Media24Media.com: विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति: महिलाओं की बढ़ती कार्यबल सहभागिता ने रचा नया इतिहास

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति: महिलाओं की बढ़ती कार्यबल सहभागिता ने रचा नया इतिहास

Document Thumbnail

विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति

कल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की, जहाँ हर महिला—ग्रामीण कारीगर से लेकर शहरी नवप्रवर्तनकर्ता तक — केवल कामकाजी सदस्य नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन की प्रमुख शक्ति के रूप में काम कर रही हो। यह विकसित भारत 2047 का सपना है, जिसमें महिलाओं की आर्थिक सहभागिता को केंद्र में रखा गया है और उन्हें शिक्षा, कौशल, सुरक्षा और उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाया गया है, ताकि नारी शक्ति राष्ट्रीय विकास की दिशा में अग्रसर हो सके।

एक विकसित भारत हासिल करने के प्रमुख स्तंभों में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी कम से कम 70 प्रतिशत हो, ताकि वे भारत की विकास कहानी की बराबरी की हिस्सेदार बन सकें।

महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में प्रगति

भारत में महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं के रोजगार दर में 2017-18 से 2023-24 के बीच लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • महिला लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बढ़कर 2017-18 में 23.3% से 2023-24 में 41.7% हो गई।

  • वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) महिलाओं के लिए 22% से बढ़कर 40.3% हो गया।

  • अगस्त 2025 में महिला WPR 32.0% और LFPR 33.7% तक पहुँच गई।

EPFO पेरोल डेटा से यह भी पता चलता है कि महिलाओं के औपचारिक रोजगार में वृद्धि हो रही है। 2024–25 में 26.9 लाख नई महिला सदस्यताएँ जुड़ीं, और जुलाई 2025 में लगभग 2.8 लाख नई महिला सदस्यताएँ हुईं।

BRICS देशों में भारत में महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में वृद्धि

पिछले दशक में, BRICS देशों में भारत ने महिलाओं की श्रम भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है। 2015–2024 के बीच महिलाओं की श्रम भागीदारी में 23% से अधिक वृद्धि हुई। अन्य देशों जैसे ब्राजील, चीन और रूस में या तो स्थिरता रही या मामूली गिरावट हुई, जबकि दक्षिण अफ्रीका में मामूली वृद्धि दर्ज हुई।

यह तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति भारत की महिला आर्थिक समावेशिता की दिशा में लक्षित नीतियों का परिणाम है, जो कौशल, ऋण और औपचारिक रोजगार तक पहुँच का विस्तार करती हैं।

महिलाओं के कार्यस्थल सशक्तिकरण के लिए कानूनी ढांचा

भारत में श्रम कानूनों में महिलाओं के रोजगार संरक्षण और कल्याण के लिए कई प्रावधान हैं। प्रमुख कानून और उनके लाभ इस प्रकार हैं:

1. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधन 2017)

  • मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया।

  • 50 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

  • इसमें सरोगेट माताओं को भी शामिल किया गया।

2. कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम, 2013

  • आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC) का निर्माण अनिवार्य।

  • शिकायत निपटान प्रक्रिया को गोपनीय और न्यायसंगत बनाना।

3. समान वेतन अधिनियम, 1976

  • समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है।

  • भारत का वैश्विक रैंक 120वां, BRICS देशों में प्रगति दर्शाता है।

4. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

  • मातृत्व, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ सभी श्रमिकों तक पहुँचाने का प्रयास।

5. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों का कोड, 2020

  • महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विशेष आवश्यकताओं का ध्यान।

  • रात्री शिफ्ट के लिए सहमति और परिवहन की सुविधा।

  • 50 से अधिक कर्मचारियों वाले स्थानों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

सरकारी क्षेत्रों में कार्यस्थल समावेशिता

सरकार ने विभिन्न महिला-केंद्रित पहलें शुरू की हैं, जैसे:

1.कौशल और रोजगार के माध्यम से सशक्तिकरण

  • PMKVY: उद्योग-सम्बंधित प्रशिक्षण में 45% महिला सहभागिता।

  • PMMY: 68% खाते महिलाएं, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम बढ़ाना।

  • Stand-Up India: 2.01 लाख महिला उद्यमियों के खाते।

  • Start-Up India: 75,000+ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप।

  • WISE-KIRAN: STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।

  • NAVYA: किशोरियों को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा आदि में प्रशिक्षण।

2. महिला कार्यबल के लिए पारिस्थितिक तंत्र

  • SHe-Box: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों की निगरानी।

  • Mission Shakti (Sambal & Samarthya):

    • Sambal: One Stop Centre, महिला हेल्पलाइन (181), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत।

    • Samarthya: Shakti Sadan, PMMVY, Sakhi Niwas, Palna, SANKALP।

निष्कर्ष

पिछले दशक में भारत में महिला कार्यबल सहभागिता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।

  • कौशल विकास, मातृत्व और बाल देखभाल लाभ, और Mission Shakti जैसी पहलें महिलाओं के लिए समावेशी और सहयोगी कार्यस्थलों का निर्माण कर रही हैं।

  • महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और लिंग-संवेदनशील नीतियों के माध्यम से नारी शक्ति अब राष्ट्र की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है।

विकसित भारत 2047 की दिशा में बढ़ते हुए, महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ प्राथमिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति की निर्णायक शक्ति है। सुरक्षित, समान और अवसर-संपन्न कार्यस्थल सुनिश्चित करके, भारत अपनी आधी आबादी की संभावनाओं को खोल रहा है, और एक मजबूत, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

Advertisement Sushasan Divas Advertisement Mohan Chandrakar Chhattisgarh Tourism Chhattisgarh Tourism
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.