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महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इंदौर में सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की

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इंदौर- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं संस्थान के निदेशक वलेटी प्रेमचंद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा क्षेत्रीय केंद्र के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण से हुई। पंचवटी की अवधारणा के अनुरूप संस्थान परिसर में बरगद, पीपल, बेल, अशोक और आंवला के पांच पौधे लगाए गए।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर वलेटी प्रेमचंद ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध अध्ययनों तथा बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) की गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से संचालित एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, जिसे पुनर्वास परिषद भारत (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं—सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य—महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, संरक्षण तथा समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रतिभागियों से नियमित रूप से फीडबैक लिया जाए। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता, जमीनी स्तर पर उनके लाभ तथा क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों का उपयोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तथा जनोन्मुखी बनाने में किया जा सकता है।

एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय और समुदाय में मनोसामाजिक परामर्श सेवाओं की आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं की नई पीढ़ी तैयार करेगा, जो बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

उन्होंने संस्थान के बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र के प्रतिभागियों के साथ “पोषण भी, पढ़ाई भी” राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रही उत्कृष्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आए सखी वन स्टॉप सेंटरों के प्रशिक्षुओं से भी बातचीत की। इस दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से जुड़े मामलों और केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सहायता सेवाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग जमीनी स्तर पर मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की समर्पण भावना तथा उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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नई दिल्ली- हिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (SHe-Box) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, संसद सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, रेखा शर्मा, लवली आनंद और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बारैया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के अध्यक्ष व सदस्य, नोडल अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि SHe-Box पोर्टल के माध्यम से देशभर में 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों की स्थापना से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि

  • 1.48 लाख से अधिक संस्थान SHe-Box पोर्टल पर पंजीकृत हैं

  • 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं

  • महिला श्रम भागीदारी दर पिछले छह वर्षों में 23% से बढ़कर 42% हो गई है

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हर महिला बिना डर के कार्य कर सके और नेतृत्व कर सके।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जानकारी

राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा महिलाओं का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि

  • मुद्रा ऋण का 70% महिलाओं को दिया गया है

  • पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं

  • 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

नई पहल और घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान मंत्री ने

  • SHe-Box का नया लोगो

  • PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट

  • मिशन शक्ति ऐप के साथ SHe-Box का एकीकरण

  • कर्मयोगी भारत PoSH प्रशिक्षण लिंक
    का शुभारंभ किया।

साथ ही राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।

विशेष चर्चा और पैनल सत्र

सम्मेलन में “अनुपालन को मजबूत करने और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति बनाने” पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, UN Women और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

व्यापक सहभागिता

इस सम्मेलन में लगभग 1,500 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से जुड़े।

सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना, PoSH कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और SHe-Box के उपयोग को बढ़ावा देना है।


महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की व्यापक योजनाएँ: सुरक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय स्वावलंबन पर जोर

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सरकार ने महिलाओं के वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई प्रमुख योजनाएँ लागू की हैं, जिनमें विधवाएँ, एकल माताएँ और कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाली महिलाएँ शामिल हैं। प्रमुख पहल और योजनाएँ इस प्रकार हैं:

1. महिला और बाल विकास मंत्रालय की योजनाएँ (15वीं वित्त आयोग अवधि, 2022-23 से):

  • मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए।

    • संबल: वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन (WHL-181) जैसी सेवाओं के माध्यम से तत्काल सहायता।

    • समर्थ्य: प्रजनन लाभ (PMMVY), शाक्ति सदन (महिला आश्रय), कृष्णा कुटीर (विधवाओं के लिए घर), सखी निवास (कार्यरत महिलाओं के लिए होस्टल), पालना (डे-केयर), और SANKALP: महिला सशक्तिकरण हब।

  • सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों (14-18 वर्ष) के लिए पोषण और स्वास्थ्य कार्यक्रम।

  • मिशन वत्सल्य: कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए।

2. गृह मंत्रालय:

  • एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) की स्थापना और सशक्तिकरण।

  • 14,658 महिला हेल्प डेस्क स्थापित, जिनमें 13,743 महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा संचालन।

  • आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (ERSS-112) और महिला हेल्पलाइन (WHL-181)।

3. आयुष्मान भारत:

  • 55 करोड़ नागरिकों के लिए 1,200+ मुफ्त चिकित्सा पैकेज, जिनमें 141 पैकेज विशेष रूप से महिलाओं के लिए।

  • 1,50,000+ स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र।

  • PMBJK (16,000+) के माध्यम से किफायती दवाइयाँ और स्वास्थ्य सुरक्षा।

4. अन्य सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सशक्तिकरण पहल:

  • PAN और पासपोर्ट नियमों में संशोधन: एकल माताओं के लिए आसान आवेदन।

  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मुफ्त LPG कनेक्शन।

  • महिलाओं के स्वामित्व वाली सूक्ष्म और लघु उद्यमों से कम से कम 3% केंद्रीय खरीद अनिवार्य।

  • MSME द्वारा कौशल विकास और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • MUDRA, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, PM SVANidhi, PMEGP और MGNREGS जैसी योजनाओं के माध्यम से रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर।

इन सभी पहलों का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी महिला और बाल विकास राज्य मंत्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में दी।

महिला मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: भारत सरकार की बहुआयामी पहल

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“जन स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और डिस्पेंसरी’’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में शामिल है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी आता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, सामुदायिक देखभाल और पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

फिर भी, भारत सरकार राज्य सरकारों का समर्थन करती है और एक व्यापक, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाती है, जो अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, टेली-मेंटल हेल्थ सेवा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कार्यस्थल सुरक्षा उपाय, लिंग-संवेदनशील कानून प्रवर्तन इंटरफेस और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जोड़ती है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना, कम करना और प्रबंधित करना है।

मुख्य पहल और कार्यक्रम:

  1. केन्द्रीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण:

    • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम, लिंग-संवेदनशीलता, लचीले कार्य समय और आंतरिक शिकायत तंत्र के दिशा-निर्देश।

  2. आपातकालीन सहायता और सुरक्षा:

    • महिला हेल्पलाइन (181), बाल हेल्पलाइन (1098), और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112।

    • ज़ीरो FIR और ई-FIR जैसी सुविधा।

  3. कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा:

    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त करना, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण और निगरानी।

    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के तहत 767 जिलों में सेवाएँ।

    • 1.81 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया।

    • टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम Tele-MANAS: 53 सेल्स, 20 भाषाओं में सेवा, 29.82 लाख कॉल्स।

  4. महिला सुरक्षा और सहायता:

    • मिशन शक्ति के तहत One Stop Centres (OSC): 864 OSCs, 12.67 लाख महिलाओं को सहायता।

    • महिला हेल्प डेस्क: 14,649 पुलिस स्टेशनों में, महिला अधिकारियों द्वारा संचालित।

    • SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए केंद्रीय मंच।

  5. सुरक्षित कार्यस्थल और रोजगार:

    • चार श्रम संहिता (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य) लागू।

    • समान कार्य के लिए समान वेतन, रात की शिफ्ट और खतरनाक काम में महिलाओं की अनुमति सुरक्षित वातावरण के तहत।

    • कार्यदिवस 8 घंटे और 48 घंटे प्रति सप्ताह, ओवरटाइम स्वीकृति और दोगुना वेतन।

    • निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच।

  6. सामाजिक-सामर्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण:

    • कौशल भारत, उद्यमिता और जीविका कार्यक्रम।

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वित्तीय समावेशन, माइक्रोक्रेडिट और स्वयं-सहायता समूह।

इन सभी पहलों को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण के मुख्य एजेंट हैं। केंद्र सरकार नीति मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, तकनीकी दिशा-निर्देश, वित्तीय सहायता, अंतर-मंत्रालय समन्वय और निगरानी के माध्यम से समर्थन देती है।

इन उपायों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना और कम करना, समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करना, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और महिलाओं की गरिमा, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देना है।

सूचना स्रोत: मंत्री राज्य महिला एवं बाल विकास, सवित्री ठाकुर, लोकसभा में आज दिए गए उत्तर के अनुसार।

विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति: महिलाओं की बढ़ती कार्यबल सहभागिता ने रचा नया इतिहास

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विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति

कल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की, जहाँ हर महिला—ग्रामीण कारीगर से लेकर शहरी नवप्रवर्तनकर्ता तक — केवल कामकाजी सदस्य नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन की प्रमुख शक्ति के रूप में काम कर रही हो। यह विकसित भारत 2047 का सपना है, जिसमें महिलाओं की आर्थिक सहभागिता को केंद्र में रखा गया है और उन्हें शिक्षा, कौशल, सुरक्षा और उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाया गया है, ताकि नारी शक्ति राष्ट्रीय विकास की दिशा में अग्रसर हो सके।

एक विकसित भारत हासिल करने के प्रमुख स्तंभों में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी कम से कम 70 प्रतिशत हो, ताकि वे भारत की विकास कहानी की बराबरी की हिस्सेदार बन सकें।

महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में प्रगति

भारत में महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं के रोजगार दर में 2017-18 से 2023-24 के बीच लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • महिला लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बढ़कर 2017-18 में 23.3% से 2023-24 में 41.7% हो गई।

  • वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) महिलाओं के लिए 22% से बढ़कर 40.3% हो गया।

  • अगस्त 2025 में महिला WPR 32.0% और LFPR 33.7% तक पहुँच गई।

EPFO पेरोल डेटा से यह भी पता चलता है कि महिलाओं के औपचारिक रोजगार में वृद्धि हो रही है। 2024–25 में 26.9 लाख नई महिला सदस्यताएँ जुड़ीं, और जुलाई 2025 में लगभग 2.8 लाख नई महिला सदस्यताएँ हुईं।

BRICS देशों में भारत में महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में वृद्धि

पिछले दशक में, BRICS देशों में भारत ने महिलाओं की श्रम भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है। 2015–2024 के बीच महिलाओं की श्रम भागीदारी में 23% से अधिक वृद्धि हुई। अन्य देशों जैसे ब्राजील, चीन और रूस में या तो स्थिरता रही या मामूली गिरावट हुई, जबकि दक्षिण अफ्रीका में मामूली वृद्धि दर्ज हुई।

यह तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति भारत की महिला आर्थिक समावेशिता की दिशा में लक्षित नीतियों का परिणाम है, जो कौशल, ऋण और औपचारिक रोजगार तक पहुँच का विस्तार करती हैं।

महिलाओं के कार्यस्थल सशक्तिकरण के लिए कानूनी ढांचा

भारत में श्रम कानूनों में महिलाओं के रोजगार संरक्षण और कल्याण के लिए कई प्रावधान हैं। प्रमुख कानून और उनके लाभ इस प्रकार हैं:

1. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधन 2017)

  • मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया।

  • 50 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

  • इसमें सरोगेट माताओं को भी शामिल किया गया।

2. कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम, 2013

  • आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC) का निर्माण अनिवार्य।

  • शिकायत निपटान प्रक्रिया को गोपनीय और न्यायसंगत बनाना।

3. समान वेतन अधिनियम, 1976

  • समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है।

  • भारत का वैश्विक रैंक 120वां, BRICS देशों में प्रगति दर्शाता है।

4. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

  • मातृत्व, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ सभी श्रमिकों तक पहुँचाने का प्रयास।

5. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों का कोड, 2020

  • महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विशेष आवश्यकताओं का ध्यान।

  • रात्री शिफ्ट के लिए सहमति और परिवहन की सुविधा।

  • 50 से अधिक कर्मचारियों वाले स्थानों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

सरकारी क्षेत्रों में कार्यस्थल समावेशिता

सरकार ने विभिन्न महिला-केंद्रित पहलें शुरू की हैं, जैसे:

1.कौशल और रोजगार के माध्यम से सशक्तिकरण

  • PMKVY: उद्योग-सम्बंधित प्रशिक्षण में 45% महिला सहभागिता।

  • PMMY: 68% खाते महिलाएं, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम बढ़ाना।

  • Stand-Up India: 2.01 लाख महिला उद्यमियों के खाते।

  • Start-Up India: 75,000+ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप।

  • WISE-KIRAN: STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।

  • NAVYA: किशोरियों को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा आदि में प्रशिक्षण।

2. महिला कार्यबल के लिए पारिस्थितिक तंत्र

  • SHe-Box: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों की निगरानी।

  • Mission Shakti (Sambal & Samarthya):

    • Sambal: One Stop Centre, महिला हेल्पलाइन (181), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत।

    • Samarthya: Shakti Sadan, PMMVY, Sakhi Niwas, Palna, SANKALP।

निष्कर्ष

पिछले दशक में भारत में महिला कार्यबल सहभागिता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।

  • कौशल विकास, मातृत्व और बाल देखभाल लाभ, और Mission Shakti जैसी पहलें महिलाओं के लिए समावेशी और सहयोगी कार्यस्थलों का निर्माण कर रही हैं।

  • महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और लिंग-संवेदनशील नीतियों के माध्यम से नारी शक्ति अब राष्ट्र की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है।

विकसित भारत 2047 की दिशा में बढ़ते हुए, महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ प्राथमिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति की निर्णायक शक्ति है। सुरक्षित, समान और अवसर-संपन्न कार्यस्थल सुनिश्चित करके, भारत अपनी आधी आबादी की संभावनाओं को खोल रहा है, और एक मजबूत, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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