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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया भारत का नया जलवायु लक्ष्य (NDC 2031-35)

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भारत की जलवायु कार्रवाई को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा सतत विकास और जलवायु न्याय के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

2031-35 के लिए भारत का NDC “विकसित भारत” के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जो केवल 2047 का लक्ष्य नहीं, बल्कि आज से ही एक समृद्ध और जलवायु-सक्षम भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत के ये नए जलवायु लक्ष्य पूर्व प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं, जिनमें से कई को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। ये पांच गुणात्मक लक्ष्य सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, जलवायु-लचीले विकास को प्रोत्साहित करने और समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्धारित किए गए हैं।

प्रारंभिक उपलब्धि से उच्च लक्ष्य तक

भारत ने 2015 में अपने पहले NDC के तहत 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 33–35% कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा था, जिसे क्रमशः 11 वर्ष और 9 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया। 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है, जिसे अब 2035 तक 47% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी पहले ही 52.57% (फरवरी 2026) तक पहुंचकर हासिल किया जा चुका है, जिसे अब 2035 तक 60% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से कार्बन सिंक को 3.5–4.0 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास

भारत बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, स्वच्छ विनिर्माण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के माध्यम से जलवायु रणनीति को लागू कर रहा है। प्रमुख योजनाओं में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर योजना, PLI योजना, पीएम-कुसुम, CCUS और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस और Lead-IT जैसी पहल के माध्यम से सहयोग बढ़ा रहा है।

जलवायु अनुकूलन पर जोर

भारत केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुकूलन (Adaptation) पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसमें तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, चक्रवात चेतावनी प्रणाली, हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, हीट एक्शन प्लान और सामुदायिक आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

जन-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत की जलवायु नीति “LiFE – Lifestyle for Environment” पर आधारित है, जो सतत जीवनशैली को जन आंदोलन बना रही है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल भी जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।

NDC (2031-35) की रूपरेखा

इस NDC को तैयार करते समय ग्लोबल स्टॉकटेक, CBDR-RC सिद्धांत और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। नीति आयोग के तहत विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों और संगठनों से व्यापक परामर्श किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ व्यवहारिक भी हों।

निष्कर्ष

भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी और देश को हरित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करेंगी। यह निर्णय भारत को कम-कार्बन और जलवायु-सक्षम भविष्य की दिशा में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट क्षेत्र को बढ़ावा: बजट 2026–27 और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम

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प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा – खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण के लिए

  • नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना को मंज़ूरी

  • 6,000 MTPA की एकीकृत REPM उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी

  • पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ के बिक्री-आधारित प्रोत्साहन

  • उन्नत सुविधाओं के लिए ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

परिचय

भारत महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। इसके तहत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के लिए एक घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। REPMs उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से किया जाता है।

इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की योजना को मंज़ूरी दी, जिसके अंतर्गत रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी वैल्यू चेन को कवर करते हुए 6,000 MTPA की एकीकृत निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी।

इसके पूरक के रूप में, केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा की गई है। ये पहल आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं तथा भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत में REPM का रणनीतिक महत्व और संसाधन क्षमता

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट अपनी अत्यधिक चुंबकीय शक्ति और स्थिरता के लिए जाने जाते हैं। इनका कॉम्पैक्ट आकार और उच्च प्रदर्शन इन्हें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, पवन टर्बाइन जनरेटर, उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और प्रिसिजन सेंसर्स के लिए अनिवार्य बनाता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत मोबिलिटी और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है, REPM की विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मज़बूत होगी।

भारत का संसाधन आधार

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का विशाल भंडार है, जो REPM जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है:

  • मोनाज़ाइट भंडार: भारत में 13.15 मिलियन टन मोनाज़ाइट उपलब्ध है, जिसमें लगभग 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) निहित है

  • भौगोलिक विस्तार: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में तटीय रेत, टेरी/लाल रेत और आंतरिक जलोढ़ क्षेत्रों में जमा

  • अतिरिक्त संसाधन: गुजरात और राजस्थान में हार्ड-रॉक क्षेत्रों में 1.29 मिलियन टन इन-सिटू REO संसाधनों की पहचान

  • अन्वेषण प्रयास: GSI द्वारा 34 परियोजनाओं के तहत 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

ये सभी भंडार भारत में एक एकीकृत REPM विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की मज़बूत क्षमता को दर्शाते हैं।

निवेश और विस्तार की आवश्यकता

हालाँकि भारत के पास प्रचुर संसाधन हैं, फिर भी स्थायी मैग्नेट का घरेलू उत्पादन अभी प्रारंभिक अवस्था में है। 2022–25 के दौरान लगभग 60–80% मूल्य और 85–90% मात्रा के हिसाब से आयात (मुख्यतः चीन से) पर निर्भरता रही है।

2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में तेज़ वृद्धि के कारण REPM की मांग दोगुनी होने की संभावना है। ऐसे में आयात निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू क्षमता का विस्तार अनिवार्य है।

केंद्रीय बजट 2026–27: REPM और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

REPM निर्माण योजना (नवंबर 2025)

  • कुल परिव्यय: ₹7,280 करोड़

  • क्षमता: 6,000 MTPA एकीकृत सिण्टर्ड REPM उत्पादन

  • लाभार्थी: वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अधिकतम पाँच

  • प्रोत्साहन: पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ (बिक्री-आधारित)

  • पूंजी सब्सिडी: ₹750 करोड़

  • उद्देश्य: रेयर अर्थ ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करना

डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

बजट 2026–27 में घोषित ये कॉरिडोर्स खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। ये पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी, अनुसंधान एवं विकास को गति देगी और भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ेगी।

IREL (इंडिया) लिमिटेड की भूमिका

IREL (इंडिया) लिमिटेड, जो 1963 से परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत है, ओडिशा और केरल में रेयर अर्थ निष्कर्षण और परिशोधन इकाइयाँ संचालित कर रही है। इसके मौजूदा ढांचे को नए कॉरिडोर्स से जोड़कर घरेलू क्षमता और उन्नत विनिर्माण को तेज़ी दी जाएगी।

राष्ट्रीय लक्ष्यों से संरेखण

  • आत्मनिर्भर भारत: आयात निर्भरता में कमी

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: EV और पवन ऊर्जा के लिए आवश्यक मैग्नेट की घरेलू आपूर्ति

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा और एयरोस्पेस के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला

  • नीतिगत सुधार: MMDR अधिनियम (2023 संशोधन) और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (2025) के अनुरूप

वैश्विक साझेदारियाँ

भारत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, पेरू, ज़िम्बाब्वे, मलावी और कोट डी’आईवोर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर रहा है। इसके अतिरिक्त, Minerals Security Partnership (MSP) और IPEF जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी सक्रिय भागीदारी है।

KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के माध्यम से भारत की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत कर रहा है।

निष्कर्ष

₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना और बजट 2026–27 में घोषित डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स मिलकर भारत के लिए खनन से लेकर विनिर्माण तक एक एकीकृत ढांचा तैयार करते हैं। ये पहल आयात निर्भरता घटाने, स्वच्छ ऊर्जा एवं रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को साकार करने में सहायक होंगी। घरेलू प्रयासों और वैश्विक साझेदारियों के संयोजन से भारत उन्नत सामग्री क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभर रहा है।


उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में भारत क्लाइमेट फोरम 2026 का उद्घाटन संबोधन दिया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारत क्लाइमेट फोरम 2026 में उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि जलवायु कार्रवाई भारत के विकास के लिए कोई बाधा नहीं है, बल्कि यह समावेशी विकास को तेज़ करने, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के निर्माण का एक रणनीतिक अवसर है।

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समझ परिषद (Council for International Economic Understanding) की सराहना करते हुए, जिसने इस फोरम को गंभीर विमर्श और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित किया है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु और सततता से जुड़े मुद्दों पर भारत की प्रतिबद्धता उसकी सभ्यतागत सोच में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि स्थिरता के आधुनिक विमर्श से बहुत पहले ही भारतीय चिंतन में मानव गतिविधियों और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर बल दिया गया था, जो पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों, सतत कृषि पद्धतियों, जैव विविधता संरक्षण और प्रकृति तथा अपरिग्रह जैसे नैतिक सिद्धांतों में परिलक्षित होता है।

पिछले एक दशक में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश ने निरंतर विकास और समानता, वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने एक विकासशील राष्ट्र के रूप में जलवायु जिम्मेदारी को देखने के दृष्टिकोण को मूल रूप से परिभाषित किया है।

COP-26 में घोषित भारत की पंचामृत प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये लक्ष्य निम्न-कार्बन भविष्य की ओर स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं, जिनमें 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य शामिल है, साथ ही भारत की विकास प्राथमिकताओं और भावी पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व की पुष्टि भी करते हैं।

स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विकसित भारत केवल आयातित तकनीकों या कमजोर आपूर्ति शृंखलाओं पर आधारित नहीं हो सकता। इसका आधार स्वदेशी स्वच्छ प्रौद्योगिकियां, सुदृढ़ विनिर्माण क्षमता और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सतत सामग्री, जलवायु-स्मार्ट कृषि और डिजिटल जलवायु समाधानों जैसे क्षेत्रों में वैश्विक निर्माता के रूप में उभर रहा है—जिससे मेक इन इंडिया को मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड का स्वरूप मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियां सोलर मॉड्यूल, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन घटकों, इलेक्ट्रोलाइज़र और हरित ईंधन में बड़े निवेश कर रही हैं, जबकि स्टार्ट-अप्स जलवायु डेटा, ऊर्जा दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्रों में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

वैश्विक सहयोग पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है, जिसके लिए सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की साझेदारी की नीति सहयोग पर आधारित है, न कि निर्भरता पर। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) के संस्थापक बल के रूप में भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों को सस्ती और विस्तार योग्य सौर ऊर्जा समाधानों के लिए एकजुट किया है। आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) में भारत के नेतृत्व को उन्होंने जलवायु-जनित झटकों से अवसंरचना प्रणालियों को सुदृढ़ करने और विकास उपलब्धियों की रक्षा करने की दूरदर्शी पहल बताया।

इस अवसर पर भारत क्लाइमेट फोरम के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के पूर्व सांसद एन. के. सिंह; भारत क्लाइमेट फोरम की संयोजक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी; सह-अध्यक्ष सुमंत सिन्हा; तथा अध्यक्ष, भारत क्लाइमेट फोरम, डॉ. अश्विनी महाजन सहित देश-विदेश से आए नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, विशेषज्ञ, शिक्षाविद और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।


भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा: ₹7,280 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी

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प्रमुख बिंदु

  • सरकार ने देश में सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के समेकित घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम की स्थापना के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।

  • इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन शामिल होगी।

  • यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

  • यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) और MMDR अधिनियम सुधारों जैसी नीतिगत पहलों से समर्थित है।

  • आयात निर्भरता कम करते हुए भारत की वैश्विक उन्नत सामग्री वैल्यू चेन में भागीदारी को सशक्त बनाएगी और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति देगी।

परिचय

केंद्र सरकार ने ‘सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना’ को मंजूरी दी है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹7,280 करोड़ है। इस योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें कच्चे रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर अंतिम मैग्नेट उत्पाद तक संपूर्ण प्रक्रिया शामिल होगी।

इस घरेलू इकोसिस्टम के निर्माण से इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक इनपुट में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आपूर्ति शृंखला और नेट ज़ीरो 2070 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सबसे शक्तिशाली स्थायी मैग्नेटों में से एक होते हैं। इनका उपयोग उन तकनीकों में होता है जहाँ छोटे आकार में उच्च चुंबकीय क्षमता की आवश्यकता होती है, जैसे—

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर

  • पवन ऊर्जा टरबाइन जनरेटर

  • उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स

  • एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियाँ

  • सटीक सेंसर और एक्ट्यूएटर

उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए REPM अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए भारत में इनका घरेलू उत्पादन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत की वर्तमान स्थिति और योजना की आवश्यकता

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का बड़ा भंडार है, विशेष रूप से मोनाजाइट, जो आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। देश में लगभग 1.315 करोड़ टन मोनाजाइट उपलब्ध है, जिसमें अनुमानित 72.3 लाख टन रेयर अर्थ ऑक्साइड मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान में हार्ड रॉक क्षेत्रों में 12.9 लाख टन REO संसाधन चिन्हित किए गए हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए व्यापक अन्वेषण से 48.26 करोड़ टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान भी हुई है।

इसके बावजूद, भारत अभी भी REPM के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वर्ष 2022–23 से 2024–25 के बीच भारत ने 60% से 80% तक मूल्य के आधार पर और 85% से 90% तक मात्रा के आधार पर आयात चीन से किया। अनुमान है कि 2030 तक REPM की घरेलू मांग दोगुनी हो जाएगी।

योजना के प्रमुख घटक

  • देश में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता का निर्माण।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 5 लाभार्थियों का चयन, प्रत्येक को 1,200 MTPA तक की क्षमता।

  • ₹6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि, जो 5 वर्षों में दी जाएगी।

  • ₹750 करोड़ की पूंजी सब्सिडी, जिससे अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को समर्थन मिलेगा।

  • कुल 7 वर्षों की कार्यान्वयन अवधि—2 वर्ष की स्थापना अवधि और 5 वर्ष का प्रोत्साहन चरण।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से तालमेल

यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, रक्षा आत्मनिर्भरता, और रणनीतिक विनिर्माण लक्ष्यों के अनुरूप है। REPM ऊर्जा-कुशल मोटरों और पवन ऊर्जा प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे यह पहल नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को भी समर्थन देती है।

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), MMDR अधिनियम संशोधन 2023, और अन्य खनन सुधारों के साथ मिलकर भारत की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन को मजबूत करती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत का अवसर

वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ और मैग्नेट आपूर्ति शृंखलाओं में बार-बार व्यवधान देखने को मिले हैं। ऐसे में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक सहित कई देशों के साथ सहयोग समझौते किए हैं।

इसके साथ ही खानिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) विदेशों में रणनीतिक खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और अन्वेषण में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे भारत की दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने, आयात निर्भरता कम करने और उन्नत तकनीकी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल रोजगार सृजन, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

एनएचपीसी लिमिटेड ने मनाया स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष और 51वां स्थापना दिवस उत्सवपूर्वक

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भारत सरकार का “नवरत्न” उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड ने अपनी स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने और 51वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 7 नवम्बर 2025 को पूरे उत्साह के साथ समारोह मनाया। इस अवसर पर एनएचपीसी के कॉरपोरेट कार्यालय, फरीदाबाद सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों, विद्युत गृहों और परियोजनाओं में भव्य समारोह आयोजित किए गए।

फरीदाबाद स्थित कॉरपोरेट कार्यालय में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि, माननीय केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी एनएचपीसी पर आधारित “कस्टमाइज्ड माई स्टैम्प” तथा एनएचपीसी की 50 वर्षों की गौरवमयी यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित “अचीवमेंट बुक” का विमोचन किया।

मुख्य अतिथि मनोहर लाल, माननीय केंद्रीय मंत्री (विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य), सचिन किशोर, मुख्य डाक महाप्रबंधक (हरियाणा परिमंडल),भूपेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), एनएचपीसी, निदेशकों, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) एवं स्वतंत्र निदेशकों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर माननीय केंद्रीय मंत्री एवं मुख्य डाक महाप्रबंधक, हरियाणा परिमंडल का स्वागत एनएचपीसी के सीएमडी भूपेंद्र गुप्ता ने पौधा एवं शॉल भेंट कर किया।

समारोह में विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, विद्युत मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्ष एवं निदेशक, विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों/विभागों के प्रतिनिधि, एनएचपीसी अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

भारत सरकार के डाक विभाग ने एनएचपीसी की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “माई स्टैम्प” का एक विशेष संस्करण जारी किया, जिसमें एनएचपीसी के 12 प्रसिद्ध बांधों और बैराजों को प्रदर्शित किया गया है। ये सभी संरचनाएँ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रतीक हैं और देश के लिए जलविद्युत के क्षेत्र में एनएचपीसी की दक्षता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

एनएचपीसी की “अचीवमेंट बुक” में पिछले 50 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों को आकर्षक तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जो संगठन की समृद्ध विरासत, तकनीकी श्रेष्ठता, उल्लेखनीय योगदान और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

अपने संबोधन में माननीय मुख्य अतिथि मनोहर लाल ने एनएचपीसी परिवार को 51वें स्थापना दिवस और स्वर्ण जयंती पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पाँच दशकों की उल्लेखनीय प्रगति के दौरान, जलविद्युत के क्षेत्र में एनएचपीसी का योगदान पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में एनएचपीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए एनएचपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग और तकनीकी नवाचारों को अपनाना होगा। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में एनएचपीसी हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगी और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेगी।

इस अवसर पर माननीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने वीडियो संदेश के माध्यम से एनएचपीसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पचास वर्षों की यात्रा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि समर्पण और उत्कृष्टता की प्रेरणादायक कहानी है। 1975 में प्रारंभ हुआ यह संगठन आज भारत का अग्रणी जलविद्युत एवं हरित ऊर्जा उपक्रम बन चुका है। यह उपलब्धि एनएचपीसी की निष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है।

इस अवसर पर विद्युत सचिव, भारत सरकार पंकज अग्रवाल ने भी सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह क्षण गौरव का है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जलविद्युत क्षेत्र में एनएचपीसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं और एनएचपीसी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता से इन दायित्वों को निष्ठापूर्वक निभाएगा तथा विकसित भारत के विज़न को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

अपने संबोधन में भूपेंद्र गुप्ता, सीएमडी, एनएचपीसी ने सभी कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दीं और माननीय केंद्रीय मंत्री का मार्गदर्शन एवं समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्युत मंत्रालय का भी निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे लिए गौरव, आत्मचिंतन और प्रेरणा का दिन है। एनएचपीसी ने पिछले पचास वर्षों में न केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, बल्कि देश की प्रगति में निरंतर योगदान भी दिया है। उन्होंने एनएचपीसी की यात्रा में जुड़े सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से संस्था आज इस ऊँचाई तक पहुँची है।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक और संगीतकार आनंद राज आनंद तथा लोकप्रिय हास्य कलाकार संकैत भोसले ने अपने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

दिन की शुरुआत में पुरस्कार वितरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन एनएचपीसी कॉरपोरेट कार्यालय, फरीदाबाद में किया गया। इस अवसर पर एनएचपीसी के ध्वज फहराने का कार्य सीएमडी  भूपेंद्र गुप्ता द्वारा किया गया। इस दौरान शिखा गुप्ता सहित एनएचपीसी के सभी निदेशक एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इसे गाकर किया गया। तत्पश्चात, इस अवसर पर एनएचपीसी परिवार ने माननीय प्रधानमंत्री का संबोधन (जो संस्कृति मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दिया गया) लाइव वेब लिंक के माध्यम से सुना।

इस अवसर पर “एनएचपीसी पुरस्कार योजना 2024-25” के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ विद्युत गृह, सर्वश्रेष्ठ निर्माण परियोजना, उत्कृष्ट समर्पण, एनएचपीसी स्टार तथा कक्षा 10 एवं 12 के स्टार विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा एनएचपीसी की विभिन्न विभागीय प्रकाशन सामग्री का विमोचन भी किया गया। एनएचपीसी के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया।


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