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उपराष्ट्रपति ने पाँचवें ऑडिट दिवस समारोह की अध्यक्षता की, CAG को बताया “जनधन का संरक्षक”

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में पाँचवें ऑडिट दिवस (Audit Diwas) समारोह की अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को “जनधन का संरक्षक” बताते हुए कहा कि CAG सार्वजनिक धन की सुरक्षा और सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने 1860 में लेखा महानियंत्रक के पद की स्थापना से लेकर अब तक CAG की 165 वर्षों की समर्पित सेवा को सराहा।

उन्होंने कहा,

“दुनिया भर के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों का एक ही उद्देश्य होता है — सार्वजनिक धन की रक्षा करना और सुशासन को बढ़ावा देना। भारत का CAG इनमें अग्रणी है, जो सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी के सिद्धांतों को मजबूती से निभा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने CAG की रिपोर्टों को तथ्यपरक, साक्ष्य-आधारित और “भारत की नैतिक संपदा” का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उन्होंने CAG द्वारा लागू की गई “वन नेशन, वन सेट ऑफ ऑब्जेक्ट हेड्स ऑफ एक्सपेंडिचर” पहल की सराहना की, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च में पारदर्शिता और तुलनात्मकता बढ़ेगी।

AI, बिग डेटा, ब्लॉकचेन और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि CAG ने One IAAD One System, AI-आधारित ऑडिट फ्रेमवर्क और कई अन्य नवाचारों के माध्यम से तकनीक को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। उन्होंने IIT मद्रास जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की भी सराहना की, जिसके माध्यम से डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और डीप लर्निंग में क्षमता निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि 20,000 से अधिक वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टों को संसाधित करने के लिए एक कस्टमाइज्ड लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित किया जा रहा है, जिससे डेटा-आधारित ऑडिट को मजबूती मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक अपनाने से जोखिम पहचान, दक्षता और साक्ष्य-आधारित शासन में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक धन का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने इसे प्राप्त करने के लिए एक भविष्य-उन्मुख और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर CAG की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है — WHO, ILO जैसे प्रमुख संगठनों के लिए एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में भारत की भूमिका और ASOSAI व INTOSAI की महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता, भारत को वैश्विक ऑडिट नेतृत्व के अग्रणी स्थान पर स्थापित करती है। इसे उन्होंने “अनुगामी से वैश्विक नेता बनने तक” भारत की यात्रा का प्रमाण बताया।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, उपराष्ट्रपति ने सरकार और CAG के बीच वित्तीय अनुशासन व पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से लगातार अपनी कौशल क्षमता बढ़ाने और ऑडिट क्षमताओं को सुदृढ़ करने का अनुरोध किया, ताकि जनकल्याण शासन के केंद्र में बना रहे।

कार्यक्रम में भारत के CAG के. संजय मु्र्थी, उप महालेखा परीक्षक सुभीर मलिक,कृ्ष्णन सागरन सुब्रमणियन,जयंत सिन्हा, पूर्व CAGs, तथा भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (IA&AS) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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