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वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष अवसंरचना को सुदृढ़ करने में हुई प्रगति

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वर्ष 2025 के दौरान भारत ने प्रक्षेपण क्षमताओं, अंतरिक्ष अवसंरचना, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं।

SPADEX मिशन के अंतर्गत उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग तथा पावर ट्रांसफर का सफल प्रदर्शन किया गया, जो कक्षा में सर्विसिंग क्षमताओं और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही SPADEX उपग्रहों ने एक-दूसरे की सफल परिक्रमा भी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-04), जो PSLV-C60 / SPADEX मिशन का हिस्सा था, में इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के कई पेलोड शामिल थे। POEM-04 ने 1000 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन में कक्षा में रोबोटिक आर्म, तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीज अंकुरण का भी प्रदर्शन किया गया।

GSLV-F15 / NVS-02 मिशन (जनवरी 2025) श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला 100वां मिशन था। प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।

GSLV-F16 / NISAR मिशन इसरो–नासा का पहला संयुक्त मिशन बना। पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में सबसे महंगे पेलोड्स में से एक, नासा का 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना, भारतीय सैटेलाइट बस पर एकीकृत कर भारतीय प्रक्षेपण यान से लॉन्च किया गया। NISAR, विश्व का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी SAR उपग्रह, अब पूर्ण रूप से परिचालन में है।

LVM3-M5 / CMS-03 मिशन के माध्यम से इसरो ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी GTO उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन ने भारत से अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन में S200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन (EMA) का सत्यापन किया गया, जिसे विश्व का सबसे शक्तिशाली स्पेस-क्वालिफाइड इलेक्ट्रिक एक्टुएशन सिस्टम माना गया है।

सरकार से श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना हेतु वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही कुलसेकरपट्टिनम (तमिलनाडु) में SSLV के लिए समर्पित प्रक्षेपण स्थल का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

ठोस प्रणोदक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए श्रीहरिकोटा में 10 टन वर्टिकल मिक्सर, केरल के अलुवा में अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र की दूसरी उत्पादन लाइन, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा तथा कर्नाटक के तुमकुरु में टाइटेनियम मिश्र धातु टैंक उत्पादन सुविधा की स्थापना की गई।

इसरो ने 300 mN उच्च-थ्रस्ट विद्युत प्रणोदन प्रणाली विकसित एवं क्वालिफाई की है। नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक इंजन के पुनः प्रज्वलन का सफल प्रदर्शन किया गया। साथ ही बिना सहायक स्टार्ट-अप सिस्टम के गैस-जनरेटर क्रायोजेनिक इंजन की बूट-स्ट्रैप स्टार्टिंग का भी सफल परीक्षण किया गया।

इसरो ने स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर VIKRAM3201 विकसित किया है, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए क्वालिफाई होने वाला भारत का पहला प्रोसेसर है। इसके अतिरिक्त KALPANA32 माइक्रोप्रोसेसर भी विकसित किया गया है।

स्पेस टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सेंटर्स (STICs) कार्यक्रम के माध्यम से इसरो शैक्षणिक संस्थानों और युवा नवप्रवर्तकों को समर्थन दे रहा है।

इसरो ने SSLV तकनीक HAL को हस्तांतरित की है तथा लिथियम-आयन बैटरी, IMA बस, डिस्टे्रस अलर्ट सिस्टम जैसी कई तकनीकों को निजी उद्योगों को सौंपा है। अब तक 100 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते किए जा चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ 10 सहयोग दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए गए।
भारत ने UNCOPUOS के दो कार्य समूहों में नेतृत्व भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए इसरो ने 2,260 से अधिक उपग्रह डेटा सेट प्राप्त किए और 725 से अधिक डेटा सेट वैश्विक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए।

इसरो ने 2025 में इंटरनेशनल चार्टर ऑन स्पेस एंड मेजर डिज़ास्टर्स की छह माह तक सफलतापूर्वक अध्यक्षता की।

वर्ष 2026 में भारत ICG, BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों, और इंटरनेशनल प्लैनेटरी डेटा एलायंस की बैठकों की मेज़बानी करेगा।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई।


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