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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल इनोवेशन मिशन के जमीनी नवप्रवर्तकों से की मुलाकात, नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (31 जुलाई 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों (Grassroots Innovators) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवर्तकों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, उनके नवाचारों को देखा तथा उनसे संवाद भी किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी विशाल क्षमता और नवाचार की भावना के बल पर जमीनी नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही जमीनी नवाचारों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर के नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचार कचरे से संपदा (Waste to Wealth), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिर्फ विचारों से सामाजिक परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मंच की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और उनके नवाचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक नवाचार की सोच के साथ समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करेगा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के विभिन्न संस्थान और नागरिक इस साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, जिससे नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद कई नवप्रवर्तकों ने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनके समर्पण और सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना की सराहना की तथा उन्हें अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अपने नवाचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचारों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण और फ्लैग-ऑफ किया, फुटबॉल प्रतिभाओं को बताया देश की ताकत

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तथा खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट वर्षों से देश के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता रहा है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी के लिए कई नई टीमें प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई टीमों की भागीदारी से इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की लोकप्रियता और बढ़ेगी। उन्होंने सभी भाग लेने वाली टीमों और खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है और यह उत्कृष्टता, एकता तथा खेल भावना का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में फुटबॉल खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से करोड़ों खेल प्रेमी प्रेरित होते हैं और यह खेल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वैश्विक फुटबॉल मंच पर भारत को अभी लंबा सफर तय करना है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट देश में नई फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि खेल भावना केवल मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समानता, सहयोग, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की सीख देती है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक "विकसित भारत" के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और जिस प्रकार फुटबॉल खिलाड़ी एकजुट होकर अपनी टीम को जीत दिलाते हैं, उसी तरह देशवासी भी एकजुट होकर विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एमईएस अधिकारी प्रशिक्षुओं को किया संबोधित, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर दिया जोर

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने देश की रक्षा अवसंरचना को मजबूत बनाने में एमईएस की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और युवा अधिकारियों को उत्कृष्टता, नवाचार तथा राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि एमईएस देश की रक्षा अवसंरचना की रीढ़ है। रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से यह सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि एमईएस अधिकारियों का कौशल, समर्पण और कठिन परिश्रम सुनिश्चित करता है कि देश के सैनिक, नौसैनिक और वायु योद्धा अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

उन्होंने युवा अधिकारियों से उच्चतम स्तर की पेशेवर दक्षता, ईमानदारी, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही, उभरती तकनीकों को अपनाने और प्रत्येक परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, जो संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित है, उसमें आत्मनिर्भरता एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट किया है कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, उन्नत तकनीक और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार किसी भी राष्ट्र की परिचालन तत्परता और रणनीतिक प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि एमईएस ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों के रूप में एमईएस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे योजना निर्माण, निर्माण कार्यों और रखरखाव गतिविधियों में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाएं।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एमईएस अधिकारियों के प्रयास न केवल भारत को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाएंगे, बल्कि एक स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे अनुभव के दौरान देश की उत्कृष्ट सेवा की है। उन्होंने विशेष रूप से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए लगातार काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के प्रति राष्ट्रपति की दृढ़ प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने राष्ट्रपति के लंबे, स्वस्थ और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में यह भी बताया कि वे आज ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात करेंगे।


राष्ट्रपति से मुलाकात: युवा अधिकारियों को मिला राष्ट्रनिर्माण का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू से आज  राष्ट्रपति भवन में भारतीय रेल के प्रोबेशनरी अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) तथा केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी अभियंताओं (2021–2024 बैच) ने मुलाकात की।

‘विकसित भारत’ के निर्माण में अहम भूमिका

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे समय में सार्वजनिक सेवा में आए हैं, जब भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे और सड़क सेवाओं में उनकी भूमिका सीधे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर ही विकास की नींव

राष्ट्रपति ने कहा कि रेलवे और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई ट्रेन दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई सड़क किसी पिछड़े क्षेत्र को जोड़ती है, तो वहां विकास के नए अवसर पैदा होते हैं।

लोगों के जीवन में बदलाव ही असली सफलता

उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने कार्य को केवल आंकड़ों से न आंकें, बल्कि इस आधार पर देखें कि उनके फैसलों से लोगों के जीवन में कितना सुधार आया है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है, व्यापार बढ़ता है और निवेश को बढ़ावा मिलता है।

ईमानदारी और नवाचार पर जोर

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपील की कि वे सार्वजनिक सेवा के मूल्यों—ईमानदारी, जवाबदेही और उत्कृष्टता—को हमेशा प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के समय उनके मूल्य ही उन्हें सही दिशा देंगे। साथ ही, उन्होंने निरंतर सीखने और नवाचार को अपनाने की भी सलाह दी।

राष्ट्रनिर्माण के सशक्त भागीदार

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि ये अधिकारी केवल प्रशासक नहीं, बल्कि देश के विकास के सक्षम निर्माता और जनता के विश्वास के रक्षक हैं।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

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केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

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भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वृंदावन में रामकृष्ण मिशन के ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया

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द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 मार्च 2026) “रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वृंदावन” में नंद किशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आध्यात्मिक चेतना और मानवीय सेवा के संगम का एक सशक्त प्रतीक है। रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक शक्तिशाली धारा को जन्म दिया, जिसे उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने मानव कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया। रामकृष्ण मिशन ने निरंतर यह संदेश दिया है कि प्रेम, सेवा और करुणा ही ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग हैं। इस मिशन ने यह भी दिखाया है कि निस्वार्थ सेवा और करुणा ही सच्ची आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। समय पर बीमारी का पता लगना और उच्च गुणवत्ता वाला उपचार किसी मरीज का जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, कई परिवारों के लिए इस बीमारी का इलाज आर्थिक कारणों से कठिन या असंभव लगता है। ऐसे समय में सेवा भावना से प्रेरित संस्थान सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जागरूकता अभियानों और समय पर जांच की सुविधाओं के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब उसके नागरिक स्वस्थ हों।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से लाखों नागरिकों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार को भी शामिल किया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेवा भावना से प्रेरित चिकित्सा संस्थान समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और सम्मान भी स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय करुणा का संगम मानव कल्याण के लिए अद्भुत कार्य कर सकता है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम से जुड़े सभी हितधारकों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान आने वाले वर्षों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।



राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राजाजी की प्रतिमा का अनावरण

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभावों के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि औपनिवेशिक प्रभाव से भारत की मुक्ति कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान में चल रहा एक सतत परिवर्तन है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और सोच को आकार देने वाली औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का लगातार आह्वान किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की दृष्टि को कई पहलों के माध्यम से कार्यरूप दिया गया है, जिनमें राजभवनों का लोक भवनों में परिवर्तन; पीएमओ का सेवा तीर्थ के रूप में विकास; केंद्रीय सचिवालय का कर्तव्य भवन के रूप में नामकरण; औपनिवेशिक कालीन आपराधिक कानूनों का स्थानापन्न; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण आदि शामिल हैं।

“ये परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि सरकार की सेवा भावना को दर्शाते हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन में किए गए कई पहलों का उल्लेख किया, जिनमें उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में जनता के लिए खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप करना; ब्रिटिश एडीसी के फोटो हटाकर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाना; तथा भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित ‘ग्रंथ कुटीर’ पुस्तकालय और संग्रहालय का उद्घाटन शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सार्वजनिक चेतना से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करेंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत के प्रति उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने देश के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

उन्होंने राजाजी की बहुआयामी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक कुशल वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, जिनमें असाधारण प्रतिभा का विस्तार था। उन्होंने कहा कि राजाजी लगातार आर्थिक स्वतंत्रता के पक्षधर रहे और उनका मानना था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अपने चरित्र को ऊँचा उठाएँ, जिम्मेदारियाँ बढ़ने पर अपने विश्वास को मजबूत करें और सदैव राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ अभियान का शुभारंभ किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (13 फरवरी 2026) नई दिल्ली में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ नामक राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का भौतिक प्रगति के साथ एकीकरण संतुलित और समग्र विकास के लिए आवश्यक है। आर्थिक प्रगति समृद्धि को बढ़ावा देती है और तकनीकी प्रगति नवाचार, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है, जो एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखते हैं। हालांकि, नैतिकता के बिना आर्थिक और तकनीकी विकास समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, अनैतिक आर्थिक प्रगति से धन और संसाधनों का संकेन्द्रण, पर्यावरणीय क्षति और समाज के कमजोर वर्गों का शोषण हो सकता है। नैतिक मूल्यों के बिना तकनीक का उपयोग मानवता के लिए विनाशकारी हो सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिकता हमें मूलभूत मूल्य और नैतिक ढांचा प्रदान करती है, जो हमें कर्मयोग यानी निस्वार्थ सेवा का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करती है। आध्यात्मिकता सत्यनिष्ठा, करुणा, अहिंसा और दूसरों की सेवा जैसे गुणों पर भी जोर देती है, जो एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक सिद्धांत हैं। जब हमारे विचार आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होते हैं, तो हम स्वार्थ से ऊपर उठकर सभी के कल्याण के बारे में सोच पाते हैं। देश का नेतृत्व आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर न्यायसंगत और निष्पक्ष प्रशासनिक निर्णय ले सकता है, जो किसी एक वर्ग के लाभ के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के हित में होते हैं। जब सरकारी कार्य न्यायपूर्ण होते हैं, तो समाज में विश्वास और स्थिरता बढ़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय राजयोग की शिक्षा देता है। यह केवल एक स्थान पर बैठकर आत्मचिंतन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मयोग इसका मूलभूत हिस्सा है। कर्मयोग का अर्थ है सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उच्च आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करना। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े लाखों लोग नियमित रूप से कर्मयोग का अभ्यास करके सार्थक जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मयोग के माध्यम से देश का प्रत्येक नागरिक भारत के सतत और समग्र विकास में योगदान दे सकता है। इससे न केवल भारत आर्थिक रूप से प्रगति करेगा, बल्कि हम एक ऐसा समाज भी बना सकेंगे जो विश्व के लिए मूल्य-आधारित जीवन का आदर्श बनेगा।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, नए ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 फरवरी, 2026) ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई तथा विश्वविद्यालय के नए सभागार (ऑडिटोरियम) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने छात्र जीवन के दौरान वे उनकी कालजयी कहानी ‘रेवती’ से गहराई से प्रभावित हुई थीं और यह प्रभाव आज भी उनके मन में अंकित है। उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं शताब्दी में एक बालिका का शिक्षा प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प उसकी अदम्य भावना का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक दूरस्थ आदिवासी गाँव में अध्ययन किया और अपने संकल्प के बल पर भुवनेश्वर जाकर हाई स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी की। इस प्रकार फकीर मोहन जी उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि फकीर मोहन जी को अपनी मातृभाषा से गहरा प्रेम था। उन्होंने लिखा था— “मेरी मातृभाषा मुझे सर्वोपरि है।” राष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थी अपने परिवेश, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक वातावरण को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। इससे वे अपने सभ्यतागत मूल्यों और जीवन पद्धति से परिचित होते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा के महत्व पर विशेष बल देती है और विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का मार्गदर्शन करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध है। हमारे शास्त्र और पांडुलिपियाँ ज्ञान और विवेक से परिपूर्ण हैं। काव्य और साहित्य के अतिरिक्त इनमें विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों का भी गहन ज्ञान निहित है। युवा विद्यार्थी इस प्राचीन ज्ञान परंपरा में अनुसंधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अतीत को समझकर और वर्तमान को आत्मसात कर विद्यार्थी न केवल अपना भविष्य बल्कि देश का भविष्य भी संवार सकते हैं।

राष्ट्रपति ने स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि ज्ञान, उत्साह और प्रतिबद्धता की शक्ति से वे समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ भी जाएँ और जो भी करें, हर प्रयास में सफलता की कुंजी समर्पण है। उन्होंने कहा कि सफल जीवन और सार्थक जीवन एक समान नहीं होते। सफल जीवन अच्छा है, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी बेहतर है। उन्होंने कहा कि यश, प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही दूसरों के लिए कुछ करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे उन लोगों की सहायता करें जो विकास की यात्रा में पीछे रह गए हैं, क्योंकि समाज का विकास तभी संभव है जब सभी का विकास हो।

राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय शैक्षणिक अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि बालासोर-भद्रक क्षेत्र धान, पान और मछली के लिए प्रसिद्ध है और विश्वविद्यालय द्वारा इन क्षेत्रों में किए जा रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सराहनीय हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘बैक टू स्कूल’, ‘अर्न व्हाइल लर्न’, ‘ईच वन टीच वन’, पर्यावरण जागरूकता और समुद्र तट स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बालासोर और भद्रक के समुद्र तटों पर नीले केकड़े (ब्लू क्रैब) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और ऐसे में ब्लू क्रैब या हॉर्सशू क्रैब पर अनुसंधान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की दूरदर्शिता को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सभी वर्गों की वृद्धि, सुरक्षा और तकनीकी विकास से देश की प्रगति को गति मिलेगी। इस दिशा में देश के सभी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वविद्यालयों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनें। आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक नेतृत्व और स्थानीय व वैश्विक चुनौतियों से जुड़ा अनुसंधान विकसित कर उच्च शिक्षण संस्थान एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जो सतत, न्यायसंगत और मानवीय मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक दृष्टि और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इस दिशा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।




राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अमृत उद्यान विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 का उद्घाटन किया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 फरवरी 2026) राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान के विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक खोला जाएगा। उद्यान सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जिसमें अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे होगा। सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

विशेष श्रेणियों के लिए उद्यान खुलने की तिथियाँ:

  • 3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

  • 5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

  • 10 मार्च – महिलाओं एवं जनजातीय महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

  • 13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, जिसे
पर किया जा सकता है। इस वर्ष ऑन-द-स्पॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्लॉट पहले से ऑनलाइन बुक करें। किसी भी तिथि की बुकिंग पिछले दिन सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

प्रवेश एवं आवागमन व्यवस्था:

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा।
आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा हर 30 मिनट में उपलब्ध रहेगी, जो सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। अंतिम शटल बस शाम 4:00 बजे रवाना होगी।

दर्शनीय मार्ग:

बल वाटिका – प्लूमेरिया गार्डन – बरगद उद्यान – बोन्साई गार्डन – बाब्लिंग ब्रुक – सेंट्रल लॉन – लॉन्ग गार्डन – सर्कुलर गार्डन।

इस वर्ष ट्यूलिप और विभिन्न प्रजातियों के गुलाबों के साथ-साथ आगंतुक बाब्लिंग ब्रुक (झरनों वाला जल प्रवाह) और रिफ्लेक्सोलॉजी पाथ से युक्त बरगद उद्यान का भी आनंद ले सकेंगे।

आगंतुक मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियाँ, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें तथा शिशुओं के लिए दूध की बोतल साथ ले जा सकते हैं। मार्ग में पेयजल, शौचालय एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी।

अमृत उद्यान के अतिरिक्त, लोग राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन संग्रहालय का भी मंगलवार से रविवार तक भ्रमण कर सकते हैं। साथ ही प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में चेंज-ऑफ-गार्ड समारोह भी देखा जा सकता है। 



अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन, युवाओं को नैतिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा का दिया संदेश

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अमृतसर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (15 जनवरी 2026) पंजाब के अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और विद्यार्थियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, नैतिक मूल्यों, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र-छात्राएं विभिन्न दिशाओं में अपने जीवन की यात्रा शुरू करेंगे। कोई सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्य करेगा, कोई उच्च शिक्षा या शोध को अपनाएगा, तो कई युवा उद्यमिता या शिक्षण के क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि भले ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग कौशल आवश्यक हों, लेकिन निरंतर सीखने की इच्छा, नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, ईमानदारी, बदलाव को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने का संकल्प, टीमवर्क की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग तथा समाज और राष्ट्र के हित में ज्ञान का प्रयोग जैसी योग्यताएं हर क्षेत्र में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को यह भी याद दिलाया कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और देश की सेवा का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि समाज ने उनकी शिक्षा में योगदान दिया है, इसलिए समाज के प्रति उनका कर्तव्य बनता है कि वे विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों के उत्थान के लिए प्रयास करें।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीकी विकास और उद्यमिता संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक युवाओं के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षण संस्थान शोध को बढ़ावा देकर, उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग मजबूत कर तथा सामाजिक रूप से उपयोगी नवाचारों को प्रोत्साहित कर इस प्रगति को और तेज कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने पंजाब में बढ़ती नशा समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह चुनौती विशेष रूप से युवाओं को प्रभावित कर रही है और समाज के स्वास्थ्य, आर्थिक व नैतिक ढांचे पर नकारात्मक असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा देने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए अगले दो दशक बेहद महत्वपूर्ण हैं। देश का भविष्य ऐसे युवाओं पर निर्भर करता है जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो, जो जिम्मेदारी से कार्य करें और निस्वार्थ भाव से सेवा करें। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से इन मूल्यों को विद्यार्थियों में विकसित करने और युवाओं से अपने पेशे के माध्यम से राष्ट्र और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना श्री गुरु नानक देव जी की 500वीं जयंती के अवसर पर हुई थी और उनके उपदेश एवं मूल्य विश्वविद्यालय के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं हमारी साझा विरासत हैं और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

उन्होंने गुरु नानक देव जी द्वारा महिलाओं को समान अधिकार देने की शिक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह के दौरान डिग्री और पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होना महिला सशक्तिकरण का सकारात्मक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के हित में महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलना आवश्यक है और इसके लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।


राष्ट्रपति का गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधन

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (15 जनवरी, 2026) पंजाब के अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई और समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद विद्यार्थी विभिन्न दिशाओं में अपने जीवन की यात्रा प्रारंभ करेंगे। कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवाएँ देंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान का मार्ग अपनाएँगे, जबकि अनेक विद्यार्थी अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करेंगे या शिक्षण के क्षेत्र में अपना करियर बनाएँगे। यद्यपि प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, फिर भी कुछ गुण ऐसे हैं जो हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और उपयोगी होते हैं। ये गुण हैं—सीखते रहने की निरंतर इच्छा और प्रवृत्ति; प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के प्रति दृढ़ निष्ठा; परिवर्तन को अपनाने का साहस; असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का संकल्प; टीमवर्क और सहयोग की भावना; समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग; तथा ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना। उन्होंने कहा कि ये गुण विद्यार्थियों को न केवल एक अच्छा पेशेवर बनाएँगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएँगे।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को यह स्मरण रखने की सलाह दी कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की सेवा का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज ने उनकी शिक्षा में योगदान दिया है और वे समाज के प्रति ऋणी हैं। विकास की यात्रा में पीछे रह गए लोगों के उत्थान के लिए प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और उद्यमिता संस्कृति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमी अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षण संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग–शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाकर और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और तेज कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरी है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक संरचना को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य ऐसे युवाओं पर निर्भर करता है जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो, जो जिम्मेदारी से कार्य करें और निःस्वार्थ भाव से सेवा करें। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे अपने विद्यार्थियों में इन मूल्यों का समावेश करें। साथ ही, उन्होंने युवाओं से भी आग्रह किया कि वे जिस भी पेशे को चुनें, उसमें उनका योगदान राष्ट्र को सशक्त बनाए और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करे।

राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना गुरु नानक देव जी की 500वीं जयंती के अवसर पर की गई थी और उनके उपदेश व मूल्य इस विश्वविद्यालय के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ हमारी साझा विरासत हैं और उनके विचार एवं आदर्श समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर हम समाज की अनेक समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने हमें यह शिक्षा दी कि समाज में महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के अनुरूप महिला सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत है, जो दीक्षांत समारोह में डिग्रियाँ और पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की बहुलता से स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के हित में यह आवश्यक है कि महिलाओं को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें और इसके लिए सभी को प्रयासरत रहना चाहिए।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा अमेरिका के राजदूतों से परिचय पत्र स्वीकार किए

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 जनवरी 2026) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनयिक प्रतिनिधियों से उनके परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) स्वीकार किए।

इस अवसर पर जिन राजदूतों एवं उच्चायुक्तों ने राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए, वे हैं:

  1. महामहिम चंद्रदत्त सिंह,
    त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य के उच्चायुक्त

  2. महामहिम डॉ. रॉबर्ट ज़िश्ग,
    ऑस्ट्रिया गणराज्य के राजदूत

  3. महामहिम सर्जियो गोर,
    संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत

यह समारोह भारत और इन देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर रहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने SOAR प्रमाणपत्र प्रदान किए और #SkillTheNation Challenge की घोषणा की

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में छात्रों और सांसदों सहित शिक्षार्थियों को SOAR (Skilling for AI Readiness) प्रमाणपत्र प्रदान किए और ‘#SkillTheNation Challenge’ की घोषणा की, जिससे भारत को डिजिटल रूप से सशक्त, भविष्य-तैयार और समावेशी राष्ट्र बनाने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि मिली।

इस अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के PM SHRI स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय के 17 चयनित छात्रों के साथ-साथ देशभर के 15 सांसदों को एआई पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

इस पहल की गति आगामी IndiaAI Summit में और सशक्त होगी, जहाँ भारत की AI के वैश्विक भविष्य को आकार देने की दृष्टि, तत्परता और सामूहिक संकल्प को मजबूती से प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने ओडिशा के रायरंगपुर में IGNOU क्षेत्रीय केंद्र का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। यह केंद्र विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी, महिला और कार्यरत शिक्षार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और शिक्षार्थी समर्थन तक पहुँच को बढ़ाएगा। यह नॉर्दर्न ओडिशा का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जो प्रवेश, परामर्श, शिक्षार्थी सेवाएँ और परीक्षाओं के साथ-साथ कौशल-उन्मुख प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को भी सशक्त करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में AI देश के GDP, रोजगार और उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश की AI प्रतिभा को विकसित करने में निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक जगत के सहयोग से सुनिश्चित कर रही है कि भारत केवल तकनीक को अपनाए ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। उन्होंने सभी से मिलकर प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने और एक तकनीक-संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत का निर्माण करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं यह देखकर भी प्रसन्न हूँ कि आज हम IGNOU क्षेत्रीय केंद्र और कौशल केंद्र, रायरंगपुर, मयूरभंज, ओडिशा का उद्घाटन करके ज्ञान और अवसर की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और भविष्य-तैयार सीखने को लोगों तक, विशेषकर आकांक्षी क्षेत्रों में, और करीब लाएंगे, जिससे तकनीकी परिवर्तन के इस युग में कोई शिक्षार्थी पीछे न रह जाए।”

राष्ट्रपति ने ‘#SkillTheNation Challenge’ की घोषणा की और नागरिकों और नेताओं से आग्रह किया कि वे भविष्य-तैयार सीखने को अपनाएँ। इस अवसर पर जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय एवं शिक्षा राज्य मंत्री ने स्वयं SOAR AI मॉड्यूल में नामांकन किया और पाठ्यक्रम पूरा किया, जिससे जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत हुआ। उन्होंने अब इस चैलेंज के तहत अन्य लोगों को नामांकित किया, जिससे नीति निर्माता, शिक्षक, पेशेवर और युवा देशभर में AI जागरूकता, क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए प्रेरित हों।

इस अवसर पर MSDE ने राष्ट्रपति भवन में Google के सहयोग से AI पर एक विशेष सत्र आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में उपस्थित थे:

  • धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री

  • जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा राज्य मंत्री

  • वरिष्ठ अधिकारी:देबश्री मुखर्जी, सचिव, MSDE, विनीत जोशी, सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, MoE, संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, MoE, सोनल मिश्रा, अतिरिक्त सचिव, MSDE

  • प्रोफ. (डॉ.) अशोक कुमार गाबा, कार्यकारी सदस्य, NCVET

  • प्रोफेसर उमा कंजिलाल, कुलपति, IGNOU

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा:

“हमारी नई पीढ़ी को अब AI-सक्षम होना चाहिए। भारत ने डिजिटल क्षेत्र में UPI और अन्य सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से अपनी क्षमता साबित की है। अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि हमारे विद्यार्थी और शिक्षक ‘AI for All’ अपनाएँ, ताकि शिक्षा, शिक्षण और शासन सभी AI की शक्ति से लाभान्वित हों। मैं व्यक्तिगत रूप से इस मिशन के प्रति प्रतिबद्ध हूँ और AI प्रमाणन प्राप्त करूँगा, क्योंकि नेताओं को सीखकर नेतृत्व करना चाहिए। मयूरभंज, ओडिशा में नए IGNOU क्षेत्रीय केंद्र के उद्घाटन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। यह शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने, भविष्य-तैयार कौशल विकसित करने और प्रत्येक शिक्षार्थी को AI-प्रेरित भारत में भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

जयंत चौधरी ने कहा:

“साल के पहले दिन, राष्ट्रपति भवन में, राष्ट्र के सर्वोच्च कार्यालय में, हमें AI-सक्षम समाज बनाने के भारत के संकल्प की पुष्टि करने का सौभाग्य मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मार्गदर्शन यह सुनिश्चित करता है कि जिज्ञासा, तैयारी और जीवनभर सीखना भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का केंद्र हैं। AI अब दूरस्थ नहीं रहा; यह पहले से ही हमारे सीखने, काम करने और समस्याओं के समाधान के तरीकों को बदल रहा है। SOAR, हमारी मंत्रालय द्वारा जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया एक नि:शुल्क पाठ्यक्रम है, जो AI को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, और पिछले छह महीनों में 1.59 लाख नामांकन इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं। मैं यहाँ केवल मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षार्थी के रूप में खड़ा हूँ, जिसने पाठ्यक्रम पूरा किया और दूसरों को भी करने के लिए प्रेरित किया।

#SkillTheNation Challenge का उद्देश्य सरकारी कार्यक्रम को जनता-प्रधान आंदोलन में बदलना है—जिससे AI अवसर बढ़ाए, समावेश को मजबूत करे, विश्वास बनाए, नैतिक अपनाने को प्रोत्साहित करे और हर भारतीय को केवल भविष्य के अनुकूल बनाने के बजाय इसे आत्मविश्वासपूर्वक आकार देने के लिए तैयार करे।”

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