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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का उदयपुर में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

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उदयपुर (राजस्थान)- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने राजस्थान के उदयपुर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, निफ्टेम (NIFTEMs) और इन्वेस्ट इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नीति सुधारों, नवाचार, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्यवाही के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रमुख सचिव सहित कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित अन्य केंद्रीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना

चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण को मजबूत करने तथा विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक होगा।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और सतत खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

समूह चर्चा: प्रमुख चुनौतियां और रणनीतिक सुझाव

चिंतन शिविर के दौरान छह विषयगत समूहों में गहन मंथन किया गया। इन समूहों ने अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने, प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड फोर्टिफिकेशन, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन उत्पाद और अल्कोहलिक बेवरेज जैसे उच्च विकास क्षेत्रों की योजना, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता, फार्म से फोर्क तक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा प्रसंस्कृत खाद्य को लेकर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की।

समूहों ने कृषि स्तर पर एकत्रीकरण, एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड चेन एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने जैसे ठोस सुझाव दिए। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देने, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना और ‘भारत गुणवत्ता खाद्य चिन्ह’ शुरू करने की अनुशंसा की गई।

राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाएं

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अपनी सर्वोत्तम नीतिगत पहलों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की योजना प्रस्तुत की, जबकि महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल साझा की। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों ने भी क्षेत्रीय नवाचारों और निर्यातोन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

सहायक पहल और आगे की राह

चिंतन शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत विकसित कॉमन इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन भी किया, जो सीताफल, जामुन, आंवला, एलोवेरा और मसालों जैसे लघु वनोपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय से ही भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समयबद्ध रूप से सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया।


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