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कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी: भारत में कृषि कचरे से ऊर्जा और संसाधन बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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भारत में बढ़ते कृषि और खाद्य अपशिष्ट (वेस्ट) की समस्या पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। देश में हर साल लगभग 35 करोड़ टन कृषि अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें फसल अवशेष, भूसा, भूसी और खाद्य प्रसंस्करण के उप-उत्पाद शामिल हैं। सही प्रबंधन न होने पर यह अपशिष्ट वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कृषि अवशेषों से 18,000 मेगावाट से अधिक ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। इसके अलावा, इनसे जैविक खाद भी बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है।

सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे से संसाधन बनाने की सोच

सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करना है। यह मॉडल Reduce, Reuse, Recycle, Refurbish, Recover और Repair के सिद्धांतों पर आधारित है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 1 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।

कृषि अपशिष्ट के प्रमुख स्रोत

  • फसल अवशेष (स्टबल): जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है।

  • पशु अपशिष्ट: गोबर और अन्य अपशिष्ट से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा सकती है।

  • पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस: भंडारण और परिवहन में खाद्य नुकसान।

  • फूड वेस्ट: घरों और बाजारों में खाद्य बर्बादी, जिससे ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं।

सरकारी पहलें: कचरे से संपदा (Waste-to-Wealth)

GOBARdhan योजना

सरकार गोबर, फसल अवशेष और खाद्य अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद बनाने को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2026 तक देश के 51.4% जिलों में 979 बायोगैस प्लांट स्थापित हो चुके हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन (CRM)

फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना की गई है। अब तक 3.24 लाख से अधिक मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)

भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 66,310 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।

एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF)

पशुपालन क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये का कोष निजी निवेश को बढ़ावा दे रहा है और जैविक खाद व बायोगैस उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।

जल शक्ति मिशन और जल पुन: उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कृषि में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और भूजल पर दबाव कम होगा।

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से जुड़ा सर्कुलर कृषि मॉडल

सर्कुलर कृषि मॉडल SDG-2 (भूख समाप्ति और सतत कृषि) और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ा है। कम्पोस्टिंग, बायोचार और बायोमास रीसाइक्लिंग से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन बढ़ता है।

निष्कर्ष

भारत में कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में उठाए गए कदम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित कर रहे हैं। सरकार की योजनाएं कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा, जैविक खाद और रोजगार में बदल रही हैं। इससे खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


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