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अंतरिक्ष सुरक्षा, बीमा और मलबा प्रबंधन को सुदृढ़ कर रहा है भारत

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भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों की बढ़ती भूमिका और निजी क्षेत्र की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए सरकार अंतरिक्ष सुरक्षा, मलबा प्रबंधन और बीमा ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। देश में विभिन्न प्रकार के स्पेस इंश्योरेंस उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें भारतीय बीमा कंपनियां वैश्विक बीमाकर्ताओं, री-इंश्योरर्स, अंडरराइटर्स और ब्रोकर्स के सहयोग से प्रदान कर रही हैं। निजी संस्थाओं को उनके द्वारा किए जा रहे अंतरिक्ष अभियानों के अनुरूप उपयुक्त बीमा लेने की स्वतंत्रता दी गई है।

स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) के बढ़ते महत्व को स्वीकार करते हुए, अंतरिक्ष संचालन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ISRO System for Safe and Sustainable Space Operations Management (IS4OM) की स्थापना की गई है। यह प्रणाली अंतरिक्ष उड़ानों की सुरक्षा, अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण और भीड़भाड़ वाले अंतरिक्ष वातावरण में उभरती चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।

ISRO अपने सभी मिशनों में संयुक्त राष्ट्र की UN-COPUOS और Inter-Agency Space Debris Coordination Committee (IADC) द्वारा अनुशंसित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देशों का अधिकतम पालन करता है। इसके साथ ही, ISRO अंतरिक्ष गतिविधियों की सुरक्षा और सतत उपयोग से जुड़े वैश्विक दिशा-निर्देशों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ISRO, IADC, International Academy of Astronautics (IAA), International Organization for Standardization (ISO), International Astronautical Federation (IAF) और संयुक्त राष्ट्र के Long Term Sustainability Working Group जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का सक्रिय सदस्य है।

भारतीय अंतरिक्ष नीति में अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण और SSA क्षमताओं के निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है। इसी दिशा में ISRO द्वारा Debris Free Space Mission (DFSM) पहल का नेतृत्व किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों—सरकारी और गैर-सरकारी—को मलबा मुक्त बनाना है। यह पहल वैश्विक अंतरिक्ष स्थिरता प्रयासों के अनुरूप है और भारत को बाह्य अंतरिक्ष में सुरक्षा, संरक्षा और सततता को प्राथमिकता देने वाले देश के रूप में स्थापित करती है।

सरकार देश में अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े निजी संस्थानों को उनके अभियानों से जुड़े जोखिमों को कवर करने के लिए पर्याप्त और उपयुक्त बीमा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में, “भारतीय अंतरिक्ष वस्तुओं से उत्पन्न तृतीय पक्ष क्षति के लिए राज्य की देयता से संबंधित नीति ढांचा एवं दिशानिर्देश” का एक मसौदा विभिन्न स्तरों पर परामर्श प्रक्रिया में है। इस मसौदे में, अन्य प्रावधानों के साथ-साथ, प्रक्षेपण संचालकों द्वारा तृतीय पक्ष देयता बीमा बनाए रखने का प्रावधान भी शामिल है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों के तहत राज्य की देयता को कवर किया जा सके।

चूंकि अंतरिक्ष गतिविधियां उच्च पूंजी निवेश और जोखिम से जुड़ी होती हैं, इसलिए वैश्विक स्तर पर बीमा और री-बीमा कंपनियों द्वारा जोखिम को आपस में साझा करना एक सामान्य प्रथा है। भारत में भी इसी वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप बीमा तंत्र उपलब्ध है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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