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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसमें अधिक जिम्मेदारियां और नए अवसर निहित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक अपने पेशेवर कौशल, करुणा और प्रतिबद्धता के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देंगे।

तमिलनाडु की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि यह राज्य ज्ञान और समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के व्यापारियों ने भारत के विचार, नैतिक मूल्य और संस्कृति को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया, जो भारत की आत्मविश्वासी सभ्यतागत परंपरा और सीखने व आदान-प्रदान के प्रति खुलेपन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत @2047 के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।

तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकें सभी क्षेत्रों को रूपांतरित कर रही हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों से नियमित रूप से अपने कौशल को उन्नत करने, आजीवन सीखने की मानसिकता अपनाने तथा अपने मुख्य विषयों से परे नई तकनीकों से जुड़ने का आग्रह किया।

मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार नैतिकता, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।

परिसर से बाहर के जीवन के लिए विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और दोनों का सामना संतुलन, दृढ़ता और मानसिक शक्ति के साथ करना चाहिए। उन्होंने शॉर्टकट अपनाने और अस्वस्थ तुलना से बचने की सलाह दी तथा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रगति करने और अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण और सेवा-भाव से युक्त जीवन जीने तथा व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमणियन, डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान के चांसलर डॉ. ए. सी. शन्मुगम तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


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