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कटघोरा में अटलजी की कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित

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रायपुर- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर में स्थापित कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से आज उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।

कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल उत्तरदायी पाये गये हैं। उनके इस कृत्य के पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सुशासन तिहार के तहत प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ करें निराकरण: प्रमुख सचिव बोरा

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सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है दुर्ग, विभागीय समन्वय से दुर्ग बने मॉडल जिला

रायपुर- प्रमुख सचिव एवं दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिले के अधिकारियों की बैठक लेकर शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया। लोक निर्माण विभाग कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि दुर्ग जिला सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला रहा है, इसलिए इसकी पहचान को बनाए रखते हुए अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने विभागीय समन्वय से दुर्ग जिले के मॉडल जिले के रूप में विकसत करने पर बल दिया। 

प्रमुख सचिव बोरा ने समीक्षा बैठक में कहा कि आमजनों को विभागीय सेवाओं का त्वरित लाभ मिले, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार के अंतर्गत शिविरों में प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

शुद्ध पेयजल, नाला सफाई और पीएम आवास पर जोर

प्रभारी सचिव बोरा ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए आमजनों के लिए शुद्ध पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बरसात पूर्व बड़े नालों सफाई कराने, अतिक्रमण हटाने तथा सैप्टिक टैंक सफाई में एसओपी का पालन करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत पीएम आवास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने तथा हितग्राही सम्मेलन आयोजित कर लोगों को निर्माण के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

मनरेगा मजदूरी भुगतान शुरू, श्रमिकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश

बैठक में मनरेगा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग जिले में 14 जनवरी 2026 से लंबित लगभग 30 करोड़ 83 लाख रुपये की मजदूरी राशि शासन द्वारा स्वीकृत कर दी गई है और श्रमिकों के खातों में भुगतान शुरू हो गया है। प्रभारी सचिव ने सभी जनपद पंचायत सीईओ और रोजगार सहायकों को निर्देशित किया कि वे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर मजदूरी भुगतान संबंधी जानकारी साझा करें तथा भुगतान से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

लखपति दीदी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी फोकस

बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 78 हजार 411 लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 37 हजार महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी सचिव ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, शिशु मृत्यु दर को शून्य करने तथा सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों और छात्रावासों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने तथा 16 जून तक सभी छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य पूर्ण कराने को कहा।

किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज

कृषि विभाग को आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक वितरण की कार्ययोजना तैयार करने तथा पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंनेे कहा कि किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज का वितरण किया जाए। रासायनिक खाद के कालाबाजारी करने वाले पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत जिले में एक लाख 46 हजार पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित है। साथ ही चीचा और बेलौदी क्षेत्र को वेटलैंड घोषित किया गया है।

बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने पुलिस विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, एडीएम वीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर योगिता देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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दाढ़ी (बेमेतरा) सीसी रोड प्रकरण पर सख्त रुख: कलेक्टर को मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है।

मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने  निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है - जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।

जनता से जुड़ी सभी सेवाएं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में होना चाहिए

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मुख्य सचिव ने लोक सेवा गारंटी की सेवाओं के क्रियान्वन की समीक्षा की

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ शासन के समस्त विभागांे के भारसाधक सचिव की बैठक लेकर विभागों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ लोक सेवा गांरटी अधिनियम के अंतर्गत विभागीय सेवाओं के क्रियान्वन समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये है कि उनके विभाग के अंतर्गत ऐसी सभी सेवाएं जो सीधे जनता से जुड़ी है, उन सभी सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिसूचित की जाये तथा अधिसूचित सेवाओं को ऑनलाईन किया जाये। समय सीमा में सेवाओं का लाभ हितग्राही को दिया जाए। समय सीमा में सेवाएं यदि नहीं दी जाती हैं तो संबधित  अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जायेगा और उसके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उत्कृष्ट सेवा कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जायेगा। 

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जनता से जुड़ी सभी शासकीय सेवाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करना हैं। मुख्य सचिव ने प्रत्येक विभाग के अंतर्गत लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तार से समीक्षा की । मुख्य सचिव ने अधिकारियों के कहा कि वे अपने विभाग के अंतर्गत और सेवाएं जो अधिनियम के अंतर्गत लायी जा सकती है, उन्हे चिन्हित कर अधिसूचित कर ली जाएं और सुशासन एवं अभिसरण विभाग को इसकी सूची उपलब्ध की जाएं। बैठक में बताया गया की छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लोक सेवा की प्रभावी क्रियान्वन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही हैं। मुख्य सचिव ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न  विभागों के अधिकारियो को विभागीय सेवओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में लाने के लिए मार्ग दर्शन दिया। 

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न विभागों की लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।राहुल भगत ने बताया की छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन विभाग द्वारा विभिन्न राज्यों में जाकर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सेवाओं का अध्ययन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के परिपेक्ष में प्रदाय की जा रहीं समान्तर सेवाओं एवं संबंधित विभागों की सेवाओं की सांकेतिक रूप से मैपिंग की गई है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग की और सेवाओं को चिन्हित कर अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित करने  हेतु प्रस्तावित करें।

बैठक में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार, खनिज विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, ऊर्जा एवं जनसंपर्क के सचिव रोहित यादव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजू एस., वाणिज्यिक कर (आबकारी)  आर. शंगीता, समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, गामोउद्योग के सचिव श्यामलाल धावड़े सहित वन एवं जलवायु परिवर्तन, लोक निर्माण, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ एवं परिवार कल्याण, परिवहन, वाणिज्यिक एवं उद्योग, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ यांत्रिकी, श्रम, जल संसाधन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए। 


जेलों में बढ़ती मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में जेलों के भीतर हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक वर्ष के भीतर राज्य की विभिन्न जेलों में 33 कैदियों की मौत होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने चिंता जताई है।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई मामलों में अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है या लंबित पड़ी है, जिससे मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने जेल विभाग के महानिदेशक (DG) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और प्रत्येक मौत की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों और रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान

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रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर  विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।

विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।

तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।

डिजिटल युग में विज्ञापन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

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“विज्ञापन का उद्देश्य केवल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वास बनाना होना चाहिए,” सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने आज मुंबई में आयोजित AdTrust Summit 2026 में मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा। उन्होंने भारत में एक जिम्मेदार, पारदर्शी और विश्वसनीय विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब यह क्षेत्र तेजी से विस्तार और प्रभाव में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का विकास जारी रहना चाहिए, लेकिन विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र में जवाबदेही भी जरूरी है। मंत्रालय का दृष्टिकोण विश्वास निर्माण, विकास को समर्थन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

AdTrust Summit 2026 के पहले संस्करण का आयोजन एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) द्वारा किया गया, जिसमें विज्ञापन, मीडिया, तकनीक और सरकार के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदार विज्ञापन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। चर्चाओं का केंद्र उभरते रुझान, कानूनी ढांचे और नई तकनीकों का विज्ञापन प्रथाओं पर प्रभाव रहा।

संजय जाजू ने कहा कि विज्ञापन केवल एक व्यावसायिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह बाजारों को आकार देता है, ब्रांड बनाता है, उपभोक्ताओं को जानकारी देता है, संस्कृति को दर्शाता है और आकांक्षाओं को प्रभावित करता है। भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश में विज्ञापन नवाचार, आर्थिक गतिविधि, कंटेंट निर्माण और समावेशन का एक महत्वपूर्ण चालक बन गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब ब्रांड, स्टार्टअप, स्थानीय व्यवसायों और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने डिजिटल विज्ञापन से जुड़े जोखिमों—जैसे वित्तीय धोखाधड़ी, भ्रामक निवेश प्रचार और फर्जी नौकरी के ऑफर—पर भी चिंता जताई, जो अक्सर कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक अभिव्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन भ्रामक और धोखेबाज विज्ञापनों को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में एआई की भूमिका, डीपफेक, डार्क पैटर्न और एंटी-इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे उभरते मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संजय जाजू ने विज्ञापनदाताओं से केवल पहुंच नहीं बल्कि विश्वसनीयता पर ध्यान देने का आग्रह किया और कंटेंट क्रिएटर्स व इन्फ्लुएंसर्स से प्रामाणिकता बनाए रखने तथा भ्रामक प्रचार से बचने की अपील की।

उन्होंने जिम्मेदार विज्ञापन के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत भी बताए:

  1. सत्यता हर संचार में अनिवार्य होनी चाहिए

  2. विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार संबंधों में पारदर्शिता जरूरी है

  3. हर सामग्री के निर्माण और प्रस्तुति में जिम्मेदारी होनी चाहिए

  4. कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

  5. जवाबदेही के साथ नवाचार, ताकि तकनीकी और रचनात्मक प्रगति विश्वास को मजबूत करे

इस अवसर पर संजय जाजू ने ASCI की सचिव जनरल एवं सीईओ मनीषा कपूर, मैडिसन के चेयरमैन सैम बलसारा, ASCI के चेयरमैन एवं पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के एमडी सुधांशु वात्स, ASCI बोर्ड सदस्य प्रवीण त्रिपाठी तथा खैतान एंड कंपनी के पार्टनर्स ईशान जोहरी और तनु बनर्जी के साथ मिलकर “Ad Law Compendium” का शुभारंभ किया। यह विज्ञापन कानूनों और नियमों पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा, जिससे उद्योग में जागरूकता और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव ने विज्ञापन उद्योग के हितधारकों—ASCI नेतृत्व, मार्केटर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कानूनी विशेषज्ञों—के साथ एक बैठक भी की।

जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल: ग्रामीण परिवारों के लिए नल कनेक्शन की उपलब्धता और निगरानी

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परिचय

अगस्त 2019 से, भारत सरकार जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन द्वारा पीने के पानी की सुविधा पहुँचाना है। “पीने का पानी” एक राज्य विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।

योजना का संचालन और मार्गदर्शन

राज्यों को JJM के प्रभावी योजना और क्रियान्वयन में मदद करने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन साझा की गई हैं, जो योजना, निष्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी और बनाए रखी जाने वाली बुनियादी संरचना के सभी पहलुओं को कवर करती हैं।

भारत सरकार समय-समय पर समीक्षा बैठकों और बहु-आयामी टीमों के दौरे के माध्यम से राज्यों के साथ मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा करती है और सुधार के क्षेत्रों को उजागर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • JJM में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • भौतिक और वित्तीय प्रगति JJM–IMIS (Integrated Management Information System) पर रिपोर्ट की जाती है।

  • सभी नल कनेक्शन परिवार के मुखिया के आधार कार्ड से लिंक किए जाते हैं।

  • निर्माण कार्य के तहत बनाए गए संपत्तियों की जियो-टैगिंग की व्यवस्था की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तृतीय पक्ष निरीक्षण

  • भुगतान से पहले तीसरे पक्ष के निरीक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया गया है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तीसरे पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (TPIAs) को सूचीबद्ध करने का अधिकार है, जो कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और मशीनरी की गुणवत्ता की जांच करें।

निगरानी और सुधारात्मक कदम

  • अप्रैल 2025 से, राज्यों द्वारा हर महीने चार योजनाओं का यादृच्छिक निरीक्षण किया जा रहा है।

  • राष्ट्रीय WASH विशेषज्ञों (NWEs) के लिए निगरानी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिसमें गुणवत्ता के मानक और TPI के ToR को संशोधित किया गया है।

  • IMIS के माध्यम से IT निगरानी का विस्तार किया गया है, जिससे जिला और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी निगरानी की सुविधा मिली है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को JJM में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं (गुणवत्ता या वित्तीय) के प्रति नियमित रूप से सचेत किया जाता है और शून्य सहिष्णुता अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

  • 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार, कुल 17,036 शिकायतें मिलीं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएँ और कार्य की खराब गुणवत्ता शामिल हैं।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 621 विभागीय अधिकारियों, 969 ठेकेदारों और 153 TPIAs के खिलाफ कार्रवाई की गई।

स्रोत: यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

जींद के अस्पताल में शव को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटना पर NHRC का संज्ञान, हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया है कि हरियाणा के जींद जिले स्थित नरवाना सिविल अस्पताल की शवगृह में एक शव को चूहों ने कुतर दिया। बताया गया है कि यह इस अस्पताल में सामने आया पहला ऐसा मामला नहीं है।

आयोग ने टिप्पणी की है कि यदि समाचार रिपोर्ट की सामग्री सत्य है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के मुद्दे उठाती है। इसलिए, आयोग ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

12 नवंबर 2025 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने शवगृह के फ्रीजर की मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी को शिकायत दी है, लेकिन उसकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, अस्थायी तौर पर फ्रीजर में चूहों के प्रवेश को रोकने के लिए जाली लगाई गई है।


उपराष्ट्रपति ने पाँचवें ऑडिट दिवस समारोह की अध्यक्षता की, CAG को बताया “जनधन का संरक्षक”

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में पाँचवें ऑडिट दिवस (Audit Diwas) समारोह की अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को “जनधन का संरक्षक” बताते हुए कहा कि CAG सार्वजनिक धन की सुरक्षा और सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने 1860 में लेखा महानियंत्रक के पद की स्थापना से लेकर अब तक CAG की 165 वर्षों की समर्पित सेवा को सराहा।

उन्होंने कहा,

“दुनिया भर के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों का एक ही उद्देश्य होता है — सार्वजनिक धन की रक्षा करना और सुशासन को बढ़ावा देना। भारत का CAG इनमें अग्रणी है, जो सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी के सिद्धांतों को मजबूती से निभा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने CAG की रिपोर्टों को तथ्यपरक, साक्ष्य-आधारित और “भारत की नैतिक संपदा” का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उन्होंने CAG द्वारा लागू की गई “वन नेशन, वन सेट ऑफ ऑब्जेक्ट हेड्स ऑफ एक्सपेंडिचर” पहल की सराहना की, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च में पारदर्शिता और तुलनात्मकता बढ़ेगी।

AI, बिग डेटा, ब्लॉकचेन और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि CAG ने One IAAD One System, AI-आधारित ऑडिट फ्रेमवर्क और कई अन्य नवाचारों के माध्यम से तकनीक को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। उन्होंने IIT मद्रास जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की भी सराहना की, जिसके माध्यम से डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और डीप लर्निंग में क्षमता निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि 20,000 से अधिक वार्षिक निरीक्षण रिपोर्टों को संसाधित करने के लिए एक कस्टमाइज्ड लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित किया जा रहा है, जिससे डेटा-आधारित ऑडिट को मजबूती मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक अपनाने से जोखिम पहचान, दक्षता और साक्ष्य-आधारित शासन में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक धन का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने इसे प्राप्त करने के लिए एक भविष्य-उन्मुख और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर CAG की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है — WHO, ILO जैसे प्रमुख संगठनों के लिए एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में भारत की भूमिका और ASOSAI व INTOSAI की महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता, भारत को वैश्विक ऑडिट नेतृत्व के अग्रणी स्थान पर स्थापित करती है। इसे उन्होंने “अनुगामी से वैश्विक नेता बनने तक” भारत की यात्रा का प्रमाण बताया।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, उपराष्ट्रपति ने सरकार और CAG के बीच वित्तीय अनुशासन व पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से लगातार अपनी कौशल क्षमता बढ़ाने और ऑडिट क्षमताओं को सुदृढ़ करने का अनुरोध किया, ताकि जनकल्याण शासन के केंद्र में बना रहे।

कार्यक्रम में भारत के CAG के. संजय मु्र्थी, उप महालेखा परीक्षक सुभीर मलिक,कृ्ष्णन सागरन सुब्रमणियन,जयंत सिन्हा, पूर्व CAGs, तथा भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (IA&AS) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


सड़क परिवहन मंत्रालय ने विशेष अभियान 5.0 को सफलता पूर्वक पूरा किया

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा इसकी एजेंसियों ने 2 से 31 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित लंबित मामलों के निस्तारण हेतु विशेष अभियान 5.0 (Special Campaign for Disposal of Pending Matters 5.0) को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस अभियान का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2025 को सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा द्वारा मंत्रालय में स्वच्छता प्रतिज्ञा दिलाते हुए और परिवहन भवन में स्वच्छता अभियान चलाकर किया गया।

मंत्रालय ने रिकॉर्ड प्रबंधन (Record Management) और स्वच्छता गतिविधियों में 100% लक्ष्य प्राप्त किया है। इस दौरान 18,616 पुराने फाइलों (भौतिक/ई-फाइल) की समीक्षा की गई। मंत्रालय और इसकी एजेंसियों ने 15,000 से अधिक स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियाँ आयोजित कीं, जिनमें कार्यालय परिसर, निर्माण स्थल, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, टोल प्लाज़ा, मार्ग सुविधाएँ, सड़क किनारे ढाबे, बस स्टॉप और फ्लाईओवर शामिल हैं।

मंत्रालय ने सार्वजनिक शिकायतों (1,147) और सार्वजनिक शिकायत अपीलों (522) के निस्तारण में 99% लक्ष्य प्राप्त किया है। इसके अलावा, 730 में से 671 लंबित सांसद संदर्भ (92%) और 13 में से 10 लंबित पीएमओ संदर्भों का निपटारा किया गया।

स्पेस प्रबंधन और सौंदर्यीकरण के तहत मंत्रालय के विभिन्न कार्यालय परिसरों में 220 वर्ग फीट से अधिक स्थान खाली कराया गया और 640 किलोग्राम से अधिक कबाड़ सामग्री का निपटान किया गया।

अभियान के दौरान एक नवाचार भी किया गया – "Report a Dirty NH Toilet and Get Rewarded" नामक योजना, जिसके तहत आम जनता को टोल प्लाज़ा पर शौचालयों की अस्वच्छता रिपोर्ट करने पर पुरस्कार दिया जाता है।

लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने हेतु सचिव (MoRTH) ने साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित कीं, जबकि मंत्रालय के नोडल अधिकारी ने विभिन्न एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय किया। वरिष्ठ अधिकारियों को मैदानी कार्यालयों का निरीक्षण करने के लिए भी भेजा गया, जिसमें कचरा प्रबंधन, एनएच खंड, टोल प्लाज़ा, फ्लाईओवर, गड्ढे, लाइटिंग सिस्टम आदि मुख्य क्षेत्र शामिल थे।

इस अभियान में MoRTH, NHAI और NHIDCL के अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, अभियान के व्यापक प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स – X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक का भी उपयोग किया गया।


महासमुंद जिले में कुल 452 कट्टा अवैध धान जब्त

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रायपुर - महासमुंद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के पूर्व अवैध धान परिवहन, भंडारण एवं विक्रय पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन द्वारा सतत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में आज की गई अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 452 कट्टा धान जब्त किया गया।

मंडी सचिव महासमुंद के नेतृत्व में गठित निरीक्षण टीम ने दो प्रतिष्ठानों से कुल 152 कट्टा धान जब्त किया। निरीक्षण के दौरान लाफिंग खुर्द स्थित भारत भूषण साहू के प्रतिष्ठान में 50 कट्टा तथा ग्राम बम्हनी में खिलावन यादव के प्रतिष्ठान से 102 कट्टा धान अवैध रूप से संग्रहित पाया गया। दोनों ही मामलों में प्रकरण तैयार कर संबंधित विभाग को अग्रिम कार्यवाही हेतु रिपोर्ट भेजी गई है।

इसी प्रकार राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सरायपाली अंतर्गत केंदुवा-सागरपाली मेन रोड पर आकस्मिक निरीक्षण के दौरान एक पिकअप वाहन से 60 कट्टा (लगभग 24 क्विंटल) धान अवैध परिवहन करते हुए जब्त किया गया, जिस पर मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त ग्राम बकमा स्थित शेखर ट्रेडर्स से 240 कट्टा अवैध धान जप्त कर मंडी के सुपुर्द किया गया।

जिला प्रशासन ने कहा है कि जिले में धान के अवैध परिवहन एवं संग्रहण के मामले में जांच-पड़ताल का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। धान के अवैध परिवहन, संग्रहण और विक्रय के मामले में संलिप्त लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा धान उपार्जन के दौरान खरीदी केन्द्रों में निगरानी के लिए पुख्ता व्यवस्था की गई है। अवैध रूप से धान विक्रय का मामला पकड़ में आने पर दोषियों को सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।


एनएचआरसी ने बेंगलुरु में शोकग्रस्त पिता से रिश्वत वसूली की खबर पर स्वतः संज्ञान लिया

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि कर्नाटक के बेंगलुरु में अपनी इकलौती बेटी की मृत्यु पर शोक मना रहे 64 वर्षीय पिता को हर स्तर पर — एंबुलेंस चालक, पुलिस, शवदाह गृह कर्मियों और नगर निगम अधिकारियों — को रिश्वत देनी पड़ी। 30 अक्टूबर, 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जो घटना एक श्रद्धांजलि का अवसर होनी चाहिए थी, वह भ्रष्टाचार, नौकरशाही और अमानवीयता का एक भयावह अनुभव बन गई।

आयोग ने कहा कि यदि रिपोर्ट में दिए गए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। इसलिए आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृतक महिला — जो IIT मद्रास और IIM अहमदाबाद की स्नातक थीं और बेंगलुरु में कार्यरत थीं — को 18 सितंबर, 2025 को ब्रेन हेमरेज हुआ था। बेटी की मृत्यु के बाद जब पिता ने एंबुलेंस बुलाई, तो एंबुलेंस चालक ने कथित रूप से अत्यधिक शुल्क वसूला। पुलिस को मृत्यु की सूचना देने पर न केवल सहानुभूति की कमी दिखाई दी, बल्कि प्राथमिकी (FIR) और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रतियां भी रिश्वत देने के बाद ही सौंपी गईं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मृतका के परिवार ने अंतिम संस्कार से पहले उसकी आंखें दान कीं। किंतु शवदाह गृह में भी धन की मांग की गई, जिसे पिता को देना पड़ा। वहीं, महादेवपुरा नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी काफी देरी हुई। वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप के बावजूद प्रमाण पत्र तभी जारी किया गया जब पिता ने रिश्वत का भुगतान किया।

आयोग ने इस पूरी घटना को मानव गरिमा और सरकारी जवाबदेही के खिलाफ बताया है और राज्य प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा की है।

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के तहत ली और दिलाई सतर्कता प्रतिज्ञा: नैतिक शासन और पारदर्शिता पर दिया जोर

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सतर्कता प्रतिज्ञा ली और दिलाई। यह कार्यक्रम सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के अवसर पर आयोजित किया गया।

देशभर में यह सप्ताह 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक “सतर्कता: हमारी साझा जिम्मेदारी” (Vigilance: Our Shared Responsibility) विषय पर मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है, जैसा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के निर्देशों में निर्धारित किया गया है।

प्रतिज्ञा दिलाते हुए, मंत्री नड्डा ने नैतिक मूल्यों को संस्थागत रूप देने और शासन के प्रत्येक स्तर पर सतर्कता की संस्कृति विकसित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा —

“हमें एक ऐसी ‘करने और न करने योग्य कार्यों की सूची’ तैयार करनी चाहिए, जिसे आम व्यक्ति आसानी से समझ सके, ताकि कोई व्यक्ति सद्भावना या सहानुभूति में आकर भी गलत कार्य न कर बैठे। इसके साथ ही प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण एक नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए, जिससे सभी जागरूक और सतर्क बने रहें।”

सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 की पूर्व संध्या पर, केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस वर्ष अगस्त माह में सभी संगठनों को 18 अगस्त से 17 नवंबर 2025 तक तीन माह का ‘निवारक सतर्कता अभियान’ चलाने की सलाह दी थी। यह अभियान पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है —

  1. लंबित शिकायतों का निपटान

  2. लंबित मामलों का निपटान

  3. क्षमता निर्माण कार्यक्रम

  4. परिसंपत्ति प्रबंधन

  5. डिजिटल पहल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य कर्मियों ने इस अवसर पर भाग लिया और ईमानदारी, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

विधि कार्य विभाग ने LIMBS और PFMS के एकीकरण से अधिवक्ता शुल्क भुगतान प्रक्रिया को किया पूर्णतः डिजिटल

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भारत सरकार की विशेष अभियान 5.0 के तहत दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग (Department of Legal Affairs – DLA) ने प्रक्रियागत सरलीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने लीगल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड ब्रीफिंग सिस्टम (LIMBS) को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से एकीकृत कर दिया है। यह सुधार अधिवक्ताओं के शुल्क के वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बना रहा है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल इंडिया जैसी सरकार की प्रमुख पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पहले अधिवक्ताओं को फीस का भुगतान करने की प्रक्रिया भौतिक दस्तावेजों पर निर्भर थी — जिसमें मैन्युअल सत्यापन और कागज़ी फाइलों को पे एंड अकाउंट्स ऑफिस तक भेजने की लंबी प्रक्रिया शामिल थी। इससे भुगतान में विलंब होता था और प्रणाली पेपर-इंटेंसिव बनी रहती थी। अब, e-Bill मॉड्यूल के उन्नत संस्करण के माध्यम से अधिवक्ताओं और विधि अधिकारियों को फीस का भुगतान पूरी तरह से डिजिटल और एंड-टू-एंड इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भुगतान समयबद्ध और कुशलता से हो रहा है।

अब LIMBS पर तैयार किए गए बिल सीधे PFMS से जुड़े हुए हैं, जिससे उनका डिजिटल सत्यापन, स्वीकृति और भुगतान स्वतः हो जाता है। यह एक पेपरलेस सिस्टम है, जो रीयल-टाइम ट्रैकिंग, कम प्रसंस्करण समय और मानवीय त्रुटियों को समाप्त करता है। प्रत्येक दावे के लिए एक क्लेम रेफरेंस नंबर (CRN) उत्पन्न होता है, जिससे विभागीय इकाइयां भुगतान की स्थिति को वास्तविक समय में देख सकती हैं। भुगतान की स्वीकृति के बाद राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में PFMS के माध्यम से स्थानांतरित हो जाती है।

केंद्रीय एजेंसी अनुभाग (CAS) ने फरवरी 2025 में LIMBS के माध्यम से पैनल अधिवक्ताओं के भुगतान के लिए e-Bill मॉड्यूल लागू किया था, और अब इसे अन्य मुकदमेबाजी इकाइयों, जैसे दिल्ली उच्च न्यायालय में भी विस्तारित करने की तैयारी है। इसके अलावा, विधि अधिकारियों के रिटेनर शुल्क के लिए एक अलग मॉड्यूल विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

यह एकीकरण डिजिटल प्रशासन को सशक्त करता है, पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है और पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्रोत्साहित करता है। इस एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म से विधिक शुल्क भुगतान प्रक्रियाओं में समानता और मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है।

विशेष अभियान 5.0 के उद्देश्यों के अनुरूप यह पहल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाती है, डिजिटल परिवर्तन को गति देती है और नागरिक-केंद्रित सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। मैन्युअल प्रक्रियाओं को समाप्त करके और कार्यप्रवाह को मानकीकृत करके, विधि कार्य विभाग इस सुधार को अन्य कानूनी भुगतान श्रेणियों तक विस्तारित कर रहा है, जिससे विकसित भारत @2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

कानून और न्याय मंत्रालय में LIMBS ‘लाइव केस’ डैशबोर्ड का प्रदर्शन: डिजिटल कानूनी प्रबंधन में नई पहल

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कानून और न्याय मंत्रालय, लीगल अफेयर्स विभाग ने आज लीगल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड ब्रीफिंग सिस्टम (LIMBS) के “लाइव केस” डैशबोर्ड को प्रदर्शित करने के लिए एक सफल कार्यक्रम आयोजित किया, जो शास्त्री भवन, नई दिल्ली में हुआ।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ कानून और न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने किया। उन्होंने इस पहल को सरकारी मुकदमेबाजी प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम में डॉ. अंजू राठी राणा, भारत सरकार की संघीय कानून सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

LIMBS “लाइव केस” डैशबोर्ड की विशेषताएँ

LIMBS “लाइव केस” डैशबोर्ड अदालत के मामलों का रियल-टाइम डेटा विज़ुअलाइजेशन प्रस्तुत करता है और आने वाली सुनवाई के मामलों का सारांश प्रदान करता है, जिससे सक्रिय निर्णय लेना और मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय संभव होता है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार मुकदमेबाजी को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारत सरकार, being one of the largest litigants, ने LIMBS लागू किया ताकि अदालत के मामलों की प्रणालीगत, सक्रिय और दक्ष निगरानी की जा सके।

वर्तमान में, LIMBS पोर्टल में 53 मंत्रालयों और विभागों से 7,23,123 लाइव केस दर्ज हैं। 13,175 मंत्रालय उपयोगकर्ता और 18,458 अधिवक्ता नियमित रूप से मामलों को अपडेट करते हैं।

डिजिटल सुधार और बेहतर प्रशासन

यह पहल सरकार की डिजिटल रूपांतरण यात्रा में एक मील का पत्थर है, जो तकनीक के माध्यम से प्रभावी कानूनी मामलों का प्रबंधन, डेटा-आधारित निर्णय और बेहतर शासन परिणाम सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।


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