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पौध-आधारित प्रोटीन निर्माण में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा, टीडीबी ने सोनिक बायोकेम को दी वित्तीय सहायता

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मूल्य संवर्धित खाद्य प्रसंस्करण और पौध-आधारित पोषण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: टीडीबी ने सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स को वित्तीय सहायता प्रदान की

भारत में मूल्य संवर्धित खाद्य प्रसंस्करण तथा पौध-आधारित पोषण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर (मध्य प्रदेश) को "फंक्शनल एवं टेक्सचर्ड सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट का विकास और व्यावसायीकरण" परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकी के आधार पर फंक्शनल सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (FSPC) और टेक्सचर्ड सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (TSPC) के व्यावसायिक उत्पादन हेतु अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है।

यह पहल उच्च गुणवत्ता वाले, नॉन-जीएमओ (Non-GMO) पौध-आधारित प्रोटीन उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। स्वास्थ्यवर्धक, टिकाऊ और क्लीन-लेबल खाद्य उत्पादों की ओर बढ़ती उपभोक्ता रुचि के कारण ऐसे उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह परियोजना भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन करने तथा आयात के स्थान पर स्वदेशी उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

दो दशकों से अधिक समय से नॉन-जीएमओ सोया खाद्य अवयवों के निर्माण और निर्यात में कार्यरत सोनिक बायोकेम ने सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (SPC) के आधार पर FSPC और TSPC के उत्पादन की स्वदेशी तकनीक विकसित की है।

पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं में अपेक्षाकृत महंगे सोया प्रोटीन आइसोलेट (SPI) का उपयोग किया जाता है, जिसे मुख्यतः चीन और अमेरिका जैसे देशों से आयात किया जाता है। इसके विपरीत, कंपनी की तकनीक में स्वयं विकसित और देश में निर्मित SPC का उपयोग किया जाता है, जो समान कार्यात्मक गुण प्रदान करता है। इससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और पौध-आधारित प्रोटीन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।

इस परियोजना के माध्यम से इन उन्नत प्रोटीन उत्पादों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जाएगा, जिनका उपयोग प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, पौध-आधारित मांस विकल्पों, पोषण संबंधी सप्लीमेंट्स तथा कार्यात्मक खाद्य उत्पादों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह तकनीक आयात पर निर्भरता कम करेगी, नए निर्यात अवसर उत्पन्न करेगी तथा मूल्य संवर्धित पौध-आधारित प्रोटीन के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएगी।

स्वदेशी तकनीक और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नॉन-जीएमओ सोयाबीन का उपयोग करते हुए यह परियोजना उच्च मूल्य वाले प्रोटीन अवयवों की मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करेगी। साथ ही भारतीय खाद्य उद्योग को वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी कच्चे माल की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इससे कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और देश को टिकाऊ खाद्य प्रणाली की ओर बढ़ने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा:

"उन्नत पौध-आधारित प्रोटीन अवयवों के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमता का विकास भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में हमारी उपस्थिति बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। टीडीबी ऐसी तकनीकों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है जो मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दें, आयात पर निर्भरता कम करें और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित करें। यह पहल विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत करने के साथ-साथ भारत के लिए नए निर्यात अवसर भी सृजित करेगी।"

सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व ने टीडीबी के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस वित्तीय सहायता से कंपनी अपनी स्वदेशी विकसित तकनीक का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण कर सकेगी, नॉन-जीएमओ सोया प्रोटीन उत्पादों के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करेगी तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौध-आधारित पोषण उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम होगी।

ग्राम गनेकेरा में रागी प्रोसेसिंग का पहला यूनिट स्थापित, अब स्थानीय स्तर पर होगा श्री अन्न का प्रसंस्करण

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यूनिट की स्थापना से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में होगी आसानी

रायपुर- जिले के किसानों को अब रागी (श्री अन्न) उत्पादन के साथ-साथ बेहतर बाजार एवं मूल्य संवर्धन का लाभ दिलाने ग्राम गनेकेरा में रागी मिलेट्स, मिलेट्स पफ एवं दलिया प्रोसेसिंग का पहला यूनिट की सफलतापूर्वक स्थापना की गई है। यूनिट का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद अब यह रागी के प्रसंस्करण के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके प्रारंभ होने से क्षेत्र के रागी उत्पादक किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण के लिए स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होगी। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा जिले में धान के बदले मिलेट्स, रागी फसलों के उत्पादन हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष 15 हजार हेक्टेयर में अन्य फसल उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

उपसंचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण कर मशीनों एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यूनिट का संचालन शीघ्र प्रारंभ करने तथा किसानों को इसका अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कश्यप ने बताया कि रागी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से परिवहन एवं प्रसंस्करण लागत में कमी आएगी, वहीं रागी के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार होने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन एवं उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में यह यूनिट जिले में श्री अन्न आधारित कृषि को नई दिशा देने का कार्य करेगी।

उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्र में रागी की खेती अपनाने तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन कार्यक्रमों का लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रागी एक पौष्टिक, कम पानी में तैयार होने वाली तथा जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसल है, जिसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए किसानों के लिए यह लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। रागी प्रोसेसिंग यूनिट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे तथा महिला स्व-सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी रागी आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण एवं विपणन में नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। इससे जिले में श्री अन्न मिशन को गति मिलेगी और किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण एवं विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।


ASPIRE: ग्रामीण सपनों को उद्यम में बदलने की कहानी

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मेघालय के मावसिनराम की बारिश भरी एक सुबह, दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इस इलाके में रहने वाले बंशैलांग मारबानियांग आसमान में छाए बादलों को देख रहे थे। लेकिन उनके मन में बारिश नहीं, बल्कि एक सवाल था—देश के सबसे दूरदराज़ इलाकों में रहने वाला एक युवा, जहां अवसर बेहद सीमित हों, अपना भविष्य कैसे बनाए?

वर्षों तक उन्होंने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ते देखा। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना असंभव लगता था। लेकिन स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रचुरता ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या इन्हीं संसाधनों के आधार पर कोई उद्यम खड़ा किया जा सकता है।

ASPIRE योजना बनी जीवन का टर्निंग प्वाइंट

बंशैलांग के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा दिए जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी मिली। IIE, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industries and Entrepreneurship) योजना के अंतर्गत मेंटर संस्थान है।

इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की और यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और कौशल के साथ कहीं भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा

बंशैलांग की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में लोग अपने विचारों को व्यवसाय में नहीं बदल पाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए 2015 में MSME मंत्रालय ने ASPIRE योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता तथा रोजगार को बढ़ावा देना है।

2018 और 2023 में योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। अब इसका मुख्य केंद्र लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (LBIs) हैं, जो लोगों को कौशल से लेकर व्यवसाय स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

कैसे काम करते हैं LBI?

लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जो नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • आधुनिक मशीनों और तकनीक तक पहुंच

  • बिजनेस मेंटरिंग

  • उत्पाद विकास

  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

  • गुणवत्ता प्रमाणन

  • नियामकीय अनुमतियां

  • बाजार से जुड़ाव

  • वित्तीय सहायता तक पहुंच

इन इन्क्यूबेटर्स के संचालन में भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और IIT जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में बढ़ रहा ASPIRE का दायरा

ASPIRE के तहत देशभर में खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस उत्पाद, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर उद्योग जैसे क्षेत्रों में हजारों उद्यम विकसित किए जा रहे हैं।

जून 2026 तक—

  • 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 109 LBI स्वीकृत

  • 1.23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

  • वर्ष 2022-23 से अब तक 1,200 से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला बड़ा लाभ

ASPIRE योजना उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2022-23 से अब तक—

  • 28,500 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के अवसर

  • 8,700 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थी

  • 9,600 से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थी

  • 17,600 से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थी

ये आंकड़े बताते हैं कि अब उद्यमिता केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का नया माध्यम बन रही है।

मावसिनराम से कर्तव्य पथ तक

बंशैलांग मारबानियांग की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। वे पूर्वोत्तर भारत के उन दस उद्यमियों में शामिल थे जिन्होंने अपने प्रयासों और ASPIRE योजना के सहयोग से रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने तक का सफर तय किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ASPIRE योजना हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराकर उनके सपनों को सफल उद्यमों में बदल रही है। यह योजना केवल नए व्यवसाय नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर दक्षिण एशियाई उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ, रोजगार सृजन और सतत विकास पर जोर

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अहमदाबाद- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली SAPLING पहल के सहयोग से अहमदाबाद, गुजरात में “रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा: दक्षिण एशिया में मूल्य संवर्धन के नए अवसर” विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ किया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में दक्षिण एशियाई देशों के लगभग 200 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विकास साझेदार, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना तथा क्षेत्र में लचीली, समावेशी और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का विकास करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवानने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय सहयोग को दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रमुख आधार बताया।

चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है, जो रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, किसानों की आय बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतिगत पहलें और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतुभाई वघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) का परिसर स्थापित करने की वकालत की, ताकि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

उद्घाटन सत्र में विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, गेट्स फाउंडेशन की भारत कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है—

  • दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को बढ़ावा देना

  • कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना

  • असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण

  • तकनीक आधारित नवाचार और स्मार्ट प्रोसेसिंग

  • खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और वैश्विक मानक

  • निवेश जुटाने और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और नीतिगत समन्वय

कार्यक्रम में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजीनोमोटो, आईटीसी, सेवा (SEWA), नाबार्ड तथा फूड इंडस्ट्री एशिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के साथ एक इनोवेशन फेयर का भी आयोजन किया गया है, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और भंडारण प्रणालियों से जुड़ी नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” भी जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 में लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अध्ययन में फल, सब्जी और डेयरी जैसे शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

यह संवाद विश्व बैंक समूह की AgriConnect और SAPLING पहल के अनुरूप आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत सुधारों, निवेश और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दक्षिण एशिया में टिकाऊ और पोषण-केंद्रित खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने, निजी निवेश को प्रोत्साहन, एमएसएमई क्षेत्र के विकास तथा खाद्य प्रसंस्करण आधारित रोजगार सृजन के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।

फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0: खाद्य उद्यमिता को मिलेगा नया प्रोत्साहन

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नई दिल्ली: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-तंजावुर) द्वारा 16 और 17 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इच्छुक उद्यमियों, छात्रों और प्रारंभिक स्तर के स्टार्टअप संस्थापकों की क्षमताओं को मजबूत करना और उन्हें व्यवस्थित मार्गदर्शन प्रदान करना था।

उद्यमिता कौशल और ज्ञान का विकास

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के ज्ञान में वृद्धि करना और उन्हें खाद्य व्यवसाय शुरू करने, संचालित करने तथा विस्तार करने की प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी देना था। साथ ही, यह कार्यक्रम खाद्य स्टार्टअप के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता, नियामकीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा।

देशभर से 82 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 82 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के इच्छुक व्यक्ति, नवोदित उद्यमी और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ज्ञान साझा करने और खाद्य व्यवसाय के बदलते परिदृश्य को समझने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े पेशेवरों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। इनमें पैकेजिंग तकनीक, कॉर्पोरेट कानून, प्रशासन एवं कराधान, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियाँ, मूल्य निर्धारण तथा निर्यात के अवसर शामिल रहे।

व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर

सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, भंडारण नियंत्रण, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, मशीनरी चयन जैसे संचालनात्मक पहलुओं के साथ-साथ डिजिटल विपणन, ई-कॉमर्स, ग्राहक सहभागिता, व्यवसायिक विचारों का परीक्षण और नए उत्पाद विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

खाद्य सुरक्षा और नीतिगत जानकारी

कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों, सार्वजनिक नीतियों और खाद्य स्टार्टअप को समर्थन देने वाली अनुदान योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

निष्कर्ष

यह कार्यक्रम तकनीकी, प्रबंधकीय और नियामकीय पहलुओं की व्यापक समझ प्रदान करने वाला एक प्रभावी मंच साबित हुआ। इसने प्रतिभागियों को तेजी से विकसित हो रहे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सफल उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 2024-25 में ₹630 करोड़ का फंड आवंटन, मांग आधारित प्रणाली से मिलती है सहायता

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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) केंद्रीय क्षेत्र की अम्ब्रेला योजना प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) का क्रियान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए PMKSY के तहत ₹630 करोड़ का फंड आवंटन किया गया था।

PMKSY के अंतर्गत घटक योजनाएं निम्नलिखित हैं:

(i) एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना (Integrated Cold Chain & Value Addition Infrastructure – ICC&VAI)
(ii) कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए अवसंरचना (Infrastructure for Agro-processing Clusters – APC)
(iii) खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता का सृजन/विस्तार (Creation/Expansion of Food Processing & Preservation Capacities – CEFPPC)
(iv) खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना (Food Safety and Quality Assurance Infrastructure – FSQAI)
(v) मानव संसाधन और संस्थान (अनुसंधान एवं विकास)
(vi) ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens – OG)
(vii) मेगा फूड पार्क (01.04.2021 से बंद)
(viii) बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का सृजन (01.04.2021 से बंद)

PMKSY के तहत पात्र संस्थाओं जैसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म, एलएलपी, सहकारी समितियां, एफपीओ/एफपीसी/एसएचजी आदि को खाद्य प्रसंस्करण/संरक्षण/परीक्षण/विश्लेषण अवसंरचना स्थापित करने और खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए अनुदान सहायता (ग्रांट-इन-एड) प्रतिपूर्ति आधार पर प्रदान की जाती है। यह योजना हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में लागू है।

PMKSY एक मांग आधारित योजना है और इसके तहत आवेदन एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) के माध्यम से पूरे देश से आमंत्रित किए जाते हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस योजना के तहत किसी भी घटक योजना में राज्यों के अनुसार धन आवंटित/स्वीकृत/जारी नहीं किया जाता। प्राप्त प्रस्तावों की पात्रता की जांच की जाती है और योजना दिशानिर्देशों के अनुसार तय मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। उपलब्ध निधि के आधार पर मेरिट के अनुसार पात्र प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाती है।

यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।


खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का उदयपुर में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

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उदयपुर (राजस्थान)- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने राजस्थान के उदयपुर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, निफ्टेम (NIFTEMs) और इन्वेस्ट इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नीति सुधारों, नवाचार, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्यवाही के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रमुख सचिव सहित कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित अन्य केंद्रीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना

चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण को मजबूत करने तथा विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक होगा।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और सतत खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

समूह चर्चा: प्रमुख चुनौतियां और रणनीतिक सुझाव

चिंतन शिविर के दौरान छह विषयगत समूहों में गहन मंथन किया गया। इन समूहों ने अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने, प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड फोर्टिफिकेशन, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन उत्पाद और अल्कोहलिक बेवरेज जैसे उच्च विकास क्षेत्रों की योजना, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता, फार्म से फोर्क तक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा प्रसंस्कृत खाद्य को लेकर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की।

समूहों ने कृषि स्तर पर एकत्रीकरण, एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड चेन एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने जैसे ठोस सुझाव दिए। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देने, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना और ‘भारत गुणवत्ता खाद्य चिन्ह’ शुरू करने की अनुशंसा की गई।

राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाएं

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अपनी सर्वोत्तम नीतिगत पहलों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की योजना प्रस्तुत की, जबकि महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल साझा की। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों ने भी क्षेत्रीय नवाचारों और निर्यातोन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

सहायक पहल और आगे की राह

चिंतन शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत विकसित कॉमन इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन भी किया, जो सीताफल, जामुन, आंवला, एलोवेरा और मसालों जैसे लघु वनोपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय से ही भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समयबद्ध रूप से सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया।


इंडसफूड 2026 का 9वां संस्करण 8 से 10 जनवरी तक ग्रेटर नोएडा में, वैश्विक खाद्य व्यापार में भारत की भूमिका होगी सुदृढ़

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भारत की प्रमुख वैश्विक खाद्य एवं पेय (एफ एंड बी) सोर्सिंग प्रदर्शनी इंडसफूड 2026 का 9वां संस्करण 8 से 10 जनवरी 2026 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का आयोजन ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत को एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी भागीदार के रूप में और अधिक सुदृढ़ करना है।

एशिया की प्रमुख एफ एंड बी ट्रेड शो के रूप में पहचाने जाने वाला इंडसफूड 2026, भारतीय खाद्य उत्पादकों, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और वैश्विक संस्थानों को एक साझा मंच पर लाएगा, जिससे व्यापार सहयोग, द्विपक्षीय सहभागिता और दीर्घकालिक साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा।

इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान द्वारा किया जाएगा, जो भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच को विस्तार देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इंडसफूड 2026 का एक प्रमुख आकर्षण अबू धाबी फूड हब द्वारा भारत–यूएई फूड कॉरिडोर जैसी पहलों का शुभारंभ होगा, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुव्यवस्थित करना और द्विपक्षीय खाद्य व्यापार प्रवाह को गति देना है। एक अन्य प्रमुख आकर्षण सऊदी अरब के प्रदर्शक अलसलान द्वारा अपनी 75 वर्षों की उपलब्धि का उत्सव होगा। यह सांस्कृतिक और व्यावसायिक प्रस्तुति सऊदी अरब की दीर्घकालिक खाद्य व्यापार विरासत और भारत के साथ उसके मजबूत होते साझेदारी संबंधों को रेखांकित करती है।

इस प्रदर्शनी में 120 से अधिक देशों की भागीदारी की अपेक्षा है, जिसमें हजारों सत्यापित वैश्विक खरीदार और कई उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे।

इंडसफूड 2026 में वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेष मंच भी होंगे, जिनमें डीपी वर्ल्ड द्वारा आयोजित ‘भारत मार्ट’ सत्र प्रमुख है, जो निर्यात अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और नीतिगत संवाद पर केंद्रित होगा, ताकि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा सके। पाक कला कूटनीति और सांस्कृतिक सहभागिता के क्षेत्र में विश्व पाक विरासत सम्मेलन का उद्घाटन संस्करण आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शेफ, नीति-निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ विरासत संरक्षण और नवाचार पर विचार-विमर्श करेंगे।

कौशल विकास और पाक नेतृत्व भी इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु होगा। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्यूलिनरी लीडरशिप (IICCL), आईएफसीए (IFCA) के सहयोग से 150 शेफों के लिए पांच दिवसीय आवासीय कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें लेवल-1 ‘एम्बेसडर ऑफ इंडियन क्यूज़ीन’ प्रमाणन प्रदान किया जाएगा। उच्चस्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों में ‘इंडिया ऑन ए प्लेटर’ गाला डिनर शामिल होगा, जिसका आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा ताज पैलेस में मंत्रियों, राजदूतों, वैश्विक खरीदारों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए किया जाएगा।

प्रदर्शनी में अंतरराष्ट्रीय स्वाद परीक्षण और नवाचार मंच भी शामिल होंगे, जिनमें साइप्रस द्वारा चीज़ और वाइन टेस्टिंग सत्र, तथा एपीडा (APEDA) की ‘भारती पहल’ प्रमुख हैं। इसके अंतर्गत भारतीय एग्री-फूड स्टार्ट-अप्स को शार्क टैंक शैली की पिच सत्रों के माध्यम से वैश्विक खरीदारों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। एफआईएफआई (FIFI), एफएचआरएआई (FHRAI) और केएसबीए (KSBA) जैसे उद्योग संगठनों के साथ क्यूरेटेड संवाद ज्ञान-विनिमय, नेटवर्किंग और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देंगे।

इंडसफूड 2026 में कई उच्चस्तरीय वैश्विक प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी भी होगी, जिनमें तुर्की के व्यापार संघों के नेता, वर्ल्डशेफ्स के अध्यक्ष शेफ एंडी कथबर्ट, एशिया कॉन्टिनेंटल डायरेक्टर शेफ विलमेंट लियोंग, तथा फिजी से वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रमुख सुपरमार्केट श्रृंखलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले रिटेल खरीदार शामिल हैं।

जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, ट्रेस करने योग्य, सतत और नैतिक रूप से प्राप्त खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है, इंडसफूड 2026 भारतीय उत्पादकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। नवाचार, सततता, मूल्य-वर्धित खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात-आधारित विकास पर मजबूत फोकस के साथ, यह आयोजन भारत के खाद्य व्यापार के अगले चरण के विस्तार के लिए एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जिससे सहयोग, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए अवसर खुलेंगे।


निफ्टेम कुंडली को ‘पीएम विकास’ योजना के क्रियान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में चयन

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राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), कुंडली को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा “पीएम विकास (PM VIKAS)” योजना के क्रियान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (PIA) के रूप में चयनित किया गया है। इस संबंध में संस्थान और मंत्रालय के बीच 22 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह योजना अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से बनाई गई है, जिसके अंतर्गत आवश्यकता आधारित पाठ्यक्रमों में कौशल प्रशिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी तथा उनके लिए रोजगार/आजीविका के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। निफ्टेम, कुंडली इस योजना के लिए PIA के रूप में चयनित कुछ गिने-चुने राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) में से एक है।

इस परियोजना के अंतर्गत निफ्टेम-कुंडली अल्पसंख्यक समुदाय के कुल 2110 लाभार्थियों को तीन श्रेणियों—मल्टी स्किल टेक्नीशियन (फूड प्रोसेसिंग), मिलेट उत्पाद प्रोसेसर तथा असिस्टेंट बेकिंग टेक्नीशियन—में प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह प्रशिक्षण झारखंड, बिहार, पंजाब और हरियाणा के चार राज्यों में स्थित सात स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। यह पहल अल्पसंख्यक समुदायों की रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा उन्हें बाजार और ऋण से जोड़कर आर्थिक मुख्यधारा में सम्मिलित करने के माध्यम से बेहतर आजीविका के अवसर सृजित करने का प्रयास है।

परियोजना के तहत लाभार्थियों को NCVET (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद) द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के माध्यम से NSQF (राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा) के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही, योग्य प्रशिक्षित लाभार्थियों को किसी न किसी प्रकार के रोजगार—जैसे वेतन रोजगार, स्वरोजगार या अप्रेंटिसशिप—में, विशेषकर संगठित क्षेत्र में, नियुक्ति के लिए सहयोग किया जाएगा। सभी लाभार्थियों को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) / NCVET द्वारा अनुमोदित संस्थानों से प्रमाणन प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम जनवरी 2026 से प्रारंभ किए जाने की संभावना है।

भारत की खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की प्रतिनिधिमंडल ने 'Africa Food 2025' में लिया भाग, अफ्रीका में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा

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खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) के प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व उप सचिव विवेक कुमार सिंह और उप सचिव अरुणव सेनगुप्ता ने किया, ने 11 से 13 दिसंबर 2025 तक त्यूनीस में आयोजित 'Africa Food 2025' में भाग लिया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया पविलियन में उद्योग हितधारकों के साथ सक्रिय बातचीत की और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीशिया सरकार के प्रतिनिधियों और विभिन्न औद्योगिक संघों के साथ भी मुलाकात की, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना था।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीस के एक फूड टेस्टिंग लैब का भी दौरा किया और मूल्यवान सुझाव साझा किए, जिससे खाद्य सुरक्षा अवसंरचना और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को मजबूत करने पर चर्चा में योगदान मिला।

इस भागीदारी से मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने और खाद्य सुरक्षा व प्रसंस्करण में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के प्रयासों की पुष्टि होती है।


खाद्य खुराक 2025, गांधीनगर में जी20 सफलताओं का प्रदर्शन कर रहा है एपीडा

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भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.97% तक घटी

IPRS 3.0, जिसे एशियाई विकास बैंक के साथ विकसित किया गया है, औद्योगिक पार्कों को स्थिरता, हरित बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी, डिजिटल तत्परता और कौशल विकास के आधार पर रेटिंग देता है।
SMILE कार्यक्रम के तहत 8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में लॉजिस्टिक्स योजनाएँ शुरू की गई हैं, ताकि मौजूदा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का आकलन किया जा सके और दक्षता बढ़ाते हुए लागत कम की जा सके।

भारत की लॉजिस्टिक्स कहानी का नया अध्याय

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और खुद को तेज, स्मार्ट और वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रणाली में बदल रहा है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म जो माल ढुलाई को सरल बनाते हैं, आधुनिक अवसंरचना जो देश के हर हिस्से को जोड़ती है — इन सबके माध्यम से अगली पीढ़ी का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। लक्षित नीति सुधारों, संस्थागत पुनर्गठन और तकनीक-आधारित समाधानों के साथ सरकार लॉजिस्टिक्स को भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार स्थिति का प्रमुख इंजन बना रही है।

संरचनात्मक बदलावों की श्रृंखला इस बात को बदल रही है कि देशभर में लॉजिस्टिक्स की योजना कैसे बनाई जाती है, उसे कैसे लागू किया जाता है और कैसे बढ़ाया जाता है।
ULIP (Unified Logistics Interface Platform) जैसे प्लेटफ़ॉर्म विभागों के बीच डेटा को एकीकृत कर रहे हैं, जबकि LDB (Logistics Data Bank) 2.0 लाखों कंटेनरों की वास्तविक समय निगरानी प्रदान करता है।
हर HSN कोड को उसकी संबंधित लाइन मंत्रालय से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही और नीति निर्माण दोनों मजबूत हुए हैं।

SMILE कार्यक्रम के तहत शहर एवं राज्य स्तर की लॉजिस्टिक्स योजनाएँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लाई जा रही हैं।
पिछले वर्ष अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से 145.84 मिलियन टन कार्गो का रिकॉर्ड परिवहन हुआ। रेल जाम को समर्पित मालवाहक गलियारों से कम किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में NICDC के प्लग-एंड-प्ले पार्क निवेशकों को तैयार अवसंरचना प्रदान कर रहे हैं।

जमीनी स्तर पर, GST और ई-वे बिल जैसी सुधारों ने अंतरराज्यीय परिवहन से दशकों पुरानी रुकावटों को दूर किया है।
इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य स्पष्ट है— लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, दक्षता बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना।

गंगा के मैदान में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स

भारत गंगा के मैदान में एकीकृत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो सड़क, रेल और जलमार्गों को जोड़कर परिवहन को तेज, सस्ता और हरित बना रहा है।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), एक उच्च गति रेल माल लाइन, ने वैगन टर्नअराउंड समय को 15–16 दिनों से घटाकर 2–3 दिन कर दिया है और ट्रांजिट समय को 60+ घंटे से घटाकर 35–38 घंटे कर दिया है।
प्रयागराज में केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के माध्यम से माल संचालन संचालित किए जा रहे हैं।
EDFC का वाराणसी में गंगा जलमार्ग से जुड़ना निर्माताओं को हल्दिया जैसे पूर्वी बंदरगाहों तक कार्गो पहुंचाने में अधिक सुविधा दे रहा है।

वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का तेजी से विकास रोजगार सृजन, बेहतर इनवेंटरी प्रबंधन और समयबद्ध उत्पादन एवं निर्यात में सहायता कर रहा है।
इन परियोजनाओं में विश्व बैंक द्वारा $1.96 बिलियन (EDFC और रेल लॉजिस्टिक्स) और $375 मिलियन (गंगा जलमार्ग) का निवेश शामिल है।

लॉजिस्टिक्स पहले से अधिक क्यों महत्वपूर्ण

भारत की विकास यात्रा अब कुशल लॉजिस्टिक्स पर अधिक निर्भर है।
नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और पीएम गतिशक्ति ने इस परिवर्तन को तेज किया है। परंतु रणनीति को सटीकता की आवश्यकता होती है — और वह शुरू होती है लॉजिस्टिक्स लागत के वास्तविक आंकड़ों से।

पहली बार—
DPIIT और NCAER की व्यापक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 7.97% पर रखा है।

यह अध्ययन 3,500+ उद्योग हितधारकों के प्राथमिक डेटा और MOSPI, RBI, GSTN जैसे स्रोतों के द्वितीयक डेटा पर आधारित है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष:

  • लॉजिस्टिक्स लागत: ₹24.01 लाख करोड़

  • नॉन-सर्विसेज आउटपुट के मुकाबले: 9.09%

रिपोर्ट दर्शाती है कि छोटी कंपनियों पर लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ अधिक है।
अध्ययन विभिन्न परिवहन मोड्स के लिए प्रति टन-किमी लागत भी प्रदान करता है।

यह स्पष्ट करता है कि लगभग 600 किमी की यात्रा में पहले और अंतिम 50 किमी में सुधार से कुल लागत काफी घट सकती है।
इससे अंतिम-मील संपर्क और मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन का महत्व बढ़ जाता है।

नया इंटरैक्टिव डैशबोर्ड नीति-निर्माताओं और उद्योग दोनों को वास्तविक समय विश्लेषण और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

2025: भारत की सप्लाई चेन को सुपरचार्ज करना

2025 में कई नई पहलें शुरू की गईं—
मापांकन, स्थानीय योजना, अवसंरचना और डेटा एकीकरण को मजबूत करने के लिए।

1. PM GatiShakti — एकीकृत योजना को गति

इस वर्ष निम्न प्रमुख लॉन्च किए गए:

  • सभी 112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान

  • PM GatiShakti – Offshore (समुद्री परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक डेटा एकीकरण)

  • PM GatiShakti Public: 230 datasets का सार्वजनिक उपयोग

  • National Master Plan Dashboard और Data Uploading System

  • Compendium Volume-3

  • LEAPS 2025 — लॉजिस्टिक्स नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए DPIIT पहल

2. SMILE — शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स योजना

ADB के सहयोग से विकसित SMILE कार्यक्रम
राज्य और शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करता है।

8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में—

  • ट्रंक रूट्स

  • आर्थिक गलियारे

  • लॉजिस्टिक्स गेटवे

  • शहरी माल ढुलाई

  • वेयरहाउस क्लस्टर

  • लास्ट-माइल कॉरिडोर

को एकीकृत ढंग से योजना में शामिल किया जा रहा है।

उद्देश्य:
तेज, सस्ता, स्वच्छ और संगठित शहरी लॉजिस्टिक्स प्रणाली।

3. LEADS 2025 — राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस रैंकिंग

LEADS अब धारणा-आधारित और वस्तुनिष्ठ दोनों प्रकार के डेटा को जोड़कर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है।
API-आधारित टूल्स वास्तविक समय में सड़क गति, यात्रा समय और प्रतीक्षा समय को ट्रैक करते हैं।

4. LDB 2.0 — बाजारों को गति देने वाली दृश्यता

ULIP के साथ एकीकृत LDB 2.0:

  • वास्तविक समय कंटेनर ट्रैकिंग

  • रोड, रेल, समुद्र और हाई-सीज ट्रैकिंग

  • लाइव कंटेनर देरी हीटमैप

  • कंटेनर नंबर, वाहन नंबर, रेलवे FNR से ट्रैकिंग

5. IPRS 3.0 — औद्योगिक पार्कों की रैंकिंग

IPRS 3.0 पार्कों को तीन श्रेणियों में रैंक करता है:
Leader, Challenger, Aspirer

20 प्लग-एंड-प्ले पार्क NICDC के तहत विकसित हो रहे हैं।

6. HSN कोड गाइडबुक

12,167 HSN कोड्स को 31 मंत्रालयों से मैप किया गया है, जिससे उद्योग और सरकार दोनों के लिए स्पष्टता बढ़ी है।

निष्कर्ष

लॉजिस्टिक्स अब परदे के पीछे का तंत्र नहीं है —
भारत इसे अपनी प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में बदल रहा है।

PM GatiShakti Public/Offshore, SMILE, LEAPS 2025, LEADS 2025, IPRS 3.0, LDB 2.0 जैसी पहलों के साथ भारत अपने लॉजिस्टिक्स को लागत केंद्र से वैश्विक प्रतिस्पर्धा की शक्ति में बदल रहा है।

विकास इंजन से वैश्विक नेतृत्व की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ अहम मुलाकात, राज्य में खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगी नई दिशा

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े अनेक जनहित विषयों पर रचनात्मक और सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमं त्रीसाय ने विशेष रूप से राज्य में खाद्य सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक खाद्य तकनीक, उद्यमिता तथा नए रोजगारों से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक मजबूत राज्य है और यहां ऐसे संस्थान से हजारों छात्रों, किसानों तथा खाद्य-आधारित उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को अत्यंत सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वे इस विषय पर हर संभव सहयोग देंगे और इसे गंभीरता से विचार में लेंगे।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यह अनुरोध भी किया कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाए। उन्होंने कहा कि रायपुर की समृद्ध खाद्य परंपरा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और विविधता ऐसे आयोजन के लिए आदर्श गंतव्य बनाती है। यह फेस्टिवल क्षेत्रीय पाक-परंपराओं को वैश्विक पहचान देगा और नए खाद्य-आधारित उद्यमों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया अथवा गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तर्ज पर हर दो वर्ष में आयोजित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खाद्य वस्तुओं की जांच के लिए फूड टेस्टिंग लैब तथा खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट स्थापित की जानी हैं, जिनके लिए राज्य केंद्र से सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि धान तथा फल–सब्जी आधारित उद्योगों में बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को व्यापक गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को विशेष महत्व दिया गया है और निवेशकों को अनेक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत Drools कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जिससे लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और इसका लाभ ग्रामीण व आदिवासी समुदायों तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 का सपना इन्हीं प्रयासों के माध्यम से साकार होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत तथा इन्वेस्टमेंट कमिश्नर रितु सेन उपस्थित थीं।

प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (PMKSY) के तहत फूड टेस्टिंग लैब्स के लिए आवेदन आमंत्रित

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कृषि प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) योग्य उद्यमियों से अनुरोध करता है कि वे फूड सेफ्टी एंड क्वालिटी एश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर (FSQAI) घटक के तहत NABL मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग लैब्स स्थापित करने के लिए अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इच्छुक आवेदक आवेदन केवल ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

आवेदन करने की महत्वपूर्ण जानकारी:

  • ऑनलाइन आवेदन: https://www.sampada-mofpi.gov.in के माध्यम से।

  • अंतिम तिथि: 20 जनवरी 2026, 17:00 बजे तक।

  • आवेदन शुल्क: गैर-वापसी योग्य डिमांड ड्राफ्ट के रूप में, “Pay & Accounts Officer, Ministry of Food Processing Industries, New Delhi” के नाम। स्कैन कॉपी ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है। मूल डाक द्वारा मंत्रालय को अंतिम तिथि के एक सप्ताह के भीतर भेजा जाना चाहिए।

  • प्री-बिड मीटिंग: 02 दिसंबर 2025, 2:30 PM, रूम नंबर 120, मंत्रालय कार्यालय, पंचशील भवन, ऑगस्ट क्रांति मार्ग, नई दिल्ली।

  • तकनीकी सहायता और आवेदन फॉर्म: आवेदन लिंक और फॉर्म 20 जनवरी 2026, 17:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगे।

आवेदन करने वाले उद्यमियों से अनुरोध है कि वे स्कीम गाइडलाइन्स (12 नवम्बर 2025) का सख्ती से पालन करें, जो मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

यह पहल किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य परीक्षण सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।

एनआईएफटीईएम ने दिया मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद निर्माण का जशपुर में प्रशिक्षण

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पोषण तत्वों  के साथ ही रोजगार के अवसरों की दी जानकारी

रायपुर- एनआईएफ़टीईएम के छात्रों ने मोटे अनाज में पाए जाने वाले फ़ाइबर, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स के महत्व के साथ ही इनके नियमित उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को मोटे अनाज आधारित उत्पादों से होने वाली आमदनी और बाज़ार संभावनाओं के बारे में भी बताया गया।

प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूह की 25 महिलाओं की रही सहभागिता

हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट द्वारा महुआ पर स्थापित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में विगत दिवस मोटे अनाज के पोषण तत्वों और इनके उपयोग से बेकरी उत्पाद बनाने संबंधी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में स्व सहायता समूह की 25 महिलाओं ने सहभागिता की।

मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर  पोषण स्तर में करना है वृद्धि

कार्यक्रम का उद्देश्य नान खटाई, न्यूट्रीबार, कुकीज़ जैसे बेकरी आइटम्स में मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर इनके पोषण स्तर में वृद्धि करना और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। 

स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से है जोड़ना 

जशपुर में एनआईएफ़टीईएम टीम वैल्यू-एडेड फ़ूड प्रोडक्ट्स के उत्पादन के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। यह पूरी पहल स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत की जा रही है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. प्रसन्ना कुमार जी.वी. और अभिमन्यु गौर कर रहे हैं, जबकि यह कार्यक्रम एनआईएफ़टीईएम के डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय के निर्देशन में संचालित हो रहा है। कार्यक्रम के संचालन और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में मिशन मैनेजर विजय शरण प्रसाद और जय जंगल एफपीसी जशपुर के डायरेक्टर समर्थ जैन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

एकीकृत कोल्ड चेन एवं मूल्य संवर्धन अवसंरचना योजना (ICCVAI): कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

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परिचय

भारत में कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-harvest losses) अब भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, विशेष रूप से फलों, सब्ज़ियों, डेयरी उत्पादों, मांस, पोल्ट्री और मछली जैसे नाशवंत उत्पादों के लिए। अनुसंधानों से यह स्पष्ट हुआ है कि फसल कटाई, संभालने, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण की प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में नुकसान होता है, जिससे किसानों की आय घटती है, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ती हैं और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना योजना (Integrated Cold Chain and Value Addition Infrastructure Scheme - ICCVAI) शुरू की है, जिसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के अंतर्गत “कोल्ड चेन योजना” के रूप में संचालित किया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेत से लेकर खुदरा बाजार तक एक निर्बाध कोल्ड चेन प्रणाली स्थापित करना है ताकि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और किसानों को उनके उत्पादों के बेहतर मूल्य मिल सकें।

यह योजना पहले से ही अस्तित्व में थी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2016–17 में इसे पुनर्गठित कर PMKSY के अंतर्गत शामिल किया गया। PMKSY मंत्रालय की एक छत्र योजना है, जिसका लक्ष्य खेत से खुदरा बाजार तक आधुनिक अवसंरचना और कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन विकसित करना है। कोल्ड चेन योजना को इस छत्र योजना में शामिल करने का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और बाजारों को जोड़ने वाली एक पूर्ण कोल्ड चेन प्रणाली विकसित करना, अपव्यय को कम करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और नाशवंत वस्तुओं के क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।

कोल्ड चेन अवसंरचना का महत्व केवल भंडारण तक सीमित नहीं है — इसमें खेतों पर प्री-कूलिंग सुविधाएं, आधुनिक प्रसंस्करण केंद्र, कुशल वितरण केंद्र और तापमान-नियंत्रित परिवहन प्रणाली शामिल हैं, जो आपस में समन्वयित रूप से कार्य करती हैं।

यह योजना कई क्षेत्रों को कवर करती है — जैसे बागवानी (फलों और सब्ज़ियों को छोड़कर, जिन्हें 2022 से एक अलग योजना में शामिल किया गया है), डेयरी, मांस, पोल्ट्री और मत्स्य (श्रिंप को छोड़कर)। इस पुनर्गठन का उद्देश्य सहायता को सुव्यवस्थित करना और दोहराव को रोकना था। फल, सब्ज़ी और श्रिंप क्षेत्र को ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के अंतर्गत स्थानांतरित किया गया, जो आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने पर केंद्रित है।

NABARD कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रा. लि. (NABCONS) द्वारा 2020 में किए गए एक मूल्यांकन अध्ययन में पाया गया कि ICCVAI योजना के तहत किए गए हस्तक्षेपों से फलों, सब्ज़ियों, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में अपव्यय में उल्लेखनीय कमी आई है।

ICCVAI योजना के उद्देश्य

इस योजना के प्रमुख उद्देश्य कोल्ड चेन अवसंरचना के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • खेत से बाजार तक निर्बाध कोल्ड चेन विकसित करना

  • कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना

  • किसानों की आय में वृद्धि करना

  • रोजगार के अवसर पैदा करना

  • नाशवंत उत्पादों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार करना

ICCVAI के प्रमुख घटक

इस योजना के तहत आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर अवसंरचना के निर्माण का समर्थन किया जाता है, जिसमें विशेष रूप से खेत-स्तर की सुविधाओं पर जोर दिया गया है।

22 मई 2025 की दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी आवेदक को वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए फार्म लेवल इन्फ्रास्ट्रक्चर (FLI) स्थापित करना आवश्यक है, जिसे वितरण केंद्र (Distribution Hub) या रेफ्रिजरेटेड/इंसुलेटेड ट्रांसपोर्ट से जोड़ा जाना चाहिए।


मुख्य घटक हैं:

  • फार्म लेवल प्री-कूलिंग और भंडारण

  • कोल्ड स्टोरेज और नियंत्रित वातावरण (CA) सुविधाएं

  • तापमान-नियंत्रित परिवहन

  • वितरण केंद्र

  • प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन इकाइयाँ

फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए पात्रता

यह एक मांग आधारित योजना (Demand Driven Scheme) है। इसके तहत विभिन्न पात्र संस्थाएं (Project Implementing Agencies – PIAs) फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर सकती हैं।

पात्र संस्थाएं:

  • व्यक्ति (किसानों सहित)

  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs), किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs),
    गैर-सरकारी संगठन (NGOs),
    सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSUs),
    फर्म, कंपनियां, निगम, सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह (SHGs)।

मंत्रालय पात्र संस्थाओं से अभिरुचि की अभिव्यक्ति (EOI) के माध्यम से प्रस्ताव आमंत्रित करता है। खाद्य उत्पादों के भंडारण के लिए राज्यों की सहमति अनिवार्य नहीं है, लेकिन इकाइयों की स्थापना में उनका सहयोग आवश्यक है।

ICCVAI योजना से संबंधित अन्य सरकारी पहलें

  • बागवानी के एकीकृत विकास मिशन (MIDH)

  • राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB)

  • कृषि अवसंरचना कोष (AIF)

  • ऑपरेशन ग्रीन्स योजना

वित्तीय सहायता

PMKSY के तहत बजटीय आवंटन में वृद्धि (2025)
जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PMKSY के लिए ₹1,920 करोड़ की अतिरिक्त राशि को मंजूरी दी, जिससे कुल आवंटन बढ़कर ₹6,520 करोड़ हो गया (15वीं वित्त आयोग अवधि तक, 31 मार्च 2026 तक)। इसमें ICCVAI योजना के तहत 50 मल्टी-प्रोडक्ट फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स स्थापित करने के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान शामिल है।

सामान्य क्षेत्रों में पात्र परियोजना लागत का 35% और कठिन क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जनजातीय क्षेत्र आदि) में 50% तक की अनुदान सहायता प्रदान की जाती है। प्रत्येक परियोजना को अधिकतम ₹10 करोड़ तक सहायता मिल सकती है।

उपलब्धियां और प्रगति

जून 2025 तक, 395 एकीकृत कोल्ड चेन परियोजनाएं अनुमोदित की जा चुकी हैं, जिनमें से 291 परियोजनाएं पूरी होकर चालू हो चुकी हैं।
इनसे 25.52 लाख मीट्रिक टन (LMT) की संरक्षण क्षमता और 114.66 LMT की प्रसंस्करण क्षमता विकसित हुई है, साथ ही लगभग 1,74,600 रोजगार सृजित हुए हैं।

2016–17 के बाद से इस योजना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2016–17 से अब तक ₹1535.63 करोड़ की राशि 269 परियोजनाओं के लिए जारी की जा चुकी है, जिनमें से 169 परियोजनाएं पूरी होकर चालू हैं।

प्रमुख संशोधन और नीतिगत अपडेट

  • जून 2022 संशोधन: फलों और सब्ज़ियों से संबंधित कोल्ड चेन परियोजनाओं को योजना से हटाकर ऑपरेशन ग्रीन्स के अंतर्गत स्थानांतरित किया गया।

  • अगस्त 2024 दिशानिर्देश: मल्टी-प्रोडक्ट फूड इर्रेडिएशन यूनिट्स की स्थापना के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए, जिनका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ाना और नुकसान घटाना है।

  • मई 2025 संशोधन: नवीनतम दिशानिर्देशों ने पूरे आपूर्ति श्रृंखला में संरक्षण और मूल्य संवर्धन को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।

निष्कर्ष

यह योजना अनुकूल शासन (Adaptive Governance) का उदाहरण है।
2022 में क्षेत्रीय पुनर्संरचना, 2025 में बजट वृद्धि, और नई तकनीकों जैसे इर्रेडिएशन सुविधाओं को शामिल करना सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस योजना का वित्तीय ढांचा इसे छोटे किसानों से लेकर बड़े कॉर्पोरेट तक सभी के लिए व्यवहार्य बनाता है। साथ ही, IoT आधारित निगरानी, ऊर्जा-कुशल प्रणालियाँ और AI-आधारित लॉजिस्टिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का एकीकरण इसकी दक्षता को और बढ़ा सकता है।

कृषि विपणन सुधारों से जोड़कर यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

सिक्किम में नई GST सुधार: पर्यटन, फार्मा, चाय और खाद्य प्रसंस्करण में विकास और रोजगार के नए अवसर

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सिक्किम में नई GST सुधारों का प्रभाव: विकास और रोजगार के नए अवसर

परिचय

नई GST सुधारें आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर कर बोझ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये नई दरें मांग को बढ़ावा देंगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएंगी और देश में विकास व रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेंगी।सिक्किम, जो एक छोटा हिमालयी राज्य है और जहाँ फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और जैविक खाद्य उत्पादों में हिस्सेदारी है, के लिए ये GST सुधार समय पर आए हैं। कर कटौती सिक्किम के व्यापक विकास लक्ष्यों से मेल खाती हैं, जैसे औद्योगिक विविधीकरण, पर्यटन संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का उत्थान। कम GST दरें सिक्किम के प्रमुख क्षेत्रों को अधिक लागत-प्रतिस्पर्धी बनाएंगी, जिससे मांग और बाजार पहुंच बढ़ेगी। ये सुधार स्थानीय आजीविकाओं को मजबूत करेंगे, निर्यात का विस्तार करेंगे और सिक्किम की आर्थिक वृद्धि में योगदान देंगे।

पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र

पर्यटन उद्योग सिक्किम की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें होटल, होमस्टे, यात्रा एजेंसियां, टैक्सी ऑपरेटर, गाइड और भोजनालय शामिल हैं, जो स्थानीय आय और रोजगार का समर्थन करते हैं। अनुमानित 7.8 लाख लोग इस क्षेत्र से अपनी आजीविका प्राप्त करते हैं।

मुख्य पर्यटन स्थल जैसे कंचनजंगा नेशनल पार्क, लाचन, लाचुंग और युमथांग वैली लगातार अधिक संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। गंगटोक को भारत सरकार द्वारा “सबसे सुरक्षित पर्यटन स्थल” के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। नए GST सुधारों के तहत, ₹7,500 प्रति रात तक के होटल आवास पर केवल 5% GST लगाया जाएगा। यह कर कटौती सीधे पर्यटकों की जेब में पैसे बचाएगी, जिससे होटल की बुकिंग बढ़ेगी और प्रवास लंबा होगा। उच्च होटल ऑक्युपेंसी से इस क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा।

सौंदर्य और वेलनेस सेवाओं पर GST को 18% से घटाकर 5% किया गया है। सिक्किम वेलनेस टूरिज्म के लिए जाना जाता है और राज्य में कई पारंपरिक और हर्बल चिकित्सा केंद्र हैं। 5% GST के कारण वेलनेस टूरिज्म पैकेज अब अधिक किफायती हो गए हैं। पर्यटन को कर राहत के माध्यम से प्रोत्साहित करना सिक्किम की अर्थव्यवस्था को और विविधित करने में मदद करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों का उत्थान करेगा।

फार्मा और दवा क्षेत्र

सिक्किम ने फार्मास्यूटिकल उत्पादन में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। राज्य में 50 से अधिक फार्मा कंपनियां हैं, जिनमें Sun Pharma, Cipla, Zydus Cadila जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

GST सुधारों के तहत दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर कर या तो समाप्त कर दिया गया है या काफी घटा दिया गया है। विशेष रूप से 30 कैंसर दवाएँ अब पूर्णतः GST-मुक्त हैं और अन्य दवाओं पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। अधिकतर चिकित्सा और शल्य उपकरण, थर्मामीटर आदि पर भी केवल 5% GST लागू होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम होगी और दवाओं की उपलब्धता सस्ती होगी।

सिक्किम के फार्मा उत्पादकों को निर्यात प्रतिस्पर्धा और बाजार विस्तार में लाभ होगा। फार्मा फार्मुलेशन, बायोलॉजिकल्स और मेडिकल उपकरण राज्य के कुल निर्यात का लगभग 63% बनाते हैं। 5% से शून्य GST होने से उत्पादकों पर कर बोझ कम होगा और उत्पादन लागत घटेगी।

प्रीमियम चाय

सिक्किम के टेमी एस्टेट की चाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों जैसे USA, Germany, UK और Japan में लोकप्रिय है। यहाँ लगभग 450 श्रमिक काम करते हैं। पहले पैकेज्ड और इंस्टेंट चाय पर 18% GST लगता था। अब इसे 5% GST पर लाया गया है। इससे अंतिम उपभोक्ता कीमत में लगभग 11% की कमी आएगी। टेमी चाय के लिए यह GST कटौती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी। श्रमिकों और छोटे उत्पादकों के लिए इससे आय बढ़ेगी।

फूड प्रोसेसिंग सेक्टर

सिक्किम में विविध फूड प्रोसेसिंग उद्योग है। पकीयांग में बेकरी, स्नैक्स और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनते हैं, सोरेंग में मांस आधारित उत्पाद, मंगल में बड़ी इलायची, और गंगटोक में Dalley Khorsani मिर्च का उत्पादन होता है।

नई GST सुधारों के तहत अचार, फल और सब्जियों का जूस 5% GST पर है, जबकि पेस्ट्री, केक, सूप आदि पर GST 18% से घटाकर 5% हुआ है। इससे उपभोक्ता कीमत में 6-13% की कमी आएगी और मांग बढ़ेगी। यह क्षेत्र PMFME योजना के तहत 1300+ उद्यमों द्वारा संचालित है। इन इकाइयों में आटा, चाय, फल, बेकरी उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। मांग बढ़ने से उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।

निष्कर्ष

सिक्किम के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों पर कर बोझ कम करके नई GST सुधारें राज्य की संपूर्ण आर्थिक विकास की प्रक्रिया को गति देंगी।

इन सुधारों के प्रभाव को हम फार्मा प्लांट में अतिरिक्त दवा पैकेट भेजते, गंगटोक होटल में लंबे प्रवास वाले खुशहाल पर्यटकों, टेमी चाय एस्टेट के बढ़ते ऑर्डर, या गांव की महिला सहकारी समिति द्वारा दाल्ली खोरसानी अचार उत्पादन दोगुना करते देखकर देख सकते हैं। नई GST सुधारें सिक्किम में सस्ती वस्तुएँ, मजबूत निर्यात और रोजगार के नए अवसर लाने के लिए तैयार हैं।

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