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भारत-फ्रांस के बीच विज्ञान और अंतरिक्ष सहयोग होगा मजबूत, जितेंद्र सिंह और फिलिप बैप्टिस्ट की अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में भारत-फ्रांस के बीच विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल साइंस और समुद्री अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 को ‘इंडो-फ्रेंच ईयर ऑफ इनोवेशन’ घोषित किया गया है, जो दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं का मार्ग खोलेगा।

उन्होंने ISRO और CNES के बीच लंबे समय से जारी सहयोग, मेघा-ट्रॉपिक्स, SARAL और TRISHNA जैसे संयुक्त मिशनों का भी उल्लेख किया। वहीं फ्रांस ने गगनयान मिशन में भारत को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण, भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन में बड़ी उपलब्धि

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भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ड्रोग पैराशूट का योग्यता स्तर भार परीक्षण (Qualification Level Load Test) सफलतापूर्वक DRDO के टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ स्थित रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) सुविधा में किया गया।

RTRS एक विशेष उच्च-गति परीक्षण सुविधा है, जिसका उपयोग एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक परीक्षणों के लिए किया जाता है।

परीक्षण का विवरण

यह परीक्षण 18 फरवरी 2026 को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (ISRO), एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRDO) और TBRL की टीमों के सहयोग से किया गया।

RTRS डायनामिक परीक्षण में ऐसे भारों का अनुकरण किया गया, जो वास्तविक उड़ान में पड़ने वाले अधिकतम भार से भी अधिक थे। इससे पैराशूट के डिज़ाइन में अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन की पुष्टि हुई।

तकनीकी सफलता और स्वदेशी क्षमता

इस परीक्षण से यह साबित हुआ कि भारत उच्च-शक्ति रिबन पैराशूट डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम है।
यह उपलब्धि अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों के लिए उन्नत परीक्षण सुविधाएं और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने में TBRL के महत्वपूर्ण योगदान को भी दर्शाती है।

रक्षा मंत्री और DRDO प्रमुख की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गगनयान ड्रोग पैराशूट के सफल परीक्षण पर DRDO, ISRO और उद्योग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

DRDO के सचिव एवं अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी।


वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष अवसंरचना को सुदृढ़ करने में हुई प्रगति

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वर्ष 2025 के दौरान भारत ने प्रक्षेपण क्षमताओं, अंतरिक्ष अवसंरचना, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं।

SPADEX मिशन के अंतर्गत उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग तथा पावर ट्रांसफर का सफल प्रदर्शन किया गया, जो कक्षा में सर्विसिंग क्षमताओं और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही SPADEX उपग्रहों ने एक-दूसरे की सफल परिक्रमा भी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-04), जो PSLV-C60 / SPADEX मिशन का हिस्सा था, में इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के कई पेलोड शामिल थे। POEM-04 ने 1000 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन में कक्षा में रोबोटिक आर्म, तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीज अंकुरण का भी प्रदर्शन किया गया।

GSLV-F15 / NVS-02 मिशन (जनवरी 2025) श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला 100वां मिशन था। प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।

GSLV-F16 / NISAR मिशन इसरो–नासा का पहला संयुक्त मिशन बना। पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में सबसे महंगे पेलोड्स में से एक, नासा का 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना, भारतीय सैटेलाइट बस पर एकीकृत कर भारतीय प्रक्षेपण यान से लॉन्च किया गया। NISAR, विश्व का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी SAR उपग्रह, अब पूर्ण रूप से परिचालन में है।

LVM3-M5 / CMS-03 मिशन के माध्यम से इसरो ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी GTO उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन ने भारत से अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन में S200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन (EMA) का सत्यापन किया गया, जिसे विश्व का सबसे शक्तिशाली स्पेस-क्वालिफाइड इलेक्ट्रिक एक्टुएशन सिस्टम माना गया है।

सरकार से श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना हेतु वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही कुलसेकरपट्टिनम (तमिलनाडु) में SSLV के लिए समर्पित प्रक्षेपण स्थल का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

ठोस प्रणोदक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए श्रीहरिकोटा में 10 टन वर्टिकल मिक्सर, केरल के अलुवा में अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र की दूसरी उत्पादन लाइन, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा तथा कर्नाटक के तुमकुरु में टाइटेनियम मिश्र धातु टैंक उत्पादन सुविधा की स्थापना की गई।

इसरो ने 300 mN उच्च-थ्रस्ट विद्युत प्रणोदन प्रणाली विकसित एवं क्वालिफाई की है। नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक इंजन के पुनः प्रज्वलन का सफल प्रदर्शन किया गया। साथ ही बिना सहायक स्टार्ट-अप सिस्टम के गैस-जनरेटर क्रायोजेनिक इंजन की बूट-स्ट्रैप स्टार्टिंग का भी सफल परीक्षण किया गया।

इसरो ने स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर VIKRAM3201 विकसित किया है, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए क्वालिफाई होने वाला भारत का पहला प्रोसेसर है। इसके अतिरिक्त KALPANA32 माइक्रोप्रोसेसर भी विकसित किया गया है।

स्पेस टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सेंटर्स (STICs) कार्यक्रम के माध्यम से इसरो शैक्षणिक संस्थानों और युवा नवप्रवर्तकों को समर्थन दे रहा है।

इसरो ने SSLV तकनीक HAL को हस्तांतरित की है तथा लिथियम-आयन बैटरी, IMA बस, डिस्टे्रस अलर्ट सिस्टम जैसी कई तकनीकों को निजी उद्योगों को सौंपा है। अब तक 100 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते किए जा चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ 10 सहयोग दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए गए।
भारत ने UNCOPUOS के दो कार्य समूहों में नेतृत्व भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए इसरो ने 2,260 से अधिक उपग्रह डेटा सेट प्राप्त किए और 725 से अधिक डेटा सेट वैश्विक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए।

इसरो ने 2025 में इंटरनेशनल चार्टर ऑन स्पेस एंड मेजर डिज़ास्टर्स की छह माह तक सफलतापूर्वक अध्यक्षता की।

वर्ष 2026 में भारत ICG, BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों, और इंटरनेशनल प्लैनेटरी डेटा एलायंस की बैठकों की मेज़बानी करेगा।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई।


विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित है भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री; तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित हो रही है, जिसमें तकनीक शासन, प्रशासन और आर्थिक परिवर्तन की केंद्रीय शक्ति के रूप में कार्य कर रही है।

वर्ष 2025 के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उपलब्धियों पर दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि आने वाले दो दशकों में भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व अंतरिक्ष, महासागर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे नवाचार-आधारित क्षेत्र करेंगे।

इस अवसर पर भारत की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं के शीर्ष नेतृत्व उपस्थित थे, जिनमें भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए. के. सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज सरकार द्वारा किए जा रहे प्रत्येक बड़े सुधार—चाहे वह किसी भी मंत्रालय या विभाग से संबंधित हों—तकनीक-सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन 2014 से राष्ट्रीय नीति-निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को निरंतर प्राथमिकता देने का परिणाम है। प्रधानमंत्री के 2014 के बाद से प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस संबोधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे सरकार की दीर्घकालिक सोच और वैश्विक दृष्टि का प्रतिबिंब बताया।

मंत्री ने डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसे प्रमुख मिशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहरे समुद्र अन्वेषण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में जहां एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएगा, वहीं भारत 6,000 मीटर गहराई तक मानव-युक्त पनडुब्बी भी भेजेगा—जो एक ऐतिहासिक दोहरी उपलब्धि होगी।

उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड को वर्ष की प्रमुख उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके तहत सरकार निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को प्रत्यक्ष समर्थन दे रही है, जो वैश्विक स्तर पर एक अभूतपूर्व कदम है। इसके साथ ही अनुसंधान निधि के लोकतंत्रीकरण और उद्योग व परोपकार सहित गैर-सरकारी स्रोतों से 50–60% संसाधन जुटाने के उद्देश्य से अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेशनल क्वांटम मिशन, NIDHI, PRERNA/PURSE और VAIBHAV कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें स्टार्टअप्स, अनुसंधान अवसंरचना और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को सशक्त बना रही हैं, साथ ही भारतीय वैज्ञानिक प्रवासी समुदाय के साथ संरचित सहभागिता को बढ़ावा दे रही हैं।

सीएसआईआर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने स्टील स्लैग से बनी टिकाऊ सड़कों, स्वदेशी पैरासिटामोल उत्पादन, भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, मिलेट आधारित खाद्य नवाचारों और पीपीपी मॉडल पर विकसित हंसा-एनजी प्रशिक्षण विमान जैसी वैश्विक स्तर पर मान्य नवाचारों को रेखांकित किया। उन्होंने इसे “स्वदेशी नवाचार को विदेशी बाजारों की स्वीकृति” का उदाहरण बताया। छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु ‘वन डे ऐज़ ए साइंटिस्ट’ जैसे जन-संपर्क कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया।

पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में मंत्री ने आईएमडी की ‘नाउकास्टिंग’ क्षमता के माध्यम से तीन घंटे पूर्व सटीक मौसम पूर्वानुमान में हुई प्रगति, लक्षद्वीप में समुद्री संसाधनों से सतत मीठे पानी के उत्पादन हेतु स्थापित अलवणीकरण संयंत्र, महासागरीय ऊर्जा, समुद्री अवलोकन प्रणालियों और जलवायु अनुकूलन में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब उच्च तकनीक—जैसे टीके और चिकित्सा उपकरण—का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन चुका है और भारत की बायोइकोनॉमी एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा, “सबसे अच्छा अभी आना बाकी है,” और विश्वास जताया कि विज्ञान-आधारित सुधार भारत को 2047 से पहले ही विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर देंगे।

प्रधानमंत्री ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। इस मिशन के तहत भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह तथा अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान अपने निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

मोदी ने कहा,

“LVM3 द्वारा विश्वसनीय हेवी-लिफ्ट क्षमता का प्रदर्शन किया जाना गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों की नींव को मजबूत करता है, वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं के विस्तार में सहायक है और वैश्विक साझेदारियों को और सुदृढ़ करता है।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट किया:

“भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम…

LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग, जिसके माध्यम से भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह — अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान — अपने निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह भारत की हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण क्षमता को सुदृढ़ करता है और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में हमारी बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।

यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारे प्रयासों को भी दर्शाता है। हमारे परिश्रमी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई।

भारत अंतरिक्ष की दुनिया में निरंतर नई ऊँचाइयों को छूता रहेगा!”

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