Media24Media.com: परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा: आयात पर शून्य कस्टम ड्यूटी

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा: आयात पर शून्य कस्टम ड्यूटी

Document Thumbnail

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर शून्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लागू करने से देश में परमाणु ऊर्जा के विकास की गति तेज होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे परियोजनाओं की कुल लागत और प्रति यूनिट बिजली की लागत में कमी आएगी, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट अधिक व्यवहार्य बनेंगे, विशेष रूप से वे जिनमें विदेशी सहयोग और आयात की अधिक भागीदारी होती है।

लोकसभा में रमेश अवस्थी और रवि किशन द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2035 तक परमाणु ईंधन और रिएक्टर घटकों पर सीमा शुल्क में छूट से परियोजना लागत और बिजली उत्पादन लागत दोनों में कमी आएगी, जिससे परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार होगा।

700 मेगावाट के दस नए स्वीकृत प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) इकाइयों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के संबंध में मंत्री ने बताया कि न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने कई कदम उठाए हैं। इनमें निरंतरता बनाए रखने के लिए थोक ऑर्डर देना, आवश्यक सहयोग के साथ विक्रेता आधार का विस्तार करना, आयात के स्थान पर स्वदेशी उपकरणों को बढ़ावा देना, कुछ उपकरणों को श्रेणी-1 स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए आरक्षित करना तथा MSME को प्रोत्साहित करने और उन्हें निविदाओं में प्राथमिकता देने के लिए विक्रेता मीट आयोजित करना शामिल है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में अनुसंधान एवं विकास के लिए बढ़ी हुई फंडिंग के बारे में मंत्री ने कहा कि इसका उपयोग आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से बहु-विषयक प्रौद्योगिकी विकास में किया जा रहा है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में नए अनुसंधान रिएक्टरों का विकास, विशेष रूप से कैंसर उपचार के लिए आइसोटोप उत्पादन सुविधाएं, उन्नत रिएक्टर तकनीक जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और हाइड्रोजन उत्पादन, एक्सेलेरेटर तकनीक, लेजर आधारित अनुप्रयोग तथा उन्नत सामग्री और विनिर्माण तकनीक शामिल हैं।

मंत्री ने आगे बताया कि वर्तमान में तटीय राज्यों में प्रस्तावित परमाणु पार्कों के निर्माण और लॉजिस्टिक्स को प्रधानमंत्री गति शक्ति ढांचे के साथ जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.