Media24Media.com: राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राजाजी की प्रतिमा का अनावरण

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राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राजाजी की प्रतिमा का अनावरण

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभावों के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि औपनिवेशिक प्रभाव से भारत की मुक्ति कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान में चल रहा एक सतत परिवर्तन है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और सोच को आकार देने वाली औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का लगातार आह्वान किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की दृष्टि को कई पहलों के माध्यम से कार्यरूप दिया गया है, जिनमें राजभवनों का लोक भवनों में परिवर्तन; पीएमओ का सेवा तीर्थ के रूप में विकास; केंद्रीय सचिवालय का कर्तव्य भवन के रूप में नामकरण; औपनिवेशिक कालीन आपराधिक कानूनों का स्थानापन्न; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण आदि शामिल हैं।

“ये परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि सरकार की सेवा भावना को दर्शाते हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन में किए गए कई पहलों का उल्लेख किया, जिनमें उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में जनता के लिए खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप करना; ब्रिटिश एडीसी के फोटो हटाकर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाना; तथा भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित ‘ग्रंथ कुटीर’ पुस्तकालय और संग्रहालय का उद्घाटन शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सार्वजनिक चेतना से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करेंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत के प्रति उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने देश के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

उन्होंने राजाजी की बहुआयामी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक कुशल वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, जिनमें असाधारण प्रतिभा का विस्तार था। उन्होंने कहा कि राजाजी लगातार आर्थिक स्वतंत्रता के पक्षधर रहे और उनका मानना था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अपने चरित्र को ऊँचा उठाएँ, जिम्मेदारियाँ बढ़ने पर अपने विश्वास को मजबूत करें और सदैव राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखें।

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