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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्चुअली दिखाई PBG सोल्जराथॉन को हरी झंडी, सैनिकों के सम्मान में दौड़े हजारों प्रतिभागी

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 अगस्त 2026) राष्ट्रपति भवन के प्रांगण से आयोजित समारोह में प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) सोल्जराथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की स्मृति में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल एवं पहल के संरक्षक जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। दौड़ का आयोजन करियप्पा परेड ग्राउंड, दिल्ली कैंट में किया गया।

'Run for Soldiers, Run with Soldiers' की थीम पर आयोजित सोल्जराथॉन का उद्देश्य आम नागरिकों और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाना है। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय "Supporting Real Heroes – the Armed Forces of India" रखा गया, जिसके माध्यम से देश के वीर सैनिकों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मान दिया गया तथा नागरिकों से उनके प्रति एकजुटता व्यक्त करने का आह्वान किया गया।

सोल्जराथॉन में प्रतिभागियों के लिए 3 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दौड़ आयोजित की गई। बड़ी संख्या में नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य कर्मियों ने इसमें भाग लेकर सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

सोल्जराथॉन से प्राप्त आय का उपयोग सशस्त्र बलों के पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्र (Paraplegic Rehabilitation Centre), युद्ध में घायल एवं शहीद सैनिकों के परिवारों और उनके आश्रितों के कल्याण सहित विभिन्न सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। वहीं PBG सोल्जराथॉन से प्राप्त सहयोग का उपयोग प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड के घोड़ों और जवानों के कल्याण के लिए किया जाएगा।

यह आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी : बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और जनजातीय प्रतिनिधियों का हुआ विशेष सम्मान

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बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐसा वैभव देखने को मिला : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुँचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

रायपुर- बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।


इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।

प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।

बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम  छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं। 

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव - केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।

राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को 'खोड़िया राजा' तथा मिटकी को 'गप्पा देई' के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण और फ्लैग-ऑफ किया, फुटबॉल प्रतिभाओं को बताया देश की ताकत

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तथा खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट वर्षों से देश के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता रहा है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी के लिए कई नई टीमें प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई टीमों की भागीदारी से इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की लोकप्रियता और बढ़ेगी। उन्होंने सभी भाग लेने वाली टीमों और खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है और यह उत्कृष्टता, एकता तथा खेल भावना का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में फुटबॉल खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से करोड़ों खेल प्रेमी प्रेरित होते हैं और यह खेल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वैश्विक फुटबॉल मंच पर भारत को अभी लंबा सफर तय करना है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट देश में नई फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि खेल भावना केवल मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समानता, सहयोग, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की सीख देती है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक "विकसित भारत" के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और जिस प्रकार फुटबॉल खिलाड़ी एकजुट होकर अपनी टीम को जीत दिलाते हैं, उसी तरह देशवासी भी एकजुट होकर विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एमईएस अधिकारी प्रशिक्षुओं को किया संबोधित, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर दिया जोर

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने देश की रक्षा अवसंरचना को मजबूत बनाने में एमईएस की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और युवा अधिकारियों को उत्कृष्टता, नवाचार तथा राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि एमईएस देश की रक्षा अवसंरचना की रीढ़ है। रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से यह सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि एमईएस अधिकारियों का कौशल, समर्पण और कठिन परिश्रम सुनिश्चित करता है कि देश के सैनिक, नौसैनिक और वायु योद्धा अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

उन्होंने युवा अधिकारियों से उच्चतम स्तर की पेशेवर दक्षता, ईमानदारी, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही, उभरती तकनीकों को अपनाने और प्रत्येक परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, जो संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित है, उसमें आत्मनिर्भरता एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट किया है कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, उन्नत तकनीक और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार किसी भी राष्ट्र की परिचालन तत्परता और रणनीतिक प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि एमईएस ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों के रूप में एमईएस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे योजना निर्माण, निर्माण कार्यों और रखरखाव गतिविधियों में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाएं।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एमईएस अधिकारियों के प्रयास न केवल भारत को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाएंगे, बल्कि एक स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


राष्ट्रपति से मुलाकात: युवा अधिकारियों को मिला राष्ट्रनिर्माण का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू से आज  राष्ट्रपति भवन में भारतीय रेल के प्रोबेशनरी अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) तथा केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी अभियंताओं (2021–2024 बैच) ने मुलाकात की।

‘विकसित भारत’ के निर्माण में अहम भूमिका

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे समय में सार्वजनिक सेवा में आए हैं, जब भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे और सड़क सेवाओं में उनकी भूमिका सीधे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर ही विकास की नींव

राष्ट्रपति ने कहा कि रेलवे और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई ट्रेन दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई सड़क किसी पिछड़े क्षेत्र को जोड़ती है, तो वहां विकास के नए अवसर पैदा होते हैं।

लोगों के जीवन में बदलाव ही असली सफलता

उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने कार्य को केवल आंकड़ों से न आंकें, बल्कि इस आधार पर देखें कि उनके फैसलों से लोगों के जीवन में कितना सुधार आया है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है, व्यापार बढ़ता है और निवेश को बढ़ावा मिलता है।

ईमानदारी और नवाचार पर जोर

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपील की कि वे सार्वजनिक सेवा के मूल्यों—ईमानदारी, जवाबदेही और उत्कृष्टता—को हमेशा प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के समय उनके मूल्य ही उन्हें सही दिशा देंगे। साथ ही, उन्होंने निरंतर सीखने और नवाचार को अपनाने की भी सलाह दी।

राष्ट्रनिर्माण के सशक्त भागीदार

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि ये अधिकारी केवल प्रशासक नहीं, बल्कि देश के विकास के सक्षम निर्माता और जनता के विश्वास के रक्षक हैं।


द्रौपदी मुर्मु से 128वें इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम के आईएएस अधिकारियों ने की मुलाकात

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नई दिल्ली- राज्य सिविल सेवाओं से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए अधिकारियों ने, जो Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration में आयोजित 128वें इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उनकी जिम्मेदारियां केवल किसी जिले या राज्य तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर की व्यापक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। इन जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर समन्वित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग से संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ किया जा सकता है और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अब वे किसी एक क्षेत्र के प्रशासक नहीं, बल्कि पूरे देश में सुशासन के मानकों के संरक्षक हैं। उनके प्रत्येक निर्णय में वर्ष 2047 तक विकसित भारत (विकसित भारत) के लक्ष्य की झलक दिखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक आईएएस अधिकारी के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन कर जनता की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करें। उनका अनुभव और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना जटिल चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने समावेशी विकास में योगदान देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत का विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ समाज के सबसे वंचित और कमजोर वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सुनिश्चित करें कि भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।

सतत विकास और जलवायु अनुकूल शासन को भी उन्होंने प्राथमिकता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में उन्हें हरित पहलों को बढ़ावा देना, जलवायु-संवेदनशील नीतियों को अपनाना और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना होगा। आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।

राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राजाजी की प्रतिमा का अनावरण

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभावों के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि औपनिवेशिक प्रभाव से भारत की मुक्ति कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान में चल रहा एक सतत परिवर्तन है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और सोच को आकार देने वाली औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का लगातार आह्वान किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की दृष्टि को कई पहलों के माध्यम से कार्यरूप दिया गया है, जिनमें राजभवनों का लोक भवनों में परिवर्तन; पीएमओ का सेवा तीर्थ के रूप में विकास; केंद्रीय सचिवालय का कर्तव्य भवन के रूप में नामकरण; औपनिवेशिक कालीन आपराधिक कानूनों का स्थानापन्न; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण आदि शामिल हैं।

“ये परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि सरकार की सेवा भावना को दर्शाते हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन में किए गए कई पहलों का उल्लेख किया, जिनमें उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में जनता के लिए खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप करना; ब्रिटिश एडीसी के फोटो हटाकर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाना; तथा भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित ‘ग्रंथ कुटीर’ पुस्तकालय और संग्रहालय का उद्घाटन शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सार्वजनिक चेतना से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करेंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत के प्रति उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने देश के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

उन्होंने राजाजी की बहुआयामी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक कुशल वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, जिनमें असाधारण प्रतिभा का विस्तार था। उन्होंने कहा कि राजाजी लगातार आर्थिक स्वतंत्रता के पक्षधर रहे और उनका मानना था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अपने चरित्र को ऊँचा उठाएँ, जिम्मेदारियाँ बढ़ने पर अपने विश्वास को मजबूत करें और सदैव राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अमृत उद्यान विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 का उद्घाटन किया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 फरवरी 2026) राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान के विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक खोला जाएगा। उद्यान सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जिसमें अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे होगा। सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

विशेष श्रेणियों के लिए उद्यान खुलने की तिथियाँ:

  • 3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

  • 5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

  • 10 मार्च – महिलाओं एवं जनजातीय महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

  • 13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, जिसे
पर किया जा सकता है। इस वर्ष ऑन-द-स्पॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्लॉट पहले से ऑनलाइन बुक करें। किसी भी तिथि की बुकिंग पिछले दिन सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

प्रवेश एवं आवागमन व्यवस्था:

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा।
आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा हर 30 मिनट में उपलब्ध रहेगी, जो सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। अंतिम शटल बस शाम 4:00 बजे रवाना होगी।

दर्शनीय मार्ग:

बल वाटिका – प्लूमेरिया गार्डन – बरगद उद्यान – बोन्साई गार्डन – बाब्लिंग ब्रुक – सेंट्रल लॉन – लॉन्ग गार्डन – सर्कुलर गार्डन।

इस वर्ष ट्यूलिप और विभिन्न प्रजातियों के गुलाबों के साथ-साथ आगंतुक बाब्लिंग ब्रुक (झरनों वाला जल प्रवाह) और रिफ्लेक्सोलॉजी पाथ से युक्त बरगद उद्यान का भी आनंद ले सकेंगे।

आगंतुक मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियाँ, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें तथा शिशुओं के लिए दूध की बोतल साथ ले जा सकते हैं। मार्ग में पेयजल, शौचालय एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी।

अमृत उद्यान के अतिरिक्त, लोग राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन संग्रहालय का भी मंगलवार से रविवार तक भ्रमण कर सकते हैं। साथ ही प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में चेंज-ऑफ-गार्ड समारोह भी देखा जा सकता है। 



राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के लिए खुलेगा

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राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के दर्शन हेतु 3 फरवरी से 31 मार्च, 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान लोग सप्ताह में छह दिन उद्यान का भ्रमण कर सकेंगे। उद्यान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अंतिम प्रवेश शाम 5:15 बजे तक होगा।

सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। आगंतुक पहले से ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर कर सकते हैं। वहीं, वॉक-इन विज़िटर्स के लिए प्रवेश द्वार के पास सेल्फ-सर्विस विज़िटर रजिस्ट्रेशन कियोस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के मिलन बिंदु के पास स्थित है।

आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह शटल सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक हर 30 मिनट में चलेगी। शटल बसों की पहचान ‘Shuttle Service for Amrit Udyan’ के बैनर से की जा सकेगी।

अमृत उद्यान का यह आयोजन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगा, जहां वे राष्ट्रपति भवन के सुंदर और सुसज्जित उद्यानों का आनंद ले सकेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा अमेरिका के राजदूतों से परिचय पत्र स्वीकार किए

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 जनवरी 2026) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनयिक प्रतिनिधियों से उनके परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) स्वीकार किए।

इस अवसर पर जिन राजदूतों एवं उच्चायुक्तों ने राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए, वे हैं:

  1. महामहिम चंद्रदत्त सिंह,
    त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य के उच्चायुक्त

  2. महामहिम डॉ. रॉबर्ट ज़िश्ग,
    ऑस्ट्रिया गणराज्य के राजदूत

  3. महामहिम सर्जियो गोर,
    संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत

यह समारोह भारत और इन देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने संथाली भाषा में संविधान जारी होने की सराहना की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संथाली भाषा में भारतीय संविधान जारी किए जाने की सराहना की है। मोदी ने कहा कि यह कदम संविधान संबंधी जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को और गहरा करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, "भारत को संथाली संस्कृति और राष्ट्रीय विकास में संथाली लोगों के योगदान पर गर्व है।"

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा:

"एक सराहनीय प्रयास!

संथाली भाषा में संविधान संविधान संबंधी जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को और गहरा करने में मदद करेगा।

भारत को संथाली संस्कृति और राष्ट्रीय विकास में संथाली लोगों के योगदान पर गर्व है।"




भारतीय रक्षा लेखा सेवा (2024 बैच) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने राष्ट्रपति से भेंट की

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भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 2024 बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने आज (24 दिसंबर 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारी भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बजट निर्माण और लेखांकन से लेकर लेखा परीक्षा, भुगतान, वित्तीय परामर्श और रक्षा व्यय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तक, उनकी भूमिका सीधे तौर पर परिचालन तैयारियों और रक्षा अवसंरचना के विकास को प्रभावित करती है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि रक्षा सेवाओं के प्रमुख लेखा एवं वित्तीय प्राधिकरण के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे सशस्त्र बलों के समक्ष आने वाली विशिष्ट चुनौतियों, कठिनाइयों और परिचालन वास्तविकताओं को भली-भांति समझें।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम तीव्र परिवर्तन के दौर में रह रहे हैं। बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरती सुरक्षा चुनौतियां त्वरित, स्मार्ट और अधिक सटीक निर्णयों की मांग करती हैं। साथ ही, व्यावसायिक प्रक्रियाएं भी अधिक जटिल और प्रौद्योगिकी आधारित होती जा रही हैं। इस संदर्भ में रक्षा लेखा विभाग को निरंतर स्वयं को अनुकूलित, नवोन्मेषी और आधुनिक बनाते रहना चाहिए। उन्होंने सरकार के महत्वाकांक्षी ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को सक्रिय रूप से समर्थन देने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिसमें स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन देना, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना शामिल है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारी आत्मनिर्भर और सुदृढ़ रक्षा इकोसिस्टम के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने आईडीएएस अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, जिज्ञासु बने रहने और आत्मविश्वास के साथ परिवर्तन को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि सेवा का वास्तविक मापदंड पद या पहचान में नहीं, बल्कि संस्थानों के प्रभावी संचालन और नागरिकों के कल्याण के लिए उनके निरंतर और समर्पित योगदान में निहित है।

राष्ट्रपति भवन में ‘परमवीर दीर्घा’ राष्ट्र को समर्पित, प्रधानमंत्री मोदी ने किया वीर शहीदों को नमन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्थापित ‘परमवीर दीर्घा’ का स्वागत करते हुए इसे देश के अदम्य वीरों के प्रति भारत की कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस दीर्घा में प्रदर्शित परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं और यह देश की एकता व अखंडता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों का सम्मान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो परमवीर चक्र विजेताओं और अन्य विजेताओं के परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति में इस दीर्घा को राष्ट्र को समर्पित किया जाना इस अवसर को और भी विशेष बनाता है। यह दीर्घा न केवल शौर्य और बलिदान की गौरवगाथा को संजोती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय तक राष्ट्रपति भवन की गैलरियों में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे रहे, लेकिन अब उनकी जगह देश के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों ने ले ली है। यह कदम भारत के औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर स्वदेशी चेतना और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि कुछ वर्ष पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कई द्वीपों का नामकरण भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किया गया था।

युवाओं के लिए इस दीर्घा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने acknowledging कहा कि यह स्थल भारत की शौर्य परंपरा से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह युवाओं को यह संदेश देगा कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में आत्मबल, साहस और संकल्प का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा ‘विकसित भारत’ की भावना को साकार करने वाला एक प्रेरणादायी तीर्थ बनेगी, जहां देशवासी अपने वीर सपूतों के बलिदान से ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजय दिवस पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 दिसंबर, 2025) विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया।

इस दीर्घा में सभी 21 परम वीर चक्र सम्मानित वीरों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। यह दीर्घा आगंतुकों को हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में जानकारी देने का उद्देश्य रखती है, जिन्होंने देश की रक्षा में अदम्य साहस और अजेय भावना का परिचय दिया। साथ ही यह पहल उन वीरों की स्मृति को सम्मानित करने के लिए भी है, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी।

परम वीर दीर्घा के बनाए गए गलियारों में पहले ब्रिटिश एडीसी के चित्र प्रदर्शित किए जाते थे। भारतीय राष्ट्रीय नायकों के चित्र प्रदर्शित करने की यह पहल उपनिवेशी मानसिकता को छोड़ने और गर्व के साथ भारत की संस्कृति, विरासत और शाश्वत परंपराओं की समृद्धि को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जो युद्ध के दौरान अद्वितीय साहस, वीरता और आत्म-बलिदान प्रदर्शित करने वाले सैनिकों को दिया जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले IRS अधिकारी प्रशिक्षु

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भारतीय राजस्व सेवा (कस्टम्स और इंडायरेक्ट टैक्सेज) (76वें बैच) के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज (25 नवंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए राजस्व संग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही राजस्व देश के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण को वित्त प्रदान करता है। इसलिए, वे भारत के राष्ट्र-निर्माण प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कर संग्रह की प्रक्रिया करदाताओं के लिए न्यूनतम असुविधा के साथ सुचारू रूप से होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि राजस्व सेवा अधिकारी के रूप में, वे कई भूमिकाएँ निभाएँगे — प्रशासक, अन्वेषक, व्यापार के सुगमकर्ता और कानून के प्रवर्तक के रूप में। वे भारत की आर्थिक सीमाओं के प्रहरी हैं, जो देश को तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध व्यापार से बचाते हैं, साथ ही वैध व्यापार और वैश्विक वाणिज्यिक साझेदारियों को सुगम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका में प्रवर्तन और सुगमता, कानून पालन और आर्थिक विकास—इन सबके बीच एक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने सलाह दी कि वे ऐसी प्रणालियाँ विकसित करें जो पारदर्शी, जवाबदेह और प्रौद्योगिकी-आधारित हों। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता उनके पेशेवर आचरण की आधारशिला होनी चाहिए। युवा अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे नवाचारपूर्ण, विश्लेषणात्मक और तकनीकी रूप से दक्ष हों।



राष्ट्रपति भवन में भव्य समारोह: न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ली भारत के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ

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नई दिल्ली — राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित गणतंत्र मंडप में आज सुबह 10 बजे आयोजित एक गरिमामय समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ग्रहण की।

राष्ट्रपति ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रीगण, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, संवैधानिक पदाधिकारी तथा कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत के शपथ ग्रहण के साथ ही देश की न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर एक अनुभवी, संवेदनशील और दूरदर्शी न्यायाधीश की नियुक्ति हुई है। संवैधानिक कानून, जनहित मामलों और न्यायिक सुधारों में उनके व्यापक योगदान को देशभर में सराहा जाता है।

इस अवसर ने भारत की न्याय व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत की, जो न्याय, पारदर्शिता और संविधान की सर्वोच्चता के प्रति समर्पण को और मजबूत करता है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान देने वाले देशों के सेना प्रमुखों से की मुलाकात

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नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सैनिक योगदान देने वाले देशों (Troop Contributing Countries) के सेना प्रमुखों और उप-प्रमुखों के साथ, उनके जीवनसाथियों सहित, भेंट की। यह भेंट सेना प्रमुखों के सम्मेलन (Army Chiefs’ Conclave) के तहत आयोजित की गई।



राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे अपने-अपने देशों के श्रेष्ठ मूल्यों और आदर्शों के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन अनुभव, विशेषज्ञता और शांति व समृद्धि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षक अब तक विश्वभर में 71 मिशनों में तैनात किए गए हैं, जिनका उद्देश्य निर्दोष नागरिकों — विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों — के कष्टों को कम करना है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी शांति सैनिकों ने साहस और करुणा का असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का दृढ़ समर्थक है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि भारत शांति अभियानों में आरंभ से ही सक्रिय योगदानकर्ता रहा है और हमारे शांति सैनिकों ने दुनिया के कई चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने शांति अभियानों में लैंगिक समानता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। महिला शांति रक्षकों ने स्थानीय समुदायों को सशक्त किया है और विश्वास का माहौल बनाया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी देशों को मिलकर ऐसे ढांचे तैयार करने चाहिए जो सैनिक योगदान देने वाले देशों को अधिक सशक्त आवाज़ दें। साथ ही, स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय सहभागिता से स्थायी शांति की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

अंत में, राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन और इसी भावना से आयोजित अन्य कार्यक्रम नए विचारों, गहरे सहयोग और स्थायी मित्रता को प्रोत्साहित करेंगे। उन्होंने कहा कि “हम सब मिलकर ऐसा विश्व बनाएं जहाँ हर बच्चा सुरक्षित नींद सोए, हर समुदाय सौहार्द में फले-फूले और संघर्ष केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित रह जाए।”



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने डॉ. कलाम के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन, समर्पण और विचार आज भी देशवासियों को प्रेरित करते हैं।


भारत की राष्ट्रपति ने माई भारत - राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्रदान किए

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (6 अक्टूबर, 2025) राष्ट्रपति भवन में माई भारत - राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) पुरस्कार 2022-23 प्रदान किए।

माई भारत - राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का विकास स्वैच्छिक सामुदायिक सेवा के माध्यम से करना है। यह योजना 1969 में महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी के अवसर पर शुरू की गई थी।

माई भारत-एनएसएस पुरस्कार, जो 1993-94 में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किए गए थे, का उद्देश्य सामाजिक सेवा, सामुदायिक विकास और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में युवाओं के उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित और प्रोत्साहित करना है।

भारतीय सांख्यिकी सेवा, भारतीय कौशल विकास सेवा और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रपति से की मुलाकात

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नई दिल्ली भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS), भारतीय कौशल विकास सेवा (ISDS) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (CES) के प्रशिक्षणार्थियों ने आज (29 सितंबर 2025) राष्ट्रपति प्रतिभागी द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सटीक सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज के डेटा-संचालित युग में सांख्यिकी का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने अधिकारियों की भूमिका को रेखांकित किया, जो सरकारी डेटा को संकलित और विश्लेषित करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका कार्य सांख्यिकीय विधियों में विशेषज्ञता की मांग करता है, जिसे वे राष्ट्र की बढ़ती डेटा और सूचना आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लागू करेंगे।

भारतीय कौशल विकास सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल और ज्ञान किसी भी राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति के असली इंजन हैं। जो देश उच्च दक्षता वाले कार्यबल का विकास करते हैं, वे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम होते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत तकनीक-आधारित विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, यह आवश्यक है कि युवा उन्नत तकनीकी कौशल को अपनाएँ और अनुकूलित हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा ISDS अधिकारी एक विशेषज्ञ कौशल प्रशासनिक मंडल के रूप में उभरेंगे और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियर किसी राष्ट्र की तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार के बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकास पर जोर के साथ, इंजीनियरिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास की संभावना है। उन्होंने CPWD जैसे संगठनों से इन पहलों के लिए तकनीकी आधार प्रदान करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि विकास सतत और पर्यावरण-अनुकूल हो। उन्होंने यह जानकर खुशी जताई कि CPWD पर्यावरण-हितैषी उपायों को अपनाता जा रहा है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल नीति के क्रियान्वयन में ही नहीं, बल्कि प्रभावी फीडबैक के माध्यम से नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। सभी, विशेष रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, देश की प्रगति की गति तय करेगी। उन्होंने आगे कहा कि उत्साह और ईमानदारी के साथ सेवा करके अधिकारी एक अधिक समृद्ध, लचीले और समावेशी राष्ट्र के निर्माण में योगदान कर सकते हैं। उनके समर्पित प्रयासों से भारत विश्व के समक्ष शक्ति और प्रगति का आदर्श राष्ट्र बन सकता है।


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