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ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विश्व बॉर्डर सुरक्षा कांग्रेस 2026 में भारत ने समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व का किया प्रदर्शन

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वियना: भारत  ने 14 से 16 अप्रैल 2026 तक वियना, ऑस्ट्रियामें आयोजित वर्ल्ड बॉर्डर सिक्योरिटी कांग्रेस 2026 में भाग लेते हुए समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला के नेतृत्व में तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने किया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए देश की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को प्रस्तुत किया, जिससे मजबूत और सक्षम समुद्री शासन प्रणाली के निर्माण पर भारत का ध्यान उजागर हुआ।

वर्ष 2012 में स्थापित वर्ल्ड बॉर्डर सिक्योरिटी कांग्रेस एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि सीमा प्रबंधन से जुड़े नए चुनौतियों, तकनीकी नवाचारों और सर्वोत्तम उपायों पर विचार-विमर्श करते हैं।

इस मंच के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जाते हैं।


भारत की अध्यक्षता में पहली ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक 2026 का आयोजन

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 भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा कार्य विभाग ने 25 मार्च 2026 को वर्चुअल माध्यम से पहला ब्रिक्स (BRICS) युवा समन्वय बैठक आयोजित की। यह बैठक शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे (IST) तक चली और इसमें सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत द्वारा वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ ही इस बैठक के माध्यम से “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत युवा सहयोग की दिशा निर्धारित की गई।

बैठक के दौरान भारत ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख पहलें शामिल थीं—कार्य समूह बैठकों का आयोजन, विषयगत सहभागिता, ‘Serve BRICS’ स्वयंसेवी गतिविधियां, युवा विकास मंच, युवा परिषद बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक।

चर्चा के दौरान सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें शिक्षा एवं कौशल विकास, युवा उद्यमिता, विज्ञान और नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य एवं खेल, पर्यावरण एवं सतत विकास, अंतर-धार्मिक संवाद तथा युवा आदान-प्रदान शामिल हैं।

यह बैठक सदस्य देशों के बीच व्यापक विषयों पर सहमति बनाने और ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिससे भारत की अध्यक्षता के दौरान आगामी कार्यक्रमों की मजबूत नींव रखी गई।

भारत-श्रीलंका सहयोग को नई दिशा: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन पर साझा अनुभव

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श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रैटेजिक डेवलपमेंट संबंधी सेक्टोरल ओवरसाइट कमेटी का एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल, एस. एम. मरिक्कर, सांसद (अध्यक्ष) के नेतृत्व में, इस समय भारत के एक सप्ताह के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर है।

इस दौरे के तहत जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (SBM-G) पर एक विस्तृत प्रस्तुति का आयोजन किया।

इस अवसर पर DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना, अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NJJM) कमल किशोर सोअन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सचिव, DDWS अशोक के. के. मीना ने बताया कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से लागू करती हैं, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक आवश्यक सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि भारत में ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए दो प्रमुख मिशन—जल जीवन मिशन (2019) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (2014)—लागू किए जा रहे हैं।

उन्होंने इन मिशनों के क्रियान्वयन से जुड़े चार प्रमुख बिंदुओं को साझा किया:

  • ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकरण और समुदाय आधारित सेवा वितरण

  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय

  • पारदर्शिता और निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग

  • सतत विकास, जैसे ग्रे-वॉटर प्रबंधन और वर्षा जल संचयन

इसके बाद जल जीवन मिशन के निदेशक हरि नारायणन मुरुगन ने भारत-श्रीलंका पेयजल सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की घोषणा की थी, जिसके बाद जल जीवन मिशन शुरू किया गया। वर्तमान में 17% से बढ़कर 82% ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंच चुका है और 15 करोड़ से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर JJM 2.0 के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें संचालन, रखरखाव, जनभागीदारी और सतत जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए उप सचिव कृतिका कुलहरी ने बताया कि यह मिशन 2014 में शुरू हुआ था और 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। अब इसका दूसरा चरण ODF प्लस और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत:

  • 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए

  • 2.72 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों का निर्माण हुआ

  • शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है

इसके बाद एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रीलंकाई प्रतिनिधियों ने भारत के अनुभवों से सीखने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने अपने देश में जल स्रोतों में भारी धातुओं (जैसे पारा) की समस्या और जल शुद्धिकरण की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया तथा सस्ती और प्रभावी तकनीकों के लिए सहयोग का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक ने कहा कि भारत और श्रीलंका आपसी सहयोग और ज्ञान साझा करने के माध्यम से जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर किया आगमन

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भारतीय नौसेना का पाल नौसैनिक प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 02 फरवरी 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह पर पहुंचा, जो उसके प्रतिष्ठित लोकायन 26 अंतरमहासागरीय अभियान का पहला अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कॉल है। ओमान में आगमन इस दस महीने लंबे अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अपना अभियान कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को शुरू किया, और अरब सागर की मौसमी हवाओं के बीच पहला चरण पूरा किया। यह पोर्ट कॉल भारत और ओमान के बीच गहरे समुद्री संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। तीन दिवसीय दौरे के दौरान, रॉयल नेवी ऑफ ओमान के साथ पेशेवर सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, पोत को स्कूल के बच्चों और स्थानीय निवासियों के लिए खोला जाएगा, ताकि समुद्री जागरूकता और जनसंपर्क को बढ़ावा मिले।

लोकायन 26 अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, सद्भावना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर जारी है।

वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष अवसंरचना को सुदृढ़ करने में हुई प्रगति

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वर्ष 2025 के दौरान भारत ने प्रक्षेपण क्षमताओं, अंतरिक्ष अवसंरचना, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं।

SPADEX मिशन के अंतर्गत उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग तथा पावर ट्रांसफर का सफल प्रदर्शन किया गया, जो कक्षा में सर्विसिंग क्षमताओं और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही SPADEX उपग्रहों ने एक-दूसरे की सफल परिक्रमा भी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-04), जो PSLV-C60 / SPADEX मिशन का हिस्सा था, में इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के कई पेलोड शामिल थे। POEM-04 ने 1000 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन में कक्षा में रोबोटिक आर्म, तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीज अंकुरण का भी प्रदर्शन किया गया।

GSLV-F15 / NVS-02 मिशन (जनवरी 2025) श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला 100वां मिशन था। प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।

GSLV-F16 / NISAR मिशन इसरो–नासा का पहला संयुक्त मिशन बना। पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में सबसे महंगे पेलोड्स में से एक, नासा का 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना, भारतीय सैटेलाइट बस पर एकीकृत कर भारतीय प्रक्षेपण यान से लॉन्च किया गया। NISAR, विश्व का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी SAR उपग्रह, अब पूर्ण रूप से परिचालन में है।

LVM3-M5 / CMS-03 मिशन के माध्यम से इसरो ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी GTO उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन ने भारत से अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन में S200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन (EMA) का सत्यापन किया गया, जिसे विश्व का सबसे शक्तिशाली स्पेस-क्वालिफाइड इलेक्ट्रिक एक्टुएशन सिस्टम माना गया है।

सरकार से श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना हेतु वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही कुलसेकरपट्टिनम (तमिलनाडु) में SSLV के लिए समर्पित प्रक्षेपण स्थल का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

ठोस प्रणोदक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए श्रीहरिकोटा में 10 टन वर्टिकल मिक्सर, केरल के अलुवा में अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र की दूसरी उत्पादन लाइन, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा तथा कर्नाटक के तुमकुरु में टाइटेनियम मिश्र धातु टैंक उत्पादन सुविधा की स्थापना की गई।

इसरो ने 300 mN उच्च-थ्रस्ट विद्युत प्रणोदन प्रणाली विकसित एवं क्वालिफाई की है। नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक इंजन के पुनः प्रज्वलन का सफल प्रदर्शन किया गया। साथ ही बिना सहायक स्टार्ट-अप सिस्टम के गैस-जनरेटर क्रायोजेनिक इंजन की बूट-स्ट्रैप स्टार्टिंग का भी सफल परीक्षण किया गया।

इसरो ने स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर VIKRAM3201 विकसित किया है, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए क्वालिफाई होने वाला भारत का पहला प्रोसेसर है। इसके अतिरिक्त KALPANA32 माइक्रोप्रोसेसर भी विकसित किया गया है।

स्पेस टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सेंटर्स (STICs) कार्यक्रम के माध्यम से इसरो शैक्षणिक संस्थानों और युवा नवप्रवर्तकों को समर्थन दे रहा है।

इसरो ने SSLV तकनीक HAL को हस्तांतरित की है तथा लिथियम-आयन बैटरी, IMA बस, डिस्टे्रस अलर्ट सिस्टम जैसी कई तकनीकों को निजी उद्योगों को सौंपा है। अब तक 100 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते किए जा चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ 10 सहयोग दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए गए।
भारत ने UNCOPUOS के दो कार्य समूहों में नेतृत्व भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए इसरो ने 2,260 से अधिक उपग्रह डेटा सेट प्राप्त किए और 725 से अधिक डेटा सेट वैश्विक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए।

इसरो ने 2025 में इंटरनेशनल चार्टर ऑन स्पेस एंड मेजर डिज़ास्टर्स की छह माह तक सफलतापूर्वक अध्यक्षता की।

वर्ष 2026 में भारत ICG, BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों, और इंटरनेशनल प्लैनेटरी डेटा एलायंस की बैठकों की मेज़बानी करेगा।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई।


नई दिल्ली में ग्लोबल फोरम ऑन टैक्स ट्रांसपेरेंसी की 18वीं प्लेनरी बैठक का उद्घाटन: भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पारदर्शिता पर जोर दिया

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केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमन ने आज नई दिल्ली में ग्लोबल फोरम ऑन ट्रांसपेरेंसी और एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन फॉर टैक्स पर्पजेस की 18वीं प्लेनरी बैठक का उद्घाटन किया।

बैठक का विषय:

“Tax Transparency: Delivering a Shared Vision Through International Cooperation”

इस फोरम में 172 सदस्य क्षेत्र शामिल हैं और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के कार्यान्वयन के लिए विश्व का प्रमुख संगठन है, जिसमें एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन ऑन रिक्वेस्ट (EOIR) और ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ फाइनेंशियल अकाउंट इंफॉर्मेशन (AEOI) शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर टैक्स चोरी और अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकना है।


मुख्य बिंदु:

  •  मंत्री सीतारमन ने कहा कि पारदर्शिता केवल अनुपालन का उपकरण नहीं है, बल्कि यह सतत विकास का आधार है। जब राष्ट्रीय धन वैध कराधान से बचता है, तो यह राजस्व और विकास दोनों में अंतर पैदा करता है।

  • उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में स्वैच्छिक अनुपालन को स्पष्टता, सरलीकरण और विश्वास निर्माण के माध्यम से बढ़ाया गया है।

  • पंकज चौधरी ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी प्राप्त करना आसान और व्यावहारिक हो गया है, जिससे करदाता का विश्वास बढ़ा है।

  • अरविंद श्रीवास्तव ने फोरम को बहुपक्षीय सहयोग का सफल उदाहरण बताया और डिजिटल अर्थव्यवस्था में कराधान और क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को आगामी प्राथमिकताओं में रखा।

प्लेनरी बैठक का महत्व:

यह बैठक ग्लोबल फोरम की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसमें सभी सदस्य क्षेत्र समान स्तर पर भाग लेते हैं और निर्णय आमतौर पर सहमति से लिए जाते हैं। बैठक में EOIR और AEOI मानकों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की जाती है और भविष्य की प्राथमिकताओं को निर्धारित किया जाता है।

भारत की भूमिका:

  • भारत 2009 से संस्थापक सदस्य है और ग्लोबल फोरम में सक्रिय नेतृत्व निभा रहा है।

  • भारत वर्तमान में स्टियरिंग ग्रुप, EOIR और AEOI पियर रिव्यू ग्रुप्स, ग्रुप ऑन रिस्क और CARF ग्रुप में प्रमुख पदों पर है।

  • भारत ने 2023–24 में एशिया इनिशिएटिव की सह-अध्यक्षता की और विकासशील देशों के लिए क्षमता निर्माण में योगदान दिया।

इस बैठक में भारत अंतरराष्ट्रीय कर पारदर्शिता और सहयोग के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराएगा और सभी देशों को समान लाभ सुनिश्चित करने पर ध्यान देगा।

भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंध मजबूत: PM मोदी और राष्ट्रपति रामाफोसा की G20 के दौरान द्विपक्षीय मुलाकात

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति महामहिम सिरिल रामाफोसा से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति रामाफोसा का गर्मजोशी भरे स्वागत और सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका द्वारा नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

भारत–दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास, खनन, युवा आदान–प्रदान और जनता से जनता के संबंध सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, नवाचार, खनन और स्टार्ट-अप क्षेत्र में पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने भारत में दक्षिण अफ्रीकी चीता पुनर्वास के लिए राष्ट्रपति रामाफोसा को धन्यवाद दिया और उन्हें भारत की पहल इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमति जताई। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने IBSA नेताओं की बैठक आयोजित करने की दक्षिण अफ्रीका की पहल की प्रशंसा की। राष्ट्रपति रामाफोसा ने 2026 में भारत की आगामी BRICS अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

भारत-मॉरीशस सहयोग: ‘ब्लू इकोनॉमी’ और समुद्री तकनीक में साझेदारी को बढ़ावा

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आज नई दिल्ली में मॉरीशस के वरिष्ठ नौकरशाहों के एक समूह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोनों देशों के बीच ‘ब्लू इकोनॉमी’ में साझा हितों को रेखांकित किया।

मंत्री ने मत्स्य पालन, समुद्री तकनीक और जल शोधन (Desalination) जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत-मॉरीशस सहयोग को गहरा करने का आह्वान किया, जिन्हें दोनों समुद्री राष्ट्रों के लिए “सतत विकास और पारस्परिक समृद्धि के नए क्षेत्र” के रूप में वर्णित किया।

राष्ट्रीय उत्कृष्ट शासन केंद्र (NCGG) में 14 मॉरीशस मंत्रालयों के 17 वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत का समुद्री संसाधन प्रबंधन और समुद्र आधारित तकनीकों में विशाल अनुभव मॉरीशस के विकास लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के “डीप ओशन मिशन” जैसी पहलों के माध्यम से समुद्री संसाधनों के उपयोग में सफलता का उल्लेख किया और मॉरीशस को ताजा पानी की कमी जैसी चुनौतियों के समाधान में भारत की जल शोधन तकनीक अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “पानी हर जगह है, पीने के लिए पर्याप्त नहीं—इस विरोधाभास का समाधान तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है।”

मंत्री ने मॉरीशस के अधिकारियों को ब्लू इकोनॉमी और समुद्री अनुसंधान में सहयोगी परियोजनाओं की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया और सुझाव दिया कि भारत के पृथ्वी विज्ञान संस्थान और संबंधित एजेंसियाँ मॉरीशस के समकक्षों के साथ मिलकर अगले दस वर्षों के लिए समुद्री अर्थव्यवस्था के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती हैं।

यह कार्यक्रम 10 से 15 नवंबर तक NCGG में आयोजित किया जा रहा है और भारत-मॉरीशस के बीच मार्च 2025 में हस्ताक्षरित दीर्घकालिक सहयोग ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 500 मॉरीशस सिविल सर्वेंट्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। वर्तमान प्रतिनिधिमंडल डॉ. धनंजय कावोल के नेतृत्व में है और यह इस पहल के तहत भारत आने वाले सबसे वरिष्ठ समूहों में से एक है।

मॉरीशस के प्रतिभागियों ने भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और शासन सुधारों में सहयोग की सराहना की, जिसमें फोरेंसिक साइंस लैब का निर्माण, तैरते हुए सोलर पैनल जैसे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं और शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा में डिजिटलाइजेशन शामिल हैं। उन्होंने प्रदर्शन-आधारित बजटिंग, वित्तीय जवाबदेही और सार्वजनिक सेवा दक्षता के लिए भारत की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने में रुचि व्यक्त की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “तकनीक पारदर्शिता का मार्ग प्रशस्त करती है और पारदर्शिता परिवर्तन को जन्म देती है।” उन्होंने भारत के डिजिटल शासन के दशकभर के अनुभव को साझा किया।

भारत और मॉरीशस के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय संबंध हैं, लगभग 70 प्रतिशत मॉरीशस के लोग भारतवंशी हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग बुनियादी ढांचे, शिक्षा, समुद्री सुरक्षा और कौशल विकास में विस्तृत है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सेवा क्षमता निर्माण में यह सहयोग “भविष्य के शासन में लाभकारी निवेश” है।

कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्ष ब्लू इकोनॉमी, नवीकरणीय ऊर्जा और जल शोधन तकनीक में संभावित परियोजनाओं की खोज जारी रखेंगे, जो आने वाले दशक में भारत-मॉरीशस साझेदारी की दिशा तय कर सकते हैं।

अंगोला की नेशनल असेंबली में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन

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अंगोला की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम कैरोलिना सेरक्वेइरा ने राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा भारत और अंगोला के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि भारत की परिवर्तनकारी विकास यात्रा अंगोला के लिए प्रेरणा है और भारत के अफ्रीका के प्रति निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की गहरी सराहना की।

अंगोला की संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास भारत और अंगोला को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अंगोला अफ्रीका के सबसे सशक्त लोकतंत्रों में से एक है।

राष्ट्रपति ने दोनों देशों की संसदों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि पारस्परिक समझ और सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।

उन्होंने अंगोला की संसद में महिलाओं के उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संसद में 39 प्रतिशत से अधिक महिला सदस्य होने के साथ, अंगोला समावेशी शासन का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने भारत में हाल ही में पारित किए गए उस कानून का भी उल्लेख किया जो विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लाया गया है।

द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, रक्षा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने अंगोला में बुनियादी ढांचे, सुशासन और कृषि, ऊर्जा तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंगोला अफ्रीका की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में अंगोला की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भूमिका की भी प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब दुनिया संघर्षों और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब वैश्विक दक्षिण के देश विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अंगोला के सांसदों से भारत-अंगोला साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए एक साथ काम करने का आग्रह किया।

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने लुआंडा में डॉ. एंतोनियो आगोस्टिन्हो नेतो की स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. नेतो, जो अंगोला के प्रथम राष्ट्रपति थे, देश की एकता, प्रतिरोध और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं और उन्होंने अंगोला की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति ने साओ मिगेल किला भी देखा, जो 16वीं सदी का औपनिवेशिक युग का दुर्ग है और अब सशस्त्र बलों के संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। यह संग्रहालय अंगोला के सैन्य इतिहास, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करता है।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान देने वाले देशों के सेना प्रमुखों से की मुलाकात

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नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सैनिक योगदान देने वाले देशों (Troop Contributing Countries) के सेना प्रमुखों और उप-प्रमुखों के साथ, उनके जीवनसाथियों सहित, भेंट की। यह भेंट सेना प्रमुखों के सम्मेलन (Army Chiefs’ Conclave) के तहत आयोजित की गई।



राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे अपने-अपने देशों के श्रेष्ठ मूल्यों और आदर्शों के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन अनुभव, विशेषज्ञता और शांति व समृद्धि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षक अब तक विश्वभर में 71 मिशनों में तैनात किए गए हैं, जिनका उद्देश्य निर्दोष नागरिकों — विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों — के कष्टों को कम करना है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी शांति सैनिकों ने साहस और करुणा का असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का दृढ़ समर्थक है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि भारत शांति अभियानों में आरंभ से ही सक्रिय योगदानकर्ता रहा है और हमारे शांति सैनिकों ने दुनिया के कई चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने शांति अभियानों में लैंगिक समानता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। महिला शांति रक्षकों ने स्थानीय समुदायों को सशक्त किया है और विश्वास का माहौल बनाया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी देशों को मिलकर ऐसे ढांचे तैयार करने चाहिए जो सैनिक योगदान देने वाले देशों को अधिक सशक्त आवाज़ दें। साथ ही, स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय सहभागिता से स्थायी शांति की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

अंत में, राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन और इसी भावना से आयोजित अन्य कार्यक्रम नए विचारों, गहरे सहयोग और स्थायी मित्रता को प्रोत्साहित करेंगे। उन्होंने कहा कि “हम सब मिलकर ऐसा विश्व बनाएं जहाँ हर बच्चा सुरक्षित नींद सोए, हर समुदाय सौहार्द में फले-फूले और संघर्ष केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित रह जाए।”



भारत में UNTCC चीफ्स कॉन्क्लेव: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शांति स्थापना में 4C सूत्र और सहयोग पर जोर दिया

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों के लिए 4C सूत्र: परामर्श, सहयोग, समन्वय और क्षमता निर्माण अपनाने पर जोर दिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14-16 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के मेनकशॉ केंद्र में आयोजित चीफ्स कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में योगदान देने वाले देशों की वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को संबोधित करते हुए 4C सूत्र – Consultation, Cooperation, Coordination & Capacity Building (परामर्श, सहयोग, समन्वय और क्षमता निर्माण) को गाइडिंग प्रिंसिपल के रूप में अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने शांति रक्षकों द्वारा आज सामना किए जा रहे जटिल चुनौतियों का उल्लेख किया, जैसे असममित युद्ध, आतंकवाद, कमजोर राजनीतिक व्यवस्थाएं, मानवीय संकट, महामारी, प्राकृतिक आपदाएँ और गलत सूचना अभियान। राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे सैन्य, पुलिस, लॉजिस्टिक्स, प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञ क्षमताओं के माध्यम से समर्थन बढ़ाएं। उन्होंने सुरक्षित संचार, निगरानी प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म जैसी नवाचारों को मिशनों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण बताया।

राजनाथ सिंह ने कहा:

“उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल बहादुरी पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है अनुकूलन, नवाचार और मिशन स्तर पर व्यापक दृष्टिकोण, जिसमें राजनीतिक, वित्तीय और अन्य हितधारक शामिल हों। पुराने बहुपक्षीय ढांचे आज की चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ हैं। हमें एक सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता है, जो यथार्थ को प्रतिबिंबित करे, सभी हितधारकों की आवाज़ दे, समकालीन चुनौतियों का समाधान करे और मानव कल्याण पर ध्यान केंद्रित करे।”

रक्षा मंत्री ने भारत की शांति स्थापना में दीर्घकालिक भूमिका को रेखांकित किया:

“लगभग 2,90,000 भारतीय कर्मियों ने 50 से अधिक UN शांति मिशनों में सेवा दी है, और विश्व स्तर पर पेशेवरिता, साहस और सहानुभूति के लिए सम्मान प्राप्त किया। हम सैनिकों, विशेषज्ञता साझा करने और सुधारों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। सहयोग और प्रौद्योगिकी साझाकरण के माध्यम से मिशनों को अधिक सक्षम, अनुकूल और मानवतावादी बनाया जा सकता है।”

उन्होंने केंद्र फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग, नई दिल्ली का उल्लेख किया, जो 90 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देता है और मिशन की सफलता के लिए अंतर-समझ और इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करता है।

आत्मनिर्भर भारत दृष्टि के तहत भारत ने शांति स्थापना मिशनों को सशक्त बनाने के लिए भूमि गतिशीलता प्लेटफॉर्म, सुरक्षित संचार, निगरानी प्रणालियाँ, UAVs और चिकित्सा समर्थन समाधान विकसित किए हैं।

रक्षा मंत्री ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को प्रेरणादायक परिवर्तन बताया:

“भारत ने इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। 2007 में लाइबेरिया में तैनात भारतीय महिला पुलिस इकाई वैश्विक सशक्तिकरण का प्रतीक बनी। आज भारतीय महिला अधिकारी मिशनों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और स्थानीय समुदायों को मार्गदर्शन दे रही हैं।”

उन्होंने भारतीय चिकित्सा टीमों की सेवाओं की सराहना की, जिन्होंने अफ्रीका में UN फील्ड अस्पतालों में हजारों नागरिकों और शांति रक्षकों का इलाज किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का विश्व गुरु बनने का उद्देश्य प्रभुत्व नहीं, बल्कि सहयोग और समावेशी प्रगति है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की अहिंसा और शांति की विरासत UN शांति स्थापना और शांति निर्माण मिशनों को समृद्ध कर सकती है।

मुख्य सैन्य नेतृत्व के विचार:

  • सचिवीय स्वागत संबोधन: सीआरएस जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत के UN शांति मिशनों में योगदान और केंद्र फॉर UN पीसकीपिंग की भूमिका को रेखांकित किया।

  • सीडीएस जनरल अनिल चौहान और सीएएस एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने नवाचार, समावेशिता और इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर दिया।

UNTCC चीफ्स कॉन्क्लेव:

  • भारतीय सेना द्वारा आयोजित, 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को एकत्र करता है।

  • सहभागी देश: अल्जीरिया, आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, बुरुंडी, कंबोडिया, मिस्र, इथियोपिया, फीजी, फ्रांस, घाना, इटली, कज़ाखस्तान, केन्या, किर्गिस्तान, मेडागास्कर, मलेशिया, मंगोलिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, पोलैंड, रवांडा, श्रीलंका, सेनेगल, तंज़ानिया, थाईलैंड, युगांडा, उरुग्वे और वियतनाम।

  • उद्देश्य: ऑपरेशनल चुनौतियाँ, खतरे, इंटरऑपरेबिलिटी, समावेशिता, प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण पर विचार-विमर्श और साझा समझ विकसित करना।

कांग्रेस भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम” नीति के अनुसार शांति और सहयोग की वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ के राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के लिए ITEC कार्यकारी क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू

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नई दिल्ली में आज छह दिवसीय इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) कार्यकारी क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत और विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें 12 देशों के 43 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें मॉरीशस, जॉर्डन, जॉर्जिया, फिलिपींस, कतर, फिजी, उज़्बेकिस्तान, बोलीविया, नाइजीरिया, माली, मोरक्को और पराग्वे शामिल हैं।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्लोबल साउथ के NHRIs की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना है और यह NHRC भारत की मानवाधिकारों पर वैश्विक संवाद, साउथ-साउथ सहयोग और अधिकार आधारित शासन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उद्घाटन सत्र:

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए NHRC, भारत के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया प्रदर्शनों, असंतोष, असमानता, अनिश्चितता और राजनीतिक अशांति से प्रभावित है।

उन्होंने कार्नेगी ग्लोबल प्रोटेस्ट ट्रैकर रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले वर्ष में विभिन्न देशों में 100 से अधिक प्रदर्शन हुए, जिनके कारणों में गुस्सा, भ्रष्टाचार की धारणा, सत्ता का दुरुपयोग और मीडिया का दमन शामिल हैं। 2022 से 2025 के बीच इन प्रदर्शनों ने भारत के पड़ोसी तीन देशों में सरकारों को भी गिरा दिया। न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने बताया कि जहां मानवाधिकार संस्थान मजबूत हैं, वहां प्रदर्शन हिंसक रूप नहीं लेते। ये संस्थान जनता के असंतोष के लिए सुरक्षा वाल्व का काम करते हैं।

उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता, विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और कला रूपों के बीच समरसता और वैश्विक साउथ देशों के मानवाधिकार अनुभवों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ITEC कार्यक्रम के माध्यम से NHRC, भारत एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ देश आपस में सीख सकते हैं और ज्ञान साझा कर सकते हैं, यह वैदिक संस्कृति के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के सिद्धांत के अनुरूप है।

प्रारंभिक विचार:

NHRC, भारत के महासचिव भरत लाल ने कहा कि मानवाधिकार हमेशा विकसित होते रहते हैं और स्थिर नहीं हैं। उन्होंने भारत की ज्ञान और अनुभव साझा करने की परंपरा पर बल दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के बीच साझा चुनौतियों पर आपसी सीख और सहयोग को बढ़ावा देना है। इन चुनौतियों में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकें जैसे AI शामिल हो सकती हैं।

कार्यक्रम की रूपरेखा:

NHRC, भारत के संयुक्त सचिव समीर कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा और इंटरैक्टिव सत्रों के बारे में बताया। प्रतिभागियों ने NHRC, भारत द्वारा वैश्विक मानवाधिकार मुद्दों पर बहुपक्षीय संवाद का अवसर प्रदान करने की सराहना की। संयुक्त सचिव सैडिंगपुई छकछुआक ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जो प्रतिभागियों को मानवाधिकारों के विभिन्न आयामों और सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोणों की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।


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