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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया, एआई को समावेशी और विकसित भारत की कुंजी बताया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा के रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र एवं कौशल केंद्र का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर में अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया रूप दे रही है। यह हमारे सीखने, काम करने, आधुनिक सेवाओं तक पहुंच और मानवता की बड़ी चुनौतियों से निपटने के तरीकों को बदल रही है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का एक बड़ा अवसर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि तकनीक लोगों को सशक्त बनाए, समावेशन को बढ़ावा दे और सभी के लिए अवसरों का विस्तार करे। एआई का उपयोग सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी विभाजनों को पाटने के उद्देश्य से होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ सभी वर्गों और आयु समूहों तक, विशेष रूप से वंचित समुदायों तक पहुंचें।

उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छात्र संभावनाओं और अवसरों से भरे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे तकनीक, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा, चुनौतियों के समाधान और दूसरों को सशक्त बनाने के लिए करें। उन्होंने एआई सीखने के मॉड्यूल पूरे करने वाले सांसदों की सराहना करते हुए कहा कि उभरती तकनीकों के बारे में स्वयं सीखकर उन्होंने सीख के माध्यम से नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में एआई देश के जीडीपी, रोजगार और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश के एआई प्रतिभा आधार के विकास में निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक जगत के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत केवल तकनीक को अपनाए ही नहीं, बल्कि उसके माध्यम से जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे।

राष्ट्रपति ने सभी से मिलकर प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने तथा एक तकनीक-संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जो एआई-प्रेरित भविष्य के लिए भारत के कार्यबल को तैयार करने की दिशा में सरकार की सतत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।


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