Media24Media.com: भारत को तकनीकी सृजनकर्ता बनाने के लिए नवाचार और सहयोग आवश्यक: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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भारत को तकनीकी सृजनकर्ता बनाने के लिए नवाचार और सहयोग आवश्यक: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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भारत को प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से सृजनकर्ता (consumer to creator) के रूप में परिवर्तित करने के लिए, रक्षा मंत्रीराजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि हमें केवल नई तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जहाँ नवाचार (innovation) पनप सकें — इसके लिए मजबूत प्रक्रियाएँ, चुस्त संस्थान (agile institutions) और सहयोग की भावना (spirit of collaboration) आवश्यक हैं, जो सैनिक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप और रणनीतिकार सभी को एकजुट करे। वे 11 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह संवाद मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका विषय था — “रक्षा क्षमता विकास के लिए नई पीढ़ी की तकनीकों का उपयोग”।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें ऐसे सिस्टम और पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystems) बनाने होंगे जो नई तकनीकों के निर्माण और अपनाने (creation and adoption) को स्वाभाविक, तेज़ और आत्मनिर्भर बना दें। उन्होंने कहा,

“यदि हमारी नींव मजबूत है, हमारे संस्थान चुस्त हैं, हमारे विचार खुले हैं और हमारा सहयोग निरंतर है, तो हर नई तकनीकी लहर हमें डुबोएगी नहीं, बल्कि आगे बढ़ाएगी। हम केवल दूसरों की बनाई तकनीकी क्रांतियों के अनुयायी नहीं बनेंगे, बल्कि भारत में जन्मी नई क्रांतियों के निर्माता बनेंगे।”

राजनाथ सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वॉर्म टेक्नोलॉजी जैसी विघटनकारी तकनीकों (disruptive technologies) को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का असली पैमाना इस बात से तय होता है कि संपूर्ण रक्षा तंत्र (apparatus) कितनी प्रभावी ढंग से कार्य करता है।

उन्होंने कहा, “तकनीक की शक्ति केवल उपकरणों या एल्गोरिद्म में नहीं है, बल्कि उसमें है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने वाली हर प्रक्रिया, हर निर्णय, हर प्रणाली को कैसे नया आकार देती है।”

उन्होंने कहा कि तेज़ डेटा लिंक, AI एल्गोरिद्म, क्वांटम कंप्यूटिंग या स्वायत्त प्रणालियाँ (autonomous systems) तभी उपयोगी हैं जब हमारे आंतरिक प्रक्रियाएँ और मानव व संस्थागत क्षमता उन्हें शीघ्रता से आत्मसात करने में सक्षम हों। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा तत्परता का एक बड़ा हिस्सा उन “अदृश्य तकनीकों” पर निर्भर है — जैसे सुरक्षित डेटा आर्किटेक्चर, एन्क्रिप्टेड नेटवर्क, स्वचालित मेंटेनेंस सिस्टम, और इंटरऑपरेबल डाटाबेस।

राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से आज भारत का रक्षा औद्योगिक आधार (defence industrial base) नए आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ रहा है। डीआरडीओ, सशस्त्र बलों, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच तालमेल ने अनुसंधान, परीक्षण, फीडबैक और नवाचार का एक सकारात्मक चक्र (virtuous cycle) बनाया है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल वैश्विक नवाचारों की बराबरी से संतुष्ट नहीं रह सकता — हमें तेज़ी और सहयोग के साथ नवाचार की संस्कृति को लगातार पोषित करना होगा।

उन्होंने कहा, “तकनीकी नेतृत्व अलग-अलग प्रतिभाओं से नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र (national ecosystem) से उभरता है, जो विचारों को प्रोत्साहित करता है, विफलताओं को स्वीकार करता है और उपलब्धियों का जश्न मनाता है।”

रक्षा मंत्री ने iDEX (Innovations for Defence Excellence) और TDF (Technology Development Fund) जैसी पहलों का विशेष उल्लेख किया, जो नई पीढ़ी के नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने कहा,

“ये वही युवा नवोन्मेषक हैं जो एक ऐसे भविष्य के निर्माता हैं जहाँ स्वायत्त प्रणालियाँ, क्वांटम सेंसर, उन्नत सामग्रियाँ और अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणालियाँ भारतीय प्रतिभा की पहचान बनेंगी।”

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) को केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजिटल संप्रभुता (digital sovereignty) तक विस्तार करना चाहिए — अर्थात् उन एल्गोरिद्म, डेटा और चिप्स पर नियंत्रण जो हमारे प्लेटफॉर्म को संचालित करते हैं। उन्होंने कहा,

“सच्ची सामरिक स्वायत्तता तभी संभव होगी जब हमारा कोड उतना ही स्वदेशी होगा जितना हमारा हार्डवेयर।”

उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षित स्वदेशी सॉफ्टवेयर स्टैक्स, विश्वसनीय सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और भारतीय डेटा पर प्रशिक्षित घरेलू AI मॉडल्स को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक मानव निर्णय की जगह नहीं ले सकती, बल्कि उसे सशक्त (amplify) करती है, इसलिए हमें उभरती तकनीकों के नैतिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी आयामों पर भी निवेश करना होगा।

उन्होंने कहा, “भारत, एक सभ्यतागत शक्ति (civilisational power) के रूप में, जिम्मेदार और मानवीय सैन्य तकनीक के उपयोग पर वैश्विक संवाद का नेतृत्व कर सकता है और करना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक को केवल बल गुणक (force multiplier) ही नहीं, बल्कि संसाधन अनुकूलक (resource optimiser) के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूंजीगत खरीद प्रक्रियाओं (capital procurement process) में तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर निर्णय-निर्माण को बेहतर और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में निर्देश दिया है कि हर खरीद प्रस्ताव के आरंभिक चरण में ही लाइफ-साइकिल लागत (life-cycle cost) का मूल्यांकन किया जाए ताकि निवेश का पूर्ण चित्र सामने आ सके — “हम केवल आज के निवेश को नहीं, बल्कि भविष्य की स्थिरता को भी देख सकें।”

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से आग्रह किया कि वे केवल उपकरणों से संबंधित तकनीकों में ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, योजना और प्रबंधन प्रणालियों में भी विश्व की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा,

“श्रेष्ठ उपकरणों की तुलना में श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आयात अधिक उपयोगी है। जब हमारी प्रणालियाँ मजबूत, अनुकूलनीय और पारदर्शी होंगी, तो हमें उत्कृष्टता विदेश से खरीदनी नहीं पड़ेगी — हम उसे यहीं भारत में बना सकेंगे।”

उन्होंने कहा कि एमपी-आईडीएसए (MP-IDSA) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन कर उन्हें भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में सहायता कर सकता है।

अपने भाषण की शुरुआत में रक्षा मंत्री ने 10 नवम्बर 2025 को दिल्ली में हुई दुखद दुर्घटना में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख जाँच एजेंसियाँ इस घटना की गहन और त्वरित जाँच कर रही हैं और जल्द ही परिणाम सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, डीजी एमपी-आईडीएसए राजदूत सुजन चिनॉय, मित्र देशों के राजदूत तथा वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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