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H1N1 को लेकर केंद्र अलर्ट: जेपी नड्डा ने की समीक्षा, दिल्ली में अस्पतालों की तैयारियों का लिया जायजा

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नई दिल्ली- देश में H1N1 इन्फ्लुएंजा की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति, अस्पतालों की तैयारियों और इन्फ्लुएंजा की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह भी बैठक में शामिल हुए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने और मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया है।

H1N1 की स्थिति पर केंद्र की पैनी नजर

बैठक के दौरान देश में इन्फ्लुएंजा की राष्ट्रीय निगरानी और महामारी विज्ञान संबंधी स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही Influenza-like Illness (ILI) और Severe Acute Respiratory Infection (SARI) के ट्रेंड पर भी चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों और प्रयोगशालाओं से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर इन्फ्लुएंजा के मामलों में होने वाले किसी भी असामान्य बढ़ोतरी या एक जगह पर मामलों के समूह यानी क्लस्टर की समय रहते पहचान करने पर जोर दिया।

जेपी नड्डा ने अधिकारियों को लगातार सतर्कता, मजबूत निगरानी और पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए।

दिल्ली के अस्पतालों की तैयारियों की भी समीक्षा

बैठक में दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अस्पतालों की क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।

इस दौरान मुख्य रूप से इन व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई:

  • अस्पतालों में उपलब्ध बेड

  • क्रिटिकल केयर सुविधाएं

  • ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड

  • वेंटिलेटर की उपलब्धता

  • जरूरी दवाइयां

  • जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाएं

  • अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री

  • मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने की व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में पर्याप्त surge capacity बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव न पड़े।

गंभीर मरीजों के लिए रेफरल सिस्टम मजबूत करने पर जोर

जेपी नड्डा ने कहा कि ऐसे मरीज जिन्हें विशेषज्ञ या गंभीर चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, उनके लिए सीमलेस रेफरल सिस्टम होना जरूरी है।

इसका मतलब है कि यदि किसी अस्पताल में मरीज की स्थिति के मुताबिक जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे बिना अनावश्यक देरी के बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में भेजने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।

जल्द पहचान और समय पर जांच जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन्फ्लुएंजा के मामलों की जल्दी पहचान, समय पर टेस्टिंग और उचित इलाज को मजबूत करने पर जोर दिया।

उन्होंने मौजूदा निगरानी और लैब नेटवर्क का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए, ताकि बीमारी के ट्रेंड को लगातार ट्रैक किया जा सके और किसी भी असामान्य स्थिति का पता शुरुआती स्तर पर ही चल जाए।

10 जुलाई को राज्यों को भेजी गई थी एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने की सलाह दे चुका है। 10 जुलाई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर Acute Respiratory Illness (ARI) को लेकर निगरानी और तैयारियां मजबूत करने को कहा था।

राज्यों को सलाह दी गई थी कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों पर लगातार नजर रखी जाए।

लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी तैयारियों के साथ-साथ जन-जागरूकता और बचाव के उपायों पर भी जोर दिया।

लोगों को खास तौर पर:

  • श्वसन संबंधी स्वच्छता बनाए रखने,

  • नियमित रूप से हाथों की सफाई करने,

  • सांस से जुड़ी समस्या होने पर सावधानी बरतने,

  • लगातार या गंभीर लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने

की सलाह दी गई है।

यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर चेतावनी वाले लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

डेंगू और मलेरिया पर भी नजर

बैठक में केवल H1N1 या इन्फ्लुएंजा ही नहीं, बल्कि डेंगू और मलेरिया जैसी अन्य मौसमी बीमारियों की स्थिति और रोकथाम पर भी चर्चा हुई।

जेपी नड्डा ने राज्य सरकारों से मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए proactive और preparedness-oriented approach अपनाने को कहा।

उन्होंने स्थानीय निकायों और नगर पार्षदों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय स्तर पर लोगों को बीमारी की रोकथाम, संक्रमण के प्रसार और नियंत्रण के उपायों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया।

TB की पहचान में स्थानीय निकायों की भूमिका का उदाहरण

बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में टीबी के मामलों की पहचान में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसमें स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी और whole-of-government approach की भूमिका रही है।

जेपी नड्डा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों तक सही और evidence-based जानकारी पहुंचाई जा सकती है। साथ ही इससे समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

H1N1 क्या है?

H1N1 इन्फ्लुएंजा एक प्रकार का वायरल फ्लू है, जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। मौसमी इन्फ्लुएंजा की तरह इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं।

कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, खासकर जब सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण विकसित हों। इसलिए लगातार या गंभीर श्वसन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सरकार ने कहा- स्थिति पर लगातार निगरानी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत संबंधित बीमारियों की स्थिति पर लगातार और करीबी निगरानी रखी जा रही है।

केंद्र सरकार राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर रही है, ताकि मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जा सके।

निष्कर्ष

H1N1 और मौसमी इन्फ्लुएंजा को लेकर केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। जेपी नड्डा की समीक्षा बैठक में दिल्ली समेत पूरे देश की निगरानी व्यवस्था, अस्पतालों की क्षमता, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, दवाओं और टेस्टिंग सुविधाओं की समीक्षा की गई।

सरकार का जोर फिलहाल घबराहट पर नहीं बल्कि निगरानी, समय पर जांच, बेहतर अस्पताल तैयारियों और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और स्थानीय निकायों से भी मौसमी बीमारियों के खिलाफ सक्रिय और समन्वित तरीके से काम करने को कहा है।

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

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धनंजय राठौर

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है। 


अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ

शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:

विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।

•एनीमिया से बचाव: 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।

पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।

कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।

•दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।

जागरूकता एवं परामर्श सत्र

केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:

•स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।

•ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें।  जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।

•अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।

•अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

•शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।

शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट मामले की सुनवाई के लिए बनेगा विशेष मेडिकल बोर्ड, त्वरित जांच कर दी जाएगी रिपोर्ट

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समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली संयुक्त बैठक

रायपुर- दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय तथा अन्य अंतर्विभागीय विषयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को महानदी भवन, मंत्रालय, अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट प्रकरणों की होगी त्वरित जांच  

बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराए जाने पर चर्चा हुई। संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षण कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा निर्धारित समयान्तराल में दिव्यांगता की भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले व्यक्तियों के प्रकरणों की समीक्षा किए जाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों की जांच के लिए राज्य मेडिकल एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड की प्रक्रिया होगी सुगम  

बैठक में दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने, मेडिकल बोर्ड में विषय- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड एवं दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने पर चर्चा की गई। पात्र दिव्यांगजनों को समयबद्ध रूप से प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप अस्थायी एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की स्थिति में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।

उभयलिंगी समुदाय के कल्याण पर भी हुई चर्चा  

बैठक में उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों के लिए राज्य की सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) संबंधी सहायता तथा समय-सीमा में पात्र हितग्राहियों को लाभ प्रदान करने पर चर्चा हुई। SRS के लिए सहायता अनुदान संबंधी दिशा-निर्देशों में आवश्यक सर्जरी को शामिल किए जाने तथा निर्धारित दरों में वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधन की कार्यवाही पर विचार किया गया। 

राज्य के शासकीय अस्पतालों में उभयलिंगी व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक/वार्ड की व्यवस्था किए जाने पर भी चर्चा हुई।

नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण पर जोर  

बैठक में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुरूप राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन तथा मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबंधित प्रक्रिया की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशामुक्ति केंद्रों में उपचाररत व्यक्तियों को दी जा रही दवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा केंद्रों के विस्तार एवं बेहतर संचालन पर भी चर्चा हुई।

इसके साथ ही दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, उभयलिंगी एवं नशा पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं संस्थागत संरक्षण के लिए संचालित शासकीय एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं में निवासरत हितग्राहियों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा, समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

तंबाकू पर शिकंजा कसने की तैयारी, कोटपा के कड़े अमल से बनेगा तंबाकू मुक्त छत्तीसगढ़

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रायपुर- तंबाकू के सेवन पर रोक और इसके दुष्प्रभावों से लोगों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ में अब कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जनभागीदारी और बहुक्षेत्रीय समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के तहत गुरुवार को स्वास्थ्य भवन, नवा रायपुर में ‘सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003’ (कोटपा) के कड़े क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता अपर संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं इंद्रजीत बर्मन ने की।

कार्यशाला में मुंबई से पहुंचीं वाइटल स्ट्रैटजीज की मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रावली मदान ने तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान और लोगों को सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों से दूर रखने के उपायों पर जानकारी दी। वहीं वाइटल स्ट्रैटजीज की डॉ. हंसा कंडू ने राज्य में तंबाकू नियंत्रण कानून को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों और संस्थाओं की बहुक्षेत्रीय सहभागिता की आवश्यकता पर विचार साझा किए। प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से नाबालिगों तक तंबाकू उत्पादों की पहुंच और उपलब्धता कम करने के उपायों पर चर्चा की गई, ताकि कम उम्र में तंबाकू सेवन की शुरुआत को रोका जा सके।

कार्यशाला में तंबाकू मुक्त समुदाय, तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान और तंबाकू मुक्त गांव की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों के साथ जिला स्तर पर एमआईएस की प्रगति और उसके अपडेट की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को कोटपा के प्रावधानों के प्रभावी पालन और मैदानी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। अपर संचालक इंद्रजीत बर्मन ने राज्य में तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए जागरूकता गतिविधियों के साथ वैधानिक प्रावधानों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया।

प्रशिक्षण में जिला स्तर से आए जिला नोडल अधिकारी (एनटीसीपी), जिला सलाहकार (एनटीसीपी), सामाजिक कार्यकर्ता, दंत शल्य चिकित्सक एवं दंत चिकित्सक, खाद्य एवं औषधि विभाग के प्रतिनिधि तथा जिला एनजीओ सहयोगियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता, आपूर्ति और उपयोग को कम करने के लिए मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की क्षमता विकसित करना रहा। स्वास्थ्य विभाग का जोर कानून के सख्त पालन, विभागीय समन्वय और जनभागीदारी के माध्यम से राज्य में तंबाकू मुक्त वातावरण तैयार करने पर है।

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

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बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।

बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक  की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं  शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। 

इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा किरण  कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

टीबी के खिलाफ लड़ाई में आगे आएं, बनें किसी मरीज की उम्मीद

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जशपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के 19 मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान कर रहे हैं निरंजन

रायपुर- टीबी केवल एक बीमारी नहीं है। यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी ऐसी चुनौती है, जो हर साल हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तब उसके सामने केवल दवा लेने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने, नियमित उपचार जारी रखने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी अनेक कठिनाइयाँ भी खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में "निक्षय मित्र" की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पर्याप्त पोषण। लेकिन दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मरीज केवल इसलिए उपचार बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों के मनोबल को भी मजबूत बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के बीच स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करते हुए  राष्ट्रीय स्वास्थ्य  मिशन कार्यरत  जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न केवल पीवीटीजी समुदाय के 19 टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं आवश्यक सहयोग प्रदान कर उपचार की राह में उनका साथ निभाया।

जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण मरीज अक्सर उपचार में देरी कर देते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।

निरंजन गुप्ता की पहल केवल पोषण किट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।

टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा और निदान जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है पोषण और सामाजिक सहयोग। कुपोषण और टीबी का संबंध एक दुष्चक्र की तरह है कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। ऐसे में निक्षय मित्र द्वारा दिया गया पोषण सहयोग मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नहीं है। यह समाज के हर उस व्यक्ति का दायित्व है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जशपुर की यह पहल बताती है कि एक व्यक्ति भी यदि संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज केवल संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।

बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

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किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र और गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र का दर्जा

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने 4–5 अगस्त 2026 को नेपाल के काठमांडू में आयोजित दक्षिण-पूर्व एशिया नियामक नेटवर्क (SEARN) की 10वीं वर्षगांठ बैठक में भाग लिया। इस बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (NRAs), फार्माकोपिया संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना था।

SEARN विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO) द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित एक सहयोगात्मक मंच है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की नियामक प्रणालियों को ज्ञान साझा करने, नियामकीय समन्वय, क्षमता निर्माण तथा सहयोगात्मक तंत्र के माध्यम से सुदृढ़ बनाना है। यह नेटवर्क गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोविजिलेंस, क्लीनिकल ट्रायल निगरानी, नियामकीय तैयारी और चिकित्सा उपकरणों के विनियमन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करता है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में डॉ. वी. कलैसेलवन (सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक), डॉ. जय प्रकाश (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी), डॉ. रॉबिन कुमार (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी) तथा अरविंद कुमार शर्मा (वैज्ञानिक अधिकारी) शामिल थे।

बैठक के दौरान IPC ने भारत की मजबूत दवा नियामक प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय फार्माकोपिया, इंडियन फार्माकोपिया रेफरेंस सब्स्टेंस (IPRS), इम्प्योरिटी रेफरेंस स्टैंडर्ड्स (IMPRS), फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI), मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI), क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक पहलों की जानकारी साझा की।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Regional Centre of Excellence in Pharmacovigilance) तथा गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र (Technical Centre in Quality) के रूप में मान्यता मिलना रही।

यह प्रतिष्ठित मान्यता फार्माकोविजिलेंस प्रणाली को मजबूत करने, दवा गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाने तथा WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नियामकीय क्षमता निर्माण में IPC के निरंतर योगदान की पुष्टि करती है। यह सम्मान फार्माकोपिया विज्ञान एवं मानकों के क्षेत्र में IPC की अग्रणी भूमिका तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान साझा करने और मानकों के सामंजस्य को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक ज्ञान, नियामकीय अनुभवों और दवा नियमन से जुड़ी उभरती चुनौतियों—जैसे गुणवत्ता आश्वासन, दवा सुरक्षा, नियामकीय सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और क्षेत्रीय समन्वय—पर विस्तृत चर्चा की।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने पुनः दोहराया कि वह WHO-SEARN की पहलों का समर्थन जारी रखेगा तथा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय उत्कृष्टता और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व  मंत्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

माँ के दूध से स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत, प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत

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जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी

रायपुर- हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

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डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध, होटल-रेस्तरां में भी नहीं होगा इस्तेमाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से राज्यभर में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के स्थान पर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर तथा अन्य वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है। देखने और स्वाद में यह पनीर जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसका पोषण स्तर असली दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश

राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को बाजार, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान चलाकर नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ में लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर लागू है। देश के अन्य राज्यों में इसके निर्माण या बिक्री पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

इस बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के लिए नए मानक और लेबलिंग संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा, खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मलेरिया पर निर्णायक प्रहार जारी, एक भी मृत्यु न हो यही हमारा लक्ष्य : स्वास्थ्य मंत्री

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प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

रायपुर- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने  कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10  मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए  प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना पर हाईकोर्ट सख्त, केवल सात जिलों तक सीमित रखने पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि यह योजना केवल सात जिलों तक ही क्यों सीमित रखी गई है, जबकि राज्य के अन्य जिलों के स्कूली बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। न्यायालय ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि योजना के सीमित दायरे के पीछे क्या कारण हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी पात्र विद्यार्थियों को समान रूप से इसका लाभ मिले। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि सीमित जिलों में योजना लागू होने से अन्य क्षेत्रों के बच्चों के साथ असमानता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना के तहत विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पोषणयुक्त मिलेट (श्री अन्न) से बनी चिक्की उपलब्ध कराई जाती है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, कुपोषण को कम करना और मोटे अनाज (मिलेट) के उपयोग को बढ़ावा देना है।

याचिका में योजना को केवल सात जिलों तक सीमित रखने के निर्णय पर सवाल उठाया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत यह जानना चाहती है कि योजना का विस्तार पूरे राज्य में क्यों नहीं किया गया और अन्य जिलों के विद्यार्थियों को इससे वंचित रखने का आधार क्या है।

अब राज्य सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि योजना के चयनित जिलों में ही लागू होने के पीछे प्रशासनिक, वित्तीय या अन्य क्या कारण हैं तथा भविष्य में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की क्या योजना है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला शिक्षा और पोषण योजनाओं में समान अवसर सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांकेर में मलेरिया का कहर: एक और महिला की मौत, अब तक 4 की गई जान, 10 से अधिक छात्र भर्ती

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 कांकेर/भानुप्रतापपुर। बस्तर अंचल के कांकेर जिले में मलेरिया का प्रकोप जानलेवा होता जा रहा है। छात्रावास के तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद अब भानुप्रतापपुर ब्लॉक के चिच गांव में एक महिला ने मलेरिया के कारण दम तोड़ दिया। जिले में मलेरिया से मौतों का आंकड़ा बढ़कर चार पहुंच गया है। संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांकेर पहुंचकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।


तेज बुखार के बाद इलाज के दौरान महिला ने तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, चिच गांव निवासी राकेश्वरी कोला (पति-...) को बीते कुछ दिनों से तेज बुखार आ रहा था। जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर मितानिन कार्यकर्ता द्वारा दवाइयां दी गई थीं, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। मंगलवार देर रात गंभीर हालत में परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में भर्ती 10 छात्र, 2 की हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर
जिले के विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले 10 से अधिक छात्र-छात्राएं फिलहाल मलेरिया से पीड़ित हैं और अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इनमें से दो छात्रों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य टीमों द्वारा छात्रावासों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने ली हाई लेवल बैठक, बस्तर संभाग में अलर्ट जारी
मलेरिया के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की। उन्होंने प्रभावित इलाकों में त्वरित जांच, पर्याप्त दवा वितरण, फॉगिंग और घर-घर सर्वे के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, धरातल पर रोजाना सामने आ रहे नए मामलों से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य-मुख्य सचिव विकासशील

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मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हर घर नल-जल जीवन मिशन की प्रगति पर कलेक्टर कॉन्फ्रेंस सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।


पूर्ण योजनाओं को 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करें

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने कार्ययोजना तैयार करें 

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।

जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग करें

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

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छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

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विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा  बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।

राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।

राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।

अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि : जिला अस्पतालों में बढ़ी जटिल ऑपरेशन की क्षमता

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सूरजपुर जिला चिकित्सालय में 6 सफल टोटल हिप रिप्लेसमेंट ऑपरेशन, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहर

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सूरजपुर जिला चिकित्सालय ने सफलतापूर्वक 6 टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ऑपरेशन कर यह साबित किया है कि अब जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा जैसी अत्याधुनिक सेवाएं भी जिला स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

इस उपलब्धि से न केवल सूरजपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे इलाज के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी तीनों की बचत होगी।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा और सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम के नेतृत्व में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू एवं डॉ. अमन गुप्ता ने इन जटिल शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास भगत और डॉ. अनिल कुमार ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि में नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। समर्पित टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के कारण सभी ऑपरेशन सफल रहे।

ऑपरेशन के बाद सभी मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना पर किए जा रहे निवेश का सकारात्मक परिणाम अब आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पतालों में टीएचआर जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की उपलब्धता से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे गंभीर अस्थि रोगों के उपचार की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने पूरी चिकित्सा टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के नागरिकों को अपने जिले में ही बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

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