के साथ स्कूली बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।इस दौरान स्कूल परिसर में फलदार, छायादार और औषधीय गुणों वाले कुल 250 पौधे रोपित किए गए। जवानों ने बच्चों को पौधा लगाने का सही तरीका सिखाया और उनकी देखभाल के महत्व के बारे में बताया। रोपण के बाद सभी बच्चों को पौधों की नियमित देखभाल की शपथ भी दिलाई गई।

इस अवसर पर सहायक कमांडेंट भरत भोई ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि "पेड़ ही जीवन हैं। बढ़ते प्रदूषण और गर्मी से बचने के लिए हर नागरिक को साल में कम से कम दो पौधे अवश्य लगाने चाहिए।" उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनें और अपने घर-आंगन में भी पौधे लगाएं।ग्राम के सरपंच देवशरण धीवर और एसएमसी अध्यक्ष चेतन पैगम्बर ने सीआरपीएफ की इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों द्वारा बच्चों के साथ मिलकर किया गया यह कार्य प्रेरणादायक है और इससे गांव में हरियाली बढ़ेगी।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। पौधरोपण अभियान में संस्था प्रधान, सीआरपीएफ जवानों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में बच्चों व ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर पर्यावरण बचाने और धरती को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया। वहीं विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश शर्मा ने चरौदा में बच्चों व शिक्षकों द्वारा लगातार पौधरोपण करने की पहल की सराहना की है।




मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

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'पीपल फॉर पीपुल' अभियान के तहत 15 एकड़ में लगाए गए 2500 से अधिक पीपल के पौधे

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, पिछले दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधों का हुआ रोपण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।

NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन, स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने पर युवाओं को दिया फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने रविवार (2 अगस्त 2026) को NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा देशभक्ति, अनुशासन, एकता और राष्ट्रीय सेवा जैसे NCC के मूल्यों को सुदृढ़ करना था।

साइक्लोथॉन को केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम, दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस तथा एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के तहत 79 एनसीसी कैडेटों ने स्वतंत्रता के 79 वर्षों का प्रतीकात्मक संदेश देते हुए 79 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी की। साइक्लोथॉन की शुरुआत मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम से हुई और राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए यात्रा का समापन भी वहीं हुआ।

"स्वच्छ भारत, हरित भारत, फिट इंडिया" थीम पर आयोजित इस साइक्लोथॉन के माध्यम से टीबी मुक्त भारत, स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम और हर घर तिरंगा जैसे राष्ट्रीय अभियानों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। साथ ही लोगों को पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ परिवहन के रूप में साइकिल अपनाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण मंच भी बना। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और सामुदायिक सेवा की भावना अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत बनने का आह्वान किया गया।

NCC साइक्लोथॉन 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वस्थ, हरित और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार के साथ की समीक्षा बैठक, सर्दियों से पहले तेज़ कार्रवाई के निर्देश

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में हरियाणा के पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम से पहले उपलब्ध समय का पूरा उपयोग मिशन मोड में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने समयबद्ध कार्रवाई, बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया।

सड़कों की धूल और सफाई पर विशेष ध्यान

भूपेंद्र यादव ने सड़कों के दोनों ओर हरियाली विकसित करने, गड्ढों की शीघ्र मरम्मत, फुटपाथ निर्माण और नियमित गहरी सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सितंबर तक सभी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) की तैनाती पूरी कर उन्हें जियो-टैग किया जाए, ताकि सफाई कार्य की रियल-टाइम निगरानी हो सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने एनसीआर के हरियाणा नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सात नगर निगम क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की तेज़ स्थापना के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की।

पुराने वाहनों पर सख्ती

बैठक में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) वाहनों को एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए एनओसी प्रक्रिया तेज़ करने और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

'No PUCC, No Fuel' अभियान होगा सख्त

मंत्री ने सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि 'No PUCC, No Fuel' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों की पहचान कर त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए।

उद्योगों और कचरा प्रबंधन पर भी जोर

औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCDs) जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए। निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरे के प्रबंधन, पुराने कचरे के निस्तारण और नगर निगम के ठोस कचरे के 100% संग्रहण पर भी जोर दिया गया।

पराली जलाने पर रोक के लिए विशेष योजना

भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से उद्योगों की फसल अवशेष उपयोग क्षमता का सर्वे कराने और मांग-आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने को भी कहा।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "वायु प्रदूषण की चुनौती का समाधान तभी संभव है, जब सरकार और समाज मिलकर 'Whole of Government' और 'Whole of Society' दृष्टिकोण अपनाएं।" वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

विशेष लेख-सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम

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जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

रक्षाबंधन पर बिखरेगा हरियाली का संदेश

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रायगढ़ में स्व-सहायता समूह की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी बीज राखियां

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार की थीम पर बिहान की अभिनव पहल

रायपुर- रक्षाबंधन पर केवल भाई-बहन का प्रेम ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। पेड़ों को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा का वचन देना और मिट्टी से बने इको-फ्रेंडली पौधे वाली राखियों का इस्तेमाल पर्यावरण को हरा-भरा रखने में मदद करता है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज

इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

गांव-गांव में दिख रहा उत्साह

जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।

सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।

जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।


'एक पेड़ मां के नाम' अभियान 3.0, विधानसभा परिसर में सीएम विष्णु देव साय और डॉ. रमन सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा

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लोकतंत्र के मंदिर से पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का सशक्त संदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।

कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' अभियान का शुभारंभ किया

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' के तहत आयोजित वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अहमदाबाद में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज केवल गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में ही नागरिकों द्वारा एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त अहमदाबाद शहर में 50 लाख पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य हरित पर्यावरण का निर्माण करना, स्वच्छ वायु एवं शुद्ध जल सुनिश्चित करना तथा भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि 1.25 करोड़ पौधे लगाने का अभियान अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने बहुत कम समय में जन आंदोलन का रूप ले लिया है और पूरा देश उनके "People, Planet with Progress" के मंत्र को आत्मसात कर रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पिछले सात वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) ने देशभर में सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली में भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि लगाए जा रहे पौधे भारत की पारिस्थितिकी के अनुरूप देशी प्रजातियों के हैं और इनमें अनेक वृक्षों की आयु 100 वर्ष से अधिक होती है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक रूप से अहमदाबाद को एक हरित शहर में परिवर्तित करना है।

शाह ने बताया कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में पहले 12 ऑक्सीजन पार्क थे, जबकि आज 61 नए ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया गया है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 73 हो गई है। वहीं अहमदाबाद नगर निगम ने एक ही दिन में 101 ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया है।

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने वैज्ञानिक पहल के तहत एक विशेष वाहन सेवा शुरू की है, जिसके माध्यम से वृक्षारोपण के इच्छुक नागरिकों के घर तक पौधे पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह वृक्षारोपण अभियान अहमदाबाद का तापमान अन्य शहरों की तुलना में कम से कम 5 प्रतिशत तक घटाने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सबसे प्रभावी पहल है। उन्होंने सभी नागरिकों से एक-एक पौधा लगाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ओजोन परत की रक्षा में योगदान देने का आह्वान किया।

शाह ने कहा कि साणंद, गांधीनगर, कलोल और अहमदाबाद शहर ने मिलकर गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को 11.23 प्रतिशत तक बढ़ाया है और वर्ष 2029 तक इसे 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।

उन्होंने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 20 प्रतिशत हरित क्षेत्र का लक्ष्य प्राप्त करना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक सोलर रूफटॉप स्थापना गांधीनगर में हुई है। उन्होंने अहमदाबाद और गांधीनगर के नागरिकों से अपील की कि कोई भी घर, अपार्टमेंट या छत सोलर रूफटॉप से वंचित न रहे।

शाह ने बताया कि आज 22 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा सात परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। उन्होंने कहा कि 325 नई एएमटीएस और बीआरटीएस बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और आज के बाद अहमदाबाद में प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी बस नहीं बचेगी।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में अब तक ₹28,492 करोड़ की विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें घाटलोडिया में ₹7,030 करोड़, वेजलपुर में ₹2,670 करोड़, साबरमती में ₹2,149 करोड़, नारणपुरा में ₹3,262 करोड़, साणंद में ₹2,800 करोड़, गांधीनगर उत्तर में ₹4,300 करोड़ तथा कलोल में ₹2,003 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने अहमदाबाद शहर एवं गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि वे अपनी आवासीय सोसायटियों के किसी भी कोने को वृक्षों से वंचित न रहने दें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को अधिक हरित और रहने योग्य बनाना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रत्येक घर में सोलर रूफटॉप स्थापित करने का भी आह्वान किया।

आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा,छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

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ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना

पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी

यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है।

रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता

वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है।

जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी।

वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

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वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

250 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, बल्क वेस्ट जेनरेटरों की जवाबदेही और जीरो वेस्ट स्टेट के लक्ष्य पर दिया गया जोर

रायपुर- छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

क्षेत्रीय अधिकारी पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में राज्य सलाहकार मोनिका सिंह एवं पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: न्याय विभाग की स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत की पहल

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न्याय विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पखवाड़े के दौरान 02.04.2026 को सभी के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिससे कर्मचारियों को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।

09.04.2026 को विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और स्वच्छ जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

10.04.2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात नीरज वर्मा, सचिव (न्याय) के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को अपने आसपास भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

इसी दिन अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्वच्छता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

13.04.2026 को विभाग द्वारा iGOT Mission LiFE (Lifestyle for Environment) पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में सतत आदतों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस सत्र में ‘यूज़ एंड डिस्पोज़’ अर्थव्यवस्था के स्थान पर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को अपनाने और ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यस्थलों और समाज में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


न्याय विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी स्वच्छता एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल, अभियान और गतिविधियाँ जारी रखेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया भारत का नया जलवायु लक्ष्य (NDC 2031-35)

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भारत की जलवायु कार्रवाई को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा सतत विकास और जलवायु न्याय के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

2031-35 के लिए भारत का NDC “विकसित भारत” के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जो केवल 2047 का लक्ष्य नहीं, बल्कि आज से ही एक समृद्ध और जलवायु-सक्षम भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत के ये नए जलवायु लक्ष्य पूर्व प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं, जिनमें से कई को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। ये पांच गुणात्मक लक्ष्य सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, जलवायु-लचीले विकास को प्रोत्साहित करने और समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्धारित किए गए हैं।

प्रारंभिक उपलब्धि से उच्च लक्ष्य तक

भारत ने 2015 में अपने पहले NDC के तहत 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 33–35% कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा था, जिसे क्रमशः 11 वर्ष और 9 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया। 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है, जिसे अब 2035 तक 47% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी पहले ही 52.57% (फरवरी 2026) तक पहुंचकर हासिल किया जा चुका है, जिसे अब 2035 तक 60% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से कार्बन सिंक को 3.5–4.0 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास

भारत बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, स्वच्छ विनिर्माण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के माध्यम से जलवायु रणनीति को लागू कर रहा है। प्रमुख योजनाओं में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर योजना, PLI योजना, पीएम-कुसुम, CCUS और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस और Lead-IT जैसी पहल के माध्यम से सहयोग बढ़ा रहा है।

जलवायु अनुकूलन पर जोर

भारत केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुकूलन (Adaptation) पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसमें तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, चक्रवात चेतावनी प्रणाली, हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, हीट एक्शन प्लान और सामुदायिक आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

जन-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत की जलवायु नीति “LiFE – Lifestyle for Environment” पर आधारित है, जो सतत जीवनशैली को जन आंदोलन बना रही है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल भी जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।

NDC (2031-35) की रूपरेखा

इस NDC को तैयार करते समय ग्लोबल स्टॉकटेक, CBDR-RC सिद्धांत और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। नीति आयोग के तहत विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों और संगठनों से व्यापक परामर्श किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ व्यवहारिक भी हों।

निष्कर्ष

भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी और देश को हरित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करेंगी। यह निर्णय भारत को कम-कार्बन और जलवायु-सक्षम भविष्य की दिशा में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) का 10वां प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 2 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत वर्ष 2012 से अब तक कुल 148 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

यह विशेष कोर्स उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन इस विषय में गहरी रुचि रखते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों—जैसे सशस्त्र बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, मीडिया, शिक्षा और छात्र समुदाय—से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चार दिनों तक विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय जैव-भूगोल, वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियां, बड़े स्तनधारियों का प्रबंधन, वन्यजीवों की अवैध तस्करी, फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिक विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को लैंसडाउन वन प्रभाग (उत्तराखंड) में पांच दिवसीय फील्ड विजिट पर ले जाया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें जंगल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों और स्थानीय समुदायों की वन संसाधनों पर निर्भरता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन 11 मार्च को हुआ, जिसमें रमेश कुमार पांडे, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), ने प्रतिभागियों से संवाद किया और भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।

मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नई दिल्ली में अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन: अरावली ग्रीन वॉल को मजबूत करना” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन” शीर्षक से संकला फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का विमोचन भी किया।

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना

भूपेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और भारत की UNCCD के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप शुरू की है।

इस पहल के तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि की पहचान की गई है, और 2.7 मिलियन हेक्टेयर में हरियाली कार्य प्रारंभ किया गया है, जो गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में फैला हुआ है। परियोजना का कार्य 29 अरावली जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल हों।

हरियाणा में संरक्षण और पुनर्वनीकरण

मंत्री ने बताया कि हरियाणा में नौरंगपुर से नूह तक लगभग 97 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि, जो अत्यधिक अपक्षयग्रस्त है, वनरोपण के लिए चिन्हित की गई है और इसे बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया गया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता के बाद अरावली की सुरक्षा और पुनर्वनीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और तब के हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सक्रिय समर्थन से संभव हुआ।

अरावली की पारिस्थितिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता

मंत्री ने कहा कि अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जिसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है। अरावली पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा चार टाइगर रिज़र्व्स और 18 संरक्षित क्षेत्रों द्वारा सुनिश्चित की जा रही है, जबकि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त हरित हस्तक्षेप भी किए जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत ने वन्यजीवन संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। देश में दुनिया की सात बड़ी बिल्लियों में से पांच प्रजातियाँ और विश्व की करीब 70% बाघ जनसंख्या पाई जाती है, जो लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया गया है और सरकार इस कार्य को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन और रिपोर्ट

सम्मेलन में नीति निर्माता, वन अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रैक्टिशनर और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग लेते हुए अरावली की पारिस्थितिक महत्ता और पुनर्स्थापन के मार्गों पर विचार-विमर्श किया।

विमोचित रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिक, समुदाय-केंद्रित और पैमाने पर लागू होने योग्य ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया है कि पुनर्स्थापन कार्य क्षेत्रीय पैमाने पर, डेटा-संचालित, समुदाय-केंद्रित और बहु-विषयक होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल अलग-थलग प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि क्षेत्र में व्यापक अपक्षय और पारिस्थितिक दबाव विद्यमान हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

उद्घाटन सत्र में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तनमय कुमार, महानिदेशक वनों सुशील कुमार अवस्थी, भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और संकला फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

यह सम्मेलन अरावली क्षेत्र की सुरक्षा, हरित पहल और पारिस्थितिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना की, रचनात्मकता और जन-भागीदारी को बताया प्रेरणादायी

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना करते हुए इसे रचनात्मकता, सततता और जन-भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर की जीवंत भावना और प्रकृति के प्रति उसके गहरे प्रेम को सुंदरता से प्रदर्शित करता है।

फ्लावर शो के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों के साथ अपने स्वरूप, भव्यता और कल्पनाशीलता में निरंतर विस्तार करता गया है और आज यह अहमदाबाद की सांस्कृतिक समृद्धि तथा पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बन चुका है।

गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“अहमदाबाद का फ्लावर शो हर किसी का मन मोह लेने वाला है! यह क्रिएटिविटी के साथ-साथ जन भागीदारी का अद्भुत उदाहरण है। इससे शहर की जीवंत भावना के साथ ही प्रकृति से उसका लगाव भी खूबसूरती से प्रदर्शित हो रहा है। यहां यह देखना भी उत्साह से भर देता है कि कैसे इस फ्लावर शो की भव्यता और कल्पनाशीलता हर साल निरंतर बढ़ती जा रही है। इस फ्लावर शो की कुछ आकर्षक तस्वीरें…”

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी अहमदाबाद फ्लावर शो की बढ़ती लोकप्रियता, रचनात्मक प्रस्तुति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को रेखांकित करती है।





राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हैदराबाद के राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा की

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 दिसंबर 2025) हैदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव के दूसरे संस्करण के उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा की।

उद्यान उत्सव आम जनता के लिए 3 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। अंतिम प्रवेश शाम 7:00 बजे तक होगा।

इस उत्सव में प्रवेश सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क रहेगा।

नौ दिवसीय यह कृषि एवं उद्यानिकी महोत्सव टिकाऊ कृषि, उद्यानिकी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह भारत की हरित परंपराओं, सतत प्रथाओं और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव होगा।

उत्सव में पुष्प एवं अपुष्प दोनों प्रकार के आकर्षण देखने को मिलेंगे, जिनमें उन्नत मौसमी फूलों की क्यारियाँ, सुसज्जित पुष्प स्थापना, सेल्फी पॉइंट और उन्नत उद्यान क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा आगंतुक कृषि एवं उद्यानिकी विषयक स्टॉल, लाइव प्रदर्शन, इको-क्राफ्ट कार्यशालाएँ और इंटरैक्टिव ज्ञान क्षेत्र भी देख सकेंगे।

NITI Aayog और HUL ने भारत में सर्कुलर इकॉनमी के लिए स्टार्टअप एक्सेलेरेशन प्रोग्राम लॉन्च किया

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निति आयोग की अटल इनोवेशन मिशन (AIM) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने भारत में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर का स्टार्टअप एक्सेलेरेशन प्रोग्राम लॉन्च किया

यह पहल, HUL के प्रमुख प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के अंतर्गत, अगले तीन वर्षों में 50 उच्च-क्षमता वाले सर्कुलर इकॉनमी स्टार्टअप्स को पहचानने और समर्थन देने के लिए आयोजित की जाएगी। यह प्रोग्राम विशेष रूप से उन स्टार्टअप्स को प्राथमिकता देगा जो प्लास्टिक सर्कुलैरिटी में नवाचार कर रहे हैं, जैसे कि प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, रीयूज़ और रिफिल मॉडल, और अगली पीढ़ी की पैकेजिंग सामग्री। प्लास्टिक के अलावा, यह प्रोग्राम उन स्टार्टअप्स का भी समर्थन करेगा जो टेक्सटाइल, ई-वेस्ट जैसी अन्य पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट स्ट्रीम में मटेरियल रिकवरी के समाधान विकसित कर रहे हैं।

प्रोग्राम में चयनित स्टार्टअप्स को बिजनेस लीडर्स, नीति विशेषज्ञों और निवेशकों से क्यूरेटेड मेंटरशिप मिलेगी। चयनित स्टार्टअप्स को अनुदान (ग्रांट) और पायलट अवसर भी प्रदान किए जा सकते हैं ताकि बाजार में उनके समाधानों का मूल्यांकन हो सके। यह साझेदारी AIM और NITI Aayog की नीति और नवाचार पोषण विशेषज्ञता, HUL के व्यापक उद्योग नेटवर्क और Xynteo की रणनीतिक विशेषज्ञता को जोड़कर भारत में सर्कुलर इकॉनमी के लिए तेजी से समाधान विकसित करने का अवसर देती है।

HUL के कार्यकारी निदेशक और चीफ पिपल, ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, BP बिद्दाप्पा ने कहा:

“NITI Aayog और HUL के बीच यह साझेदारी भारत में प्लास्टिक के लिए सर्कुलर इकॉनमी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमारे दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि जो भारत के लिए अच्छा है, वह HUL के लिए भी अच्छा है। सरकार की ताकत, उद्योग विशेषज्ञता और उद्यमिता की ऊर्जा को मिलाकर हम अगली पीढ़ी के सस्टेनेबिलिटी स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना और व्यावहारिक समाधानों को तेजी से स्केल करना चाहते हैं।”

AIM, NITI Aayog के मिशन डायरेक्टर डॉ. दीपक बगला ने कहा:

“यह सहयोग उस दृष्टि और मूलभूत विचार पर आधारित है जिसे माननीय प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया है, कि ‘हमारे लिए सतत विकास केवल नारा नहीं बल्कि एक प्रतिबद्धता है।’

उन स्टार्टअप्स को सशक्त बनाकर जो भारत में संसाधनों के उपयोग और मूल्यांकन को फिर से परिभाषित कर रहे हैं, हम ऐसे समाधान उत्पन्न कर रहे हैं जो कचरे को कम कर सकते हैं, रीसाइक्लिंग को नए रूप में पेश कर सकते हैं और कल की ग्रीन इंडस्ट्रीज़ का निर्माण कर सकते हैं।”

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के बारे में

HUL भारत की सबसे बड़ी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियों में से एक है, जिसके उत्पाद देश के लगभग 9 में से 10 घरों तक पहुँचते हैं। HUL हर दिन एक बेहतर भविष्य बनाने का प्रयास करता है।

अटल इनोवेशन मिशन (AIM), NITI Aayog के बारे में

AIM, NITI Aayog भारत सरकार की प्रमुख पहल है जो देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देती है। यह ATL, AIC, ACIC जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करता है।

PM-KUSUM योजना के तहत किसानों और FPOs को मिली बड़ी सफलता

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पीएम-कुसुम योजना एक मांग आधारित योजना है। इसकी क्षमता आवंटन उन राज्यों को प्राप्त मांग और प्रगति के आधार पर किया जाता है। योजना में किसान, किसानों के समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (PACS) आदि भाग ले सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना की स्थापना प्रगति (Annexure-I) के अनुसार है।

योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या, जिसमें FPO शामिल हैं, Annexure-II में दी गई है।

30 नवंबर 2025 तक PM-KUSUM योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की जा चुकी है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता राज्यों की मांग, SIAs द्वारा रिपोर्ट की गई प्रगति और योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की जाती है। अब तक राज्यों से प्राप्त मांग के अनुसार ₹7,106 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए मंत्रालय ने 17 जनवरी 2024 को व्यापक संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

दिशानिर्देशों के अनुसार लघु और सीमांत किसानों तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करता है। इसमें राज्यों के साथ समीक्षा बैठक और मार्गदर्शन भी शामिल हैं।

यह जानकारी संयुक्त राज्य मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्रिपाद यसो नाइक द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

Annexure-II: PM-KUSUM योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या (30.11.2025 तक)

  • S.No   राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कुल लाभार्थी (FPO सहित)
    Arunachal Pradesh     616
    Assam 151
    Chhattisgarh 9
    Goa 859
    Gujarat 2,28,504
    Haryana 1,80,582
    Himachal Pradesh 1,193
    Jammu & Kashmir 3,601
    Jharkhand 43,693
    Karnataka 60,387
    Kerala 13,489
    Ladakh 102
    Madhya Pradesh 37,689
    Maharashtra 11,21,416
    Manipur 150
    Meghalaya 98
    Mizoram 40
    Nagaland 140
    Odisha 10,113
    Punjab 17,592
    Rajasthan 2,35,924
    Tamil Nadu 4,950
    Tripura 7,061
    Uttar Pradesh 72,417
    Uttarakhand 1,663
    West Bengal 20
  • कुल लाभार्थी: 20,42,459


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