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भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट

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जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा

रायपुर- भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।नरेन्द्र भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया।

राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है।

पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास

छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्री श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

DARPG ने आयोजित किया 36वां राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार, उत्कृष्ट पहलों के प्रसार पर जोर

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प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) को जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस/वेबिनार आयोजित करने के लिए कहा गया था, जिसमें प्रधानमंत्री पुरस्कार (लोक प्रशासन में उत्कृष्टता) के पूर्व विजेताओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि इन पहलों का व्यापक प्रसार और दोहराव सुनिश्चित किया जा सके।

इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में DARPG ने अप्रैल 2022 से अब तक हर महीने एक वेबिनार आयोजित करते हुए कुल 36 राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार आयोजित किए हैं। इन वेबिनारों का उद्देश्य प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत चयनित पहलों के अनुभवों को साझा करना और उन्हें अन्य स्थानों पर लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में विभिन्न विभागों, राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।

ये वेबिनार न केवल पहलों के संस्थागतकरण और स्थायित्व की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि उनके विस्तार और अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

27 मार्च 2026 को आयोजित 36वें वेबिनार में ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 और 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों को प्रस्तुत किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की पहल को डॉ. हरिदास फाटिंग (निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं एवं परियोजना निदेशक, एड्स नियंत्रण सोसायटी) द्वारा तथा ओडिशा के कोरापुट जिले की पहल को वी. कीर्ति वासन (कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, गंजाम) द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह वेबिनार DARPG के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुआ और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। देशभर के 620 से अधिक स्थानों से राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि इस वेबिनार से जुड़े।

यह पहल देश में सुशासन के सफल मॉडलों के प्रसार और उनके व्यापक क्रियान्वयन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ के IAS डॉ. रवि मित्तल को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, PMO में 'डिप्टी सेक्रेटरी' नियुक्त

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रायपुर/नई दिल्ली-  छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी डॉ. रवि मित्तल को केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें प्रतिनियुक्ति पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव (Deputy Secretary) के पद पर नियुक्त किया गया है।

कार्यकाल: केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. मित्तल की यह नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्षों की अवधि के लिए अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

वर्तमान जिम्मेदारी: दिल्ली पदस्थापना से पहले डॉ. मित्तल छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क आयुक्त (CPR) और मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

चयन प्रक्रिया: कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है।

शानदार रहा है प्रशासनिक सफर 

​डॉ. रवि मित्तल अपनी कार्यकुशलता और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जशपुर जिले में कलेक्टर के रूप में बेहतरीन कार्य किया, जिसकी सराहना राज्य स्तर पर हुई। उनके पास चिकित्सा की पृष्ठभूमि (MBBS) भी है, जो उन्हें जटिल मुद्दों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करती है।

​छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के मुखिया के तौर पर उन्होंने सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में तकनीकी नवाचारों का भी प्रयोग किया। अब PMO जैसे देश के सबसे प्रभावशाली कार्यालय में उनकी नियुक्ति को उनके करियर की एक बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।

ग्राम पंचायतों के लिए उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू

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नई दिल्ली:- उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) ने वर्ष 2024 और 2025 में आयोजित वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सफलता के बाद, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए अपने राष्ट्रीय वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू किया है। यह श्रृंखला 13 फरवरी 2026 को पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण तंत्र को मजबूत करना है।

इस पहल के तहत पहली बैठक बिहार, झारखंड और ओडिशा राज्यों के साथ आयोजित की गई, जिसमें 1,011 ऑनलाइन लिंक के माध्यम से हजारों पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को उपभोक्ता अधिकारों, उभरते उपभोक्ता मुद्दों और शिकायत निवारण की संस्थागत व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं पर सीधे सवाल पूछने और स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

पंचायतों की अहम भूमिका पर जोर

सत्र में पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा दें, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाएं और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे शिकायत मंचों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित कर सकें।

इससे पहले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उपभोक्ता अधिकारों, कर्तव्यों और शिकायत निवारण प्रणाली पर व्यापक जागरूकता सत्र आयोजित किए थे। यह अभियान 20 दिसंबर 2024 को शुरू होकर 22 अगस्त 2025 को समाप्त हुआ था और दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों को कवर किया गया था।

क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजन

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय भाषाओं में सत्रों का आयोजन रहा, जिससे प्रभावी संवाद, व्यापक भागीदारी और बेहतर समझ सुनिश्चित हुई। संबंधित राज्यों की भाषाओं में दक्ष अधिकारियों ने सत्रों की अध्यक्षता की, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद संभव हुआ।

ग्रामीण उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की पहल

इस पहल से पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता मजबूत हुई है, जिससे वे अपने समुदायों में उपभोक्ता संरक्षण के संवाहक बन सकें। स्थानीय संस्थाओं को उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत निवारण प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में मदद मिली है।

वर्चुअल कार्यक्रम के फायदे

वर्चुअल प्रारूप ने कम लागत, व्यापक पहुंच और तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित करने के लाभ दिखाए हैं। सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को जारी रखने और विस्तार करने का निर्णय लिया है।

निष्कर्ष

इस सतत प्रयास के माध्यम से उपभोक्ता मामलों का विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उपभोक्ता जागरूकता शासन के हर स्तर तक पहुंचे और विशेष रूप से ग्रामीण नागरिकों को जागरूक निर्णय लेने और समय पर शिकायत निवारण तक पहुंचने में सशक्त बनाया जा सके।


पेंशन अदालत में त्वरित न्याय: 1087 में से 815 पेंशनरों की शिकायतों का मौके पर समाधान

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रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, वित्त, डाक, आवास एवं शहरी कार्य, नागरिक उड्डयन आदि से संबंधित 30 विभागों/मंत्रालयों के सुपर सीनियर पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों से जुड़ी कुल 1087 शिकायतें पेंशन अदालत में निवारण हेतु उठाई गईं, जिनमें से 815 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। यह पहल पेंशनरों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई।

24.12.2025 को आयोजित पेंशन अदालत में कई हृदयस्पर्शी सफलता कथाएँ सामने आईं। नीचे कुछ मामलों के अंश प्रस्तुत हैं, जो पेंशनरों द्वारा झेली गई कठिनाइयों और पेंशन अदालत की व्यवस्था के माध्यम से उनके लंबे समय से लंबित वैध अधिकारों की प्राप्ति को दर्शाते हैं—

प्रीतम सिंह

हरियाणा के रेवाड़ी निवासी प्रीतम सिंह की शिकायत 114 दिनों से अधिक समय से लंबित थी। यह जीपीएफ, अवकाश नकदीकरण और ग्रेच्युटी के भुगतान न होने से संबंधित थी। उन्होंने फोन पर अपनी शिकायत की स्थिति बताई। बीएसएफ अधिकारियों ने सूचित किया कि मामला सुलझा लिया गया है और ₹68,10,192/- की कुल बकाया राशि शीघ्र ही पेंशनर के खाते में जमा कर दी जाएगी।

केवल कृष्ण

जम्मू-कश्मीर निवासी केवल कृष्ण की शिकायत 150 दिनों से अधिक समय से लंबित थी। उनकी पत्नी स्व.फोली देवी के निधन के बाद पारिवारिक पेंशन शुरू होने में देरी हुई थी। सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि ₹8,56,107/- की अतिरिक्त पारिवारिक पेंशन राशि पहले ही जमा की जा चुकी है तथा 07.12.2020 से 30.11.2025 तक की कुल बकाया राशि ₹12,11,444/- का भुगतान प्रक्रिया में है और शीघ्र जारी कर दिया जाएगा।

खिमुली देवी

उत्तराखंड निवासी खिमुली देवी, जिनके पति एसएसबी में कार्यरत थे, एक पारिवारिक पेंशनर हैं। उनकी शिकायत 133 दिनों से अधिक समय से लंबित थी और न्यूनतम असाधारण पेंशन (Extraordinary Pension) के संशोधन व ब्याज सहित बकाया भुगतान से संबंधित थी। उनके पोते ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लेते हुए बकाया गणना पत्र की मांग की। एसएसबी नोडल अधिकारी ने आश्वासन दिया कि शेष बकाया शीघ्र भुगतान किया जाएगा और गणना पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सबित्री बाग

सबित्री बाग, स्व. क्षमा सिल बाग की विधवा हैं, जो डाक विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी शिकायत 129 दिनों से अधिक समय से लंबित थी। निलंबन अवधि के नियमितीकरण में देरी के कारण वेतन लाभ और पारिवारिक पेंशन जारी नहीं हो पाई थी। डाक विभाग ने बताया कि 11.10.2014 से 09.01.2020 की सेवा अवधि को 21.11.2025 को नियमित कर दिया गया है। पेंशन अदालत में यह निर्देश दिया गया कि मामले की एक सप्ताह में समीक्षा कर बकाया भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए।

सावित्री देवी भिकाजी मदाये

84 वर्षीय सुपर सीनियर पारिवारिक पेंशनर सावित्री देवी भिकाजी मदाये को जून 2021 से पारिवारिक पेंशन नहीं मिल रही थी, क्योंकि कोषागार से बैंक में भुगतान स्थानांतरण के दौरान मूल दस्तावेज और पीपीओ गुम हो गए थे। सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय, पीएओ और सीपीएओ से समन्वय के बाद 18.12.2025 को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सीपीपीसी को ₹7,40,870/- की बकाया राशि के भुगतान की स्वीकृति जारी कर दी गई है। उनके अस्पताल में भर्ती होने के कारण पुणे से एआईसीजीपीए पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव ने उनकी ओर से भाग लिया और शिकायत समाधान पर आभार व्यक्त किया।


नवंबर 2025: CPGRAMS रिपोर्ट में 70,598 लोक शिकायतों का निपटान, 1,65,930 मामले लंबित

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प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) की 40वीं मासिक रिपोर्ट (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश) नवंबर 2025 के लिए जारी की। यह रिपोर्ट लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों का विस्तृत विश्लेषण तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निपटान की प्रकृति प्रस्तुत करती है।

नवंबर 2025 में, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60,450 लोक शिकायत (PG) मामले दर्ज किए गए और 70,598 मामलों का निपटान किया गया।

  • उत्तरी प्रदेश ने नवंबर 2025 में सबसे अधिक निपटान किया, कुल 25,184 PG मामलों का निपटान।

  • इसके बाद दिल्ली में 7,989 PG मामलों का निपटान हुआ।

  • 30 नवंबर 2025 तक, CPGRAMS पोर्टल पर कुल लंबित PG मामलों की संख्या 1,65,930 है।

  • इसके अलावा, 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्रत्येक में 1,000 से अधिक लंबित शिकायतें हैं।

नवंबर 2025 में CPGRAMS पोर्टल पर 57,180 नए उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 8,739 पंजीकरण उत्तर प्रदेश से हुए।
फीडबैक कॉल सेंटर ने नवंबर 2025 में कुल 70,141 फीडबैक एकत्र किए, जिनमें से 28,669 फीडबैक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त हुए।

नवंबर 2025 में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से दर्ज शिकायतों का विश्लेषण भी रिपोर्ट में शामिल है। CPGRAMS को CSC पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और यह 5 लाख से अधिक CSCs पर उपलब्ध है, जिसमें 2.5 लाख गांव स्तरीय उद्यमी (VLEs) शामिल हैं। इस महीने CSCs के माध्यम से कुल 14,094 शिकायतें दर्ज की गईं।

सेवोत्तम योजना के तहत प्रशिक्षण

पिछले चार वित्तीय वर्षों (FY 2022–23 से FY 2025–26 तक) में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रशिक्षित अधिकारियों की संख्या:

  • वित्तीय वर्ष
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • प्रशिक्षित अधिकारी
  • 2022-23
  • 280
  • 8,496
  • 2023-24
  • 236
  • 8,477
  • 2024-25
  • 314
  • 10,740
  • 2025-26 (30 नवम्बर तक)
  • 154
  • 5,226
  • कुल
  • 984
  • 32,939

नवंबर 2025 के प्रमुख तथ्य

सामान्य हाइलाइट्स

  • वरिष्ठ स्तर की समीक्षा हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में PG मामलों के लिए समर्पित समीक्षा मॉड्यूल 6 जून 2025 से चालू है।

  • 12 नवंबर 2025 को DARPG सचिव की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

  • फीडबैक कॉल सेंटर ने कुल 70,141 फीडबैक एकत्र किए, जिसमें 28,669 फीडबैक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त हुए।

CPGRAMS पर लोक शिकायतों की स्थिति

  • नवंबर 2025 में 60,450 PG मामले प्राप्त और 70,598 PG मामलों का निपटान किया गया।

  • PG मामलों के निपटान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, अक्टूबर के 63,305 मामलों से बढ़कर नवंबर में 70,598 मामलों तक।

  • उत्तरी प्रदेश ने सबसे अधिक निपटान किया (25,184 मामले), उसके बाद दिल्ली (7,989 मामले)।

लंबित शिकायतों की स्थिति

  • 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1,000 से अधिक लंबित शिकायतें हैं।

  • 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल लंबित PG मामले 1,65,930 हैं।


उपराष्ट्रपति ने पाँचवें ऑडिट दिवस समारोह की अध्यक्षता की, CAG को बताया “जनधन का संरक्षक”

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में पाँचवें ऑडिट दिवस (Audit Diwas) समारोह की अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को “जनधन का संरक्षक” बताते हुए कहा कि CAG सार्वजनिक धन की सुरक्षा और सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने 1860 में लेखा महानियंत्रक के पद की स्थापना से लेकर अब तक CAG की 165 वर्षों की समर्पित सेवा को सराहा।

उन्होंने कहा,

“दुनिया भर के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों का एक ही उद्देश्य होता है — सार्वजनिक धन की रक्षा करना और सुशासन को बढ़ावा देना। भारत का CAG इनमें अग्रणी है, जो सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी के सिद्धांतों को मजबूती से निभा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने CAG की रिपोर्टों को तथ्यपरक, साक्ष्य-आधारित और “भारत की नैतिक संपदा” का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उन्होंने CAG द्वारा लागू की गई “वन नेशन, वन सेट ऑफ ऑब्जेक्ट हेड्स ऑफ एक्सपेंडिचर” पहल की सराहना की, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च में पारदर्शिता और तुलनात्मकता बढ़ेगी।

AI, बिग डेटा, ब्लॉकचेन और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि CAG ने One IAAD One System, AI-आधारित ऑडिट फ्रेमवर्क और कई अन्य नवाचारों के माध्यम से तकनीक को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। उन्होंने IIT मद्रास जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की भी सराहना की, जिसके माध्यम से डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और डीप लर्निंग में क्षमता निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि 20,000 से अधिक वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टों को संसाधित करने के लिए एक कस्टमाइज्ड लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित किया जा रहा है, जिससे डेटा-आधारित ऑडिट को मजबूती मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक अपनाने से जोखिम पहचान, दक्षता और साक्ष्य-आधारित शासन में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक धन का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने इसे प्राप्त करने के लिए एक भविष्य-उन्मुख और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर CAG की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है — WHO, ILO जैसे प्रमुख संगठनों के लिए एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में भारत की भूमिका और ASOSAI व INTOSAI की महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता, भारत को वैश्विक ऑडिट नेतृत्व के अग्रणी स्थान पर स्थापित करती है। इसे उन्होंने “अनुगामी से वैश्विक नेता बनने तक” भारत की यात्रा का प्रमाण बताया।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, उपराष्ट्रपति ने सरकार और CAG के बीच वित्तीय अनुशासन व पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से लगातार अपनी कौशल क्षमता बढ़ाने और ऑडिट क्षमताओं को सुदृढ़ करने का अनुरोध किया, ताकि जनकल्याण शासन के केंद्र में बना रहे।

कार्यक्रम में भारत के CAG के. संजय मु्र्थी, उप महालेखा परीक्षक सुभीर मलिक,कृ्ष्णन सागरन सुब्रमणियन,जयंत सिन्हा, पूर्व CAGs, तथा भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (IA&AS) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक: अमित शाह की अध्यक्षता में आपसी सहयोग और विकास पर चर्चा

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 नवंबर, 2025 को हरियाणा के फरीदाबाद में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ शामिल हैं। इस बैठक में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे। यह बैठक अंतर-राज्यीय परिषद सचिवालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित की जा रही है, और इसके मेजबान के रूप में हरियाणा सरकार कार्य करेगी।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद और संरचना

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी, जिनमें उत्तरी क्षेत्रीय परिषद भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री इसके उपाध्यक्ष हैं। सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री (वार्षिक रूप से घूर्णन प्रणाली के तहत) उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। प्रत्येक सदस्य राज्य के राज्यपाल दो मंत्रियों को परिषद का सदस्य नामित करते हैं। प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिव स्तर पर एक स्थायी समिति भी गठित की है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों पर पहले स्थायी समिति में विचार किया जाता है और उसके बाद शेष मुद्दे परिषद की बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं।

टीम भारत और क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'टीम भारत' विज़न के तहत क्षेत्रीय परिषदों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। "मजबूत राज्य = मजबूत राष्ट्र" के विश्वास के साथ, क्षेत्रीय परिषदें दो या अधिक राज्यों या केंद्र और राज्यों से संबंधित मुद्दों पर संवाद और चर्चा का संरचित मंच प्रदान करती हैं, जिससे आपसी सहयोग बढ़ता है।

हालांकि क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका परामर्शी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिछले ग्यारह वर्षों में सभी राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से कुल 63 बैठकें आयोजित की गई हैं।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख कार्य और मुद्दे

  • केंद्र और सदस्य राज्य/संघ शासित प्रदेशों के बीच, सदस्य राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के बीच और क्षेत्र के भीतर मुद्दों और विवादों का समाधान।

  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की त्वरित जांच और फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) का क्रियान्वयन।

  • प्रत्येक गांव में ब्रिक-एंड-मोर्टार बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता।

  • इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS-112) का कार्यान्वयन।

  • क्षेत्रीय स्तर पर पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत, शहरी नियोजन और सहकारी प्रणाली जैसे सामान्य हित के मुद्दों को सुदृढ़ करना।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद राज्य और केंद्र के बीच सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होती रही है।

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