Media24Media.com: नई दिल्ली में ‘रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव’ का पहला संस्करण आयोजित

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नई दिल्ली में ‘रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव’ का पहला संस्करण आयोजित

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नई दिल्ली केभारत मंडपम में 5 मार्च 2026 को Raisina Science Diplomacy Initiative (SDI) का पहला संस्करण आयोजित किया गया। इस पहल को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और Observer Research Foundation (ORF) ने संयुक्त रूप से रायसीना डायलॉग  के अंतर्गत शुरू किया।

इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कूटनीतिज्ञों और शोधकर्ताओं सहित लगभग 80 विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान कूटनीति (Science Diplomacy) की भूमिका और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी शासन चुनौतियों पर चर्चा करना था।

इस पहल की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में पीटर ग्लकमैन (अंतरराष्ट्रीय विज्ञान परिषद के अध्यक्ष), Marilyne Andersen (जिनेवा साइंस एंड डिप्लोमेसी एंटिसिपेटर की महानिदेशक) और Vijay Chauthaiwale (भारतीय जनता पार्टी के विदेश विभाग के प्रभारी) शामिल रहे।

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक सुरक्षा और सामाजिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। समीर सरन, अध्यक्ष, ORF ने कहा कि रायसीना SDI को वैश्विक मंच के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विज्ञान कूटनीति के समकालीन ढांचे पर चर्चा हो सके।

रणनीतिक स्वायत्तता के दौर में विज्ञान कूटनीति

पहली गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy in the Era of Strategic Autonomy” विषय पर आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता Parvinder Maini ने की। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं और विज्ञान की सहयोगात्मक प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। विशेषज्ञों ने भरोसेमंद वैज्ञानिक नेटवर्क, पारदर्शी शोध प्रणाली और मजबूत बहुपक्षीय ढांचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के शासन पर चर्चा

दूसरी गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy and Governance of Disruptive Technologies” विषय पर हुई, जिसकी अध्यक्षता Marilyne Andersen ने की। इसमें उभरती तकनीकों के लिए न्यायसंगत और प्रभावी वैश्विक शासन मॉडल विकसित करने, समावेशी नीति-निर्माण और तकनीकी नवाचार को नैतिक तथा सामाजिक मानकों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर जाह्नवी फाल्के , निदेशक, साइंस गैलरी बेंगलुरु ने विज्ञान कूटनीति के ऐतिहासिक विकास पर व्याख्यान दिया। वहींस्टीन सोंडरगार्ड नाटो के मुख्य वैज्ञानिक ने उभरती तकनीकों पर नाटो की तकनीकी दूरदृष्टि से जुड़े अनुभव साझा किए।

वैश्विक विमर्श को मिलेगा नया मंच

रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव से प्राप्त विचार और सुझाव विज्ञान कूटनीति पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसे वार्षिक मंच के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नीति और शासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रो.अजय कुमार सूद ने कहा कि भविष्य में इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना होगा—
पहला, निजी क्षेत्र की भूमिका को विज्ञान कूटनीति के ढांचे में कैसे शामिल किया जाए; और दूसरा, मौजूदा बहुपक्षीय तंत्रों का उपयोग कर तकनीकी प्रगति के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से कैसे पहुंचाया जाए।

यह पहल विज्ञान, कूटनीति और नीति निर्माण के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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