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छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध, होटल-रेस्तरां में भी नहीं होगा इस्तेमाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से राज्यभर में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के स्थान पर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर तथा अन्य वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है। देखने और स्वाद में यह पनीर जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसका पोषण स्तर असली दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश

राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को बाजार, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान चलाकर नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ में लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर लागू है। देश के अन्य राज्यों में इसके निर्माण या बिक्री पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

इस बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के लिए नए मानक और लेबलिंग संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा, खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

कोरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट किए गए 108 किलो फल, दुकानों पर छापेमारी

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​बैकुंठपुर/कोरिया- कोरिया जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले फल विक्रेताओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के निर्देश पर और कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले की अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर के नेतृत्व में टीम ने पिछले तीन दिनों 27 मई से 29 मई तक, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताबड़तोड़ निरीक्षण किया। इस दौरान भारी मात्रा में सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट कराए गए, वहीं दुकानदारों को सख्त हिदायत भी दी गई। अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, 27 मई को अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से हुई। यहाँ टीम ने 6 फल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी मात्रा में खराब फल पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। इस दौरान ​22 किलोग्राम आम, ​4 किलोग्राम सेब, ​14 दर्जन केले, ​1 किलोग्राम संतरा और 500 ग्राम अनार नष्ट कराया गया। इसी तरह से ​28 मई को कार्रवाई के दूसरे दिन टीम पटना पहुँची, जहाँ 9 फल दुकानों की जाँच की गई। टीम ने सभी दुकानदारों को सड़े एवं खराब फल न बेचने तथा दुकानों में स्वच्छता बनाए रखने की सख्त समझाइश दी। कार्रवाई के तीसरे दिन आज ​29 मई को जिला मुख्यालय में दोबारा कार्रवाई की गई। आज मुख्यालय के अलग-अलग क्षेत्र में फिर से 5 फल दुकानों का सघन जांच किया गया। यहाँ नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 77 किलोग्राम से अधिक फल और केले नष्ट कराए गए। जिनमें ​65 किलोग्राम तरबूज, 12 किलोग्राम आम, 0​1 किलोग्राम सेब, ​2 दर्जन केले, 0​1 किलोग्राम अंगूर और 0​1 किलोग्राम चुकंदर शामिल है। 

अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि, लोगों के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं है। गर्मी के इस मौसम में सड़े-गले और हानिकारक रसायनों से पकाए गए फल बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी फल विक्रेताओं को अपनी दुकानों में साफ-सफाई रखने और केवल गुणवत्तापूर्ण फल ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, विभाग का यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इस कार्रवाई में नमूना सहायक प्रमोद पैकरा और निधि जायसवाल का योगदान रहा।


प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 2024-25 में ₹630 करोड़ का फंड आवंटन, मांग आधारित प्रणाली से मिलती है सहायता

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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) केंद्रीय क्षेत्र की अम्ब्रेला योजना प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) का क्रियान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए PMKSY के तहत ₹630 करोड़ का फंड आवंटन किया गया था।

PMKSY के अंतर्गत घटक योजनाएं निम्नलिखित हैं:

(i) एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना (Integrated Cold Chain & Value Addition Infrastructure – ICC&VAI)
(ii) कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए अवसंरचना (Infrastructure for Agro-processing Clusters – APC)
(iii) खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता का सृजन/विस्तार (Creation/Expansion of Food Processing & Preservation Capacities – CEFPPC)
(iv) खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना (Food Safety and Quality Assurance Infrastructure – FSQAI)
(v) मानव संसाधन और संस्थान (अनुसंधान एवं विकास)
(vi) ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens – OG)
(vii) मेगा फूड पार्क (01.04.2021 से बंद)
(viii) बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का सृजन (01.04.2021 से बंद)

PMKSY के तहत पात्र संस्थाओं जैसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म, एलएलपी, सहकारी समितियां, एफपीओ/एफपीसी/एसएचजी आदि को खाद्य प्रसंस्करण/संरक्षण/परीक्षण/विश्लेषण अवसंरचना स्थापित करने और खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए अनुदान सहायता (ग्रांट-इन-एड) प्रतिपूर्ति आधार पर प्रदान की जाती है। यह योजना हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में लागू है।

PMKSY एक मांग आधारित योजना है और इसके तहत आवेदन एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) के माध्यम से पूरे देश से आमंत्रित किए जाते हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस योजना के तहत किसी भी घटक योजना में राज्यों के अनुसार धन आवंटित/स्वीकृत/जारी नहीं किया जाता। प्राप्त प्रस्तावों की पात्रता की जांच की जाती है और योजना दिशानिर्देशों के अनुसार तय मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। उपलब्ध निधि के आधार पर मेरिट के अनुसार पात्र प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाती है।

यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।


एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस नियमों के बीच भारत को यूरोपीय संघ के बाज़ार में निरंतर पहुँच सुनिश्चित

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एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के मद्देनज़र, यूरोपीय संघ ने EU विनियमन (EU) 2021/405 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है, जिसे यूरोपीय आयोग के कार्यान्वयन विनियमन (EU) 187/2026/EC के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। यह संशोधित विनियमन सितंबर 2026 से प्रभावी होगा। यदि भारत उस समय तक इस विनियमन की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता, तो भारतीय पशु-उत्पादों के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। वर्तमान में यूरोपीय संघ को भारत से मछली और मत्स्य उत्पादों का निर्यात लगभग 1.125 अरब अमेरिकी डॉलर का है।

भारत सरकार द्वारा समयबद्ध और सक्रिय कदम उठाए जाने के परिणामस्वरूप, भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है जिन्हें सितंबर 2026 के बाद भी यूरोपीय संघ में एक्वाकल्चर उत्पादों, अंडों, शहद और पशु आवरण (animal casings) के प्रवेश की अनुमति प्राप्त है। वहीं, दूध और पोल्ट्री उत्पादों के लिए सशर्त प्रावधान लागू रहेंगे। इस निर्णय से कड़े नियामक प्रावधानों के बावजूद यूरोपीय संघ के बाज़ार में भारतीय पशु-उत्पादों की निरंतर पहुँच सुनिश्चित हुई है।

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग, भारत सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जो निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय में किए गए। वाणिज्य विभाग यूरोपीय आयोग के साथ नियामक और बाज़ार पहुँच से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद करता रहा है, जबकि EIC ने भारत की आधिकारिक नियंत्रण प्रणाली (Official Control System) — जिसमें निरीक्षण, परीक्षण और प्रमाणन तंत्र शामिल हैं — को यूरोपीय संघ के नियामक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वाणिज्य विभाग, निर्यात निरीक्षण परिषद, तथा समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) सहित अन्य हितधारकों के साथ मिलकर, यूरोपीय संघ द्वारा अनुमोदित प्रतिष्ठानों और वहाँ की नियामक संस्थाओं के साथ निकट सहयोग जारी रखेगा, ताकि संशोधित विनियमों का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके और यूरोपीय संघ सहित वैश्विक बाज़ारों के लिए खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा आश्वासन को और सुदृढ़ किया जा सके।

संशोधित यूरोपीय संघ विनियमन के अंतर्गत भारत की यह सहभागिता भारतीय निर्यातकों के लिए बाज़ार पहुँच को बेहतर बनाएगी, व्यापार प्रवाह को प्रोत्साहित करेगी और पशु-उत्पाद क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करेगी। भारत सरकार निर्यात को बढ़ावा देने, संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ आर्थिक सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का उदयपुर में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

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उदयपुर (राजस्थान)- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने राजस्थान के उदयपुर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, निफ्टेम (NIFTEMs) और इन्वेस्ट इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नीति सुधारों, नवाचार, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्यवाही के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रमुख सचिव सहित कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित अन्य केंद्रीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना

चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण को मजबूत करने तथा विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक होगा।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और सतत खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

समूह चर्चा: प्रमुख चुनौतियां और रणनीतिक सुझाव

चिंतन शिविर के दौरान छह विषयगत समूहों में गहन मंथन किया गया। इन समूहों ने अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने, प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड फोर्टिफिकेशन, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन उत्पाद और अल्कोहलिक बेवरेज जैसे उच्च विकास क्षेत्रों की योजना, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता, फार्म से फोर्क तक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा प्रसंस्कृत खाद्य को लेकर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की।

समूहों ने कृषि स्तर पर एकत्रीकरण, एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड चेन एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने जैसे ठोस सुझाव दिए। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देने, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना और ‘भारत गुणवत्ता खाद्य चिन्ह’ शुरू करने की अनुशंसा की गई।

राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाएं

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अपनी सर्वोत्तम नीतिगत पहलों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की योजना प्रस्तुत की, जबकि महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल साझा की। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों ने भी क्षेत्रीय नवाचारों और निर्यातोन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

सहायक पहल और आगे की राह

चिंतन शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत विकसित कॉमन इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन भी किया, जो सीताफल, जामुन, आंवला, एलोवेरा और मसालों जैसे लघु वनोपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय से ही भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समयबद्ध रूप से सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया।


भारत की खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की प्रतिनिधिमंडल ने 'Africa Food 2025' में लिया भाग, अफ्रीका में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा

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खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) के प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व उप सचिव विवेक कुमार सिंह और उप सचिव अरुणव सेनगुप्ता ने किया, ने 11 से 13 दिसंबर 2025 तक त्यूनीस में आयोजित 'Africa Food 2025' में भाग लिया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया पविलियन में उद्योग हितधारकों के साथ सक्रिय बातचीत की और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीशिया सरकार के प्रतिनिधियों और विभिन्न औद्योगिक संघों के साथ भी मुलाकात की, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना था।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीस के एक फूड टेस्टिंग लैब का भी दौरा किया और मूल्यवान सुझाव साझा किए, जिससे खाद्य सुरक्षा अवसंरचना और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को मजबूत करने पर चर्चा में योगदान मिला।

इस भागीदारी से मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने और खाद्य सुरक्षा व प्रसंस्करण में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के प्रयासों की पुष्टि होती है।


प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (PMKSY) के तहत फूड टेस्टिंग लैब्स के लिए आवेदन आमंत्रित

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कृषि प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) योग्य उद्यमियों से अनुरोध करता है कि वे फूड सेफ्टी एंड क्वालिटी एश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर (FSQAI) घटक के तहत NABL मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग लैब्स स्थापित करने के लिए अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इच्छुक आवेदक आवेदन केवल ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

आवेदन करने की महत्वपूर्ण जानकारी:

  • ऑनलाइन आवेदन: https://www.sampada-mofpi.gov.in के माध्यम से।

  • अंतिम तिथि: 20 जनवरी 2026, 17:00 बजे तक।

  • आवेदन शुल्क: गैर-वापसी योग्य डिमांड ड्राफ्ट के रूप में, “Pay & Accounts Officer, Ministry of Food Processing Industries, New Delhi” के नाम। स्कैन कॉपी ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है। मूल डाक द्वारा मंत्रालय को अंतिम तिथि के एक सप्ताह के भीतर भेजा जाना चाहिए।

  • प्री-बिड मीटिंग: 02 दिसंबर 2025, 2:30 PM, रूम नंबर 120, मंत्रालय कार्यालय, पंचशील भवन, ऑगस्ट क्रांति मार्ग, नई दिल्ली।

  • तकनीकी सहायता और आवेदन फॉर्म: आवेदन लिंक और फॉर्म 20 जनवरी 2026, 17:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगे।

आवेदन करने वाले उद्यमियों से अनुरोध है कि वे स्कीम गाइडलाइन्स (12 नवम्बर 2025) का सख्ती से पालन करें, जो मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

यह पहल किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य परीक्षण सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।

गुवाहाटी में 8वें कोडेक्स कमिटी ऑन स्पाइसेस और क्यूलिनरी हर्ब्स का सत्र शुरू, भारत की मसाला उद्योग में वैश्विक भूमिका पर जोर

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गुवाहाटी- को गुवाहाटी में 8वां कोडेक्स कमिटी ऑन स्पाइसेस और क्यूलिनरी हर्ब्स (CCSCH) सत्र शुरू हुआ। कार्यक्रम का आयोजन स्पाइसेस बोर्ड, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत किया गया, जिसमें 27 देशों से 81 प्रतिनिधि शामिल हुए। सत्र का उद्देश्य मसालों और क्यूलिनरी हर्ब्स के अंतरराष्ट्रीय मानकों को संगठित करना और वैश्विक मसाला व्यापार में पारदर्शिता तथा सततता बढ़ाना है।

उद्घाटन के अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उत्तर-पूर्व क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और कृषि विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्र गुणवत्ता मानकों को सुधारने और खाद्य प्रणाली को सुरक्षित व सतत बनाने में नए अवसर खोलेगा।

स्पाइसेस बोर्ड की सचिव पी. हेमलथा ने मसालों के वैश्विक सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगठित और विज्ञान-आधारित मानक सुरक्षा, व्यापार में निष्पक्षता और उपभोक्ताओं का विश्वास सुनिश्चित करते हैं।

FSSAI के CEO, रजित पुनहानी ने वैश्विक मसाला उद्योग की आर्थिक और सांस्कृतिक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह उद्योग 2024 में USD 28.5 बिलियन का है और 2033 तक USD 41.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

सत्र में 16 मसालों के मानक पहले ही तय किए जा चुके हैं और इस बार बड़ी इलायची, स्वीट मार्जोरम, दालचीनी और सूखी धनिया के बीज के लिए नए मानक विकसित किए जाएंगे। सत्र सप्ताह भर जारी रहेगा और इसका फोकस वैश्विक मानकों के संरेखण, पारदर्शिता और सतत व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा देने पर रहेगा।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया ‘ग्लोबल फूड रेगुलेटर्स समिट (GFRS) 2025’ के लोगो एवं पुस्तिका का विमोचन

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नई दिल्ली-केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज निर्माण भवन में ग्लोबल फूड रेगुलेटर्स समिट (GFRS) 2025 के लोगो और पुस्तिका का अनावरण किया। यह समिट 26 से 27 सितंबर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में, वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 (आयोजक – खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय) के साथ आयोजित किया जा रहा है।

अपने मुख्य संबोधन में मंत्री नड्डा ने कहा कि इस वर्ष की थीम “Evolving Food Systems – यथा अन्नं तथा मनः” भोजन और मन/समाज के स्वास्थ्य के गहरे संबंध को दर्शाती है। उन्होंने कहा – “भोजन मात्र पोषण नहीं है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, भावनात्मक स्थिरता और सामाजिक सौहार्द्र को गढ़ने वाली शक्ति है।”

स्वास्थ्य मंत्री ने FSSAI और स्वास्थ्य मंत्रालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने खाद्य सुरक्षा मानकों को आगे बढ़ाने और वैश्विक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा – “भोजन सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक हो, इसके लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। बदलती खानपान आदतों और बाज़ार के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों, नियमों और विनियमों को अद्यतन करते रहना चाहिए।”

GFRS 2025 की दृष्टि पर बोलते हुए मंत्री नड्डा ने कहा – “यह समिट वैश्विक नियामकों को विचार साझा करने, मानकों का सामंजस्य करने, जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं को सुदृढ़ करने और खाद्य सुरक्षा में तकनीकी प्रगति के नए क्षेत्रों की खोज का अवसर प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा करना और निष्पक्ष व्यापार, नवाचार तथा सतत खाद्य प्रणालियों को प्रोत्साहित करना है।”

उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए FSSAI को सफल और सार्थक सम्मेलन की शुभकामनाएँ दीं।

समिट के दौरान FSSAI द्वारा ‘ईट राइट थाली’ पुस्तक का भी अनावरण किया जाएगा। यह भारत की विविध पाक विरासत और संतुलित आहारों का उत्सव है। इस पुस्तक में प्रत्येक राज्य की पारंपरिक थालियों को प्रदर्शित किया गया है, जो स्थानीय सामग्री, पकाने की विधियाँ और प्राचीन आहार संबंधी ज्ञान को दर्शाती हैं। यह पुस्तक न केवल एक सांस्कृतिक धरोहर है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान के अनुरूप मोटापे और जीवनशैली संबंधी रोगों से बचाव हेतु पारंपरिक आहारों को बढ़ावा देने का मार्गदर्शक भी है।

GFRS 2025 की विशेषताएँ:

  • अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैज्ञानिकों के मुख्य भाषण

  • तकनीकी एवं पूर्ण सत्रों में खाद्य नियामकों की सहभागिता

  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ संवाद

  • द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय बैठकें

  • आठ परस्पर जुड़े पूर्ण सत्र एवं उच्च स्तरीय समानांतर सम्मेलन

यह समिट भारत में लगातार तीसरी बार आयोजित की जा रही है। पिछले दो सम्मेलनों की सफलता के आधार पर, भारत ने खाद्य सुरक्षा पहलों और नियामक संवाद का वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। WHO, Codex, FAO, EFSA जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों तथा राष्ट्रीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी इस समिट को और भी सशक्त बनाती है।

इस अवसर पर रजित पुनहानी, सीईओ, FSSAI; उमाशंकर ध्यानी, कार्यकारी निदेशक (एचआर), FSSAI, निखिल गजराज, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय सहित FSSAI एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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