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केशव चंद्र ने खान मंत्रालय के सचिव का पदभार संभाला

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नई दिल्ली- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1995 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी केशव चंद्र ने आज भारत सरकार के खान मंत्रालय (Ministry of Mines) के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।

पदभार संभालने के तुरंत बाद सचिव ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं एवं चल रही गतिविधियों की समीक्षा की।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने उन्हें खनिज अन्वेषण (Mineral Exploration), खनिज ब्लॉकों की नीलामी एवं संचालन, महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज (Critical & Strategic Minerals) तथा खनन एवं खनिज क्षेत्र से जुड़ी अन्य प्रमुख पहलों की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर सचिव, खान ने भारत के खनिज क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती औद्योगिक और आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में खनिज क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।

सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के विकास, पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को मजबूत करना है।

छत्तीसगढ़ में निकेल, कॉपर और पैलेडियम के बड़े भंडार की खोज, खनिज क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती

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 छत्तीसगढ़ में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खनिज खोज सामने आई है, जिससे राज्य और देश दोनों के लिए बड़ी संभावनाएँ बन रही हैं।

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निकेल, कॉपर और पैलेडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार मिलने की जानकारी मिली है। यह खोज भारत के “क्रिटिकल मिनरल सेक्टर” को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये खनिज आधुनिक उद्योगों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में अत्यंत उपयोगी होते हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में इन संसाधनों की उपलब्धता से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की आयात निर्भरता भी कम हो सकती है।

सरकारी स्तर पर अब इन खनिज क्षेत्रों के विस्तृत सर्वे और विकास की दिशा में तेजी से काम किए जाने की संभावना है। इस खोज को राज्य के खनिज विकास के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।

सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक में मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन क्षेत्र में सुधार एवं आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने 14 मई 2026 को रांची में सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस समीक्षा बैठक में सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक नीलेंदु कुमार सिंह, एमईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक आई. डी. नारायण, सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक तथा सीएमपीडीआई, सीसीएल और एमईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 में सीएमपीडीआई द्वारा अन्वेषण, प्रतिवेदन तैयार करना, पूंजीगत व्यय, अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल तथा सौर परियोजनाओं के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों पर भी चर्चा की गई।

मंत्री ने सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की सराहना करते हुए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक अन्वेषण के महत्व पर बल दिया, जो देश की भविष्य की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए बाजार पहुंच में सुधार करने और अधिक बोलीदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि खदान बंदी गतिविधियों को स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक अवसरों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने पुनः प्राप्त खनन क्षेत्रों में मखाना की खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इसे सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” पहल से जोड़ा जा सके। यह दूरदर्शी पहल परित्यक्त खनन क्षेत्रों को कृषि एवं जलीय कृषि परिसंपत्तियों में बदलकर स्थानीय लोगों को दीर्घकालिक और सतत आर्थिक सहायता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

बैठक के दौरान सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड तथा मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के बीच कोयला तथा ऊर्जा एवं गैर-ऊर्जा खनिजों के अन्वेषण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु 14 मई 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह संयुक्त अन्वेषण गतिविधियां देश में कोयला एवं अन्य खनिजों के राष्ट्रीय भंडार को बढ़ाने तथा नई खदानों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने, भारत की खनिज संपदा के विकास को गति देने तथा खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “भारत महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण को तेजी से बढ़ाने, स्टार्टअप-प्रधान खनन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए मजबूत घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण कर रहा है।”




यह बात उन्होंने “नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट” (NMET) के संचालन निकाय की बैठक में जीपीओए कॉम्प्लेक्स में कही। बैठक की सह-अध्यक्षता कोल और खनन मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री एवं NMET के संचालन निकाय के अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने की। बैठक में खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CSIR–इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटीरियल्स टेक्नोलॉजी (CSIR–IMMT) के निदेशक, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट के निदेशक, परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधि, अन्वेषण एजेंसियों के अधिकारी और राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण की गति को वैश्विक मांग और भारत की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप रखना जरूरी है। उन्होंने राजस्थान के सिवाना बेल्ट और जम्मू एवं कश्मीर के सलाल–हाइमना ब्लॉक में चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और अधिक संभावित क्षेत्रों में स्वदेशी अन्वेषण प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि भारत में कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में प्रवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाना आवश्यक है। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की सफलता का हवाला देते हुए कहा कि इसी तरह की संस्थागत मदद, लक्षित प्रोत्साहन और मार्गदर्शन खनन तकनीकों और अन्वेषण विधियों में नवाचार को सक्षम कर सकते हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि निजी अन्वेषण एजेंसियों में क्षमता निर्माण दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने नोटिफाइड प्राइवेट एक्सप्लोरेशन एजेंसियों (NPEAs) की भूमिका को मजबूत करने, तकनीक और वित्त तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने और परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

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मंत्री ने आगे कहा कि तेजी से अनुमोदन, बेहतर खरीद प्रणालियाँ और समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लियरेंस अन्वेषण गतिविधियों में गति बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में वन स्वीकृतियों से संबंधित मुद्दे समयसीमा पर प्रभाव डालते हैं और इन्हें हल करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

स्थानीय भागीदारी पर उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अन्वेषण चल रहा है, वहां निर्वाचित प्रतिनिधियों जैसे सांसद और विधायक को जोड़ा जा सकता है। इससे स्थानीय समुदाय में जागरूकता बढ़ेगी और परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एंड-टू-एंड घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास आवश्यक है, जिसमें प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात में प्रसंस्करण क्षमता स्थापित करने के प्रयासों का उल्लेख किया, जो भारत की वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता तक पहुँच बनाई जा सकती है, जबकि CSIR–IMMT और परमाणु ऊर्जा विभाग जैसी संस्थाओं के माध्यम से स्वदेशी तकनीक विकास पर ध्यान बनाए रखना चाहिए।

बैठक के दौरान NMET की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वार्षिक योजनाओं, परियोजना अनुमोदन, वित्तीय सहायता और संस्थागत तंत्र पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि NMET को नवाचार का समर्थन जारी रखना चाहिए, अन्वेषण एजेंसियों को सक्षम बनाना चाहिए, राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए और महत्वपूर्ण खनिजों की वसूली के लिए पायलट परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि वे खनिज विकास के दीर्घकालिक लाभ को समझ सकें।

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इस अवसर पर जी. किशन रेड्डी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे और उनके अन्वेषण को प्राथमिकता देने, तेज नीलामी प्रक्रिया सुनिश्चित करने और राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।

खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने NMET की गतिविधियों की प्रगति, स्टार्टअप पहल, परियोजना अनुमोदन तंत्र और समन्वय व दक्षता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।

रेयर अर्थ और लिथियम में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

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भारत ने दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों (Rare Earth Permanent Magnets) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को तेज करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि 2030 तक उत्पादन क्षमता को 5,000 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों की मांग लगभग 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन होने का अनुमान है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

मंत्री ने जानकारी दी कि नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) स्थायी चुंबकों पर एक पायलट परियोजना शुरू की गई है, जबकि विशाखापत्तनम में समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट प्लांट शुरू हो चुका है, जिसकी शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन प्रति वर्ष है। इसे अगले चरण में 2,000 टन और 2030 तक 5,000 टन तक बढ़ाया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय कर Whole-of-Government Approach के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास को तेज कर रही है।

राजस्थान के डेगाना में लिथियम भंडार के बारे में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने बताया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है और जल्द ही आगे की खोज प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में भी लिथियम की खोज जारी है।

उन्होंने बताया कि लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका निभाएंगे।

मंत्री ने यह भी बताया कि हाल के नीतिगत बदलावों, जैसे एटॉमिक एनर्जी (संशोधन) ढांचा, के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है, हालांकि यूरेनियम जैसे रणनीतिक संसाधनों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे घरेलू प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री के अनुसार, रेयर अर्थ तत्व समुद्री तटीय रेत और चट्टानी संरचनाओं दोनों में पाए जाते हैं, जिनकी खोज के लिए अलग-अलग तकनीकों की आवश्यकता होती है। राजस्थान, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों में चट्टानी खनिज भंडार मौजूद हैं, जिनकी खोज अपेक्षाकृत जटिल है।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन से जुड़े सुरक्षा उपाय खनन मंत्रालय और संबंधित नियमों के तहत आते हैं, साथ ही अवैध खनन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लक्ष्य के साथ महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है, जो भविष्य के औद्योगिक और तकनीकी विकास के लिए आवश्यक है।

23 मार्च 2026 को क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी

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नई दिल्ली- केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे 23 मार्च 2026 को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी (7th Tranche) की शुरुआत करेंगे।

देश के आर्थिक विकास और खनिज सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ते रुझान के कारण लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), टंगस्टन, वैनेडियम, टाइटेनियम जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनकी सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित भंडार वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

इन खनिजों के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 17 अगस्त 2023 को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन किया, जिसके तहत 24 खनिजों को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित किया गया। इस संशोधन से केंद्र सरकार को इन खनिजों के लिए माइनिंग लीज और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिला है। इन नीलामियों से होने वाली आय संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होती है।

अब तक खान मंत्रालय ने 6 चरणों में सफल नीलामी आयोजित की है, जिसमें 46 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इससे उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और भारत के खनिज क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 7वें चरण में विभिन्न राज्यों के 19 ब्लॉक्स नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे। इन ब्लॉक्स में ऐसे खनिज शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, उर्वरक और रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए हैं। मिनरल (ऑक्शन) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत नीलामी के बाद की प्रक्रियाओं जैसे परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ इंटेंट को सरल बनाया गया है। वहीं मिनरल (ऑक्शन) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की सुविधा दी गई है, जिससे बोलीदाताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।

यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी दो-चरणीय आरोही बोली प्रक्रिया (two-stage ascending forward auction) के माध्यम से होगी, जिसमें सबसे अधिक प्रतिशत बोली लगाने वाले को विजेता चुना जाएगा।


भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट क्षेत्र को बढ़ावा: बजट 2026–27 और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम

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प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा – खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण के लिए

  • नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना को मंज़ूरी

  • 6,000 MTPA की एकीकृत REPM उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी

  • पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ के बिक्री-आधारित प्रोत्साहन

  • उन्नत सुविधाओं के लिए ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

परिचय

भारत महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। इसके तहत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के लिए एक घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। REPMs उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से किया जाता है।

इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की योजना को मंज़ूरी दी, जिसके अंतर्गत रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी वैल्यू चेन को कवर करते हुए 6,000 MTPA की एकीकृत निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी।

इसके पूरक के रूप में, केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा की गई है। ये पहल आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं तथा भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत में REPM का रणनीतिक महत्व और संसाधन क्षमता

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट अपनी अत्यधिक चुंबकीय शक्ति और स्थिरता के लिए जाने जाते हैं। इनका कॉम्पैक्ट आकार और उच्च प्रदर्शन इन्हें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, पवन टर्बाइन जनरेटर, उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और प्रिसिजन सेंसर्स के लिए अनिवार्य बनाता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत मोबिलिटी और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है, REPM की विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मज़बूत होगी।

भारत का संसाधन आधार

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का विशाल भंडार है, जो REPM जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है:

  • मोनाज़ाइट भंडार: भारत में 13.15 मिलियन टन मोनाज़ाइट उपलब्ध है, जिसमें लगभग 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) निहित है

  • भौगोलिक विस्तार: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में तटीय रेत, टेरी/लाल रेत और आंतरिक जलोढ़ क्षेत्रों में जमा

  • अतिरिक्त संसाधन: गुजरात और राजस्थान में हार्ड-रॉक क्षेत्रों में 1.29 मिलियन टन इन-सिटू REO संसाधनों की पहचान

  • अन्वेषण प्रयास: GSI द्वारा 34 परियोजनाओं के तहत 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

ये सभी भंडार भारत में एक एकीकृत REPM विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की मज़बूत क्षमता को दर्शाते हैं।

निवेश और विस्तार की आवश्यकता

हालाँकि भारत के पास प्रचुर संसाधन हैं, फिर भी स्थायी मैग्नेट का घरेलू उत्पादन अभी प्रारंभिक अवस्था में है। 2022–25 के दौरान लगभग 60–80% मूल्य और 85–90% मात्रा के हिसाब से आयात (मुख्यतः चीन से) पर निर्भरता रही है।

2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में तेज़ वृद्धि के कारण REPM की मांग दोगुनी होने की संभावना है। ऐसे में आयात निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू क्षमता का विस्तार अनिवार्य है।

केंद्रीय बजट 2026–27: REPM और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

REPM निर्माण योजना (नवंबर 2025)

  • कुल परिव्यय: ₹7,280 करोड़

  • क्षमता: 6,000 MTPA एकीकृत सिण्टर्ड REPM उत्पादन

  • लाभार्थी: वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अधिकतम पाँच

  • प्रोत्साहन: पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ (बिक्री-आधारित)

  • पूंजी सब्सिडी: ₹750 करोड़

  • उद्देश्य: रेयर अर्थ ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करना

डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

बजट 2026–27 में घोषित ये कॉरिडोर्स खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। ये पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी, अनुसंधान एवं विकास को गति देगी और भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ेगी।

IREL (इंडिया) लिमिटेड की भूमिका

IREL (इंडिया) लिमिटेड, जो 1963 से परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत है, ओडिशा और केरल में रेयर अर्थ निष्कर्षण और परिशोधन इकाइयाँ संचालित कर रही है। इसके मौजूदा ढांचे को नए कॉरिडोर्स से जोड़कर घरेलू क्षमता और उन्नत विनिर्माण को तेज़ी दी जाएगी।

राष्ट्रीय लक्ष्यों से संरेखण

  • आत्मनिर्भर भारत: आयात निर्भरता में कमी

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: EV और पवन ऊर्जा के लिए आवश्यक मैग्नेट की घरेलू आपूर्ति

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा और एयरोस्पेस के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला

  • नीतिगत सुधार: MMDR अधिनियम (2023 संशोधन) और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (2025) के अनुरूप

वैश्विक साझेदारियाँ

भारत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, पेरू, ज़िम्बाब्वे, मलावी और कोट डी’आईवोर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर रहा है। इसके अतिरिक्त, Minerals Security Partnership (MSP) और IPEF जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी सक्रिय भागीदारी है।

KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के माध्यम से भारत की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत कर रहा है।

निष्कर्ष

₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना और बजट 2026–27 में घोषित डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स मिलकर भारत के लिए खनन से लेकर विनिर्माण तक एक एकीकृत ढांचा तैयार करते हैं। ये पहल आयात निर्भरता घटाने, स्वच्छ ऊर्जा एवं रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को साकार करने में सहायक होंगी। घरेलू प्रयासों और वैश्विक साझेदारियों के संयोजन से भारत उन्नत सामग्री क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभर रहा है।


जीएसआई की 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) बैठक 21 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित

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नई दिल्ली- खनिज मंत्रालय के अंतर्गत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI) 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के ICAR, पुसा स्थित ए. पी. शिंदे सिम्पोजियम हॉल में 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) की बैठक का आयोजन करेगा। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और खनन क्षेत्रों के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर भूवैज्ञानिक प्रगति, खनिज अन्वेषण रणनीतियों और स्वच्छ ऊर्जा, भू-जोखिम तथा सतत विकास से संबंधित चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।


CGPB का उद्देश्य और महत्व

केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI), खनिज मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां GSI के वार्षिक फील्ड सीजन प्रोग्राम (FSP) पर चर्चा की जाती है और कार्यों के दोहराव को रोकने के उपाय किए जाते हैं। CGPB के सदस्य और अन्य हितधारक जैसे राज्य सरकारें, केंद्रीय/राज्य खनिज अन्वेषण एजेंसियां, PSU और निजी उद्यमी GSI के साथ सहयोगात्मक कार्यों के लिए प्रस्ताव रखते हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं और प्रस्तुत प्रस्तावों की महत्वता व तात्कालिकता के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए GSI के सर्वेक्षण, मानचित्रण, अन्वेषण, अनुसंधान एवं विकास, सामाजिक परियोजनाओं तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का वार्षिक कार्यक्रम अंतिम रूप दिया जाता है।

65वीं CGPB बैठक का नेतृत्व और सहभागिता

65वीं CGPB बैठक की अध्यक्षता खनिज मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल करेंगे, जबकि GSI के महानिदेशक असित साहा और खनिज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय लोइया की गरिमामयी उपस्थिति में बैठक आयोजित होगी। बैठक में खनिज मंत्रालय, GSI, राज्य भूवैज्ञानिक विभागों, PSU और निजी अन्वेषण/खनन कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।

बैठक में चर्चा के प्रमुख विषय

बैठक में देश के खनिज क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर विचार किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

  • लिथियम, REEs, ग्रेफाइट, PGE, वैनाडियम, स्कैंडियम, सीज़ियम आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण, जो ऊर्जा संक्रमण और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े हैं।

  • AI/ML आधारित डेटा एकीकरण, भू-भौतिक सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, डीप ड्रिलिंग और मिनरल सिस्टम अध्ययन जैसे आधुनिक अन्वेषण उपकरणों को अपनाना।

  • महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए प्री-प्रतिस्पर्धात्मक डेटा साझा करने और सहयोगात्मक अन्वेषण मॉडल, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, कार्यों का दोहराव कम हो और अन्वेषण से नीलामी-योग्य ब्लॉक्स तक की प्रक्रिया तेज हो।

  • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में भू-भूस्खलन खतरा जोनिंग और ढलान स्थिरता अध्ययन, ताकि आपदा जोखिम में कमी लाई जा सके।

बैठक में GSI का वार्षिक कार्यक्रम FS 2026-27 भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें पृथ्वी-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में 1,068 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें प्रमुख जोर खनिज अन्वेषण पर है। यह कार्यक्रम नवाचार और सततता पर केंद्रित है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन अध्ययन, अपतटीय अन्वेषण और सार्वजनिक भलाई से जुड़ी भू-विज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में GSI की प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन और रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में GSI की गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाली प्रदर्शनी भी आयोजित होगी।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ाव

CGPB बैठक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक प्राथमिकताओं को वैश्विक सततता लक्ष्यों के साथ संरेखित करने, नवाचार और संसाधन सुरक्षा के भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक और समन्वयात्मक मंच के रूप में कार्य करेगी।

राजस्व वृद्धि, रोजगार और तकनीक: छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति

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सचिव खनिज संसाधन पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाते है। इन खनिजों के लिए राज्य सरकार के द्वारा अन्वेषण एवं उत्खनन हेतु खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यम से खनन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। जिससे राज्य शासन को राजस्व की प्राप्ति में पिछले 02 वर्षों में उल्लेखनियवृद्धि हुई है।

सी.एम.डी.सी. भी इस राज्य में अन्वेषण एवं खनन से संबंधित कार्यांे के संपादनका सहभागी है। छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज के आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने तथा खनिज राजस्व मंे वृद्धि के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन (सी.एम.डी.सी.) का गठन 07 जून 2001 में किया गया। सी.एम.डी.सी. के कार्य संचालन का स्वरूप माईनिंग एण्ड मार्केटिंग ठेका,उत्खनन ठेका, मार्केटिंग ठेका, एमडीओ, अन्वेषण एवं संयुक्त उपक्रम के माध्यम सेअन्वेषण एवं खनन कार्य वर्तमान मंे कार्यरत् है। 

दयानन्द ने बताया कि वर्तमान में 09 खनिजों के खनन/मार्केटिंग एवं अन्वेषण का कार्य सी.एम.डी.सी. के द्वारा किया जा रहा है (टिन,बाक्साईट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैग्नीज, कोरण्डम, डोलोमाईट, कोयला)। (टिन) वर्तमान में सी.एम.डी.सी. के द्वारा बस्तर के अनुसूचित जनजातियों के जीविकोपार्जन के लिए विशेष रूप से टिन अयस्क की खरीदी का कार्य किया जा रहा है। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से खनन एवं टिन स्मेल्टर का भी संचालन किया जा रहा है। यह खनिज भी क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में आता हैं।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को टिन विक्रय करने का सही मूल्य सही वक्त में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप यह क्रय मूल्य बढ़कर वर्तमान में 1926.00 रूपये प्रति कि.ग्रा किया गया है। इस प्रकार लगभग 03 गुना अधिक राशि क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप टिन ओर की क्रय मात्रा में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है एवं ऑनलाईन क्रय एवं रियल टाईम भुगतान की कार्यवाही प्रचलन में है। इस हेतु TIN - Tribal Incentive for Natural Resources, Portal तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम सेऑनलाईन भुगतान हितग्राहियों को प्राप्त होगा।

दयानंद ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में अन्वेषण कार्य में सी.एम.डी.सी., मॉयल केसहयोग से बलरामपुर जिले में मैग्नीज एवं ग्रेफाईट का अन्वेषण का कार्य कर रही है जिसके उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे है। कोल इंडिया लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पाेरेशन के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन के संबंध में समझौता पत्र हस्ताक्षर किया जाचुका है। इसके क्रियान्वयन के लिए संयुक्त कार्यसमिति का गठन किया गया है। शीघ्र ही इसकी अपेक्षित परिणाम प्राप्त हांेगे एवं केन्द्र शासन के निर्देशानुसार क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की ओर सी.एम.डी.सी. की सहभागीता बढ़ रही है। यह समझौता केवल खनन तक सीमित नहीं है अपितु इसमें खनिज संवर्धन,प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और सबसे महत्वपूर्ण हमारे युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसर भी शामिल है। मुझे विश्वास है कि यह पहल रोजगार सृजन करेगी और हमारी युवा पीढ़ी को गरिमा और अवसर प्रदान करेगी।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पारदर्शी नीलामी - माननीय मुख्यमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने खनिज संसधान प्रबंधन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। सी.एम.डी.सी. ने MSTC के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक - सक्षम नीलामी प्रक्रिया द्वारा निविदा और खनिज बिक्री में नये मानक स्थापित किये है। उक्त पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी से, जहां एक ओर लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड उच्च बिक्री मूल्य प्राप्त हुए है, वही दूसरी ओर लौह अयस्क के उत्खनन में न्यूनतम दर प्राप्त हुआ है, जो प्रतिस्पर्धी पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से उत्पादित लौह अयस्क के विक्रय से राज्य शासन को लगभग 28.65 करोड़ रूपये का राजस्व साथ ही सी.एम.डी.सी. को शुद्ध लाभ लगभग 24 करोड़ रूपये प्राप्त हुआ। वर्ष 2021 से 2025 तक 1.10 करोड़रूपये सीएसआर में व्यय हो चुका है एवं 42 लाख रूपये की कार्यों की स्वीकृति प्रचलन में है। माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर एक पेड़ के नाम पर 14700 वृक्षांे कारोपड़ किया गया है एवं 29.77 लाख रूपये का व्यय की गई। चालू वित्तीय वर्ष में 60,000 टन लौह अयस्क की नीलामी की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से प्रचलन में है। इस खदान के संचालन से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। इसी अनुक्रम में आरीडोंगरी में उत्पादन क्षमता 05 लाख टन से 20 लाख टन प्रतिवर्ष किये जाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास किये जा रहे है। इस हेतु खनन योजना तैयार किया जा रहा है। सरगुजा जिले में सी.एम.डी.सी. की 05 खदानें संचालित है, जिससे वित्तिय वर्ष 2023-24 से दिसंबर 2025 तक में राज्य शासन को 11.28 करोड़ एवं सी.एम.डीसी. को 8.13 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है। वर्तमान में सी.एम.डी.सी. द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के अंतर्गत 05 बाक्साईट खदानों की नीलामी प्रगति पर है।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में सी.एम. डी.सी.- एन.एम.डी.सी. संयुक्त उपक्रम एनसीएल के द्वारा बैलाडिला डिपॉजिट 04 और डिपॉजिट 13 में खनन कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होंगे। इस हेतु डिपॉजिट 04 का रेजिंग कॉन्ट्रेक्टर की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 2026 में दोनों खदानों में उत्पादन प्रारंभ होने से एक ओर शासन और निगम को राजस्व की प्राप्ति होगी वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय उद्योगों को लौह अयस्क सुगमता से प्राप्त होगा। परिणामस्वरूप राज्य का समावेशी विकास होने में सी.एम.डी.सी. की सहभागीता चिन्हीत् होगी। सी.एम.डी.सी. को दोनों परियोजनाओं से अधिकतम उत्पादन की स्थिति में लगभग राज्य शासन को 7 हजार करोड रूपये राजस्व एवं सी.एम.डी.सी. को 3 हजार करोड़ रूपये राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही क्षेत्र में रोजगार एवं विकास के अवसर का मार्ग प्रशस्त होगा। बहुमूल्य खनिजों की श्रेणी में CMDC-NMDC के संयुक्त उपक्रम एनसीएल जिला महासमुंद के ग्राम बलौदा-बेलमंुडी में हीरा खनिज के क्षेत्र में हीरा धारित किम्बरलाईट की उपस्थिति के संकेत मिले है, इसकी पुष्टि हेतु ड्रिलिंग का कार्य प्रगति पर है।

माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल मार्ग निर्देशन में विगत वर्षों से लंबित केरवा कोल परियोजना के लिए अब सफलता प्राप्त हुई है। सटीक कार्ययोजना के माध्यम से पारदर्शी नीलामी से 15.85 प्रतिशत प्रिमियम में MDO का चयन हो चुका है। यह ब्लॉक MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से कोयला मंत्रालय भारत शासन द्वारा आबंटित है।

क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अधिकमत उत्पादन की स्थिति में राज्य शासन को लगभग 150 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी एवं MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से 53 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्त होगी। सी.एम.डी.सी. के द्वारा मुख्य खनिजों के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर खनन/व्यापार हेतु गौण खनिज को भी शामिल किया गया है। इस क्रम में जिला सक्ती के ग्राम छितापंडरिया में डोलोमाईट खनिज रकबा 326.167 हे. क्षेत्र को राज्य शासन द्वारा सी.एम.डी.सी. हेतु आरक्षित किया गया है। इसके अनुक्रम में सी.एम.डी.सी. द्वारा माईनिंग/मार्केटिंग के लिए MDO चयन की कार्यवाही पारदर्शी तरीके के MSTC के माध्यम से प्रचलन में है।

कोरण्डम खनिज के क्षेत्र में जिला बीजापुर के ग्राम कुचनुर में सी.एम.डी.सी. को उत्खनिपट्टा क्षेत्र में वर्षांे बाद उत्पादन प्रारंभ हो गया है, 1 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त है। उत्पादित कोरण्डम में आधारित स्थानीय लोगों को जीविकोपार्जन एवं समाजिक/आर्थिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए कोरण्डम कटिंग/पॉलिशिंग का प्रशिक्षण दिया जा कर जीविकोपार्जन की व्यवस्था की जा रही है। कॉपर की उपस्थिति की पुष्टि एवं भविष्य में खनन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम छत्तीसगढ़ कॉपर लिमिटेड का गठन किया जा चुका है। इस हेतु राष्ट्रीय खनिज एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के माध्यम से अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति हो चुकी है एवं अन्वेषण का कार्य प्रगति पर है। यह अन्वेषण क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा मोहला-मानपुर जिले में हिदर ब्लॉक 28.60 वर्ग कि.मी. एवं बोदल ब्लॉक में 21.75 वर्ग कि.मी. 03 वर्ष के लिए अधिसूचित किया गया है।

भविष्य की कार्ययोजना - पिछले 02 वर्षों में सी.एम.डी.सी. के द्वारा नवीन आयाम स्थापित किये है एवं भविष्य के परियोजनाओं को अपेक्षित गति प्रदान करने के लिए सटिक कार्ययोजना तैयार कर क्रमशः आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सी.एम.डी.सी. भी सहभागीता निभाने का प्रयास कर रही है।

टिन खनिज के लिए नॉन ऑपरेशन खदान को लैप्स घोषित किया गया एवं केन्द्र सरकार के माध्यम से नीलामी की कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी 2 से 3 वर्षों में खदान प्रारंभ होने से भविष्य में खनन एवं निकासी से राज्य शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। 

टिन स्लैग में अवस्थित टेंटलम, नियोबियम एवं अन्य को निष्कर्षण की कार्ययोजना तैयार कर पायलट परियोजना प्रारंभ की जा रही है। नवीन क्षेत्रों का चयन कर MSTC के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल के लिए अन्वेषण/खनन की कार्ययोजना पर आगे कार्यवाही की जाएगी।
लौह अयस्क में वर्तमान उत्पादन क्षमता 5 लाख मिट्रिक टन से 20 लाख मिट्रिक टन किया जा रहा है इससे राज्य शासन को राजस्व के रूप मंे लगभग 250 करोड़ रूपये एवं सी.एम.डी.सी. को 768.4 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी। 

बाक्साईट खनिज में पथरई खदान में उत्पादन क्षमता 2 लाख टन होने से एवं अन्य संचालित परियोजना में अधिकतम उत्पादन/निकासी की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को अतिरिक्त राजस्व में लगभग 10 करोड़ रूपये की वृद्धि होगी है।

क्रिटिकल मिनरल में भविष्य में कोल इण्डिया के साथ नये ग्रेफाईट युक्त क्षेत्र का चयन कर संयुक्त रूप से अन्वेषण/उत्खनन का कार्य किया जाएगा। टिनस्लैग/एल्यूमिनियम स्लैग से क्रिटिकल मिनरल का निष्कर्षण किया जाएगा। क्रिटिकल मिनरल का सेमिनार आयोजित एवं रिसर्च पेपर आमंत्रित किये जाएंगे। 

डोलोमाईट में 2 मिलियन टन उत्पादन क्षमता आगामी 03 वर्षों में प्राप्त करने की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को 20 करोड़ रूपये का लाभ होगा एवं राज्य शासन को 32 करोड़ प्राप्त होगा। 

हीरा क्षेत्र में प्रचलित पूर्वेक्षण से चिन्हित् हीरा धारित क्षेत्र में हीरा की उपस्थिति सुनिश्चित होने पर शासन को लाभ मिलेगा। 

सी.एम.डी.सी. द्वारा खनन से संबंधित सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सेवा दिया जाकर अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति का प्रयास किया जाएगा। जैसे - प्री एम्बेडेड क्लियरेन्स की कार्यवाही से नीलामी हेतु ब्लॉक जल्दी उपलब्ध हांगे, इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति एवं सी.एम.डी.सी. को सेवा शुल्क प्राप्त होगा। इसी तरह खनन योजना तैयार करने, अन्वेषण एजेंसी के रूप में कार्य करने एवं ड्रोन से संबंधित कार्य,चेक गेट, वेब्रिज सेवा, बंद पड़ी खदानों का पुर्नउद्धार एवं ग्रेनाईट माईनिंग एवं कटिंग/पॉलिशिंग उद्योग, सैण्ड माईनिंग पर भी कार्ययोजना तैयार किया गया है।

राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का गांधीनगर में समापन, सतत खनन और महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा पर केंद्र–राज्यों की प्रतिबद्धता

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गांधीनगर, गुजरात- राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा सतत खनन को आगे बढ़ाने तथा भारत की महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। चिंतन शिविर के दूसरे दिन भारत के खनन क्षेत्र को सशक्त बनाने से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, सतत खनन पद्धतियों और दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। विचार-विमर्श में खनन मूल्य शृंखला के सभी चरणों में घरेलू क्षमताओं को समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित किया गया।

विचार-विमर्श के दौरान विवेक कुमार बाजपेयी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की रूपरेखा पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, अन्वेषण एवं नीलामी रणनीतियों, घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण से संबंधित पहलों को रेखांकित किया।

भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपशिष्ट ढेरों और टेलिंग्स से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों और द्वितीयक संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिससे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और परिपत्र (सर्कुलर) खनन पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए खनिज उपलब्धता में वृद्धि की जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल, सचिव, खान मंत्रालय ने राष्ट्रीय विकास में खनन क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए खदानों के समयबद्ध संचालन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने त्वरित और जवाबदेह प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि खान मंत्रालय देश की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप खनन गतिविधियों को तेज करने के लिए कदम उठा रहा है।

पंजाब के खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राज्य के खनन क्षेत्र की प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक प्रौद्योगिकियों, सतत पद्धतियों और प्रभावी नीतिगत उपायों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि इस क्षेत्र को और सुदृढ़ किया जा सके।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समावेशी और सतत विकास की आधारशिला के रूप में खनन क्षेत्र को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने खनन से प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधियों के प्रभावी उपयोग, मजबूत खान समापन योजनाओं की आवश्यकता और खनिज ब्लॉकों की समयबद्ध नीलामी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने दोहराया कि खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में राज्य प्रमुख भागीदार हैं और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप उत्तरदायी खनन और घरेलू खनिज सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आठ से अधिक राज्यों के खनन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने हेतु सहकारी संघवाद की सशक्त भावना को दर्शाया।


भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा: ₹7,280 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी

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प्रमुख बिंदु

  • सरकार ने देश में सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के समेकित घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम की स्थापना के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।

  • इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन शामिल होगी।

  • यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

  • यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) और MMDR अधिनियम सुधारों जैसी नीतिगत पहलों से समर्थित है।

  • आयात निर्भरता कम करते हुए भारत की वैश्विक उन्नत सामग्री वैल्यू चेन में भागीदारी को सशक्त बनाएगी और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति देगी।

परिचय

केंद्र सरकार ने ‘सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना’ को मंजूरी दी है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹7,280 करोड़ है। इस योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें कच्चे रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर अंतिम मैग्नेट उत्पाद तक संपूर्ण प्रक्रिया शामिल होगी।

इस घरेलू इकोसिस्टम के निर्माण से इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक इनपुट में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आपूर्ति शृंखला और नेट ज़ीरो 2070 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सबसे शक्तिशाली स्थायी मैग्नेटों में से एक होते हैं। इनका उपयोग उन तकनीकों में होता है जहाँ छोटे आकार में उच्च चुंबकीय क्षमता की आवश्यकता होती है, जैसे—

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर

  • पवन ऊर्जा टरबाइन जनरेटर

  • उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स

  • एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियाँ

  • सटीक सेंसर और एक्ट्यूएटर

उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए REPM अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए भारत में इनका घरेलू उत्पादन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत की वर्तमान स्थिति और योजना की आवश्यकता

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का बड़ा भंडार है, विशेष रूप से मोनाजाइट, जो आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। देश में लगभग 1.315 करोड़ टन मोनाजाइट उपलब्ध है, जिसमें अनुमानित 72.3 लाख टन रेयर अर्थ ऑक्साइड मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान में हार्ड रॉक क्षेत्रों में 12.9 लाख टन REO संसाधन चिन्हित किए गए हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए व्यापक अन्वेषण से 48.26 करोड़ टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान भी हुई है।

इसके बावजूद, भारत अभी भी REPM के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वर्ष 2022–23 से 2024–25 के बीच भारत ने 60% से 80% तक मूल्य के आधार पर और 85% से 90% तक मात्रा के आधार पर आयात चीन से किया। अनुमान है कि 2030 तक REPM की घरेलू मांग दोगुनी हो जाएगी।

योजना के प्रमुख घटक

  • देश में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता का निर्माण।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 5 लाभार्थियों का चयन, प्रत्येक को 1,200 MTPA तक की क्षमता।

  • ₹6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि, जो 5 वर्षों में दी जाएगी।

  • ₹750 करोड़ की पूंजी सब्सिडी, जिससे अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को समर्थन मिलेगा।

  • कुल 7 वर्षों की कार्यान्वयन अवधि—2 वर्ष की स्थापना अवधि और 5 वर्ष का प्रोत्साहन चरण।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से तालमेल

यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, रक्षा आत्मनिर्भरता, और रणनीतिक विनिर्माण लक्ष्यों के अनुरूप है। REPM ऊर्जा-कुशल मोटरों और पवन ऊर्जा प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे यह पहल नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को भी समर्थन देती है।

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), MMDR अधिनियम संशोधन 2023, और अन्य खनन सुधारों के साथ मिलकर भारत की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन को मजबूत करती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत का अवसर

वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ और मैग्नेट आपूर्ति शृंखलाओं में बार-बार व्यवधान देखने को मिले हैं। ऐसे में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक सहित कई देशों के साथ सहयोग समझौते किए हैं।

इसके साथ ही खानिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) विदेशों में रणनीतिक खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और अन्वेषण में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे भारत की दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने, आयात निर्भरता कम करने और उन्नत तकनीकी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल रोजगार सृजन, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

महत्वपूर्ण खनिजों पर टेक टॉक: राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति और आत्मनिर्भर भारत पर उच्चस्तरीय मंथन

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संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (CENJOWS) ने IP बाज़ार के सहयोग से 17 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में “Minerals That Matter: Geopolitics, Sovereignty & Value Chains” विषय पर एक उच्चस्तरीय, बंद कमरे में आयोजित टेक टॉक गोलमेज़ चर्चा का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य वक्तव्य देते हुए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) अब राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षमताओं के विकास और तकनीकी संप्रभुता के लिए एक रणनीतिक आधार बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा प्रणालियाँ—जैसे जेट इंजन, मिसाइलें, सटीक हथियार, रडार, उपग्रह, बैटरियाँ और सेमीकंडक्टर—इन खनिजों की सुनिश्चित उपलब्धता पर निर्भर हैं।

एयर मार्शल दीक्षित ने इस बात पर जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ अत्यधिक केंद्रित हैं और निर्यात नियंत्रणों तथा भू-राजनीतिक दबावों के अधीन होती जा रही हैं, जिससे आयात पर अत्यधिक निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी बन जाती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण और परिचालन तत्परता, सुरक्षित और लचीली खनिज आपूर्ति शृंखलाओं से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं, जो विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप है।

हाल के राष्ट्रीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए एयर मार्शल ने भारत द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की स्थापना तथा खनन से लेकर प्रसंस्करण, विनिर्माण और पुनर्चक्रण तक पूरे मूल्य शृंखला को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ये पहलें नीति उद्देश्यों को ठोस परिणामों में बदलने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों पर 30 तकनीकी रिपोर्टों के एक संकलन का भी उद्घाटन किया, जिसमें बौद्धिक संपदा (IP) परिदृश्य के विस्तृत अध्ययन और बाज़ार विश्लेषण शामिल हैं।

आमंत्रण-आधारित इस मंच में वरिष्ठ नीति-निर्माता, रक्षा विशेषज्ञ, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक, शिक्षाविद और बौद्धिक संपदा (IP) पेशेवर शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत की रणनीतिक दृष्टि का अन्वेषण करना था। इस आयोजन को भारत सरकार के कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी का स्नेहपूर्ण शुभकामना संदेश भी प्राप्त हुआ।

भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा: पीयूष गोयल ने क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और एआई में अपार संभावनाएँ बताईं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में इंडो-कनाडियन बिजनेस चैंबर को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, मिनरल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी और सप्लाई-चेन विविधीकरण में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की क्षमता दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और भारत हर वर्ष सबसे बड़ा STEM टैलेंट पूल तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा प्राकृतिक सहयोगी हैं, जिनकी पूरक क्षमताएँ—व्यापार, निवेश और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करती हैं।

भारत–कनाडा के मजबूत संबंध और CEPA पर प्रगति

पीयूष गोयल ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई सकारात्मक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उच्च महत्त्वाकांक्षी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि CEPA दोनों देशों के बीच विश्वास, निवेश सुरक्षा और सम्मानजनक संवाद को मजबूत करेगा।

क्लीन एनर्जी और एआई–ड्रिवन इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत अग्रणी

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की 500 GW की राष्ट्रीय पावर ग्रिड—जिसमें 250 GW नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है—एआई आधारित प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं में शामिल होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था: मजबूती, स्थिरता और वैश्विक विश्वास

उन्होंने बताया कि भारत “Fragile Five” की सूची से आगे बढ़कर आज दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और अगले 2–2.5 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

भारत के पास—

  • कम मुद्रास्फीति,

  • मजबूत बैंकिंग प्रणाली,

  • ऊँचे विदेशी मुद्रा भंडार,

  • तेज़ी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर,

  • और सशक्त कैपिटल मार्केट है।

उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार 4.5 गुना तक बढ़ा है, जो निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।

भारत–कनाडा साझेदारी को मज़बूत करने के लिए पाँच–बिंदु प्रस्ताव

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संबंध को गति देने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दिए—

  1. संवाद को परिणामों में बदलना
    — स्पष्ट रोडमैप, लक्ष्य और मापनीय प्रगति।

  2. सीईओ फोरम को सक्रिय करना
    — उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. कनाडा को भारत के आगामी AI Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रण।

  4. संयुक्त नवाचार को बढ़ावा
    — भारत की मजबूत IPR व्यवस्था, विशाल डेटा सेट और किफायती अनुसंधान माहौल का लाभ उठाना।

  5. प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी
    — क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, एयरोस्पेस, रक्षा और मेक इन इंडिया के तहत निर्माण।

उन्होंने कहा कि कनाडाई नवाचार और भारतीय क्षमताएँ मिलकर दुनिया के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

भारत–कनाडा सहयोग: 2047 के विकसित भारत की यात्रा में साथ

अंत में,पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत की विकसित राष्ट्र 2047 की यात्रा में सहयोगी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत स्थिर, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर वातावरण प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में भारत–कनाडा साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।


प्रधानमंत्री का G20 संबोधन: मानव-केंद्रित तकनीक और न्यायपूर्ण वैश्विक विकास की दिशा में भारत का नेतृत्व

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प्रधानमंत्री ने आज G20 शिखर सम्मेलन के तीसरे सत्र को संबोधित किया, जिसका विषय था— “सभी के लिए न्यायपूर्ण एवं समान भविष्य – क्रिटिकल मिनरल्स, सुरक्षित रोजगार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुदाय को यह सुनिश्चित करना होगा कि महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास और उपयोग मानव-केंद्रित हो, वित्त-केंद्रित नहीं; वैश्विक हो, राष्ट्र-केंद्रित नहीं; और ओपन-सोर्स आधारित हो, विशिष्ट मॉडलों पर नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने तकनीकी इकोसिस्टम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है, जिसके कारण अंतरिक्ष तकनीक, एआई और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत की दृष्टि

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की एआई नीति समान अवसर, जन-स्तर कौशल विकास और जिम्मेदार उपयोग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इंडिया-AI मिशन के तहत देशभर में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं ताकि एआई के लाभ सभी नागरिकों को मिल सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई को “ग्लोबल गुड” बनाना आवश्यक है, जिसके लिए एक वैश्विक समझौते की जरूरत है, जिसमें पारदर्शिता, मानव निरीक्षण, ‘सेफ्टी-बाय-डिज़ाइन’ और दुरुपयोग रोकने के सिद्धांत शामिल हों। उन्होंने जोर दिया कि एआई मानव क्षमताओं का विस्तार करे, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार मनुष्यों के पास ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत फरवरी 2026 में AI Impact Summit आयोजित करेगा, जिसका विषय होगा—

‘सर्वजनम् हिताय, सर्वजनम् सुखाय’ (सभी के हित और सभी के सुख के लिए)।
उन्होंने सभी G20 देशों को इसमें भाग लेने का आमंत्रण दिया।

रोजगार से क्षमताओं की ओर बदलाव की आवश्यकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई के दौर में दुनिया को “आज के रोजगार” से “भविष्य की क्षमताओं” की ओर तेजी से बढ़ना होगा। नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन के दौरान टैलेंट मोबिलिटी पर हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता ढांचा (Global Framework for Talent Mobility) तैयार करने का प्रस्ताव रखा।

भारत का वैश्विक संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता दोहराई—

“भारत ऐसे विकास के लिए प्रतिबद्ध है जो टिकाऊ हो; ऐसे व्यापार के लिए जो विश्वसनीय हो; ऐसी वित्तीय व्यवस्था के लिए जो न्यायपूर्ण हो; और ऐसी प्रगति के लिए जिसमें हर कोई समृद्ध हो।”

IITF 2025: खनन मंत्रालय का मंडप बनेगा ‘विकसित भारत’ की खनिज शक्ति का प्रतीक

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खनन मंत्रालय का यह मंडप भारत के समृद्ध खनिज संसाधनों, तकनीकी प्रगति और “विकसित भारत – एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में खनन क्षेत्र के योगदान को प्रदर्शित करेगा।

1,500 वर्ग मीटर में फैला यह मंडप आगंतुकों को एक जीवंत और जानकारीपूर्ण अनुभव प्रदान करेगा, जिसमें थीम आधारित प्रदर्शन, इंटरएक्टिव गतिविधियाँ और प्रदर्शनी शामिल होंगी जो भारत के खनन और खनिज क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की दृष्टि को दर्शाएंगी।

इस मंडप में मंत्रालय के अधीन सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSEs), संलग्न, अधीनस्थ और स्वायत्त संस्थान भाग लेंगे — जिनमें नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL), जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI), मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (MECL), नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिज़ाइन केंद्र (JNARDDC) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (NIRM) शामिल हैं।

एक विशेष थीम जोन में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission - NCMM) को प्रदर्शित किया जाएगा — जो भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में खनन मंत्रालय की एक अहम पहल है। इस खंड में नॉन-फेरस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (NFTDC) द्वारा प्रदर्शित उपलब्धियाँ और तकनीकी नवाचार शामिल होंगे जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक वृद्धि के लिए आवश्यक रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, प्रसंस्करण और उपयोग में सहायक हैं।

निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियाँ जैसे हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड (HZL) भी अपने नवाचारों और योगदानों को प्रदर्शित करेंगी।

  • हिंडाल्को अपने प्रदर्शनी क्षेत्र में वंदे भारत एक्सप्रेस और चंद्रयान-3 के मॉडल प्रदर्शित करेगा, जो भारत की प्रगति में धातुओं की भूमिका का प्रतीक हैं।

  • HZL सतत खनन और तकनीकी उत्कृष्टता में अपनी उपलब्धियाँ प्रदर्शित करेगा।

इसके अलावा, जिला खनिज फाउंडेशन (DMFs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा खनन क्षेत्र की CSR पहलों के अंतर्गत किए गए सामुदायिक विकास कार्यों और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा।

आगंतुकों के लिए वर्चुअल रियलिटी (VR) और डिजिटल माइनिंग अनुभव, छात्रों एवं युवाओं के लिए इंटरएक्टिव क्विज़, तथा महत्वपूर्ण खनिजों, अन्वेषण तकनीकों और स्थायित्व-आधारित नवाचारों पर विशेष प्रदर्शनियाँ भी आकर्षण का केंद्र होंगी।

यह मंडप जिम्मेदार खनन, नवाचार और समावेशी विकास के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो भारत को खनिज आत्मनिर्भरता और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है।


राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत IISc बेंगलुरु और C-MET हैदराबाद को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता

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खनिज मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission - NCMM) के तहत दो और संस्थानों — भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (C-MET), हैदराबाद — को उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence - CoE) के रूप में मान्यता प्रदान की है। इससे पहले 7 अन्य संस्थानों को CoE के रूप में मान्यता दी जा चुकी थी। यह निर्णय 24 अक्टूबर 2025 को हुई परियोजना अनुमोदन और सलाहकार समिति (PAAC) की बैठक में लिया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता खनिज मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने की।

महत्वपूर्ण कच्चे खनिज (Critical Raw Materials) स्वच्छ ऊर्जा, गतिशीलता परिवर्तन, उन्नत प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में संपूर्ण प्रणाली दृष्टिकोण (end-to-end systems approach) अपनाने, प्रौद्योगिकी विकसित करने, प्रदर्शित करने और लागू करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) आवश्यक है, ताकि तकनीकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Level – TRL) को TRL 7/8 के पायलट संयंत्र और प्री-कमर्शियल प्रदर्शन तक बढ़ाया जा सके।

ये उत्कृष्टता केंद्र देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सशक्त और उन्नत बनाने के लिए नवोन्मेषी और परिवर्तनकारी अनुसंधान करेंगे।

प्रत्येक उत्कृष्टता केंद्र ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ (Hub & Spoke Model) पर कार्य करेगा, जिसके तहत विभिन्न संस्थानों की अनुसंधान क्षमताओं और विशेषज्ञताओं को एक मंच पर लाया जाएगा। CoE (हब संस्थान) को दिशानिर्देशों के अनुसार कम से कम दो उद्योग साझेदार और दो अनुसंधान/शैक्षणिक साझेदारों को अपने संघ (consortium) में शामिल करना अनिवार्य है।

अब तक मान्यता प्राप्त 9 उत्कृष्टता केंद्रों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 उद्योग, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों को अपने ‘स्पोक्स’ के रूप में जोड़ा है।

यह पहल भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग को भी सुदृढ़ करेगी।

खनन मंत्रालय ने ₹1,500 करोड़ की ‘क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना’ के दिशा-निर्देश जारी किए

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नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 03.09.2025 को क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी देने के बाद, खनन मंत्रालय ने 02.10.2025 को योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

दिशा-निर्देश योजना की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करते हैं, जिनमें रिसाइक्लिंग सिस्टम के लिए अनुमानित व्यय, प्रोत्साहन आवंटन की पद्धति, आवेदन, मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रियाएँ, संस्थागत तंत्र और प्रदर्शन समीक्षा शामिल हैं। ये दिशा-निर्देश उद्योग और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं।

यह योजना राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश में द्वितीयक स्रोतों से क्रिटिकल मिनरल्स के पृथक्करण और उत्पादन के लिए रिसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना है। पात्र फीडस्टॉक स्रोत हैं: ई-कचरा, प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरी (LiB) और अन्य स्क्रैप सामग्री।

यह योजना नई इकाइयों में निवेश के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों की क्षमता विस्तार / आधुनिकीकरण और विविधीकरण पर लागू होगी। प्रोत्साहन केवल उस मूल्य श्रृंखला के लिए होगा जो क्रिटिकल मिनरल्स के वास्तविक निष्कर्षण में शामिल है।

योजना 02.10.2025 से आवेदन के लिए खुली है और आवेदन की अवधि छह (6) महीने यानी 01.04.2026 तक है। योजना दिशा-निर्देश और आवेदन लिंक खनन मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।


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