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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का उदयपुर में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

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उदयपुर (राजस्थान)- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने राजस्थान के उदयपुर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, निफ्टेम (NIFTEMs) और इन्वेस्ट इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नीति सुधारों, नवाचार, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्यवाही के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रमुख सचिव सहित कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित अन्य केंद्रीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना

चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण को मजबूत करने तथा विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक होगा।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और सतत खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

समूह चर्चा: प्रमुख चुनौतियां और रणनीतिक सुझाव

चिंतन शिविर के दौरान छह विषयगत समूहों में गहन मंथन किया गया। इन समूहों ने अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने, प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड फोर्टिफिकेशन, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन उत्पाद और अल्कोहलिक बेवरेज जैसे उच्च विकास क्षेत्रों की योजना, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता, फार्म से फोर्क तक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा प्रसंस्कृत खाद्य को लेकर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की।

समूहों ने कृषि स्तर पर एकत्रीकरण, एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड चेन एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने जैसे ठोस सुझाव दिए। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देने, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना और ‘भारत गुणवत्ता खाद्य चिन्ह’ शुरू करने की अनुशंसा की गई।

राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाएं

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अपनी सर्वोत्तम नीतिगत पहलों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की योजना प्रस्तुत की, जबकि महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल साझा की। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों ने भी क्षेत्रीय नवाचारों और निर्यातोन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

सहायक पहल और आगे की राह

चिंतन शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत विकसित कॉमन इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन भी किया, जो सीताफल, जामुन, आंवला, एलोवेरा और मसालों जैसे लघु वनोपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय से ही भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समयबद्ध रूप से सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया।


समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 21 जनवरी को नई दिल्ली में राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन

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नई दिल्ली- मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में “समुद्री खाद्य निर्यात संवर्धन पर राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन” का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्कों को मजबूत करना है।

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय करेंगे। यह कार्यक्रम मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश है और मछली तथा जलीय खाद्य उत्पादों के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। बीते वर्षों में यह क्षेत्र आजीविका आधारित गतिविधि से आगे बढ़कर एक मजबूत, निर्यातोन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें पालन, चारा, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। साथ ही यह क्षेत्र लाखों छोटे, सीमांत और पारंपरिक मछुआरों एवं किसानों की आजीविका का भी आधार बना हुआ है। लक्षित योजनाओं और नीतिगत समर्थन के बल पर भारत आज मछली एवं मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। वर्ष 2024–25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन रहा, जिसका मूल्य ₹62,408 करोड़ (7.45 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जो देश के कुल कृषि निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत है।

इस राउंड टेबल सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र के 83 साझेदार देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे। इसके अलावा विदेश मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा एफएओ, एएफडी, जीआईजेड, बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एडीबी और आईएफएडी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक एवं तकनीकी मंच प्रदान करेगा।

सम्मेलन में सतत, ट्रेस करने योग्य और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश, संयुक्त उपक्रम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के अवसरों की पहचान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही जलवायु और बाजार जोखिमों के प्रति समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला की मजबूती पर भी विचार-विमर्श होगा। प्रमुख विषयों में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार के रुझान, मानक एवं प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और डिजिटल रिपोर्टिंग, सतत एवं जिम्मेदार स्रोत, मूल्य संवर्धन एवं उत्पाद नवाचार, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा मत्स्य और एक्वाकल्चर में डिजिटल एवं तकनीकी परिवर्तन शामिल हैं।

विचार-विमर्श के दौरान उच्च गुणवत्ता, प्रमाणित और सतत रूप से प्राप्त समुद्री खाद्य उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में एक्वाकल्चर आधारित प्रोटीन की बढ़ती खपत तथा रेडी-टू-कुक, रेडी-टू-ईट और न्यूट्रास्यूटिकल-ग्रेड समुद्री उत्पादों जैसे प्रीमियम वर्गों के विस्तार पर भी प्रकाश डाला जाएगा। ये रुझान भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुपालन, मूल्यवर्धित प्रसंस्करण और प्रजातियों के विविधीकरण के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।

सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों से खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने, मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका में सुधार लाने तथा सतत, लचीले और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई

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इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा 

ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है- मुख्यमंत्री साय 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।

छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। 

मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।


खाद्य खुराक 2025, गांधीनगर में जी20 सफलताओं का प्रदर्शन कर रहा है एपीडा

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भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.97% तक घटी

IPRS 3.0, जिसे एशियाई विकास बैंक के साथ विकसित किया गया है, औद्योगिक पार्कों को स्थिरता, हरित बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी, डिजिटल तत्परता और कौशल विकास के आधार पर रेटिंग देता है।
SMILE कार्यक्रम के तहत 8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में लॉजिस्टिक्स योजनाएँ शुरू की गई हैं, ताकि मौजूदा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का आकलन किया जा सके और दक्षता बढ़ाते हुए लागत कम की जा सके।

भारत की लॉजिस्टिक्स कहानी का नया अध्याय

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और खुद को तेज, स्मार्ट और वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रणाली में बदल रहा है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म जो माल ढुलाई को सरल बनाते हैं, आधुनिक अवसंरचना जो देश के हर हिस्से को जोड़ती है — इन सबके माध्यम से अगली पीढ़ी का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। लक्षित नीति सुधारों, संस्थागत पुनर्गठन और तकनीक-आधारित समाधानों के साथ सरकार लॉजिस्टिक्स को भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार स्थिति का प्रमुख इंजन बना रही है।

संरचनात्मक बदलावों की श्रृंखला इस बात को बदल रही है कि देशभर में लॉजिस्टिक्स की योजना कैसे बनाई जाती है, उसे कैसे लागू किया जाता है और कैसे बढ़ाया जाता है।
ULIP (Unified Logistics Interface Platform) जैसे प्लेटफ़ॉर्म विभागों के बीच डेटा को एकीकृत कर रहे हैं, जबकि LDB (Logistics Data Bank) 2.0 लाखों कंटेनरों की वास्तविक समय निगरानी प्रदान करता है।
हर HSN कोड को उसकी संबंधित लाइन मंत्रालय से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही और नीति निर्माण दोनों मजबूत हुए हैं।

SMILE कार्यक्रम के तहत शहर एवं राज्य स्तर की लॉजिस्टिक्स योजनाएँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लाई जा रही हैं।
पिछले वर्ष अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से 145.84 मिलियन टन कार्गो का रिकॉर्ड परिवहन हुआ। रेल जाम को समर्पित मालवाहक गलियारों से कम किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में NICDC के प्लग-एंड-प्ले पार्क निवेशकों को तैयार अवसंरचना प्रदान कर रहे हैं।

जमीनी स्तर पर, GST और ई-वे बिल जैसी सुधारों ने अंतरराज्यीय परिवहन से दशकों पुरानी रुकावटों को दूर किया है।
इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य स्पष्ट है— लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, दक्षता बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना।

गंगा के मैदान में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स

भारत गंगा के मैदान में एकीकृत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो सड़क, रेल और जलमार्गों को जोड़कर परिवहन को तेज, सस्ता और हरित बना रहा है।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), एक उच्च गति रेल माल लाइन, ने वैगन टर्नअराउंड समय को 15–16 दिनों से घटाकर 2–3 दिन कर दिया है और ट्रांजिट समय को 60+ घंटे से घटाकर 35–38 घंटे कर दिया है।
प्रयागराज में केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के माध्यम से माल संचालन संचालित किए जा रहे हैं।
EDFC का वाराणसी में गंगा जलमार्ग से जुड़ना निर्माताओं को हल्दिया जैसे पूर्वी बंदरगाहों तक कार्गो पहुंचाने में अधिक सुविधा दे रहा है।

वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का तेजी से विकास रोजगार सृजन, बेहतर इनवेंटरी प्रबंधन और समयबद्ध उत्पादन एवं निर्यात में सहायता कर रहा है।
इन परियोजनाओं में विश्व बैंक द्वारा $1.96 बिलियन (EDFC और रेल लॉजिस्टिक्स) और $375 मिलियन (गंगा जलमार्ग) का निवेश शामिल है।

लॉजिस्टिक्स पहले से अधिक क्यों महत्वपूर्ण

भारत की विकास यात्रा अब कुशल लॉजिस्टिक्स पर अधिक निर्भर है।
नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और पीएम गतिशक्ति ने इस परिवर्तन को तेज किया है। परंतु रणनीति को सटीकता की आवश्यकता होती है — और वह शुरू होती है लॉजिस्टिक्स लागत के वास्तविक आंकड़ों से।

पहली बार—
DPIIT और NCAER की व्यापक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 7.97% पर रखा है।

यह अध्ययन 3,500+ उद्योग हितधारकों के प्राथमिक डेटा और MOSPI, RBI, GSTN जैसे स्रोतों के द्वितीयक डेटा पर आधारित है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष:

  • लॉजिस्टिक्स लागत: ₹24.01 लाख करोड़

  • नॉन-सर्विसेज आउटपुट के मुकाबले: 9.09%

रिपोर्ट दर्शाती है कि छोटी कंपनियों पर लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ अधिक है।
अध्ययन विभिन्न परिवहन मोड्स के लिए प्रति टन-किमी लागत भी प्रदान करता है।

यह स्पष्ट करता है कि लगभग 600 किमी की यात्रा में पहले और अंतिम 50 किमी में सुधार से कुल लागत काफी घट सकती है।
इससे अंतिम-मील संपर्क और मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन का महत्व बढ़ जाता है।

नया इंटरैक्टिव डैशबोर्ड नीति-निर्माताओं और उद्योग दोनों को वास्तविक समय विश्लेषण और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

2025: भारत की सप्लाई चेन को सुपरचार्ज करना

2025 में कई नई पहलें शुरू की गईं—
मापांकन, स्थानीय योजना, अवसंरचना और डेटा एकीकरण को मजबूत करने के लिए।

1. PM GatiShakti — एकीकृत योजना को गति

इस वर्ष निम्न प्रमुख लॉन्च किए गए:

  • सभी 112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान

  • PM GatiShakti – Offshore (समुद्री परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक डेटा एकीकरण)

  • PM GatiShakti Public: 230 datasets का सार्वजनिक उपयोग

  • National Master Plan Dashboard और Data Uploading System

  • Compendium Volume-3

  • LEAPS 2025 — लॉजिस्टिक्स नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए DPIIT पहल

2. SMILE — शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स योजना

ADB के सहयोग से विकसित SMILE कार्यक्रम
राज्य और शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करता है।

8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में—

  • ट्रंक रूट्स

  • आर्थिक गलियारे

  • लॉजिस्टिक्स गेटवे

  • शहरी माल ढुलाई

  • वेयरहाउस क्लस्टर

  • लास्ट-माइल कॉरिडोर

को एकीकृत ढंग से योजना में शामिल किया जा रहा है।

उद्देश्य:
तेज, सस्ता, स्वच्छ और संगठित शहरी लॉजिस्टिक्स प्रणाली।

3. LEADS 2025 — राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस रैंकिंग

LEADS अब धारणा-आधारित और वस्तुनिष्ठ दोनों प्रकार के डेटा को जोड़कर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है।
API-आधारित टूल्स वास्तविक समय में सड़क गति, यात्रा समय और प्रतीक्षा समय को ट्रैक करते हैं।

4. LDB 2.0 — बाजारों को गति देने वाली दृश्यता

ULIP के साथ एकीकृत LDB 2.0:

  • वास्तविक समय कंटेनर ट्रैकिंग

  • रोड, रेल, समुद्र और हाई-सीज ट्रैकिंग

  • लाइव कंटेनर देरी हीटमैप

  • कंटेनर नंबर, वाहन नंबर, रेलवे FNR से ट्रैकिंग

5. IPRS 3.0 — औद्योगिक पार्कों की रैंकिंग

IPRS 3.0 पार्कों को तीन श्रेणियों में रैंक करता है:
Leader, Challenger, Aspirer

20 प्लग-एंड-प्ले पार्क NICDC के तहत विकसित हो रहे हैं।

6. HSN कोड गाइडबुक

12,167 HSN कोड्स को 31 मंत्रालयों से मैप किया गया है, जिससे उद्योग और सरकार दोनों के लिए स्पष्टता बढ़ी है।

निष्कर्ष

लॉजिस्टिक्स अब परदे के पीछे का तंत्र नहीं है —
भारत इसे अपनी प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में बदल रहा है।

PM GatiShakti Public/Offshore, SMILE, LEAPS 2025, LEADS 2025, IPRS 3.0, LDB 2.0 जैसी पहलों के साथ भारत अपने लॉजिस्टिक्स को लागत केंद्र से वैश्विक प्रतिस्पर्धा की शक्ति में बदल रहा है।

विकास इंजन से वैश्विक नेतृत्व की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है।


एसएआरएएल SIMS: लघु इस्पात आयातकों और निर्यात उद्देश्यों के लिए आसान पंजीकरण प्रक्रिया

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लघु कंसाइनमेंट के आयातकों (MSMEs और अन्य छोटे आयातक) और एडवांस ऑथराइजेशन, SEZ तथा EOU मार्ग से निर्यात उद्देश्यों के लिए आयात करने वालों के लिए Steel Import Monitoring System (SIMS) के तहत अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से नई सुविधा ‘SARAL SIMS’ पेश की गई है।

मुख्य बिंदु:

  1. SARAL SIMS सुविधा:

    • आयातक अब www.sims.steel.gov.in/SARAL पर SARAL SIMS पंजीकरण कर सकते हैं।

    • पंजीकरण के दौरान केवल कुल इच्छित आयात मात्रा का विवरण देना होगा।

    • एक SARAL SIMS नंबर जारी किया जाएगा, जिसके तहत पूरे वर्ष किसी भी संख्या में इस्पात कंसाइनमेंट आयात किए जा सकते हैं, प्रत्येक कंसाइनमेंट के लिए अलग SIMS नंबर की आवश्यकता नहीं होगी।

  2. SARAL SIMS का उपयोग:

    • लघु कंसाइनमेंट आयात: ≤10 MT प्रति कंसाइनमेंट, वार्षिक सीमा 1000 MT (SARAL SIMS for small import)।

    • एडवांस ऑथराइजेशन / SEZ / EOU मार्ग: बिना किसी मात्रा सीमा के (SARAL SIMS for export purposes)।

  3. वार्षिक रिटर्न:

    • आयातक को वित्तीय वर्ष में SARAL SIMS पंजीकरण के तहत किए गए वास्तविक आयात का विवरण 30 अप्रैल तक अगले वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत करना होगा।

  4. आयात सीमा और नियमित SIMS:

    • यदि वार्षिक आयात 1000 MT से अधिक हो जाता है, तो शेष आयात के लिए नियमित SIMS पंजीकरण लेना आवश्यक होगा।

    • एक बार नियमित SIMS में माइग्रेट होने के बाद, SARAL SIMS सुविधा उसी वित्तीय वर्ष के लिए उपयोग नहीं की जा सकती।

    • वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए SARAL SIMS की सीमा 500 MT है, जो अप्रैल 2026 तक लागू होगी। 2026-27 से 1000 MT वार्षिक सीमा लागू होगी।

  5. नियमों में अन्य सरलताएँ:

    • नियमित SIMS पंजीकरण के लिए आवश्यक फील्ड्स को 56 से घटाकर 20 कर दिया गया है।

    • गैर-QCO कवर किए गए स्टील ग्रेड के लिए मंत्रालय से NOC / स्पष्टीकरण की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।

  6. प्रभाव की तिथि:

    • यह बदलाव 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी होंगे।


मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संघों के साथ बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) और उद्योग संघों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में वाणिज्य विभाग, राजस्व विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), निर्यात संवर्धन परिषदों और विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और वाणिज्य विभाग ने वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में की गई प्रमुख सुधार पहलों, निर्यात सुगमता के लिए प्रस्तावित आगामी सुधार उपायों तथा इस अवधि के दौरान निर्यात प्रदर्शन पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए।

चर्चा का मुख्य केंद्र उद्योग द्वारा सामना की जा रही चुनौतियाँ, निर्यात विविधीकरण में प्राप्त उपलब्धियाँ, और देश से निर्यात को और बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के विचार व अपेक्षाएँ रहीं।

बैठक में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO), वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग, रत्न एवं आभूषण, चिकित्सा उपकरण, औषधि, सेवा क्षेत्र, EPCH, दूरसंचार, चमड़ा, CII, FICCI, PHDCCI, SIAM, ASSOCHAM और NASSCOM सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारतीय निर्यातकों के लिए अनुकूल व्यापारिक वातावरण तैयार करने तथा वैश्विक बाज़ारों में अवसरों का विस्तार करने में केंद्रीय मंत्री और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।

पीयूष गोयल ने यह दोहराया कि सरकार ‘व्यवसाय करने में सुगमता’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक बाज़ार तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने हेतु एक सक्षम व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के प्रति प्रतिबद्ध है।

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