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नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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नई दिल्ली- हिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (SHe-Box) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, संसद सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, रेखा शर्मा, लवली आनंद और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बारैया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के अध्यक्ष व सदस्य, नोडल अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि SHe-Box पोर्टल के माध्यम से देशभर में 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों की स्थापना से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि

  • 1.48 लाख से अधिक संस्थान SHe-Box पोर्टल पर पंजीकृत हैं

  • 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं

  • महिला श्रम भागीदारी दर पिछले छह वर्षों में 23% से बढ़कर 42% हो गई है

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हर महिला बिना डर के कार्य कर सके और नेतृत्व कर सके।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जानकारी

राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा महिलाओं का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि

  • मुद्रा ऋण का 70% महिलाओं को दिया गया है

  • पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं

  • 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

नई पहल और घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान मंत्री ने

  • SHe-Box का नया लोगो

  • PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट

  • मिशन शक्ति ऐप के साथ SHe-Box का एकीकरण

  • कर्मयोगी भारत PoSH प्रशिक्षण लिंक
    का शुभारंभ किया।

साथ ही राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।

विशेष चर्चा और पैनल सत्र

सम्मेलन में “अनुपालन को मजबूत करने और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति बनाने” पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, UN Women और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

व्यापक सहभागिता

इस सम्मेलन में लगभग 1,500 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से जुड़े।

सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना, PoSH कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और SHe-Box के उपयोग को बढ़ावा देना है।


विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति: महिलाओं की बढ़ती कार्यबल सहभागिता ने रचा नया इतिहास

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विकसित भारत के केंद्र में नारी शक्ति

कल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की, जहाँ हर महिला—ग्रामीण कारीगर से लेकर शहरी नवप्रवर्तनकर्ता तक — केवल कामकाजी सदस्य नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन की प्रमुख शक्ति के रूप में काम कर रही हो। यह विकसित भारत 2047 का सपना है, जिसमें महिलाओं की आर्थिक सहभागिता को केंद्र में रखा गया है और उन्हें शिक्षा, कौशल, सुरक्षा और उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाया गया है, ताकि नारी शक्ति राष्ट्रीय विकास की दिशा में अग्रसर हो सके।

एक विकसित भारत हासिल करने के प्रमुख स्तंभों में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी कम से कम 70 प्रतिशत हो, ताकि वे भारत की विकास कहानी की बराबरी की हिस्सेदार बन सकें।

महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में प्रगति

भारत में महिलाओं की कामकाजी हिस्सेदारी में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं के रोजगार दर में 2017-18 से 2023-24 के बीच लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • महिला लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बढ़कर 2017-18 में 23.3% से 2023-24 में 41.7% हो गई।

  • वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) महिलाओं के लिए 22% से बढ़कर 40.3% हो गया।

  • अगस्त 2025 में महिला WPR 32.0% और LFPR 33.7% तक पहुँच गई।

EPFO पेरोल डेटा से यह भी पता चलता है कि महिलाओं के औपचारिक रोजगार में वृद्धि हो रही है। 2024–25 में 26.9 लाख नई महिला सदस्यताएँ जुड़ीं, और जुलाई 2025 में लगभग 2.8 लाख नई महिला सदस्यताएँ हुईं।

BRICS देशों में भारत में महिलाओं की कार्यबल सहभागिता में वृद्धि

पिछले दशक में, BRICS देशों में भारत ने महिलाओं की श्रम भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है। 2015–2024 के बीच महिलाओं की श्रम भागीदारी में 23% से अधिक वृद्धि हुई। अन्य देशों जैसे ब्राजील, चीन और रूस में या तो स्थिरता रही या मामूली गिरावट हुई, जबकि दक्षिण अफ्रीका में मामूली वृद्धि दर्ज हुई।

यह तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति भारत की महिला आर्थिक समावेशिता की दिशा में लक्षित नीतियों का परिणाम है, जो कौशल, ऋण और औपचारिक रोजगार तक पहुँच का विस्तार करती हैं।

महिलाओं के कार्यस्थल सशक्तिकरण के लिए कानूनी ढांचा

भारत में श्रम कानूनों में महिलाओं के रोजगार संरक्षण और कल्याण के लिए कई प्रावधान हैं। प्रमुख कानून और उनके लाभ इस प्रकार हैं:

1. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधन 2017)

  • मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया।

  • 50 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

  • इसमें सरोगेट माताओं को भी शामिल किया गया।

2. कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम, 2013

  • आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC) का निर्माण अनिवार्य।

  • शिकायत निपटान प्रक्रिया को गोपनीय और न्यायसंगत बनाना।

3. समान वेतन अधिनियम, 1976

  • समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है।

  • भारत का वैश्विक रैंक 120वां, BRICS देशों में प्रगति दर्शाता है।

4. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

  • मातृत्व, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ सभी श्रमिकों तक पहुँचाने का प्रयास।

5. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों का कोड, 2020

  • महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विशेष आवश्यकताओं का ध्यान।

  • रात्री शिफ्ट के लिए सहमति और परिवहन की सुविधा।

  • 50 से अधिक कर्मचारियों वाले स्थानों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य।

सरकारी क्षेत्रों में कार्यस्थल समावेशिता

सरकार ने विभिन्न महिला-केंद्रित पहलें शुरू की हैं, जैसे:

1.कौशल और रोजगार के माध्यम से सशक्तिकरण

  • PMKVY: उद्योग-सम्बंधित प्रशिक्षण में 45% महिला सहभागिता।

  • PMMY: 68% खाते महिलाएं, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम बढ़ाना।

  • Stand-Up India: 2.01 लाख महिला उद्यमियों के खाते।

  • Start-Up India: 75,000+ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप।

  • WISE-KIRAN: STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।

  • NAVYA: किशोरियों को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा आदि में प्रशिक्षण।

2. महिला कार्यबल के लिए पारिस्थितिक तंत्र

  • SHe-Box: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों की निगरानी।

  • Mission Shakti (Sambal & Samarthya):

    • Sambal: One Stop Centre, महिला हेल्पलाइन (181), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत।

    • Samarthya: Shakti Sadan, PMMVY, Sakhi Niwas, Palna, SANKALP।

निष्कर्ष

पिछले दशक में भारत में महिला कार्यबल सहभागिता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।

  • कौशल विकास, मातृत्व और बाल देखभाल लाभ, और Mission Shakti जैसी पहलें महिलाओं के लिए समावेशी और सहयोगी कार्यस्थलों का निर्माण कर रही हैं।

  • महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और लिंग-संवेदनशील नीतियों के माध्यम से नारी शक्ति अब राष्ट्र की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है।

विकसित भारत 2047 की दिशा में बढ़ते हुए, महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ प्राथमिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति की निर्णायक शक्ति है। सुरक्षित, समान और अवसर-संपन्न कार्यस्थल सुनिश्चित करके, भारत अपनी आधी आबादी की संभावनाओं को खोल रहा है, और एक मजबूत, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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