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विक्रम-1 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर टीडीबी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी बधाई

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को विक्रम-1 मिशन की सफल उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है। यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और सशक्त बनाती है तथा देश में विकसित डीप-टेक नवाचारों की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करती है।

यह ऐतिहासिक सफलता टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है, जिसके तहत बोर्ड व्यावसायीकरण की मजबूत संभावनाओं वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन देता रहा है।

स्वदेशी प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) प्रौद्योगिकियों के विकास में स्काईरूट एयरोस्पेस के अग्रणी योगदान को देखते हुए, कंपनी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 के अवसर पर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा नेशनल टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक भी उपस्थित थे।

यह पुरस्कार स्काईरूट एयरोस्पेस को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण बाजार के लिए विकसित स्वदेशी क्रायोजेनिक, लिक्विड और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीकों के विकास के लिए प्रदान किया गया था। इससे कंपनी की तकनीकी उत्कृष्टता और व्यावसायिक क्षमता को उसके शुरुआती चरण में ही मान्यता मिली। आज विक्रम-1 मिशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कारों का उद्देश्य भारत की उन कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, जो क्रांतिकारी तकनीकों के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा,

"स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप पुरस्कार से सम्मानित एक उभरते स्टार्ट-अप से लेकर भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने तक की उनकी यात्रा, भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। अपने नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI Fund) के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड को एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।"

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड लगातार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार-आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करता रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस जैसी कंपनियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर संस्थागत पहचान और निरंतर सहयोग भारत के नवाचार-आधारित उद्यमियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

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भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के दूरदर्शी निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन ‘आगमन’ के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष साक्षी बनते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। इस मिशन के तहत विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अपने निर्धारित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई जिसने भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए नहीं खोला होता तो यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने ISRO, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की भी सराहना करते हुए कहा कि इनके सहयोग से तैयार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा दी है। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और युवा उद्यमियों की प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर की तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में उच्च तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के अधिकांश पहले प्रक्षेपण केवल डमी पेलोड लेकर उड़ान भरते हैं, जबकि विक्रम-1 अपने साथ कई प्रयोगात्मक पेलोड, तकनीकी प्रदर्शन और भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के पेलोड भी लेकर गया। इससे भारत की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। कुछ वर्षों पहले जहां निजी लॉन्च इकोसिस्टम लगभग नहीं था, वहीं आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप, पहला स्पेस यूनिकॉर्न और लगभग 9 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूद है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

पूरी तरह भारत में विकसित विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियां शामिल हैं, जैसे—

  • भारत का पहला ऑल-कार्बन कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट,

  • 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन,

  • उन्नत अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम,

  • और देश के सबसे लंबे मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक।

इस मिशन ने प्रणोदन (Propulsion), एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल परीक्षण किया, जिससे भारत के भविष्य के व्यावसायिक ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीति सुधारों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और भारतीय नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं रहा।"

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त प्रतीक है विक्रम-1 : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन की नीतियों के फलस्वरूप आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना रहा है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण इसी परिवर्तनकारी सोच का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष अवसंरचना को सुदृढ़ करने में हुई प्रगति

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वर्ष 2025 के दौरान भारत ने प्रक्षेपण क्षमताओं, अंतरिक्ष अवसंरचना, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं।

SPADEX मिशन के अंतर्गत उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग तथा पावर ट्रांसफर का सफल प्रदर्शन किया गया, जो कक्षा में सर्विसिंग क्षमताओं और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही SPADEX उपग्रहों ने एक-दूसरे की सफल परिक्रमा भी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-04), जो PSLV-C60 / SPADEX मिशन का हिस्सा था, में इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के कई पेलोड शामिल थे। POEM-04 ने 1000 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन में कक्षा में रोबोटिक आर्म, तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीज अंकुरण का भी प्रदर्शन किया गया।

GSLV-F15 / NVS-02 मिशन (जनवरी 2025) श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला 100वां मिशन था। प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।

GSLV-F16 / NISAR मिशन इसरो–नासा का पहला संयुक्त मिशन बना। पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में सबसे महंगे पेलोड्स में से एक, नासा का 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना, भारतीय सैटेलाइट बस पर एकीकृत कर भारतीय प्रक्षेपण यान से लॉन्च किया गया। NISAR, विश्व का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी SAR उपग्रह, अब पूर्ण रूप से परिचालन में है।

LVM3-M5 / CMS-03 मिशन के माध्यम से इसरो ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी GTO उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन ने भारत से अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन में S200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन (EMA) का सत्यापन किया गया, जिसे विश्व का सबसे शक्तिशाली स्पेस-क्वालिफाइड इलेक्ट्रिक एक्टुएशन सिस्टम माना गया है।

सरकार से श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना हेतु वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही कुलसेकरपट्टिनम (तमिलनाडु) में SSLV के लिए समर्पित प्रक्षेपण स्थल का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

ठोस प्रणोदक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए श्रीहरिकोटा में 10 टन वर्टिकल मिक्सर, केरल के अलुवा में अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र की दूसरी उत्पादन लाइन, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा तथा कर्नाटक के तुमकुरु में टाइटेनियम मिश्र धातु टैंक उत्पादन सुविधा की स्थापना की गई।

इसरो ने 300 mN उच्च-थ्रस्ट विद्युत प्रणोदन प्रणाली विकसित एवं क्वालिफाई की है। नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक इंजन के पुनः प्रज्वलन का सफल प्रदर्शन किया गया। साथ ही बिना सहायक स्टार्ट-अप सिस्टम के गैस-जनरेटर क्रायोजेनिक इंजन की बूट-स्ट्रैप स्टार्टिंग का भी सफल परीक्षण किया गया।

इसरो ने स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर VIKRAM3201 विकसित किया है, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए क्वालिफाई होने वाला भारत का पहला प्रोसेसर है। इसके अतिरिक्त KALPANA32 माइक्रोप्रोसेसर भी विकसित किया गया है।

स्पेस टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सेंटर्स (STICs) कार्यक्रम के माध्यम से इसरो शैक्षणिक संस्थानों और युवा नवप्रवर्तकों को समर्थन दे रहा है।

इसरो ने SSLV तकनीक HAL को हस्तांतरित की है तथा लिथियम-आयन बैटरी, IMA बस, डिस्टे्रस अलर्ट सिस्टम जैसी कई तकनीकों को निजी उद्योगों को सौंपा है। अब तक 100 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते किए जा चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ 10 सहयोग दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए गए।
भारत ने UNCOPUOS के दो कार्य समूहों में नेतृत्व भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए इसरो ने 2,260 से अधिक उपग्रह डेटा सेट प्राप्त किए और 725 से अधिक डेटा सेट वैश्विक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए।

इसरो ने 2025 में इंटरनेशनल चार्टर ऑन स्पेस एंड मेजर डिज़ास्टर्स की छह माह तक सफलतापूर्वक अध्यक्षता की।

वर्ष 2026 में भारत ICG, BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों, और इंटरनेशनल प्लैनेटरी डेटा एलायंस की बैठकों की मेज़बानी करेगा।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई।


प्रधानमंत्री ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। इस मिशन के तहत भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह तथा अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान अपने निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

मोदी ने कहा,

“LVM3 द्वारा विश्वसनीय हेवी-लिफ्ट क्षमता का प्रदर्शन किया जाना गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों की नींव को मजबूत करता है, वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं के विस्तार में सहायक है और वैश्विक साझेदारियों को और सुदृढ़ करता है।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट किया:

“भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम…

LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग, जिसके माध्यम से भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह — अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान — अपने निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह भारत की हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण क्षमता को सुदृढ़ करता है और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में हमारी बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।

यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारे प्रयासों को भी दर्शाता है। हमारे परिश्रमी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई।

भारत अंतरिक्ष की दुनिया में निरंतर नई ऊँचाइयों को छूता रहेगा!”

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