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कौशल विकास को लेकर केंद्र और राजस्थान सरकार की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार ने आज राजस्थान सरकार के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य में चल रही कौशल विकास पहलों की प्रगति की समीक्षा और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने की। बैठक में राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल तथा कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ भी उपस्थित रहे।

राजस्थान देश के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है, जहां 1,537 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के तहत राज्य में 3.14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 2.50 लाख से अधिक प्रमाणित हो चुके हैं। राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) के तहत 1.04 लाख से अधिक अप्रेंटिस प्रशिक्षित किए गए हैं और 24.98 करोड़ रुपये का डीबीटी भुगतान किया गया है।

बैठक में राजस्थान में दो स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (SIIC) स्थापित करने और PM-SETU योजना के तहत ITI के उन्नयन पर चर्चा हुई। PM-SETU योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से 1,000 ITI और 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) को उन्नत करने तथा 20 लाख युवाओं को आधुनिक ट्रेड में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।

जयंत चौधरी ने कहा कि राजस्थान की संस्थागत क्षमता और बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्रणाली इसे कौशल परिवर्तन में अग्रणी बनाती है। उन्होंने उद्योग साझेदारी बढ़ाने और रोजगार परिणामों को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने राज्य में कौशल सुधारों को तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में भरतपुर में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और जयपुर व जोधपुर के NSTI के उन्नयन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जयपुर और भरतपुर में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित कर विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना पर विचार किया गया।

बैठक के अंत में दोनों सरकारों ने लंबित स्वीकृतियों को शीघ्र पूरा करने, निगरानी प्रणाली मजबूत करने और उद्योग सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, ताकि राजस्थान के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

PM-SETU के तहत पुणे में उद्योग परामर्श बैठक: उन्नत आईटीआई के माध्यम से भविष्य-तैयार कार्यबल की दिशा में कदम

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोज़गार परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU – Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना के कार्यान्वयन के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रमुख उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परामर्श बैठक यशवंतराव चव्हाण अकादमी ऑफ़ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (यशदा), पुणे में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा योजना के उद्योग-नेतृत्व वाले कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियाँ भाग लेंगी, जो निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। बैठक की अध्यक्षता देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा की जाएगी। उनके साथ मनीषा वर्मा, अपर मुख्य सचिव, कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार भी उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर वे क्षेत्र के आईटीआई एवं उद्योगों का भी दौरा करेंगी।

PM-SETU योजना के अंतर्गत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत अवसंरचना और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण की पहुँच को विस्तारित करेंगे। इस योजना में आईटीआई को सरकारी स्वामित्व लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और बेहतर प्लेसमेंट अवसर सुनिश्चित हो सकें। क्लस्टर आधारित साझेदारी के माध्यम से उद्योग, एंकर इंडस्ट्री के साथ मिलकर प्रशिक्षण और रोज़गार से जुड़ी मज़बूत कड़ियाँ स्थापित करेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श बैठक इस बात पर प्रकाश डालेगी कि PM-SETU किस प्रकार उद्योग को केवल समय-समय पर सहभागिता तक सीमित न रखते हुए, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर और संरचित भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है। क्लस्टर मॉडल के तहत उद्योग साझेदार संस्थागत शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धतियों में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन में सहयोग देंगे तथा अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट तंत्र को मज़बूत बनाएंगे। इससे भर्ती लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और उद्योग मानकों के अनुरूप जॉब-रेडी प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

योजना के क्रियान्वयन की दिशा में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी प्रारंभिक कदम उठाए गए हैं। अब तक 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक क्लस्टरों की पहचान कर ली है और 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य स्तरीय संचालन समितियों (State Steering Committees) को अधिसूचित कर दिया है।

परामर्श बैठक के दौरान, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार परिणामों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग एवं संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (DVET), महाराष्ट्र सरकार और FIAT इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फ़ाउंडेशन, तथा DVET और SDN/वाधवानी के बीच साझेदारियाँ शामिल हैं।

PM-SETU भारत की कौशल यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रही है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रमों के विकास और उभरते क्षेत्रों के लिए सशक्त प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संस्थागत शासन को सुदृढ़ कर, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण कर तथा कौशल को श्रम बाज़ार की मांग से जोड़कर, यह पहल विकसित भारत के अवसरों के लिए देश के युवाओं को तैयार करने में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया, एआई को समावेशी और विकसित भारत की कुंजी बताया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा के रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र एवं कौशल केंद्र का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर में अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया रूप दे रही है। यह हमारे सीखने, काम करने, आधुनिक सेवाओं तक पहुंच और मानवता की बड़ी चुनौतियों से निपटने के तरीकों को बदल रही है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का एक बड़ा अवसर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि तकनीक लोगों को सशक्त बनाए, समावेशन को बढ़ावा दे और सभी के लिए अवसरों का विस्तार करे। एआई का उपयोग सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी विभाजनों को पाटने के उद्देश्य से होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ सभी वर्गों और आयु समूहों तक, विशेष रूप से वंचित समुदायों तक पहुंचें।

उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छात्र संभावनाओं और अवसरों से भरे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे तकनीक, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा, चुनौतियों के समाधान और दूसरों को सशक्त बनाने के लिए करें। उन्होंने एआई सीखने के मॉड्यूल पूरे करने वाले सांसदों की सराहना करते हुए कहा कि उभरती तकनीकों के बारे में स्वयं सीखकर उन्होंने सीख के माध्यम से नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में एआई देश के जीडीपी, रोजगार और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश के एआई प्रतिभा आधार के विकास में निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक जगत के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत केवल तकनीक को अपनाए ही नहीं, बल्कि उसके माध्यम से जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे।

राष्ट्रपति ने सभी से मिलकर प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने तथा एक तकनीक-संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जो एआई-प्रेरित भविष्य के लिए भारत के कार्यबल को तैयार करने की दिशा में सरकार की सतत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।


निर्मला सीतारमण ने हंपी, कर्नाटक में पीएमइंटर्नशिप स्कीम (PMIS) के इंटर्न्स से की बातचीत

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15 अक्टूबर, 2025 को केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने हंपी, कर्नाटक में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) के इंटर्न्स के साथ संवाद किया। इस अवसर पर राज्य भर से आए 60 से अधिक इंटर्न्स और प्रमुख साझेदार कंपनियों जैसे Infosys, MSPL, IBM, TCS, Tata Consumer Products, Bharat Electronics Limited, Mangalore Refinery and Petrochemicals, HAL, NMDC, Honeywell Technology Solutions के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री ने इंटर्न्स के अनुभव और उनके भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में सुना। उन्होंने इंटर्न्स से यह जानने की कोशिश की कि किसने उन्हें इस स्कीम से जोड़ा और इंटर्नशिप के दौरान उनके सीखने और कौशल विकास का अनुभव कैसा रहा। इस बातचीत के दौरान मंत्री ने इंटर्न्स को उनके पेशेवर करियर के लिए मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया।

कुछ इंटर्न्स ने अपनी उत्कृष्ट कार्य क्षमता के कारण अपनी कंपनियों में पूर्णकालिक पद हासिल कर लिया है। मंत्री ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने इंटर्न्स की मेहनत की सराहना करते हुए आज के बदलते कार्यस्थल में अनुकूलन क्षमता (Adaptability) के महत्व पर जोर दिया। मंत्री ने कहा, “यह जानकर प्रसन्नता होती है कि यह इंटर्नशिप व्यक्तित्व विकास में कैसे योगदान दे रही है। इंटर्न्स काम के मूल पहलुओं को सीख रहे हैं और साथ ही संचार में आने वाली बाधाओं को पार करने जैसे अन्य कौशल भी विकसित कर रहे हैं।”

प्रेरक कहानियाँ

कार्यक्रम में PMIS के माध्यम से युवाओं के परिवर्तन की कई प्रेरक कहानियाँ सामने आईं।

  • कलुवा हरी कृष्णा, कडपा, आंध्र प्रदेश के, जिन्होंने IT और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में इंटर्नशिप पूरी करने के बाद TCS में पूर्णकालिक पद प्राप्त किया। किसान पिता और गृहिणी मां के पुत्र हरी ने अपनी यात्रा को “सच्चाई में परिवर्तनकारी” बताया। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मंत्री से अपना ऑफ़र लेटर पाने की इच्छा जताई, जिसे मंत्री ने स्वीकार किया।

  • आर. लक्ष्मी प्रसन्ना, चित्तूर, आंध्र प्रदेश की, जिन्होंने Infosys में इंटर्नशिप के दौरान अपने लिए नए अवसर खोले। कृषि पृष्ठभूमि से आने वाली लक्ष्मी ने बताया कि इस इंटर्नशिप ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया में आत्मविश्वास और exposure दिया।

  • गौरी एच, केरल की, Honeywell Technology Solutions Lab Pvt. Ltd. में Embedded Engineer इंटर्न, जो एक एकल मां की बेटी हैं, ने बताया कि PMIS ने उन्हें वह करियर पाने में मदद की जिसकी उन्होंने हमेशा कल्पना की थी। मंत्री ने कहा, “गौरी की सकारात्मकता और धैर्य से मैं प्रभावित हूं। उसकी कहानी PMIS की सच्ची भावना को दर्शाती है।”

यह बातचीत PMIS के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है और Viksit Bharat 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण में सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) के बारे में

PMIS भारत के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और अन्य अवसरों की सुविधा प्रदान करने वाली पांच प्रमुख योजनाओं में से एक है। यह 21-24 वर्ष के युवाओं के लिए है, जो वर्तमान में किसी भी पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रम या रोजगार में नहीं हैं। इसमें उन्हें देश की प्रमुख कंपनियों में वेतनयुक्त इंटर्नशिप का अवसर दिया जाता है। योजना के अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ से अधिक इंटर्नशिप प्रदान करने का लक्ष्य है। वर्तमान में योजना का पायलट चरण चल रहा है।

अधिक जानकारी के लिए: https://pminternship.mca.gov.in/

राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (NSQC) की 44वीं बैठक आयोजित

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (NSQC) की 44वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव एवं NCVET की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की।

बैठक में कुल 210 कौशल योग्यताएँ — स्वास्थ्य, कृषि, ऑटोमोबाइल, आईटी-आईटीईएस, दूरसंचार, खुदरा, लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण और आतिथ्य क्षेत्रों से संबंधित — मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गईं।

इस बैठक में केंद्रीय एवं राज्य सरकारों, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और पुरस्कार प्रदाता संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

NSQC का उद्देश्य कौशल योग्यताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के अनुरूप बनाना है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूपता सुनिश्चित हो सके।

यह पहल भारत में कौशल विकास पारितंत्र को सशक्त करने और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (Future-Ready Workforce) तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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