Media24Media.com: Chandrayaan-3

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label Chandrayaan-3. Show all posts
Showing posts with label Chandrayaan-3. Show all posts

इसरो का दुनिया ने माना लोहा, चंद्रयान-3 को मिलेगा विश्व अंतरिक्ष पुरस्कार

No comments Document Thumbnail

 Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना दिया था। अब इस कार्यक्रम को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। चंद्रयान-3 को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष महासंघ द्वारा विश्व अंतरिक्ष पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत के अलावा अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की उपलब्धि हासिल की है।


पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 अक्टूबर को इटली के मिलान में 75वें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के दौरान किया जाएगा। आपको बता दें कि चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को सफल लैंडिंग की थी। इसके करीब एक साल के बाद उसे यह उपलब्धि हासिल होने वाली है।

महासंघ ने गुरुवार को कहा, "इसरो द्वारा चंद्रयान-3 मिशन वैज्ञानिक जिज्ञासा और लागत प्रभावी इंजीनियरिंग के तालमेल का उदाहरण है। यह उत्कृष्टता के लिए भारत की प्रतिबद्धता और अंतरिक्ष अन्वेषण द्वारा मानवता को प्रदान की जाने वाली विशाल क्षमता का प्रतीक है। चंद्रमा की संरचना और भूविज्ञान के पहले से अनदेखे पहलुओं को तेजी से उजागर करते हुए यह मिशन नवाचार के लिए एक वैश्विक वसीयतनामा है।"

चंद्रयान-3 की कई उपलब्धियों में से एक भारत के अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्रों का सफल समन्वय था। इसमें मिशन का प्रणोदन मॉड्यूल परमाणु प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित था। चंद्रयान-3 की लैंडिंग की पहली वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए देश भर में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।


चांद पर विक्रम और प्रज्ञान कब जागेंगे? ISRO ने दिया बड़ा अपडेट

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 Udpate:  चंद्रयान-3  के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर  को जब सुलाया गया था, तब उनके कुछ सर्किट को जगते रहने का निर्देश दिया गया था. ताकि वो इसरो का 22 सितंबर को भेजा जाने वाला मैसेज रिसीव कर लें. इसरो लगातार संपर्क कर रहा है. लेकिन विक्रम या प्रज्ञान की तरफ से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आ रही है.


इसरो चीफ डॉ. एस सोमनाथ ने कहा है कि हमें परेशान होने की जरुरत नहीं है. विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर में ऐसी तकनीक भेजी गई है, कि जैसे ही वो पूरी तरह से सूरज की रोशनी से ऊर्जा हासिल कर लेंगे. वो खुद-ब-खुद जग जाएंगे. यानी ऑटोमैटिकली एक्टिव हो जाएंगे. हमें बस यहां से उन पर नजर रखनी है. हमारे पास अभी 13-14 दिन बाकी है.

इतने दिनों में किसी भी दिन विक्रम और प्रज्ञान से अच्छी खबर आ सकती है. सूरज के ढलने यानी शिव शक्ति प्वाइंट पर फिर से अंधेरा होने से पहले खुशखबरी आ सकती है. इससे ठीक पहले 22 सितंबर 2023 को अहमदाबाद स्थित इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर नीलेश देसाई ने कहा था कि इसरो चंद्रयान-3 को यानी लैंडर-रोवर को 23 सितंबर को जगाने का प्रयास करेगा. फिलहाल लैंडर-रोवर निष्क्रिय हैं. यह प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती.

चांद पर सुबह हो चुकी है. रोशनी पूरी तरह से मिल रही है. लेकिन चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर को अभी तक पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिली है. चंद्रयान-3 से कई इनपुट मिले हैं, जिनकी इसरो वैज्ञानिक गहनता से जांच कर रहे हैं. पिछले दस दिनों के डेटा का भी एनालिसिस किया जा रहा है. इस दौरान प्रज्ञान रोवर ने 105 मीटर तक मूवमेंट किया है. उस समय चांद के दक्षिणी ध्रुवीय इलाके में तापमान माइनस 120 से माइनस 220 डिग्री सेल्सियस था. इससे यंत्रों का सर्किट बिगड़ता है.

22 सितंबर 2023 की अलसुबह यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के कोरोउ स्पेस स्टेशन से Chandrayaan-3 के लैंडर Vikram को लगातार संदेश भेजे जा रहे थे. लेकिन लैंडर की तरफ से जो रेसपॉन्स कमजोर था. यानी उसके पास से जिस तरह की ताकतवर रेडियो फ्रिक्वेंसी आनी चाहिए, वो नहीं आ रही थी.

यह दावा किया था एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर स्कॉट टाइली ने. स्कॉट ने एक ट्वीट में लिखा था कि बुरी खबर है. चंद्रयान-3 के चैनल पर 2268 मेगाहर्ट्ज का उत्सर्जन हो रहा है. यह एक कमजोर बैंड है. यानी चंद्रयान-3 के लैंडर से अभी तक मजबूत सिग्नल नहीं मिल रहा है. इससे पहले स्कॉट कहा था कि चंद्रयान लगातार ऑन-ऑफ सिग्नल भेज रहा है. चांद से आ रहे सिग्नल कभी स्थिर हैं. कभी उछल रहे हैं. कभी एकदम गिर जा रहे हैं. विक्रम का ट्रांसपोंडर RX फ्रिक्वेंसी का है. उसे 240/221 की दर की फ्रिक्वेंसी पर काम करना चाहिए. लेकिन वह 2268 मेगाहर्ट्ज का सिग्नल दे रहा है.

Vikram Lander चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जिस जगह है, वहां पर सूरज की रोशनी 13 डिग्री पर पड़ रही है. इस एंगल की शुरुआत 0 डिग्री से शुरू होकर 13 पर खत्म हो गई. यानी सूरज की रोशनी विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर टेढ़ी पड़ रही है. 6 से 9 डिग्री एंगल पर सूरज की रोशनी इतनी ऊर्जा देने की क्षमता रखता है कि विक्रम नींद से जाग जाए.

ये बात इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के डायरेक्टर एम शंकरन ने एक अंग्रेजी अखबार से कही. उन्होंने बताया कि विक्रम और प्रज्ञान की सेहत का असली अंदाजा 22 सितंबर तक हो जाएगा. ये बात तो तय है कि अगर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर अगर जग गए और काम करना शुरू कर दिया तो ये इसरो के लिए बोनस होगा.


अब तक जितना डेटा भेजा गया है, उस हिसाब से विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का मिशन पूरा हो चुका है. अगर लैंडर उठ गया तो भी बहुत सारा डेटा हमें वापस मिलेगा. कई सारे इन-सीटू एक्सपेरिमेंट फिर से हो सकेंगे. जगने के बाद कई डेटा और मिलेंगे, जिनकी एनालिसिस करके रिजल्ट आने में कई महीने लगेंगे. कुछ नई जानकारी मिल सकती है.


Chandrayaan-3: सूरज से जगेगी उम्मीद की किरण या सोता रह जाएगा विक्रम? पढ़े पूरी खबर

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 : चांद पर सुबह होने को है। इधर, पृथ्वी पर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के जागने का इंतजार और प्रार्थनाएं जारी हैं। ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों  का मानना है कि अगर विक्रम और प्रज्ञान दोबारा तैयार हो जाते हैं, तो यह बोनस होगा। 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से रवाना हुए चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को चांद पर सफल लैंडिंग कर ली थी।


ISRO के वैज्ञानिक गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी मॉड्यूल की ‘रिबूट’ करने की प्रक्रिया कर रहे हैं। भारतीय स्पेस एजेंसी को उम्मीद है कि शिव शक्ति पॉइंट पर सूर्योदय होते ही उपकरण दोबारा काम करने के लिए तैयार हो सकते हैं। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग के बाद विक्रम और प्रज्ञान, जिस जगह पार्क किए गए हैं उसे शिव शक्ति पॉइंट नाम दिया गया है।

ISRO के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा था कि उपकरणों को दोबारा शुरू करने की कोशइश 21 और 22 सितंबर को की जाएगी। उन्होंने बताया था, ‘हम केवल उम्मीद कर सकते हैं कि 22 सितंबर को उपकरण दोबारा तैयार हो जाएंगे।’

बेहद जरूरी है सूर्य की स्थिति

खास बात है कि चांद पर सूर्योदय बुधवार को ही हो चुका है, लेकिन विक्रम और प्रज्ञान को जागने के लिए सूर्य के सही एंगल की जरूरत है। अखबार से बातचीत में यूआर राव सैटेलाइल सेंटर के निदेशक एम शंकरन बताते हैं, ‘सिस्टम के काम करने के लिए अच्छा एंगल 6 डिग्री से 9 डिग्री के बीच होगा। तापमान को भी एक सीमा से ज्यादा होना होगा।’

उन्होंने बताया, ‘जागने के लिए हमें विक्रम और प्रज्ञान पर पावर तैयार करने की प्रक्रिया और तापमान की जरूरत है। हमें 21 या 22 सितंबर को कुछ जानकारी मिल सकती है। अगर वे जाग जाते हैं, तो इस दौरान जागेंगे।’

मिशन हो चुका है पूरा

खास बात है कि अगर विक्रम और प्रज्ञान जागने में सफल हो जाते हैं, तो यह बड़ी सफलता होगी। हालांकि, अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो भी इसरो के चंद्रयान-3 मिशन को सफल माना जाएगा।

चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान को चांद पर देवी की मूर्ति! पढ़े पूरी खबर

No comments Document Thumbnail

 Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद दुनिया भर में भारत के चंद्रयान 3 की कामयाबी के चर्चे हैं। अब भी प्रज्ञान रोवर चांद पर अपना काम कर रहे है। भारत के तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान 3 ने अंतरिक्ष में एक महीने की लंबी यात्रा के बाद चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित किया।


वहीं अपने सफर के दौरान चंद्रयान-3 ने इसरो को कई अहम जानकारियां साझी की। इतना ही नहीं इस दौरान चंद्रयान-3 ने अंतरिक्ष से कई अद्धभूत तस्वीरें भी शेयर की। वहीं इस बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। वायरल हुई एक 3D तस्वीर में एक देवी की मुर्ति नजर आ रही है।

हालांकि इसरो ने इसकी पुष्टि नहीं की न ही इसके बारे में कोई जानकारी अपने official वेबसाइट, फेसबुक और एक्स (twitter) पर भी नहीं दी। वहीं जब इस तस्वीर की जांच की गई तो पता चला कि इसे रूस की वेबसाइट ‘ट्रेना बुलगरिया’ पर पोस्ट की गई है। ये तस्वीर 28 अगस्त 2023 को शेयर की गई थी, जिसपर कैप्शन लिख था ‘चद्रमा पर एक दिन कैसा दिखता है’।

इसके अलावा एक अन्य वेबसाइट ‘कोस्टियाओस डॉट आर्ट स्टेशन’ पर भी चंद्रमा की 3D तस्वीर पोस्ट की गई हालांकि इस फोटो में कोई मूर्ति नहीं नज़र आई और यह भी लिखा था कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है।


Pragyan Rover ने किया कमाल, चंद्रमा पर खोज निकाला ऑक्सीजन और सल्फर, हाइड्रोजन की तलाश जारी

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 Update: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  ने मंगलवार को चंद्रयान-3 मिशन से जुड़ी नई जानकारी दी है। भारत के मून मिशन ने चंद्रमा पर ऑक्सीजन और सल्फर की खोज की है। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि रोवर ‘प्रज्ञान’ का चांद की सतह पर मिशन जारी है।


इसरो ने ट्वीट करके बताया कि प्रज्ञान रोवर पर लगा उपकरण एलआईबीएस पहली बार इन-सीटू माप के माध्यम से, दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्र सतह में सल्फर (एस) की उपस्थिति की स्पष्ट रूप से पुष्टि करता है। जैसा कि अपेक्षित था, Al, Ca, Fe, Cr, Ti, Mn, Si और O का भी पता चला है। एजेंसी ने आगे लिखा कि हाइड्रोजन (एच) की खोज जारी है।

लेजर-इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप’ (एलआईबीएस) चंद्रमा पर लैंडिंग स्थल के आसपास की मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना की पड़ताल के लिए है। एलआईबीएस उपकरण को इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स सिस्टम्स (एलईओएस)/इसरो, बेंगलुरु की प्रयोगशाला में विकसित किया गया है।

चांद को सरकार हिंदू राष्ट्र घोषित करें - स्वामी चक्रपाणि महाराज

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3: सरकार से एक विचित्र मांग में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से चंद्रमा को 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करने और शिवशक्ति प्वाइंट, जहां चंद्रयान -3 ने लैंडिंग की थी, को अपनी राजधानी घोषित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जाना चाहिए ताकि ''कोई भी आतंकवादी जिहादी मानसिकता के साथ वहां न पहुंच सके।


उन्होंने कहा, ''चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के टचडाउन प्वाइंट का नाम 'शिवशक्ति' रखने के लिए मैं पीएम मोदी को धन्यवाद देता हूं। संसद में प्रस्ताव पारित कर मून को 'हिन्दू राष्ट्र' घोषित किया जाना चाहिए। शिवशक्ति प्वाइंट को इसकी राजधानी बनाया जाना चाहिए। इससे पहले कि अन्य मान्यताएं वहां जाएं और जिहादी मानसिकता फैलाएं, मून को हिंदू सनातन राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए, ”चक्रपाणि ने एक वीडियो में कहा, जिसे उन्होंने एक्स, पूर्व में ट्विटर पर साझा किया था।

पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते इसरो वैज्ञानिकों को अपने संबोधन में भारत के चंद्र मिशन के लैंडिंग बिंदु का नाम 'शिवशक्ति पॉइंट' रखने की घोषणा की थी और जहां इसका पूर्ववर्ती चंद्रयान -2 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उसका नाम 'तिरंगा पॉइंट' रखा गया था।

बिंदु के नामकरण की इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने सराहना की और कहा कि "इसमें कुछ भी गलत नहीं है"। उन्होंने कहा पीएम ने इसका अर्थ इस तरह बताया जो हम सभी के लिए उपयुक्त है। मुझे लगता है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. और उन्होंने अगला नाम भी 'तिरंगा' रखा और दोनों ही भारतीय लगने वाले नाम हैं। देखिए, हम जो कर रहे हैं उसका एक महत्व होना चाहिए। और देश का प्रधानमंत्री होने के नाते उन्हें यह नाम देने का विशेषाधिकार है।



Chandrayaan-3: मिशन के तीन लक्ष्यों में से दो पूरे, सफल लैंडिंग अब तक, जानें अब तक क्या हुआ

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 मिशन की सफलता के बाद पूरी दुनिया दिलचस्पी से भारत (India) के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर (Vikram Lander and Pragyan Rover) की तरफ से आने वाली जानकारियों का इंतजार कर रही है। भारत की स्पेस (space) एजेंसी भी समय-समय पर मिशन से जुड़े अपडेट्स साझा कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नवीनतम अपडेट के अनुसार, चंद्रयान-3 मिशन के रोवर ‘प्रज्ञान’ ने चांद की सतह पर सफलतापूर्वक ‘मूनवॉक’ कर 8 मीटर की दूरी तय कर ली है और इसके सारे पेलोड सही तरीके से काम कर रहे हैं। बता दें, चंद्रयान -3 का विक्रम लैंडर बुधवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सुरक्षित रूप से उतरा था। आइए अब एक नजर चंद्रयान-3 की यात्रा पर डालते हैं।


चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की अब तक की यात्रा

इसरो ने बुधवार को शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस ‘लैंडर मॉड्यूल’ की सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिग कराई। इसी के साथ चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बन गया। इसके अलावा, भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले, अमेरिका, चीन और सोवियत संघ यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के कुछ समय बाद ही इसरो के मून मिशन चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद की तस्वीरें भेजीं। यह तस्वीर उस समय ली गई थीं, जब लैंडर विक्रम बुधवार को चांद की सतह पर उतर रहा था। इसके बाद लैंडर ने एक और तस्वीर भेजी, जिसमें लैंडिंग साइट दिख रही थी। इसके अलावा, लैंडर का एक पैर और उसके साथ की परछाई दिखाई दी। बता दें, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर अपेक्षाकृत समतल क्षेत्र चुना है।

इसरो ने बताया था कि Ch-3 लैंडर और MOX-ISTRAC, बेंगलुरु के बीच संचार लिंक स्थापित किया गया है। तस्वीरें लैंडर विक्रम के हॉरिजोन्टल वेलोसिटी कैमरे से ली गईं, जब यह धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था।

इसरो ने 24 अगस्त की सुबह एक वीडियो साझा की। इसमें बताया गया कि रोवर लैंडर से बाहर निकल गया है और चांद पर चहलकदमी कर रहा है।

इसरो ने बताया था कि सभी गतिविधियां निर्धारित समय पर हैं। सभी प्रणालियां सामान्य हैं। लैंडर मॉड्यूल पेलोड ILSA, RAMBHA और ChaSTE ने काम करना शुरू कर दिया है। रोवर की गतिशीलता संचालन शुरू हो गया है। इसरो ने बताया कि प्रॉपल्शन मॉड्यूल पर SHAPE पेलोड रविवार को चालू किया गया था।

25 अगस्त को विक्रम लैंडर से बाहर निकलने और चंद्रमा की सतह पर चलने वाले प्रज्ञान रोवर का एक वीडियो इसरो द्वारा जारी किया गया था।

इसरो ने एक और वीडियो जारी कर बताया कि कैसे दो खंडों वाले रैंप ने रोवर के रोल-डाउन में सुविधा प्रदान की। इसमें बताया गया कि एक सौर पैनल ने रोवर को बिजली पैदा करने में सक्षम बनाया।

इसरो ने शुक्रवार शाम को बताया था कि चंद्रयान-3 के रोवर ‘प्रज्ञान’ ने चांद की सतह पर लगभग आठ मीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय कर ली है। इसके उपकरण चालू हो गए हैं। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा था कि सभी नियोजित रोवर गतिविधियों को सत्यापित कर लिया गया है। रोवर के उपकरण एलआईबीएस और एपीएक्सएस चालू हैं। बेंगलुरु मुख्यालय वाली राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा था कि प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और रोवर पर सभी पेलोड सामान्य प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसरो ने शनिवार को बताया था कि चंद्रयान -3 मिशन के तीन उद्देश्यों में से दो हासिल कर लिए गए हैं, जबकि तीसरे पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के सभी पेलोड सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस स्थान का नाम शिव शक्ति पॉइंट रखने की घोषणा की, जहां विक्रम लैंडर ने सॉफ्ट लैंडिंग की थी। वहीं, 2019 में जिस जगह पर चंद्रयान -2 लैंडर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था उसका नाम तिरंगा पॉइंट रखने का निर्णय लिया।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने एलान किया कि 23 अगस्त को जिस दिन चंद्रयान -3 लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, उसे ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।

14 दिन बहुत खास

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार को कहा था कि चंद्रयान-3 के अधिकतर वैज्ञानिक मिशन उद्देश्य अब पूरे होने जा रहे हैं। लैंडर और रोवर सभी चालू हैं। उन्होंने कहा था कि अभी तक बहुत डाटा प्राप्त हुए हैं। 14 दिनों तक मिलने वाले डाटा को लेकर सभी उत्साहित हैं।

Chandrayaan-3 : छत्तीसगढ़ से निकले वैज्ञानिकों का बड़ा कमाल, चंद्रयान-3 की कामयाबी में दिया अहम योगदान

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 की सफलता के साथ भारत ने बुधवार को अंतरिक्ष में नया इतिहास  रचा। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग में इसरो की बहुत बड़ी टीम ने काम किया है। देशभर के कई होनहार वैज्ञानिकों को टीम का हिस्सा बनाया गया, जो अलग-अलग कोनों से संबंध रखते हैं। 


इन टीमों में छत्तीसगढ़ के कई वैज्ञानिकों ने भी अहम भूमिका निभाई है। किसी ने उपकरण डिजाइन किया तो कोई चंद्रयान पर हर पल निगरानी रख रहा था। रायपुर , भिलाई और महासमुंद जैसे कई शहरों से निकले इन वैज्ञानिकों भारत की इस सफलता में बड़ा योगदान दिया है।

चंद्रयान-3 अभियान में इसरो के वैज्ञानिकों की टीम में अंबिकापुर के वैज्ञानिक निशांत सिंह भी शामिल रहे । निशांत सिंह  के साथ इसरो के वैज्ञानिकों की टीम ने ही चंद्र यान-3 में एक उपकरण लगाया है, जो चांद पर मिट्टी सहित  अन्य  तत्वों का अध्ययन करेगा । निशांत के साथ टीम ने अल्फ़ा पार्टिकल  एक्स-रे पोटोमीटर चंद्रयान - 3 स्थापित करेगा।   इसी तरह, महासमुंद जिले के बसना- सरायपाली निवासी ज्ञानेंद्र कश्यप ने भी चंद्र यान- 3 मिशन में अपनी भागीदारी निभाई  है, जो इस समय इसरो में कर्यरत हैं। 





Chandrayaan-3 : लैंडर विक्रम ने खुद को नई कक्षा में किया स्‍थापित, अब चंद्रमा सिर्फ 25 किमी दूर

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 चांद के बेहद करीब पहुंच गया है. विक्रम लैंडर देर रात यानी रविवार (20 अगस्त) सुबह 2 से 3 बजे के बीच चांद के और करीब पहुंच गया. अब विक्रम चांद से महज 25 किलोमीटर दूर रह गया है. इससे पहले वह 113 किमी x 157 किमी की ऑर्बिट में था. 


दूसरे डिबूस्टिंग ऑपरेशन (रफ्तार कम करने की प्रक्रिया) ने ऑर्बिट को 25 किमी x 134 किमी तक कम कर दिया है यानी अब चांद की सतह से विक्रम लैंडर की दूरी 25 किलोमीटर ही बची है. अब बस 23 को सफल लैंडिंग का इंतजार है. लैंडिंग से पहले मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा. 


18 अगस्त को हुई थी पहली डीबूस्टिंग

चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए चंद्रयान-3 के लैंडर की रफ्तार का कम होना सबसे जरूरी है. लैंडिंग मिशन में यही सबसे बड़ी चुनौती है. इसके पहले 18 अगस्त को डीबूस्टिंग की पहली प्रक्रिया की गई थी. 

रविवार को हुई दूसरी और आखिरी डीबूस्टिंग के बारे में इसरो (Indian Space Research Organisation) ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और इसने ऑर्बिट को 25 किमी x 134 किमी कर दिया है. सॉफ्ट लैंडिंग के लिए पॉवर्ड डिसेंट 23 अगस्त 2023 को भारतीय समयानुसार शाम लगभग 5.45 बजे शुरू होने की उम्मीद है.

दक्षिणी ध्रुव पर होगी सॉफ्ट लैंडिंग

लैंडर विक्रम इस समय चांद के ऐसे ऑर्बिट में है, जहां चंद्रमा का निकटतम बिंदु 25 किमी और सबसे दूर 134 किमी है. इसी कक्षा से यह बुधवार (23 अगस्त) को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा. अभी तक दक्षिणी ध्रुव पर कोई मिशन नहीं पहुंचा है. यही वजह है कि इसरो ने चंद्रयान को यहां पर भेजा है.

लैंडर विक्रम स्वचालित मोड में चंद्रमा की कक्षा में उतर रहा है. दरअसर यह स्वयं फैसला ले रहा है कि इसे आगे की प्रक्रिया को किस तरह से करना है. चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद भारत इस सफलता को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. अभी तक अमेरिका, सोवियत संघ (वर्तमान रूस) और चीन ही ऐसा कर सके हैं.

Chandrayaan-3 ने कैद की चांद की खूबसूरत तस्वीर, ISRO ने शेयर किया वीडियो

No comments Document Thumbnail

 Chandrayaan-3 : भारत का तीसरा मून मिशन चंद्रयान-3  धीरे-धीरे चंद्रमा के करीब पहुंचता जा रहा है. गुरुवार को लैंडर मॉड्यूल के प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग होने के ठीक बाद चंद्रयान-3 ने चांद की पहली तस्वीर भेजी है, जो बेहद खूबसूरत है. चंद्रयान-3 के लैंडर इमेजर लगे कैमरा-1 से 17/18 अगस्त को ये तस्वीर ली गई थी. भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने इसका वीडियो बनाकर ट्विटर पर शेयर किया है.




चंद्रमा तक जाने के लिए चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को करीब 100 किमी की दूरी खुद तय करनी है. 18 अगस्त को लैंडर मॉड्यूल की डीबूस्टिंग हुई. डीबूस्टिंग की प्रक्रिया में लैंडर की स्पीड कम हो जाती है.

इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (इसरो) के मुताबिक लैंडर 23 अगस्त शाम 5 बजकर 47 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा. लैंडर विक्रम और रोवर चांद के साउथ पोल पर लैंड करेंगे. अगर चंद्रमा-3 की सॉफ्ट लैंडिंग सफलतापूर्वक हो जाती है तो भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा. 

चंद्रयान 3 का इंजन फेल होने पर भी चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा : ISRO

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3:  भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने में सक्षम होगा, भले ही इसके सभी संवेदक और दोनों इंजन काम न करें. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने मंगलवार को यह बात कही.


गैर-लाभकारी संस्था दिशा भारत द्वारा आयोजित चंद्रयान-3: भारत का गौरव अंतरिक्ष मिशन विषय पर एक बातचीत के दौरान सोमनाथ ने कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ का पूरा डिजाइन इस तरह से बनाया गया है कि यह विफलताओं को संभालने में सक्षम होगा.

इंजन फेल होने पर भी चंद्रयान करेगा लैंड

सोमनाथ ने कहा कि अगर सब कुछ विफल हो जाता है, अगर सभी सेंसर नाकाम हो जाते हैं, कुछ भी काम नहीं करता है, फिर भी यह (विक्रम) लैंडिंग करेगा. इसे इसी तरह डिजाइन किया गया है, बशर्ते कि प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) अच्छी तरह से काम करे.

लैंड की चांद पर उतारने की वैकल्पिक योजना तैयार

उन्होंने कह कि योजना के अनुसार कक्षा में बदलाव किया जा रहा है। इसमें कोई भटकाव नहीं है। इसलिए, चंद्रयान-3 मिशन शानदार नतीजे दे रहा है और हमें उम्मीद है कि सब कुछ ठीक रहेगा। इसरो ने बताया कि यान के चांद पर उतरने के दौरान अगर किसी तरह की कोई समस्या आती है, तो ऐसे में विक्रम लैंडर को चांद पर लैंड कराने के लिए एक और वैकल्पिक योजना तैयार की गई है। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि अगर (विक्रम में) दो इंजन इस बार भी काम नहीं करते हैं, तब भी यह उतर सकेगा।

सोमनाथ ने कहा कि एक बार जब लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा, तो यह क्षैतिज रूप से चलेगा। चंद्रमा पर सुरक्षित रूप से उतरने के लिए इसे ऊर्ध्वाधर रुख में लाया जाएगा। यह अभ्यास महत्वपूर्ण है, क्योंकि चंद्रयान-2 मिशन के दौरान इसरो अपने लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित रूप से उतारने में विफल रहा था। सोमनाथ ने बताया कि क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर दिशा में स्थानांतरित करने की क्षमता वह चाल है जिसे हमें यहां खेलना है। पिछली बार केवल यहीं समस्या थी।

चंद्रयान-2 मिशन की असफलता से मिली सीख

इसरो चीफ सोमनाथ ने बताया कि जब लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा, तो चंद्रमा पर सुरक्षित लैंड करने के लिए इसे वर्टिकल में लाया जाएगा. यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले चंद्रयान-2 मिशन के दौरान इसरो अपने लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतारने में सफल नहीं हुआ था. सोमनाथ ने बताया कि होरिजेंटल से वर्टिकल दिशा में स्थानांतरित करने की क्षमता वह चाल है जिसे हमें ठीक रखना है, पिछली बार केवल यहीं समस्या आई थी और मिशन असफल हो गया था.

 

चंद्रयान-3 ने खींची चांद की पहली तस्वीर, ऐसी दिखी चंद्रमा की सतह, आपने देखी क्या?

No comments Document Thumbnail

 Chandrayaan-3 Capture First Images Of Moon : चंद्रयान-3 द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें अब सबके सामने हैं. इन तस्वीरों को Lunar Orbit Injection के दौरान खींचा गया. इन तस्वीरों में बाईं ओर गोल्डेन कलर का चंद्रयान-3 का सोलर पैनल नजर आ रहा है और सामने चंद्रमा की सतह पर मौजूद गड्ढे दिखाई दे रहे हैं.


हर तस्वीर में इन गड्ढों का आकार बढ़ा होता जा रहा है. बताया गया कि 9 अगस्त की दोपहर पौने दो बजे करीब इसके ऑर्बिट को बदलकर 4 से 5 हजार किलोमीटर की ऑर्बिट में डाला जाएगा. इस प्रक्रिया के बाद चांद की जब भी फोटो ली जाएगी तो वो और बड़ी और स्पष्ट दिखेगी.


इसरो का मिशन मून, अब तक सही तरीके से आगे बढ़ रहा है. अंतरिक्ष एजेंसी को उम्मीद है कि विक्रम लैंडर 23 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा.

चंद्रयान-3, इसरो का मानवरहित मून मिशन है. चंद्रयान-3 शनिवार को चंद्रमा की ऑर्बिट में दाखिल हुआ था. वहीं से चंद्रमा की तस्वीरें ली गई हैं. भारत के इस महत्वाकांक्षी मिशन पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं.

चंद्रयान-3 लॉन्च होने के 41 दिन बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच रहा है. चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया है. चांद के इस हिस्से तक, अभी तक कोई देश नहीं गया है.

 

 

Chandrayaan-3 Update : चंद्रमा की कक्षा में पहुंचते ही चंद्रयान-3 ने भेजा पहला संदेश

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 Update: चंद्रयान-3 के सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित होने के बाद अंतरिक्ष में भारत धमक बढ़ गयी है. अब चंद्रमा की ऑर्बिट से बड़ी खबर सामने आयी है. चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करते ही चंद्रयान 3 का पहला मैसेज इसरो (ISRO) मिल गया है. मैसेज में है कि “MOX, ISTRAC, मैं चंद्रयान-3 हूं. मुझे चंद्रमा की ग्रैविटी महसूस हो रही है.”


 इस मैसेज के बाद मिशन चंद्रयान 3 सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है. बता दें कि बीते दिन शनिवार को चंद्रयान 3 ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया था. यहां तक पहुंचने के लिए इस मिशन में अभी तक 22 दिन का समय लगा है.

मिशन चंद्रयान 3 ने अभी तक 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है. शनिवार को चंद्रयान 3 ने धरती की ग्रैविटी से बाहर निकलकर चांद की ऑर्बिट में एंट्री कर ली है. इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस प्रोसेस को अंजाम देने में कुल आधे घंटे का समय लगा और चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा दिया गया.

चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद चंद्रयान-3 को चरणबद्ध तरीके से चंद्रमा के पास ले जाया जाएगा. मिशन चंद्रयान-3 को अभी चंद्रमा के चार और ऑबिटों को पार करना है. ऐसा करने में उसे अभी 17 दिन और लग जाएंगे. इसके बाद वह चंद्रमा के पास जा पहुंचेगा. ISRO के मुताबिक, चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैडिंग का लक्ष्य 23 अगस्त तक रखा गया है. अगर सब सही चलता रहा तो तय समय पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जा सकेगी.


Chandrayaan-3 Mission: चंद्रमा की ऑर्बिट में पहुंचा हमारा चंद्रयान-3

No comments Document Thumbnail
Chandrayaan-3 Mission:  देश का महत्‍वाकांक्षी चंद्रयान मिशन  लगातार अपने लक्ष्‍य की ओर बढ़ता जा रहा है. शनिवार को चंद्रयान-3  सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया. इसरो (Indian Space Research Organization) ने अपने एक ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है. एजेंसी ने अपने बयान में कहा, "चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित कर दिया गया है. मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), आईस्ट्रैक (इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क), बेंगलुरु से पेरिल्यून पर रेट्रो-बर्निंग का आदेश दिया गया था." पेरिल्यून अंतरिक्ष यान का चंद्रमा से निकटतम बिंदु है.



इसरो की ओर से कहा गया कि कक्षा में दूरी कम करने का ऑपरेशन रविवार को रात 11 बजे किया जाएगा .




इसरो ने अपने केंद्रों को उपग्रह से प्राप्‍त एक संदेश भी साझा किया, जिसमें लिखा था, "MOX, ISTRAC, यह चंद्रयान-3 है. मैं चंद्र गुरुत्वाकर्षण महसूस कर रहा हूं." 14 जुलाई को लॉन्च के बाद से तीन हफ्तों में पांच से अधिक परिवर्तन में, इसरो चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से दूर और दूर की कक्षाओं में ले जा रहा है.




चंद्रयान-3 ने पूरी की दो-तिहाई यात्रा, ISRO बोला- काफी अहम है कल का दिन

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 : 5 अगस्त 2023 यानी चंद्रयान-3 के लिए परीक्षा की घड़ी . इसरो ने आज बताया है कि चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की ओर दो-तिहाई यात्रा  पूरी कर ली है. वो चांद के करीब पहुंच रहा है. करीब 40 हजार किलोमीटर की दूरी पर चंद्रमा की ग्रैविटी  उसे अपनी ओर खींचेगी. चंद्रयान-3 भी चांद के ऑर्बिट को पकड़ने का प्रयास करेगा.


चंद्रयान-3 के लिए कल का दिन बेहद जरूरी है. इसरो वैज्ञानिकों  ने भरोसा दिलाया है कि वो चंद्रयान-3 को चंद्रमा के ऑर्बिट में डालने में कामयाब होंगे. 5 अगस्त की शाम करीब सात बजे के आसपास चंद्रयान-3 का लूनर ऑर्बिट इंजेक्शन कराया जाएगा. यानी चांद के पहले ऑर्बिट में डाला जाएगा. 6 अगस्त की रात 11 बजे के आसपास चंद्रयान को चांद के दूसरे ऑर्बिट में डाला जाएगा. 9 अगस्त की दोपहर पौने दो बजे के आसपास तीसरी ऑर्बिट मैन्यूवरिंग होगी. 14 अगस्त को दोपहर 12 बजे के आसपास चौथी और 16 अगस्त की सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास पांचवां लूनर ऑर्बिट इंजेक्शन होगा. 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे.

17 अगस्त को ही चंद्रयान को चांद की 100 किलोमीटर ऊंचाई वाली गोलाकार कक्षा में डाला जाएगा. 18 और 20 अगस्त को डीऑर्बिटिंग होगी. यानी चांद के ऑर्बिट की दूरी को कम किया जाएगा. लैंडर मॉड्यूल 100 x 30 किलोमीटर के ऑर्बिट में जाएगा. इसके बाद 23 की शाम पांच बजकर 47 मिनट पर चंद्रयान की लैंडिंग कराई जाएगी. लेकिन अभी 19 दिन की यात्रा बची है. चंद्रयान के सामने कुछ दिक्कतें आ सकती हैं… जानिए क्या हैं वो. चंद्रयान-3 के चारों तरफ सुरक्षा कवच लगाया गया है. जो अंतरिक्ष में प्रकाश की गति से चलने वाले सबएटॉमिक कणों से बचाते हैं. इन कणों को रेडिएशन कहते हैं. एक कण जब सैटेलाइट से टकराता है, तब वह टूटता है. इससे निकलने वाले कण सेकेंडरी रेडिएशन पैदा करते हैं. इससे सैटेलाइट या स्पेसक्राफ्ट के शरीर पर असर पड़ता है.

हमारे सूरज से निकलने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स स्पेसक्राफ्ट को खराब या खत्म कर सकते हैं. तेज जियोमैग्नेटिक तूफान से स्पेसक्राफ्ट पर नुकसान पहुंचता है. लेकिन चंद्रयान-3 को सुरक्षित बनाया गया है. इसके चारों तरफ खास तरह का कवच लगा है जो इसे बचाता है. अंतरिक्ष की धूल. यानी स्पेस डर्स्ट. इन्हें कॉस्मिक डस्ट भी बुलाते हैं. ये स्पेसक्राफ्ट से टकराने के बाद प्लाज्मा में बदल जाते हैं. ऐसा तेज गति और टक्कर की वजह से होता है. इनकी वजह से अंतरिक्षयान खराब भी हो सकता है.

किसी भी इंसानी सैटेलाइट या अंतरिक्ष के पत्थरों से टक्कर भी खतरनाक है. पिछले कुछ सालों में धरती के चारों तरफ सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ गई है. खास तौर से वो सैटेलाइट्स जो अब निष्क्रिय हैं, लेकिन अंतरिक्ष में पृथ्वी के चारों तरफ तेज गति से चक्कर लगा रही हैं. लेकिन चंद्रयान-3 ने यह इलाका पार कर लिया है. यह खतरा 230 किलोमीटर के ऑर्बिट में था, जो अब वह पार कर चुका है. अगर सैटेलाइट या स्पेसक्राफ्ट या अपना चंद्रयान-3 किसी भी तरह से गलत ऑर्बिट में चला जाए तो उसे सही करने में काफी समय, क्षमता और ताकत लगती है. ऐसा करते समय मिशन के पूरे टाइम टेबल और लागत पर असर पड़ता है. ईंधन कम हो जाता है. ऐसे में मिशन जल्दी खत्म होता है. अगर पकड़ में नहीं आया तो अंतरिक्ष में लापता हो जाता है.

चंद्रयान-3 इतनी लंबी यात्रा के दौरान तेज गति, घटता-बढ़ता तापमान, रेडिएशन सब बर्दाश्त कर रहा है. ये सब यान के अंदरूनी हिस्सों पर असर डाल सकते हैं लेकिन उसे खास धातुओं से बनाया गया है. खास कवच लगा है, जो इन दिक्कतों से चंद्रयान को बचा रहा है. लेकिन इनकी वजह से पेलोड्स या यंत्र खराब हो सकते हैं. जिससे उनका धरती से संपर्क टूट सकता है. कोई एक या कई हिस्से काम करना बंद कर सकते हैं. अंतरिक्ष में दिन में तापमान 100 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जा सकता है. वहीं, रात में पारा माइनस 100 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है. अगर चंद्रयान-3 या अन्य सैटेलाइट का शरीर इतने वैरिएशन वाले तापमान को बर्दाश्त नहीं कर पाता है, तो खराब हो सकता है.


Chandrayaan-3 : धरती की कक्षा से निकल अब चांद की सैर करेगा चंद्रयान-3, जानें कब होगी एंट्री

No comments Document Thumbnail

 Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3  अब चांद की कक्षा में पहुंचने से महज 6 दिन दूर है. इसरो ने चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा की कक्षा में भेजने के लिए 1 अगस्त को 12 बजे से 1 बजे के बीच उसके थ्रस्टर्स को चालू करने की योजना बनाई गई है. मध्यरात्रि में ट्रांस-लूनर इंजेक्शन की प्रक्रिया को पूरा होने में 28 से 31 मिनट के बीच का समय लगने की उम्मीद है. चंद्रयान-3 के ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स को तब फायर किया जाएगा, जब चंद्रयान-3 पृथ्वी के निकटतम बिंदु पर होगा, न कि तब जब सबसे दूर के बिंदु पर होगा. 


चंद्रयान-3 के थ्रस्टर्स को चालू करके उसकी रफ्तार बढ़ाने की कोशिश, उसके धरती के सबसे करीब बिंदु से इसलिए की जाती है क्योंकि तब उसकी गति सबसे ज्यादा होती है. चंद्रयान-3 मौजूदा वक्त में 1 किमी/सेकंड और 10. 3 किमी/सेकंड के बीच के वेग से एक अण्डाकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है. चंद्रयान-3 का वेग धरती के सबसे करीबी बिंदु पर सबसे ज्यादा (10.3 किमी/सेकंड) और धरती से सबसे दूर बिंदु पर सबसे कम होता है. चंद्रयान-3 की रफ्तार को बढ़ाने की कोशिश करते समय उसको तेज रफ्तार की जरूरत होगी. दूसरा कारण यह है कि चंद्रमा की ओर बढ़ने के लिए इसके कोण को बदलना होगा. जिसे चंद्रयान-3 के धरती के सबसे करीबी बिंदु पर बदला जा सकता है.

ट्रांस-लूनर इंजेक्शन के लिए पहले से तैयार और लोड किए गए कमांड, थ्रस्टर्स के चालू होने की उम्मीद के समय से लगभग पांच-छह घंटे पहले शुरू किए जाएंगे. इससे चंद्रमा की ओर बढ़ने के लिए चंद्रयान-3 को अपना कोण बदलने में मदद मिलेगी. इसके अलावा थ्रस्टर्स की फायरिंग से इसकी रफ्तार भी बढ़ेगी. टीएलआई के बाद चंद्रयान-3 का वेग पेरिगी की तुलना में लगभग 0.5 किमी/सेकंड अधिक होने की उम्मीद है. चंद्रयान-3 को औसतन 1. 2 लाख किलोमीटर का सफर तय करने में करीब 51 घंटे का समय लगता है. जबकि पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी 3.8 लाख किमी है. बहरहाल किसी भी दिन वास्तविक दूरी पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर अलग होगी.




Chandrayaan-3 5th Maneuver: : आज धरती के चारों तरफ अंतिम बार बदलेगा चंद्रयान-3 का ऑर्बिट

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 5th Maneuve :  आज यानी 25 जुलाई 2023 की दोपहर 2 से 3 बजे के बीच आखिरी बार धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। यह पांचवां अर्थ बाउंड ऑर्बिट मैन्यूवर है। इसके बाद चंद्रयान-3 को सीधे चंद्रमा की ओर जाने वाले हाइवे पर भेज दिया जाएगा। चंद्रयान-3 इस समय 71351 किलोमीटर वाली एपोजी और 233 किलोमीटर वाली पेरीजी की ऑर्बिट में घूम रहा है। अब 71,351 किलोमीटर को बढ़ाकर सवा लाख किलोमीटर के आसपास किया जा सकता है।


इसके बाद चंद्रयान-3 को 31 जुलाई या 01 अगस्त को चंद्रमा की ओर जाने वाले लंबे गैलेक्टिक हाइवे पर डाल दिया जाएगा। यानी लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी (Lunar Transfer Trajectory – LTT) में। इस हाइवे पर डालने के लिए चंद्रयान-3 को स्लिंगशॉट किया जाएगा। चंद्रयान-3 लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी में पांच दिन यात्रा करेगा। 5-6 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की ऑर्बिट को पकड़ने की कोशिश करेगा। एक बार चंद्रमा की ग्रैविटी फंसकर ऑर्बिट को पकड़ लिया तो उस पर उतरना आसान होगा। चंद्रमा की ओर वह करीब 42 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में अगर चंद्रमा की ऑर्बिट पकड़ में नहीं आई तो वह उसके बगल से गहरे अंतरिक्ष में निकल जाएगा। चंद्रमा की 100X100 KM की कक्षा में डाला जाएगा।


कन्नड़ लेक्चरर ने चंद्रयान-3 मिशन का उड़ाया मजाक, बीजेपी भड़की

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 : कर्नाटक में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-3 मिशन का कथित तौर पर मजाक उड़ाने के लिए एक कन्नड़ व्याख्याता से स्पष्टीकरण की मांग की है। बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में एक सरकारी प्री-ग्रेजुएट कॉलेज में काम करने वाले लेक्चरर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि इस बार भी चंद्रमा मिशन विफल हो जाएगा।


बीजेपी नेता ने इस आलोक में कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधुबंगरप्पा को पत्र लिखा और पूछा कि अगर कोई लेक्चरर सोशल मीडिया पर ऐसी बातें पोस्ट करता है तो वह छात्रों को कैसे प्रेरित कर सकता है। मूर्ति ने कन्नड़ में ट्वीट करते हुए कहा कि ई सलावु चंद्रयान -3 तिरुपति नामा अंसत्ते, जिसका अर्थ है चंद्रयान -3 इस बार भी विफल हो जाएगा। 17 जुलाई को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मल्लेश्वरम गवर्नमेंट प्री-ग्रेजुएट कॉलेज के कन्नड़ लेक्चरर हुलिकुंटे मूर्ति ने इसरो के महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन के खिलाफ पोस्ट करके अस्वास्थ्यकर व्यवहार दिखाया।

जबकि पूरा देश चंद्रयान-3 की सफलता के लिए कामना और प्रार्थना कर रहा है, हुलिकुंटे मूर्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अस्वस्थ व्यवहार दिखाया है कि 'इस बार भी चंद्रयान चला गया' (ई सलावु चंद्रयान -3 तिरूपति नामा अंसत्ते),'' इसमें कहा गया है। उन्होंने इस तरह अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का परिचय दिया है. ऐसा व्यक्ति हमारे छात्रों को कैसे प्रेरित कर सकता है? पत्र में आगे कहा गया, ''मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप उसकी जांच करें और उसे इस तरह का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार दोबारा न करने की चेतावनी दें।


Chandrayaan-3 : चांद की जगह धरती के चक्कर काटने लगा चंद्रयान, जाने वजह

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 : 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने के बाद अपना चंद्रयान-3 अभी धरती की कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। आपने इसरो से जारी वो तस्वीर भी शायद देखी हो जिससे पता चलता है कि चंद्रयान धरती की परिक्रमा करते हुए पांच बार कक्षाएं बदलेगा। सरल भाषा में कहें तो पांच बार अलग-अलग रास्ते पर चलते हुए धरती के चक्कर लगाएगा। अगर आप नासा के मून मिशन पर नजर दौड़ाएंगे तो पता चलता है कि धरती से चांद की दूरी तो 3-4 दिन में ही पूरी की जा सकती है तो अपना यान धरती के चक्कर क्यों लगा रहा है?


ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते की दूरी तय करने में अपना यान 40-42 दिन क्यों ले रहा है? इसका जवाब रोचक है। साथ ही यह भी बताता है कि भारतीय तकनीक कैसे कम पैसे में दुनिया के ताकतवर देशों को चुनौती दे रही है। जी हां, चंद्रयान-3 का बजट आदिपुरुष फिल्म के बजट से भी कम है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि धरती के चारों तरफ यान को घुमाया क्यों जा रहा है?

https://www.isro.gov.in/media_isro/video/chandrayaan3/LVM3_M4OnboardVideo.webm

धरती की स्पीड से दौड़ जाता है चंद्रयान

अब बारीक बात समझिए। चंद्रयान में ईंधन की मात्रा सीमित होती है। उसे सीधे चांद पर भेजेंगे तो सारा ईंधन खर्च हो जाएगा। इसके बजाय उसे धरती की परिक्रमा करने के लिए छोड़ा जाता है। इस दौरान ईंधन का इस्तेमाल काफी कम होता है। आगे की प्रक्रिया सरल भाषा में समझिए तो यान को धरती की स्पीड और ग्रैविटी की मदद से आगे उछाला जाता है। वैसे ही, जैसे हम चलती बस से उतरते समय आगे की दिशा में दौड़ जाते हैं। धरती जिस तेजी से अपनी धुरी पर घूमती है उसका फायदा चंद्रयान को मिलता है। धीरे-धीरे चंद्रयान अपनी कक्षा बदलता जाता है। इस तरह से देखिए तो 5 कक्षाएं बदलने में वक्त तो लगेगा ही। 18 जुलाई सुबह 11 बजे तक के अपडेट के अनुसार यान तीसरी कक्षा की तरफ जाने वाला है।

 

 

 

Chandrayaan-3 ने पास की पहली बड़ी परीक्षा, ISRO ने दी गुड न्यूज़

No comments Document Thumbnail

Chandrayaan-3 : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को उसकी कक्षा में आगे बढ़ाने की पहली कवायद शनिवार को सफलतापूर्वक पूरी की. अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अंतरिक्ष यान की हालत ‘सामान्य’ है.


इसरो ने कहा, ‘चंद्रयान-3 मिशन अपडेट: अंतरिक्ष यान की हालत सामान्य है. कक्षा में आगे बढ़ाने की पहली कवायद ISTRAC/इसरो, बेंगलुरु द्वारा सफलतापूर्वक पूरी की गई. अंतरिक्ष यान अब 41762 किलोमीटर (किमी) गुना 173 किमी कक्षा में है.’

40 दिन के महत्वपूर्ण चरण से गुजरेगा ‘चंद्रयान-3’ मिशन

वहीं विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर ने कहा कि शुक्रवार को प्रक्षेपित किया गया ऐतिहासिक ‘चंद्रयान-3’ मिशन 40 दिन के महत्वपूर्ण चरण से गुजरेगा और अंतत: चंद्रमा की सतह पर ‘लैंडिंग’ के लिए इसमें लगे ‘थ्रस्टर्स’ की मदद से इसे पृथ्वी से दूर ले जाया जाएगा.

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.