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भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट क्षेत्र को बढ़ावा: बजट 2026–27 और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम

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प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा – खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण के लिए

  • नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना को मंज़ूरी

  • 6,000 MTPA की एकीकृत REPM उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी

  • पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ के बिक्री-आधारित प्रोत्साहन

  • उन्नत सुविधाओं के लिए ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

परिचय

भारत महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। इसके तहत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के लिए एक घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। REPMs उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से किया जाता है।

इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की योजना को मंज़ूरी दी, जिसके अंतर्गत रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी वैल्यू चेन को कवर करते हुए 6,000 MTPA की एकीकृत निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी।

इसके पूरक के रूप में, केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा की गई है। ये पहल आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं तथा भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत में REPM का रणनीतिक महत्व और संसाधन क्षमता

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट अपनी अत्यधिक चुंबकीय शक्ति और स्थिरता के लिए जाने जाते हैं। इनका कॉम्पैक्ट आकार और उच्च प्रदर्शन इन्हें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, पवन टर्बाइन जनरेटर, उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और प्रिसिजन सेंसर्स के लिए अनिवार्य बनाता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत मोबिलिटी और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है, REPM की विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मज़बूत होगी।

भारत का संसाधन आधार

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का विशाल भंडार है, जो REPM जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है:

  • मोनाज़ाइट भंडार: भारत में 13.15 मिलियन टन मोनाज़ाइट उपलब्ध है, जिसमें लगभग 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) निहित है

  • भौगोलिक विस्तार: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में तटीय रेत, टेरी/लाल रेत और आंतरिक जलोढ़ क्षेत्रों में जमा

  • अतिरिक्त संसाधन: गुजरात और राजस्थान में हार्ड-रॉक क्षेत्रों में 1.29 मिलियन टन इन-सिटू REO संसाधनों की पहचान

  • अन्वेषण प्रयास: GSI द्वारा 34 परियोजनाओं के तहत 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

ये सभी भंडार भारत में एक एकीकृत REPM विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की मज़बूत क्षमता को दर्शाते हैं।

निवेश और विस्तार की आवश्यकता

हालाँकि भारत के पास प्रचुर संसाधन हैं, फिर भी स्थायी मैग्नेट का घरेलू उत्पादन अभी प्रारंभिक अवस्था में है। 2022–25 के दौरान लगभग 60–80% मूल्य और 85–90% मात्रा के हिसाब से आयात (मुख्यतः चीन से) पर निर्भरता रही है।

2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में तेज़ वृद्धि के कारण REPM की मांग दोगुनी होने की संभावना है। ऐसे में आयात निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू क्षमता का विस्तार अनिवार्य है।

केंद्रीय बजट 2026–27: REPM और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

REPM निर्माण योजना (नवंबर 2025)

  • कुल परिव्यय: ₹7,280 करोड़

  • क्षमता: 6,000 MTPA एकीकृत सिण्टर्ड REPM उत्पादन

  • लाभार्थी: वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अधिकतम पाँच

  • प्रोत्साहन: पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ (बिक्री-आधारित)

  • पूंजी सब्सिडी: ₹750 करोड़

  • उद्देश्य: रेयर अर्थ ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करना

डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

बजट 2026–27 में घोषित ये कॉरिडोर्स खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। ये पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी, अनुसंधान एवं विकास को गति देगी और भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ेगी।

IREL (इंडिया) लिमिटेड की भूमिका

IREL (इंडिया) लिमिटेड, जो 1963 से परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत है, ओडिशा और केरल में रेयर अर्थ निष्कर्षण और परिशोधन इकाइयाँ संचालित कर रही है। इसके मौजूदा ढांचे को नए कॉरिडोर्स से जोड़कर घरेलू क्षमता और उन्नत विनिर्माण को तेज़ी दी जाएगी।

राष्ट्रीय लक्ष्यों से संरेखण

  • आत्मनिर्भर भारत: आयात निर्भरता में कमी

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: EV और पवन ऊर्जा के लिए आवश्यक मैग्नेट की घरेलू आपूर्ति

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा और एयरोस्पेस के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला

  • नीतिगत सुधार: MMDR अधिनियम (2023 संशोधन) और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (2025) के अनुरूप

वैश्विक साझेदारियाँ

भारत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, पेरू, ज़िम्बाब्वे, मलावी और कोट डी’आईवोर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर रहा है। इसके अतिरिक्त, Minerals Security Partnership (MSP) और IPEF जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी सक्रिय भागीदारी है।

KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के माध्यम से भारत की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत कर रहा है।

निष्कर्ष

₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना और बजट 2026–27 में घोषित डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स मिलकर भारत के लिए खनन से लेकर विनिर्माण तक एक एकीकृत ढांचा तैयार करते हैं। ये पहल आयात निर्भरता घटाने, स्वच्छ ऊर्जा एवं रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को साकार करने में सहायक होंगी। घरेलू प्रयासों और वैश्विक साझेदारियों के संयोजन से भारत उन्नत सामग्री क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभर रहा है।


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