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डोपिंग के खिलाफ भारत का सख्त रुख: वैश्विक सम्मेलन में मांडविया ने दोहराई स्वच्छ खेल की प्रतिबद्धता

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नई दिल्ली- युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशंस नेटवर्क (GAIIN) के अंतिम सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए स्वच्छ खेल और डोपिंग के खिलाफ वैश्विक सहयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “वैश्विक एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस और जांच नेटवर्क इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन डोपिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाता है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत ने खेलों की शुचिता बनाए रखने के लिए “सिर्फ अनुपालन के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ” कई सुधार किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग अधिनियम, 2022 को एक मजबूत कानूनी ढांचा बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन अधिनियम, 2025 वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार प्रतिबंधित पदार्थों के प्रशासन और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले डोपिंग को व्यक्तिगत गलती माना जाता था, लेकिन अब यह एक संगठित बहुराष्ट्रीय गतिविधि बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

WADA के अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने कहा कि “WADA का इंटेलिजेंस और जांच मॉडल राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करता है।” उन्होंने बताया कि यह मॉडल साझेदारी पर आधारित है और इसमें Europol तथा INTERPOL जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग भी शामिल है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि WADA कार्यशालाओं और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से भारत की जांच क्षमताएं मजबूत हुई हैं और एंटी-डोपिंग पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को “उभरती हुई वैश्विक खेल शक्ति” बताया।

उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदल रहे हैं और खेलों को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बना रहे हैं।

मंत्री ने खेलों में नैतिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि “खिलाड़ियों के मूल्य खेल उत्कृष्टता के केंद्र में होने चाहिए।” उन्होंने निष्पक्षता, ईमानदारी और सम्मान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

रोकथाम के उपायों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “रोकथाम सबसे प्रभावी रणनीति है,” और खिलाड़ियों को सही समय पर सही जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) इंडिया जागरूकता के लिए कार्यशालाएं, सेमिनार, डिजिटल अभियान और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं।

खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि खेल मंत्रालय ने NADA की संस्थागत और जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण शामिल है। उन्होंने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. मांडविया ने “Know Your Medicine” मोबाइल ऐप का भी उल्लेख किया, जो खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की जांच में मदद करता है। उन्होंने बताया कि देश में डोपिंग जांच की संख्या 2019 में लगभग 4,000 से बढ़कर पिछले वर्ष करीब 8,000 हो गई है, जबकि प्रतिकूल मामलों की दर 5.6% से घटकर 2% से कम हो गई है।

NADA इंडिया के महानिदेशक अनंत कुमार ने कहा कि परीक्षण कार्यक्रम का विस्तार हुआ है, लेकिन अब केवल परीक्षण पर्याप्त नहीं है—इसके लिए खुफिया जानकारी, समन्वय और शिक्षा भी आवश्यक है।

मंत्री ने बताया कि भारत नई WADA-अनुपालन प्रयोगशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

अंत में, डॉ. मांडविया ने कहा कि “डोपिंग की चुनौती का सामना कोई एक संस्था अकेले नहीं कर सकती,” और सरकार, नियामक संस्थाओं तथा खेल संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल खेल उत्कृष्टता बल्कि उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

नई दिल्ली में ‘रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव’ का पहला संस्करण आयोजित

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नई दिल्ली केभारत मंडपम में 5 मार्च 2026 को Raisina Science Diplomacy Initiative (SDI) का पहला संस्करण आयोजित किया गया। इस पहल को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और Observer Research Foundation (ORF) ने संयुक्त रूप से रायसीना डायलॉग  के अंतर्गत शुरू किया।

इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कूटनीतिज्ञों और शोधकर्ताओं सहित लगभग 80 विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान कूटनीति (Science Diplomacy) की भूमिका और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी शासन चुनौतियों पर चर्चा करना था।

इस पहल की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में पीटर ग्लकमैन (अंतरराष्ट्रीय विज्ञान परिषद के अध्यक्ष), Marilyne Andersen (जिनेवा साइंस एंड डिप्लोमेसी एंटिसिपेटर की महानिदेशक) और Vijay Chauthaiwale (भारतीय जनता पार्टी के विदेश विभाग के प्रभारी) शामिल रहे।

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक सुरक्षा और सामाजिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। समीर सरन, अध्यक्ष, ORF ने कहा कि रायसीना SDI को वैश्विक मंच के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विज्ञान कूटनीति के समकालीन ढांचे पर चर्चा हो सके।

रणनीतिक स्वायत्तता के दौर में विज्ञान कूटनीति

पहली गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy in the Era of Strategic Autonomy” विषय पर आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता Parvinder Maini ने की। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं और विज्ञान की सहयोगात्मक प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। विशेषज्ञों ने भरोसेमंद वैज्ञानिक नेटवर्क, पारदर्शी शोध प्रणाली और मजबूत बहुपक्षीय ढांचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के शासन पर चर्चा

दूसरी गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy and Governance of Disruptive Technologies” विषय पर हुई, जिसकी अध्यक्षता Marilyne Andersen ने की। इसमें उभरती तकनीकों के लिए न्यायसंगत और प्रभावी वैश्विक शासन मॉडल विकसित करने, समावेशी नीति-निर्माण और तकनीकी नवाचार को नैतिक तथा सामाजिक मानकों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर जाह्नवी फाल्के , निदेशक, साइंस गैलरी बेंगलुरु ने विज्ञान कूटनीति के ऐतिहासिक विकास पर व्याख्यान दिया। वहींस्टीन सोंडरगार्ड नाटो के मुख्य वैज्ञानिक ने उभरती तकनीकों पर नाटो की तकनीकी दूरदृष्टि से जुड़े अनुभव साझा किए।

वैश्विक विमर्श को मिलेगा नया मंच

रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव से प्राप्त विचार और सुझाव विज्ञान कूटनीति पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसे वार्षिक मंच के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नीति और शासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रो.अजय कुमार सूद ने कहा कि भविष्य में इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना होगा—
पहला, निजी क्षेत्र की भूमिका को विज्ञान कूटनीति के ढांचे में कैसे शामिल किया जाए; और दूसरा, मौजूदा बहुपक्षीय तंत्रों का उपयोग कर तकनीकी प्रगति के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से कैसे पहुंचाया जाए।

यह पहल विज्ञान, कूटनीति और नीति निर्माण के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 20वें G20 शिखर सम्मेलन में मेरी भागीदारी

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मैं 21-23 नवम्बर, 2025 को गणराज्य दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति महामहिम सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 20वें G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर रहूँगा।

यह शिखर सम्मेलन विशेष रूप से ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि यह अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन होगा। वर्ष 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ G20 का सदस्य बना था।

यह शिखर सम्मेलन प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इस वर्ष के G20 की थीम ‘एकजुटता, समानता और स्थिरता’ रही है, जिसके माध्यम से दक्षिण अफ्रीका ने नई दिल्ली, भारत और रियो डी जनेरियो, ब्राज़ील में आयोजित पिछले शिखर सम्मेलनों के परिणामों को आगे बढ़ाया है। मैं शिखर सम्मेलन में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ की हमारी दृष्टि के अनुरूप भारत का परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करूँगा।

मैं सहभागी देशों के नेताओं के साथ अपने संवाद और शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित 6वें इब्सा (IBSA) शिखर सम्मेलन में भागीदारी के लिए उत्सुक हूँ।

यात्रा के दौरान मैं दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय से भी मिलने के लिए उत्सुक हूँ, जो भारत के बाहर सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है।

भारत ने CoP30 में जलवायु कार्रवाई और वैश्विक सहयोग के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के केंद्रीय मंत्री, भूपेंद्र यादव ने 17.11.2025 को ब्राज़ील के बेलें में UNFCCC के 30वें सम्मेलन (CoP30) के उच्च स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। मंत्री ने कहा कि CoP30 को “कार्यान्वयन का COP” और “वादों को पूरा करने का COP” के रूप में याद किया जाना चाहिए।

मंत्री ने ब्राज़ील सरकार और उसके लोगों को CoP30 की मेज़बानी करने के लिए धन्यवाद दिया, जिसे उन्होंने “हमारे ग्रह की पारिस्थितिक संपदा का जीवंत प्रतीक” कहा।

भूपेंद्र यादव ने विकसित देशों से अधिक जलवायु महत्वाकांक्षा दिखाने और अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का दृढ़ आग्रह किया। उन्होंने कहा, “विकसित देशों को वर्तमान लक्ष्यों से कहीं पहले नेट जीरो तक पहुंचना चाहिए और नए, अतिरिक्त और अनुकूल जलवायु वित्त को ट्रिलियनों की राशि में प्रदान करना चाहिए, न कि बिलियनों में।” उन्होंने सस्ती और सुलभ जलवायु तकनीक की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि जलवायु तकनीक को बौद्धिक संपदा से जुड़े प्रतिबंधों से मुक्त होना चाहिए।

मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह सफलतापूर्वक दिखाया है कि विकास और पर्यावरणीय संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत की उत्सर्जन तीव्रता 2005 से अब तक 36% से अधिक घट चुकी है, और गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत अब हमारे कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा हैं (वर्तमान में लगभग 256 GW), जो कि हमारे 2030 के लक्ष्य से पाँच साल पहले ही प्राप्त किया जा चुका है। उन्होंने आगे बताया कि भारत अपने संशोधित NDCs को 2035 तक घोषित करेगा और पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट (Biennial Transparency Report) भी समय पर प्रस्तुत करेगा।

भूपेंद्र यादव ने यह भी बताया कि भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी पहलों के माध्यम से प्रदर्शित होती है। उन्होंने भारत के नाभिकीय मिशन (Nuclear Mission) और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (Green Hydrogen Mission) के माध्यम से 2070 तक नेट जीरो के मार्ग को आगे बढ़ाने की गति पर भी जोर दिया।

मंत्री ने पेरिस समझौते के उद्देश्यों के अनुरूप कार्बन सिंक और भंडार के संरक्षण और विकास पर ध्यान देते हुए बताया कि केवल सोलह महीनों में समुदाय-नेतृत्व वाली पहल के तहत 20 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक जलवायु कार्रवाई की शक्ति का वास्तविक प्रमाण है।

मंत्री ने अपने संबोधन का निष्कर्ष इस प्रतिबद्धता के साथ किया कि भारत वैश्विक जलवायु सहयोग और न्याय के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा, “आने वाला दशक कार्यान्वयन, लचीलापन और साझा जिम्मेदारी का दशक होना चाहिए।”


बड़ी बिल्लियाँ = स्वस्थ पृथ्वी: भारत ने IBCA के जरिए वैश्विक संरक्षण की अपील की

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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के केंद्रीय मंत्री, भूपेंद्र यादव ने 17.11.2025 को ब्राज़ील के बेलें में UNFCCC CoP30 के अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (IBCA) के उच्च स्तरीय मंत्री स्तरीय सत्र को संबोधित किया। उन्होंने बड़ी बिल्लियों की प्रजातियों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसे एकीकृत जलवायु और जैव विविधता कार्य के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में नेपाल सरकार के कृषि और पशुपालन मंत्री, डॉ. मदन प्रसाद परियार भी उपस्थित थे।

मंत्री ने ब्राज़ील को कार्यक्रम की मेज़बानी करने के लिए धन्यवाद दिया और इस विषय की प्रासंगिकता पर ध्यान आकर्षित किया – “बड़ी बिल्लियों की सुरक्षा, जलवायु और जैव विविधता की सुरक्षा”। उन्होंने कहा कि आज की पारिस्थितिक चुनौतियाँ गहराई से आपस में जुड़ी हुई हैं और इनके समाधान भी जुड़े हुए होने चाहिए।भूपेंद्र यादव ने बताया कि बड़ी बिल्लियाँ शिखर पर शिकारी (Apex Predators) होती हैं, पारिस्थितिक संतुलन की नियंत्रक होती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की संकेतक होती हैं।

“जहाँ बड़ी बिल्लियाँ पनपती हैं, वहाँ जंगल स्वस्थ रहते हैं, घास के मैदान फिर से बढ़ते हैं, जल प्रणालियाँ सुचारू रूप से काम करती हैं और कार्बन जीवित परिदृश्यों में प्रभावी रूप से संग्रहित होता है।” उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी बिल्लियों की आबादी में कमी पारिस्थितिक तंत्र को अस्थिर कर देती है, जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता कम कर देती है और प्राकृतिक कार्बन स्टोर खो जाता है।

‘बड़ी बिल्ली परिदृश्य’ को ‘प्राकृतिक-आधारित जलवायु समाधान’ के रूप में उजागर करते हुए, मंत्री ने भविष्य की राष्ट्रीय निर्धारित योगदान योजनाओं (NDCs) में प्राकृतिक-आधारित जलवायु कार्य को केंद्र में रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जिसे हम अक्सर ‘वन्यजीव संरक्षण’ कहते हैं, वह वास्तव में सबसे प्राकृतिक रूप में जलवायु कार्रवाई है।” उन्होंने समझाया कि बड़ी बिल्ली के परिदृश्य का संरक्षण सीधे कार्बन अवशोषण, जल प्रबंधन, आपदा जोखिम कम करना, जलवायु अनुकूलन और सतत आजीविका को मजबूत करता है। मंत्री ने IBCA की क्षमता पर भी जोर दिया कि यह देशों को तकनीकी सहायता, मानकीकृत उपकरण, क्षमता निर्माण, दक्षिण-दक्षिण सहयोग, मिश्रित वित्त और जैव विविधता-कार्बन क्रेडिट तंत्र के माध्यम से समर्थन प्रदान कर सकता है।

भूपेंद्र यादव ने भारत की भूमिका के बारे में जानकारी दी, जो दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों में से पाँच का घर है, और देश की प्रमुख संरक्षण सफलताओं को साझा किया। उन्होंने कहा, “भारत ने अपनी बाघ की आबादी को निर्धारित लक्ष्य समय सीमा से पहले दोगुना कर दिया और हमारी एशियाई शेर की आबादी लगातार बढ़ रही है।” उन्होंने बताया कि भारत ने बाघ, शेर, तेंदुए और हिम तेंदुए की राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या आंकड़ों के माध्यम से दुनिया के सबसे व्यापक वन्यजीव डेटाबेस का निर्माण किया है, जबकि संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार, परिसरों को सुरक्षित करना और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी कर संरक्षण और पारिस्थितिक आधारित आजीविका को बढ़ावा दिया है।

भूपेंद्र यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस की बढ़ती सदस्यता पर प्रकाश डाला और बताया कि IBCA प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक दृष्टि है, जो विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है, और दर्शनशास्त्र ‘वन अर्थ, वन वर्ल्ड, वन फ्यूचर’ पर आधारित है। उन्होंने बताया कि IBCA से औपचारिक रूप से 17 देश जुड़े हैं और 30 से अधिक देश इसमें शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य सभी बड़ी बिल्ली क्षेत्रों वाले देशों और उन सभी देशों को अलायंस में शामिल करना है, जो जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा को महत्व देते हैं।

इस पृष्ठभूमि में, मंत्री ने घोषणा की कि भारत सरकार 2026 में नई दिल्ली में ‘ग्लोबल बिग कैट समिट’ की मेज़बानी करेगी। उन्होंने सभी क्षेत्रीय देशों को अपने अनुभव और रणनीतियाँ साझा करने के लिए आमंत्रित किया ताकि बड़ी बिल्लियों और उनके आवासों को बचाया जा सके। उन्होंने सभी देशों से IBCA में शामिल होने और वैश्विक संरक्षण साझेदारियों को मजबूत करने का आह्वान किया।

वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि दुनिया एक पारिस्थितिक पुन:संरेखण के क्षण पर खड़ी है, जो एकता और सहयोग की मांग करता है। उन्होंने कहा, “हमें प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग करना चाहिए। हमें अलगाव में नहीं, बल्कि एकजुटता में शक्ति ढूँढनी चाहिए।” उन्होंने बड़े बिल्ली संरक्षण के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए निष्कर्ष दिया, “बड़ी बिल्लियों की सुरक्षा, हमारी साझा धरती की सुरक्षा है। बड़ी बिल्लियों की सुरक्षा, हमारे भविष्य की सुरक्षा है।”


भारत–दक्षिण कोरिया समुद्री साझेदारी को नई गति: हरदीप सिंह पुरी का रणनीतिक दौरा

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केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज दक्षिण कोरिया के जियोजे स्थित हैंवा ओशियन (Hanwha Ocean) के विस्तृत जहाज निर्माण परिसर का दौरा किया।

यह दौरा 13–15 नवंबर 2025 तक कोरिया गणराज्य में मंत्री की चल रही औपचारिक यात्राओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समुद्री सहयोग को गहरा करना तथा जहाज निर्माण, बेड़े के विकास और ऊर्जा परिवहन में नई साझेदारियों को बढ़ावा देना है। ये प्रयास भारत की मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047 का प्रमुख हिस्सा हैं, जिसके तहत भारत की वाणिज्यिक जहाज बेड़े की क्षमता में बड़ी वृद्धि, घरेलू शिपबिल्डिंग अवसंरचना का विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार का लक्ष्य रखा गया है।

हैंवा ओशियन की यात्रा के दौरान मंत्री को कंपनी की जहाज निर्माण क्षमताओं, उन्नत जहाज निर्माण प्रक्रियाओं और समुद्री प्रौद्योगिकी नवाचारों की जानकारी दी गई।मंत्री पुरी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की तीव्र वृद्धि साझेदारी के बड़े अवसर तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत की ऊर्जा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ प्रतिवर्ष लगभग 5–8 अरब अमेरिकी डॉलर का माल भाड़ा खर्च करती हैं, और तुरंत लगभग 59 जहाजों की आवश्यकता है। यह वैश्विक कंपनियों, जैसे हैंवा ओशियन, के लिए भारत में जहाज निर्माण साझेदारी का बड़ा अवसर है।

मंत्री ने कहा कि जहाँ दक्षिण कोरिया के पास जहाज निर्माण की तकनीकी विशेषज्ञता है, वहीं भारत के पास मजबूत मांग, कुशल कार्यबल और सक्षम नीतिगत ढांचा है। उन्होंने मेक इन इंडिया पहल को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सहयोग मॉडल न केवल भारत की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए भी जहाजों के निर्माण को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने दोहराया कि सहयोग के तहत निर्मित जहाज पाँच वर्षों में लागत वसूल करने में सक्षम होंगे और भारत को वैश्विक समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।

उन्होंने आगे बताया कि भारत सरकार ने घरेलू शिपबिल्डिंग को प्रोत्साहित करने के लिए कई मजबूत नीतिगत उपाय लागू किए हैं—

  • भारत में निर्मित जहाजों पर 15–25% पूंजी सहायता,

  • जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियों के लिए अतिरिक्त 5% प्रोत्साहन,

  • इक्विटी फंडिंग के लिए मरीन डेवलपमेंट फंड,

  • 3% ब्याज सबवेंशन योजना,

  • नए ग्रीनफील्ड शिपयार्ड और समुद्री क्लस्टरों के लिए आधारभूत संरचना सहायता।

उन्होंने कहा कि ये प्रोत्साहन जहाज निर्माताओं और निवेशकों के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं और भारत की दीर्घकालिक समुद्री आत्मनिर्भरता रणनीति के अनुरूप हैं।

हैंवा ओशियन के यार्ड दौरे से पहले मंत्री ने सियोल में कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ किम ही-चुल से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने जहाज निर्माण और समुद्री प्रौद्योगिकियों में सहयोग तथा भारत के शिपबिल्डिंग लक्ष्यों में योगदान देने वाले संभावित निवेशों पर चर्चा की।

अपनी कोरिया यात्रा के दौरान मंत्री पुरी ने देश की प्रमुख शिपिंग कंपनियों के प्रमुखों से भी गहन चर्चा की, जिनमें शामिल थे—

  • कोरिया ओशन बिज़नेस कॉरपोरेशन (KOBC) के सीईओ आन ब्यंग गिल,

  • एसके शिपिंग के सीईओ किम सुंग इक,

  • एच-लाइन शिपिंग के सीईओ सियो म्युंग डिओक,

  • पैन ओशन के वाइस प्रेसिडेंट सुंग जे योंग।

इस दौरान मंत्री पुरी ने कहा कि जहाज निर्माण तकनीक में कोरिया की अग्रणी भूमिका और भारत का मजबूत विनिर्माण आधार तथा लागत लाभ, दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों के लिए मजबूत नींव प्रदान करते हैं।

मंत्री ने कल उल्सान स्थित अत्याधुनिक HD Hyundai Heavy Industries के 1,680 एकड़ में फैले विश्व के सबसे बड़े शिपयार्ड का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि भारत, एक बड़े ऊर्जा आयातक के रूप में, हर वर्ष भारी मालभाड़ा खर्च करता है और भारतीय पीएसयू अकेले ही 59 कच्चे तेल, एलएनजी और एथेन जहाजों की खरीद कर सकते हैं।

इसके अलावा मंत्री ने सेओंगनाम स्थित कंपनी के ग्लोबल R&D सेंटर में HD Hyundai के चेयरमैन चुंग की-सुन से भी मुलाकात की, जहाँ उन्नत जहाज डिजाइन और स्मार्ट शिपयार्ड संचालन प्रणालियों की जानकारी दी गई।

दक्षिण कोरिया की यह यात्रा भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह जहाज निर्माण और शिपिंग में वैश्विक नेताओं के साथ मजबूत समुद्री साझेदारियाँ स्थापित करना चाहता है, जिससे भारत की बेड़े की क्षमता, समुद्री अवसंरचना और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।


डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे दोहा में द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (WSSD-2) में भारत का नेतृत्व —वैश्विक मंच पर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता

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श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 4 से 6 नवंबर, 2025 तक दोहा, क़तर में आयोजित होने वाले द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (World Summit for Social Development – WSSD-2) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

डॉ. मांडविया उद्घाटन सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे और विश्व नेताओं के साथ मिलकर ‘दोहा राजनीतिक घोषणा’ को अपनाएंगे। वे उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक में भी शामिल होंगे, जिसका विषय है — “सामाजिक विकास के तीन स्तंभों को सुदृढ़ करना: गरीबी उन्मूलन, सभी के लिए पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार और सम्मानजनक कार्य, तथा सामाजिक समावेशन।” इस दौरान वे भारत की समावेशी, डिजिटल रूप से समर्थ और नागरिक-केन्द्रित विकास यात्रा को साझा करेंगे।

भारत अब एक ऐसे राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर है जिसने गरीबी उन्मूलन में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। 2011 से 2023 के बीच 24.8 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले, जिससे 2022-23 में अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या घटकर केवल 2.3% रह गई। इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और जन धन योजना जैसी प्रमुख योजनाओं को जाता है।

भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी तेजी से बढ़ा है — जो अब विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा तंत्रों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा सत्यापित आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% जनसंख्या को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है — यानी 94 करोड़ से अधिक नागरिक। यह सफलता जन धन–आधार–मोबाइल (JAM) ढांचे के माध्यम से पारदर्शी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की बदौलत संभव हुई है।

भारत की भागीदारी का एक प्रमुख आकर्षण होगा नीति आयोग द्वारा आयोजित साइड इवेंट — “Pathways Out of Poverty: India’s Experience in Empowering the Last Mile” (5 नवंबर 2025)। इस सत्र में भारत की गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के विस्तार में उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में ब्राज़ील, मालदीव और ILO जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भागीदारी भी होगी, जो भारत की “2030 सतत विकास एजेंडा” और “किसी को पीछे न छोड़ने” की प्रतिबद्धता को और मज़बूती देगी।

डॉ. मांडविया ILO द्वारा आयोजित “Global Coalition for Social Justice” मंत्री स्तरीय कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और क़तर, रोमानिया, मॉरीशस, यूरोपीय संघ तथा ILO के महानिदेशक सहित कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं और वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों से द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। ये बैठकें श्रमिक गतिशीलता, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेंगी।

इसके अलावा, डॉ. मांडविया राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल पर आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लेंगे, जिसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और भारतीय व्यवसाय एवं प्रोफेशनल्स परिषद (IBPC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह मंच नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं को पारदर्शी और समावेशी अवसर प्रदान करता है।

शिखर सम्मेलन के दौरान Aspire Zone Complex और अन्य खेल अवसंरचना स्थलों का दौरा भी प्रस्तावित है, ताकि खेल प्रबंधन और युवा सहभागिता के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जा सके।

विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (WSSD-2) 1995 के कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन के उद्देश्यों — गरीबी उन्मूलन, सम्मानजनक कार्य और सामाजिक समावेशन — को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। दोहा शिखर सम्मेलन देशों को साझा लक्ष्यों की पुनः पुष्टि और सहयोग मजबूत करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

डॉ. मांडविया की यह यात्रा भारत की “विकसित भारत @2047” की दृष्टि और समाज न्याय, समावेशी विकास एवं डिजिटल सशक्तिकरण के प्रति भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


गुरुग्राम में होगा वैश्विक समुद्री सुरक्षा सम्मेलन—सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) द्वारा आयोजित किया जाएगा ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW) 2025

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गुरुग्राम, भारत में एक बार फिर वैश्विक समुद्री सुरक्षा समुदाय एकजुट होने जा रहा है, जब सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region, IFC-IOR) अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW 2025)’ का तीसरा संस्करण 3 से 5 नवम्बर 2025 तक आयोजित करेगा।

इस वर्ष का विषय है — “Enhancing Real-Time Coordination and Information Sharing Across the Indian Ocean Region” (हिंद महासागर क्षेत्र में वास्तविक समय समन्वय और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ बनाना) — जो समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए सामूहिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्षेत्रीय सहयोग को सशक्त बनाता MISW

भारत की दृष्टि ‘MAHASAGAR’ — Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions के अनुरूप, IFC-IOR समुद्री सूचना साझा करने के लिए कई कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें MISW इसका प्रमुख आयोजन है।
2019 में शुरू हुई यह कार्यशाला अब एक प्रमुख परिचालन मंच के रूप में विकसित हो चुकी है, जहाँ विश्वभर के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करते हैं, पारस्परिक विश्वास को प्रोत्साहित करते हैं और समुद्री सुरक्षा में सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

यह मंच केवल संवाद तक सीमित नहीं है — बल्कि समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री खतरों से निपटने में समन्वित कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है।
MISW ने हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और टिकाऊ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संवाद से क्रियान्वयन तक: MISW 2025 का नया अध्याय

MISW 2025, जो 3–5 नवम्बर 2025 को आयोजित होगी, भारत के साझेदार देशों और क्षेत्रीय मंचों के साथ सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
कार्यशाला का उद्घाटन उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती करेंगे और मुख्य संबोधन श्री सुशील मंसिंग खोपड़े, आईपीएस, अतिरिक्त महानिदेशक, डीजी शिपिंग द्वारा दिया जाएगा।

इस आयोजन में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), Djibouti Code of Conduct/Jeddah Amendment (DCoC/JA) और BIMSTEC देशों के 30 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
कार्यशाला के अंत में एक टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTX) आयोजित की जाएगी, जिसमें वास्तविक समुद्री परिदृश्यों का अनुकरण करते हुए सामूहिक प्रतिक्रिया योजनाओं का अभ्यास किया जाएगा।

विचार, नवाचार और कार्रवाई का समागम

MISW 2025 में UNODC, ReCAAP ISC, RMIFC, IFC Singapore, RCoC और प्रमुख शिपिंग कंपनियों के विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
भारत की National Maritime Information Sharing Centres (NMISCs) की पहल को भी इस अवसर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
चर्चा सत्रों में एक लचीले और समन्वित समुद्री सूचना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

हिंद महासागर — वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

हिंद महासागर विश्व व्यापार का केंद्र है — जहां से विश्व के अधिकांश तेल और कंटेनर यातायात गुजरता है।
यह क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
22 दिसम्बर 2018 को स्थापित IFC-IOR, जिसका नेतृत्व वर्तमान में कैप्टन सचिन कुमार सिंह कर रहे हैं, आज 15 देशों के अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (ILOs) की मेजबानी करता है और 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों तथा 25 साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता है।

सुरक्षित और समृद्ध महासागरों की दिशा में भारत की पहल

MISW 2025 IFC-IOR की उस निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो एक सहयोगी, पारदर्शी और मजबूत समुद्री सूचना नेटवर्क की स्थापना के लिए की जा रही है।
इस कार्यशाला के परिणाम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने वाले भविष्य के सहयोगी ढांचे को दिशा प्रदान करेंगे।


विश्व खाद्य दिवस 2025: FAO के 80 वर्षों और भारत की कृषि सफलता का उत्सव

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कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव, डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने विश्व खाद्य दिवस 2025 के अवसर पर मुख्य भाषण दिया। यह अवसर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की 80वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक था।

मुख्य बिंदु:

  • FAO के साथ साझेदारी और योगदान:
    डॉ. चतुर्वेदी ने FAO की तकनीकी विशेषज्ञता और मंत्रालय के साथ उनके सतत सहयोग की सराहना की, जिसने भारत को खाद्य अनाज में आत्मनिर्भर बनाने, फसल विविधीकरण बढ़ाने और नवाचार व सतत प्रथाओं के माध्यम से किसानों की क्षमता बढ़ाने में मदद की।

  • भारत की खाद्य सुरक्षा यात्रा:
    स्वतंत्रता के समय खाद्य घाटे वाले देश से भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराने वाला खाद्य-उत्पादक देश बनने का मार्ग तय किया। यह बदलाव दूरदर्शी नीतियों, वैज्ञानिक नवाचार और FAO के साथ मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से संभव हुआ।

  • पारंपरिक और आधुनिक कृषि का संतुलन:
    भारत ने राष्ट्रीय खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल की और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सार्वजनिक भंडारण जैसे तंत्रों के माध्यम से 8 करोड़ से अधिक लोगों के लिए सुलभ खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित की।

  • लघु और सीमांत किसान:
    भारत के 1.46 करोड़ छोटे और सीमांत खेत ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं। तनाव-सहिष्णु बीज, सस्ती क्रेडिट, फसल बीमा और जलवायु-स्मार्ट प्रथाओं के लक्षित हस्तक्षेपों ने उत्पादकता, लचीलापन और आय बढ़ाई।

  • सतत कृषि और डिजिटल पहलें:
    सूक्ष्म सिंचाई, एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और AgriStack जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से किसानों को तकनीक और वास्तविक समय डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है।

  • FAO की पुस्तक का विमोचन:
    Sowing Hope, Harvesting Success” नामक FAO की कॉफी टेबल बुक जारी की गई, जिसमें FAO की भारत में आठ दशक लंबी यात्रा और कृषि व संबंधित क्षेत्रों में उनके मील के पत्थर दिखाए गए हैं।
  • आंतरराष्ट्रीय सहभागिता:
    कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के भारत स्थित रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर श्री शॉम्बी शार्प और FAO के भारत प्रतिनिधि तकायुकी हागिवारा उपस्थित थे।

  • भविष्य की दिशा:
    डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि वैश्विक खाद्य चुनौतियों के लिए वैश्विक समाधान आवश्यक हैं, जो स्थानीय वास्तविकताओं पर आधारित हों। उन्होंने गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान साझा करने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • उपसंहार:
    डॉ. चतुर्वेदी ने विश्व खाद्य दिवस की शुभकामनाएं दी और सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई दी।


G20 पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में भूपेंद्र यादव ने भारत का वक्तव्य प्रस्तुत किया; ‘सॉलिडैरिटी, समानता और स्थिरता’ के लिए वैश्विक सहयोग पर दिया जोर

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आज केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत का वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए दक्षिण अफ्रीका के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने ‘सॉलिडैरिटी, समानता और स्थिरता’ विषय को आगे बढ़ाया। मंत्री ने प्रतिनिधियों से अपील की कि वे एक ऐसे विश्व का निर्माण करें जो उद्देश्य में एकजुट, अधिकारों और संसाधनों में समान और ग्रह के प्रति प्रतिबद्ध हो।

अपने संबोधन में  भूपेंद्र यादव ने संतोष व्यक्त किया कि पेरिस समझौते को 10 वर्ष पूरे होने पर सभी देश अपने NDCs निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए एक साथ आए हैं। कई मामलों में, जैसे कि भारत, ने तो निर्धारित समय सीमा से पहले ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना शुरू कर दिया।

भारत हमेशा समाधान का हिस्सा रहा है, यह रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि G20 को महत्वाकांक्षा और क्रियान्वयन के बीच पुल का काम करना चाहिए, ताकि हर राष्ट्र का योगदान सम्मानित हो और उसकी क्षमता बढ़ाई जा सके। उन्होंने कहा, “हमें ‘सामान्य लेकिन भिन्न जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत को दोहराना चाहिए। विकासशील देशों को आवश्यक वित्तीय सहायता देना केवल वचन नहीं, बल्कि एक गंभीर कर्तव्य होना चाहिए, क्योंकि समानता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक अधिकार है।”

 भूपेंद्र यादव ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष G20 शिखर सम्मेलन में ‘बुनियादी बातों पर लौटना’ और इसे ‘भविष्य की यात्रा’ के साथ जोड़ने के महत्व पर बल दिया था। मंत्री ने कहा, “पारिस्थितिकी-आधारित समाधान और भविष्य की तकनीकें मिलकर एक सतत भविष्य का निर्माण करेंगी। ज्ञान साझा करना, क्षमता निर्माण, तकनीक का सह-विकास और स्थानांतरण स्थिरता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

उन्होंने ‘समाज के सभी हिस्सों की भागीदारी’ और व्यक्तियों द्वारा अपनाए जाने वाले ‘प्रो-प्लैनेट जीवनशैली विकल्प’ के महत्व पर जोर दिया। “हम पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता द्वारा प्रस्तावित जन-केंद्रित, समग्र, एकीकृत और सहयोगी दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और उसकी सराहना करते हैं,” उन्होंने निष्कर्ष में कहा।

मंगोलिया के राष्ट्रपति ने भारत संसद का दौरा किया, द्विपक्षीय सहयोग और साझा सांस्कृतिक विरासत पर हुई चर्चा

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आज मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख़ उखना और उनके प्रतिनिधिमंडल ने भारत की संसद का दौरा किया। उन्हें लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मकर द्वार पर गर्मजोशी से स्वागत किया।

प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन की वास्तुकला, कलात्मक शिल्पकला और सांस्कृतिक धरोहर की सराहना की और नई संसद भवन में भारत की सजीव लोकतांत्रिक परंपराओं को देखा।

दोनों नेताओं के बीच उपजाऊ द्विपक्षीय बातचीत हुई।ओम बिड़ला ने कहा कि भारत और मंगोलिया अपने 70वें राजनयिक संबंध वर्ष का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने सहयोग की प्रगति की सराहना की और पिछले सात दशकों में दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। अपनी 2023 की मंगोलिया यात्रा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने दोनों देशों की प्रतिबद्धता को सशक्त पार्लियामेंटरी लोकतंत्र के लिए दोहराया।

ओम बिड़ला ने कहा कि भारत-मंगोलिया सहयोग में रक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्थिक क्षेत्र में बड़े अवसर हैं। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंध लोकतंत्र, धर्म और विकास (3D) के सिद्धांतों पर आधारित हैं और दोनों देशों के बीच गहन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध हैं।

साझा बौद्धिक विरासत पर चर्चा करते हुए,ओम बिड़ला ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ समय की सीमा से परे हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने “बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” के सिद्धांत का उल्लेख किया, जो आज भी भारत की नीति निर्धारण में मार्गदर्शक है। उन्होंने लोक सभा में धर्म चक्र का उल्लेख किया, जो धर्म आधारित शासन का प्रतीक है।

नई संसद भवन पर प्रकाश डालते हुए, ओम बिड़ला ने बताया कि COVID-19 महामारी के बावजूद भवन का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि भवन में भारत के 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाएँ और बौद्ध दर्शन के तत्व झलकते हैं। एक गैलरी में “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि” के श्लोक और “प्रकाश जैसी बनें” की प्रेरणाएँ प्रदर्शित हैं।

पार्लियामेंटरी सहयोग बढ़ाने की बात करते हुए, ओम बिड़ला ने कहा कि दोनों देशों के संसदों के बीच नियमित आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने 2023 में मंगोलिया में हस्ताक्षरित साझा समझौते (MoU) का उल्लेख किया और मंगोलियाई सांसदों को भारत के PRIDE संस्थान में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए,ओम बिड़ला ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में महिलाओं की प्रतिनिधित्व में वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान स्थानीय निकायों में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है, जबकि कई राज्यों में इसे 50% तक बढ़ाया गया है। उन्होंने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का भी उल्लेख किया, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है।

मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसु ख़ उखना ने ओम बिड़ला की 2023 की मंगोलिया यात्रा को याद किया और उनके नेतृत्व की पार्लियामेंटरी सहयोग में भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारत को मंगोलिया का “आध्यात्मिक पड़ोसी और महान मित्र” बताया और भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक शांति में योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने भारत-मंगोलिया के सहयोग और वैश्विक मंचों पर साझेदारी की आशा व्यक्त की।


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