Media24Media.com: राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर आयुष मंत्रालय ने रोकथाम, शीघ्र पहचान और समेकित देखभाल पर दिया विशेष जोर

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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर आयुष मंत्रालय ने रोकथाम, शीघ्र पहचान और समेकित देखभाल पर दिया विशेष जोर

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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने इस बात पर बल दिया कि जन-जागरूकता बढ़ाना और कैंसर की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कैंसर अब भी विश्व स्तर पर मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। दुनिया के कई देशों में मुख (ओरल), गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) और स्तन कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, स्क्रीनिंग और समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों (Holistic Health Practices) पर विशेष जोर दे रहा है।

कैंसर का एक बड़ा हिस्सा रोकथाम योग्य कारणों से उत्पन्न होता है, जैसे कि तंबाकू का सेवन, अस्वास्थ्यकर भोजन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक शराब का सेवन, पर्यावरण प्रदूषण और एचपीवी संक्रमण। ये सभी कारक इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मजबूत जागरूकता और समय पर कार्रवाई की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शीघ्र पहचान (Early Detection) से कैंसर से बचाव और उपचार की संभावना कई गुना बढ़ जाती है—विशेष रूप से स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुख कैंसर के मामलों में, जिन्हें प्रारंभिक अवस्था में नियमित जांच के माध्यम से पहचाना जा सकता है। चूँकि कई प्रकार के कैंसर रोके जा सकते हैं और कई का उपचार शुरुआती अवस्था में संभव है, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

तंबाकू से परहेज, शराब का सीमित सेवन, पौध-आधारित आहार, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि, और धुआँ व प्रदूषण से बचाव — ये सभी उपाय कैंसर के जोखिम को घटाने और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक हैं।

प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार ने कहा कि जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए कैंसर जागरूकता और रोकथाम के प्रति सक्रिय और जनकेंद्रित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की बढ़ती पहलें—जैसे समेकित कैंसर-देखभाल केंद्र, सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम और सामुदायिक केंद्रित परियोजनाएं—यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि सुलभ, समग्र और सहायक उपचार देश के हर नागरिक तक पहुँचे।
उन्होंने जोड़ा कि आधुनिक ऑन्कोलॉजी और आयुष प्रणालियों के एकीकृत मॉडल जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं, खासकर कमज़ोर और संवेदनशील वर्गों के लिए।

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा कि भारत में बढ़ते समेकित कैंसर-देखभाल नेटवर्क मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि वह प्रमाण-आधारित (Evidence-Based), रोगी-केंद्रित समाधान को सशक्त बना रहा है। उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence), सहयोगी अनुसंधान प्लेटफॉर्म और टाटा मेमोरियल सेंटर–ACTREC, आर्य वैद्यशाला, एम्स और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी से नए चिकित्सीय दृष्टिकोण, बेहतर लक्षण प्रबंधन और कैंसर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि ये प्रयास दिखाते हैं कि आयुष प्रणाली किस प्रकार आधुनिक ऑन्कोलॉजी को वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सहायक क्लिनिकल देखभाल के माध्यम से पूरक बना सकती है।

आयुष मंत्रालय देशभर में समेकित कैंसर देखभाल (Integrative Cancer Care) का विस्तार कर रहा है। प्रमुख उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) में से एक टीएमसी–ACTREC, मुंबई में स्थित है, जो इंटीग्रेटिव केयर और आयुष ड्रग डिस्कवरी पर केंद्रित है। ये केंद्र इन-सिलिको, प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल स्टडीज़, विशेष ओपीडी सेवाएँ और क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहयोग कर रहे हैं।

आर्य वैद्यशाला, कोट्टक्कल में स्थित एक समर्पित उत्कृष्टता केंद्र जीवन गुणवत्ता और सहायक चिकित्सा (Supportive Therapy) पर केंद्रित है, जिसने पिछले दो वर्षों में 26,356 कैंसर रोगियों, जिनमें 338 फेफड़ों के कैंसर के मामले शामिल हैं, का प्रबंधन किया है। यह समेकित रोगी देखभाल के सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है।

अंत में मंत्रालय ने दोहराया कि रोकथाम, शीघ्र निदान और समेकित सहायक देखभाल भारत की कैंसर चुनौती का प्रमुख उत्तर होना चाहिए।

जागरूकता बढ़ाना, स्क्रीनिंग तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना — ये सभी कदम कैंसर के जोखिम को कम करने और परिणामों में सुधार के लिए अनिवार्य हैं।
आयुष प्रणाली की यह पहल आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलकर एक समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो न केवल राष्ट्रीय कैंसर बोझ को कम करने बल्कि रोगियों और समुदायों के समग्र कल्याण को भी बढ़ाने में सहायक है।

कैंसर जागरूकता पर सीसीआरएएस (CCRAS) का आईईसी प्रकाशन यहाँ देखा जा सकता है:


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