Media24Media.com: जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने पेश किया सामुदायिक जल संरक्षण का अनूठा मॉडल

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने पेश किया सामुदायिक जल संरक्षण का अनूठा मॉडल

Document Thumbnail

जब जल संकट दुनिया के सामने सबसे बड़ी जलवायु चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है, ऐसे समय में कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि सबसे प्रभावी समाधान बड़े बांधों या भारी मशीनरी से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से शुरू होते हैं।

जल संचय जन भागीदारी की भावना के साथ जिले ने एक साधारण लेकिन क्रांतिकारी विचार को अपनाया—
क्या होगा अगर हर किसान अपनी जमीन का केवल 5% हिस्सा पानी के लिए समर्पित कर दे?

5% मॉडल: छोटी प्रतिबद्धता, बड़ा प्रभाव

आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत किसानों ने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5% हिस्सा छोटे-छोटे रीचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे (टेर्रेस पिट) बनाने के लिए अलग रखा। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को सीधे खेतों में ही रोकना और उसे जमीन में समाहित करना है।

इस पहल के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए—

  • जो वर्षा जल पहले बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल को रिचार्ज कर रहा है

  • मिट्टी का कटाव काफी कम हुआ है

  • सूखे के दौरान भी फसलों में नमी बनी रहती है

  • भूजल स्तर में स्थिर और निरंतर सुधार हुआ है

यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए बड़े निवेश या विस्थापन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सामूहिक इच्छा शक्ति ही सबसे बड़ा संसाधन है।

जनभागीदारी से मिला आंदोलन को बल

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

  • महिलाओं ने “नीर नायिका” बनकर घर-घर जागरूकता फैलाने और सोक पिट निर्माण का नेतृत्व किया।

  • युवाओं ने “जल दूत” के रूप में ट्रेंच मैपिंग, नालों की सफाई और नुक्कड़ नाटक तथा वॉल आर्ट के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश फैलाया।

  • सामूहिक श्रमदान से जिले में 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों को पुनर्जीवित किया गया।

  • Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से अधिक लाभार्थियों ने अपने घरों के पास सोक पिट बनाकर इस अभियान को एक साझा सामाजिक जिम्मेदारी में बदल दिया।

भागीदारी से स्वामित्व की ओर

इस 5% मॉडल की सफलता केवल संरचनाओं में नहीं, बल्कि समुदाय के स्वामित्व की भावना में छिपी है।

  • 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन पर 5% रिचार्ज प्रणाली अपनाई

  • पूरे जिले में 2,000 से अधिक सोक पिट बनाए गए

  • ग्रामीण आवास योजनाओं के लाभार्थियों ने भी स्वेच्छा से अपने घरों के पास सोक पिट बनाए

सामूहिक प्रयास का एक ऐतिहासिक उदाहरण तब देखने को मिला जब समुदायों ने सिर्फ तीन घंटे में 660 सोक पिट का निर्माण कर दिया।

पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ

इस पहल के प्रभाव स्पष्ट और मापनीय रहे—

  • कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ा

  • 17 दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से जीवित हो गए

  • मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ

  • आजीविका स्थिर होने से मौसमी पलायन में लगभग 25% कमी आई

इस प्रकार जल सुरक्षा ने आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत किया है।

विज्ञान और जनभागीदारी का संगम

जिला प्रशासन ने माइक्रो-वाटरशेड मैपिंग, हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस पहल को वैज्ञानिक आधार दिया। इससे हर संरचना को अधिकतम जल पुनर्भरण के लिए रणनीतिक रूप से बनाया गया।

जिले के कलेक्टर ने कहा,

“यह पहल केवल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य किसानों के भविष्य को सुरक्षित करना, पलायन को कम करना और हर गांव में भरोसेमंद जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।”

पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल

कोरिया का 5% मॉडल यह दर्शाता है कि जलवायु अनुकूलन विकेंद्रीकृत, कम लागत वाला और जनभागीदारी आधारित हो सकता है।

सिर्फ 5% भूमि समर्पित करके समुदायों ने अपने पानी के भविष्य को 100% सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय जल संरक्षण के लिए एकजुट होते हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.