Media24Media.com: मौसम

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किसानों और ग्रामीणों के सच्चे साथी बनेंगे दामिनी और मेघदूत

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रायपुर। किसानों और ग्रामीणों के दो सच्चे साथी अब हमेशा उनके साथ रहेंगे। एक उन्हें मौसम संबंधी जानकारी से लैस करेगा, तो दूसरा आकाशीय बिजली की कहर से बचाएगा। छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही खेती-किसानी का काम-काज शुरू हो जाता है। किसान भाई मौसम संबंधी सटीक जानकारी के लिए मेघदूत और आकाशीय बिजली से जनहानि और पशुहानि से बचाव के लिए दामिनी एप्प का सहारा ले सकते हैं।

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इन दोनों एप्प को लॉन्च किया है। इसे गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से किसी भी एंड्राइड मोबाईल पर डाउनलोड किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सभी कलेक्टरों को राजस्व विभाग और अन्य विभागों के मैदानी अमले के माध्यम से इन दोनों ही एप्प का प्रचार-प्रसार करने के साथ ही गांवों में मुनादी करने के निर्देश दिए गए हैं।

खेती-किसानी के सीजन में किसानों के लिए मौसम की सटीक जानकारी आवश्यक होती है, इससे खेती-किसानी का काम-काज व्यवस्थित और सुचारू ढंग से करने में मदद मिलती है। मेघदूत एप्प के माध्यम से किसान भाई मौसम पूर्वानुमान जैसे तापमान, वर्षा की स्थिति, हवा की गति एवं दिशा इत्यादि की जानकारी मिलेगी, जिससे किसान अपने क्षेत्र की मौसम से संबंधित पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मानसून के दौरान ही आकाशीय बिजली की घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है, इसके कारण अधिक संख्या में जन एवं पशु हानि की सूचनाएं प्राप्त होती है। इन घटनाओं में कमी लाने और लोगों को सचेत करने के लिए दामिनी एप्प तैयार किया गया है। इस एप्प के माध्यम से 20 से 31 किलोमीटर के दायरे में आकाशीय बिजली का पूर्वानुमान मिल जाएगा। इससे पशुहानि और जनहानि को रोकने में मदद मिलेगी। 

ऐसे बनती है आकाशीय बिजली

जब ठंडी हवा संघनित होकर बादल बनती है तब इन बादलों के अंदर गर्म हवा की गति और नीचे ठंडी हवा के होने से बादलों में धनावेश (पॉजिटिव चार्ज) ऊपर की ओर एवं ऋणावेश (निगेटिव चार्ज) नीचे की ओर होता है। बादलों में इन विपरीत आवेशों की आपसी क्रिया से विद्युत आवेश उत्पन्न होता है। इस प्रकार आकाशीय बिजली उत्पन्न होती है। फिर धरती पर पहुंचने पर आकाशीय बिजली बेहतर चालक को तलाशती हैं, जिससे वह गुजर सके। इसके लिए धातु और पेड़ उपयुक्त होते हैं। बिजली अक्सर इन्हीं माध्यमों से पृथ्वी में जाने का रास्ता चुनती है। इसलिए बरसात के दिनों में लोग बिजली के खंभों, पेड़ों और धातुओं से दूर रहना चाहिए तथा बिजली के उपकरणों का प्रयोग सावधानीपूर्वक करें। जितना हो सके आकाशीय बिजली की स्थिति में मोबाइल का उपयोग नहीं किया जाए।

छत्तीसगढ़ में मौसम ने ली करवट, गाज गिरने से कई मवेशियों की मौत

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 कांकेर। छत्तीसगढ़ में गरज बरस के साथ बीती रात अचानक मौसम ने रुख बदला व बारिश हुई जिसके चलते कई जगहों में पेड़ गिरने व बिजली तार के टूटने से रात्रि कई घन्टे बिजली भी गुल रही। वहीं दुर्गुकोंदल क्षेत्र के ग्राम डांगरा में आकाशीय बिजली गिरने से दो गाय एवं एक बछड़े की आकस्मिक मौत हो गई।


सोमवार की रात्रि अचानक मौसम में बदलाव हुआ दिनभर की तपीस भरी गर्मी से जहां लोगों को राहत तो मिली लेकिन बारिश होते ही बिजली भी गुल हो गई जिससे जनजीवन प्रभावित रहा।

कांकेर बिजली विभाग के सहायक अभियंता  कोड़ोपी ने बताया कि अचानक आंधी तूफान से कई जगहों में पेड़ गिरने से पोल टूट गये जिसके चलते बिलजी आपूर्ति प्रभावित हुआ है विभाग के कर्मचारियों द्वारा सुधार कार्य किया जा रहा जल्द ही बिलजी आपूर्ति सुधर जाएगी। विकास खंड दुगूकोंदल के अंतर्गत ग्राम पंचायत भंडार डिग्गी के आश्रित ग्राम डांगरा में आकाशीय बिजली गिरने से दो गाय एवं एक बछड़े की आकस्मिक मौत हो गई मवेशी मालिक जयलाल कुमेटी एवं मेहर सिंह कुमेटी ने शासन से मुआवजा की मांग की है वही इस तरह से पूरे क्षेत्र में आज प्रातः 6 बजे से बे मौसम बारिश जगह-जगह पानी गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ -सुबह वही प्रातः 9,10 बजे से मौसम खुलने से तापमान में गिरावट आई।


मौसम की प्रतिकूलता की परिस्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से लाभ

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राजनांदगांव। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानानुसार कृषकों को फसल उत्पादन में क्षति के अतिरिक्त बुआई नहीं हो पाने, रोपण बाधित होने, मौसम प्रतिकूलताओं के कारण नुकसान, स्थानीय आपदाओं की स्थिति होने पर कृषकों को संबल प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है। शासन द्वारा योजना के तहत कृषकों की फसल खराब होने पर उन्हें बीमा कवर प्रदान किया जाता है, यानि फसल खराब होने पर बीमा दावा राशि कृषकों को प्रदाय की जाती हैं।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से हुए फसल नुकसान पर पीडि़त कृषकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि कृषकों को नवीन और आधुनिक कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके और कृषकों की आय को स्थिर एवं उनकी खेती में निरंतरता सुनिश्चित हो सके। इस योजना के तहत शासन द्वारा कृषकों को फसलों के नुकसान पर अलग-अलग धन राशि प्रदान की जाती है। अंतिम भुगतान हेतु दावा गणना आयुक्त भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा अधिसूचित क्षेत्र एवं अधिसूचित फसलों के लिए निर्धारित न्यूनतम अनिवार्य संख्या में किये गये फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त औसत उपज के आकड़ों के आधार पर की जाती है तथा पात्रता अनुसार दावा राशि बीमा कंपनी द्वारा बैंक के माध्यम से कृषकों के खातों में अंतरित की जाती है।

फसल कटाई के उपरांत खेत में सुखाने के लिये फैलाकर रखी हुई फसल में नुकसान होने की स्थिति में -

फसल कटाई के उपरांत खेत में सुखाने के लिए फैलाकर रखी हुई अथवा छोटे बंडलों में रखे हुए अधिसूचित फसल को प्राकृतिक आपदा यथा ओला, चक्रवात, चक्रवाती वर्षा एवं बेमौसम वर्षा से अधिसूचित इकाई में 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फसलों को क्षति होती है, तो ऐसी स्थिति में नमूना जांचकर सभी बीमित कृषकों को क्षति का भुगतान किया जाएगा। यदि अधिसूचित इकाई में 25 प्रतिशत से कम क्षेत्र में हानि होती है, तो उन सभी प्रभावित बीमित कृषकों के नुकसान की जांच कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति के लिए पात्र घोषित की जाएगी,

कृषक इसकी सूचना क्रियान्वयक बीमा कंपनी को सीधे फ्री नंबर भारतीय कृषि बीमा कंपनी का टोल फ्री नं. 1800-419-03441800-11-6515  लिखित रूप में अथवा स्थानीय राजस्व व कृषि विभाग अधिकारियों, संबंधित बैंक अथवा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्ट www.pmfbygov.in में निर्धारित समय-सीमा 72 घंटे के भीतर लिखित रूप से बीमित फसल के ब्यौरे तथा क्षति का कारण सहित सूचित करेंगे। इसके तहत क्राप कैलेण्डर में अंकित फसल कटाई की निर्धारित अंतिम तिथि से यदि कटी हुई अधिसूचित फसल, अधिकतम 2 सप्ताह तक सूखने के लिये फैलाकर रखी जाती है, तो इस अवधि तक के लिए ही वर्णित कारणों से होने वाली क्षति का आंकलन किया जाएगा। योजनांतर्गत फसल कटाई उपरांत अतिवृष्टि से फसल क्षति होने की जानकारी इत्यादि शिकायत निवारण पोर्टल में कर सकते है।

हानि संबंधी सूचना मिलने पर क्रियान्वयक बीमा कंपनी क्षेत्र में फसल की हानि का अनुमान लगाने के लिए फसल क्षति की सूचना प्राप्त होने के 48 घंटे के भीतर हानि निर्धारक की नियुक्ति करेंगी तथा पुर्नगठित मार्गदर्शिका में दिये गये प्रावधानों के अनुसार 10 दिवस के भीतर क्षतिपूर्ति निर्धारित किया जाएगा। जिला एवं विकाससखंड पर्यवेक्षण समिति, संयुक्त समिति के सदस्यों एवं कृषक फसल क्षति का अनुमान लगाने में क्रियान्वयक बीमा कंपनी को आवश्यक सहायता करेंगेे। सांकेतिक, संकेतों, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट, कृषि व राजस्व विभाग के रिपोर्ट को क्षति का आंकलन का आधार बनाया जाएगा।

 

बरसात के मौसम में बीमारियों से रहें सावधान, मच्छर जनित रोगों की बढ़ जाती है संभावना

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रायपुर। जून के अंत तक प्रायः देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून आ जाता है। हालांकि मानसून के शुरूआती दिनों में कभी धूप, कभी बारिश की स्थिति सेहत के लिए कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो जाती है। वातावरण में आर्द्रता की शुरूआत के साथ ही कई प्रकार के रोग भी पनपने शुरू हो जाते हैं। यह मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए भी काफी अनुकूल माना जाता है, जिसके कारण बरसात शुरू होते ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी कई तरह की मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि बदलते मौसम के मद्देनजर सभी लोगों को अपनी सेहत के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जरा सी भी लापरवाही बीमार कर सकती है। बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त, वायरल बुखार, फंगल इन्फेक्शन, हेपेटाइटिस और टायफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि मानसून में कई तरह के मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू आदि का खतरा काफी बढ़ जाता है। बारिश के दिनों में गड्ढों में भरे हुए पानी को मच्छरों के प्रजनन के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में संक्रमित मच्छरों के काटने के कारण मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। ये दोनों ही बीमारियां गंभीर स्थिति में पहुंचने पर जानलेवा भी हो सकती हैं। इसलिए इनसे बचाव के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना चाहिए। घर के आसपास जल जमाव नहीं होने देना चाहिए। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। बुखार, उल्टी, दस्त जैसी समस्या होने पर अपने मन से दवा नहीं लेनी चाहिए, बल्कि निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक की सलाह से ही दवाईयों का सेवन करना चाहिए।

मानसून में सबसे प्रमुख बीमारियों में से एक आम सर्दी यानि कॉमन कोल्ड है। यह नम और उमस भरे मौसम में पनपने वाले वायरस की वजह से होता है। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने या लगातार बारिश के पानी में भीगने से सर्दी, बुखार, खांसी व फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में तापमान में होने वाला भारी उतार-चढ़ाव शरीर को बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील बना देता है। यह मौसमी सर्दी और फ्लू का कारण बन सकता है। सर्दी और फ्लू का जोखिम कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में अधिक देखा जाता है। इनसे बचने के लिए बाहर जाते समय अपने साथ कपड़ों का एक अतिरिक्त जोड़ा रखें। एयर कंडीशनर के बजाय ताजी हवा में रहें। ताजे फल और सब्जियां खाएं तथा अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें।

हेपेटाइटिस-ए, डेंगू और टायफाइड से रहें सावधान

संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि हेपेटाइटिस-ए मुख्यतः दूषित भोजन या पानी के कारण होता है जो लिवर को प्रभावित करता है। इसके कारण बुखार, उल्टी, शरीर पर दाने आदि हो सकते हैं। पर्याप्त साफ-सफाई न होने के कारण हेपेटाइटिस-ए का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्वच्छता का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

टाइफाइड का भी मुख्य कारण दूषित पानी होता है। बारिश के मौसम में पानी इकट्ठा हो जाने से पैदा हुए मच्छर व गंदगी की वजह से टाइफाइड की बीमारी होती है। टाइफाइड का बुखार बैक्टीरिया संक्रमित लोगों के मल-मूत्र के जरिए दूसरे लोगों में ट्रांसफर हो सकता है। टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए साफ पेयजल का सेवन करें। यदि पेयजल सुरक्षित न हो  तो इसे उबालकर पीना चाहिए। 

बरसात के मौसम में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप रहा है। यह बीमारी एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलती है। सिरदर्द, थकान, जोड़ों में दर्द, प्लेटलेट्स कम होना आदि डेंगू के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर इलाज कराना चाहिए।   

Heavy Rain Alert: ओडिशा में मंडरा रहा चक्रवात का खतरा, भारी बारिश का अलर्ट जारी

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Heavy Rain Alert: मौसम के मिजाज बदलने के बाद बीते एक सप्ताह से देश के कई राज्यों में ओले गिरने के साथ ही भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के बीच ओडिसा में चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है जिससे भारी तबाही हो सकती है । भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि 6 मई के आसपास बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है, जिसके बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की।


Heavy Rain Alert: ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि 6 मई के आसपास बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है। इसमें कहा गया है कि मौसम प्रणाली के प्रभाव में, अगले 48 घंटों के दौरान इसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। नवीन पटनायक ने राज्य के अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा।

उन्होंने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को यदि आवश्यक हो तो चक्रवात आश्रयों में स्थानांतरित करने और चक्रवात के बाद राहत और बहाली कार्यों के लिए योजना तैयार करने के निर्देश जारी किए। पटनायक ने मुख्य सचिव पीके जेना से नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करने और विशेष राहत आयुक्त सत्यव्रत साहू को सभी विभागों और जिलों के साथ समन्वय से काम करने को कहा। भुवनेश्वर में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के एक अधिकारी ने बताया कि आईएमडी ने अभी तक किसी चक्रवात की भविष्यवाणी नहीं की है।

उन्होंने कहा कि कम दबाव वाले क्षेत्र को चक्रवात बनने से पहले डिप्रेशन और फिर गहरे दबाव में विकसित होना होगा। पटनायक ने मुख्य सचिव पीके जेना ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि राज्य में चक्रवात आने पर एक भी जनहानि न हो। उन्होंने कहा कि 18 तटीय और आसपास के जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है और चक्रवात आश्रय स्थल तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की कुल 17 टीमों और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) की 20 टीमों को तैयार रखा गया है।

 

CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में फिर बरसेंगे बादल, इन इलाकों में बारिश और वज्रपात की संभावना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज मौसम शुष्क रहने का अनुमान जताया है, हालांकि मौसम विभाग ने दुर्ग ,रायपुर . बलोद,बेमेतरा धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बस्तर बारिश होने की संभावना जतायी है। मौसम विभाग मुताबिक बारिश के साथ ही इनसे लगे जिलों में एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ अंधड़ चलने की संभावना है। बारिश के साथ वर्ष वज्रपात होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों तक शुष्क रह सकता है।


प्रदेश भर में अधिकतम व न्यूनतम तापमान में विशेष बदलाव नहीं हुआ, लेकिन दोपहर की तपिश अब बढ़ने लगी है। रायपुर का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री नीचे रहने के बाद भी 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम राजस्थान और उसके आसपास 1.5 किमी ऊंचाई तक है। उत्तर दक्षिण द्रोणिका विदर्भ से दक्षिण तमिलनाडु तक 0.9 किमी ऊंचाई तक है। इसके प्रभाव से मंगलवार को प्रदेश के विभिन्ना क्षेत्रों में हल्की वर्षा के आसार बने हुए हैं।

वहीं, न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य है। प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान मुंगेली में 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बढ़ती गर्मी के चलते अब शहर में विभिन्न क्षेत्रों में कोल्ड्रिंक, जलजीरा, गन्नाा रस,आम पना आदि की बिक्री बढ़ गई है। इसके साथ ही आइसक्रीम की भी बिक्री में इजाफा हुआ है।


Chhattisgarh Weather Alert : प्रदेश के कई हिस्सों में आज अंधड़, बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से मौसम  बदलने की संभावना है. तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है. सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. वहीं प्रदेश में अधिकतम तापमान बलौदाबाजार में 37.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं आज मौसम का मिजाज बदल सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक आज चक्रीय चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश में मौसम में परिवर्तन होगा. प्रदेश के कई हिस्सों में अंधड़ के साथ हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना है.


मौसम विभाग के मुताबिक, एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम राजस्थान और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. उत्तर-दक्षिण द्रोणिका/ हवा की अनियमित गति विदर्भ से दक्षिण तमिलनाडु तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. प्रदेश में आज यानी 4 अप्रैल को एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. वहीं एक-दो स्थानों पर वज्रपात होने तथा अंधड़ चलने की संभावना है. प्रदेश में अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है किंतु वृद्धि का क्रम लगातार जारी रहने की संभावना है.


WEATHER UPDATE : IMD ने छत्तीसगढ़ सहित इन राज्यों के लिए जारी किया यलो अलर्ट

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रायपुर। देश के ज्यादातर राज्यों में पिछले कुछ दिनों से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। भीषण गर्मी से जूझ रहे राज्यों में अब बारिश और ओले की बरसात हो रही है। मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले 4 दिनों के मौसम के हाल की जानकारी दी है, कि किस-किस राज्य में बारिश होगी और ओला गिरेगा।


मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी और उत्तर पश्चिम भारत में 18 से 20 मार्च के बीच बारिश के साथ ही आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इसके साथ ही 19 मार्च को पश्चिम भारत, दक्षिण भारत और मध्य भारत में भी बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं मौसम विभाग ने 19 से 22 मार्च के बीच उत्तरपूर्वी राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

पिछले 24 घंटे में देश के ज्यादातर राज्यों में हल्की से लेकर मध्यम बारिश, आंधी तूफान के साथ ही जमकर ओलों की बरसात हुई। वहीं केरल, तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हुई। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, रायलसीमा और आंतरिक कर्नाटक में ओलावृष्टि हुई।

इन राज्यों में होगी बारिश 

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक आने वाले दिनों में नॉर्थवेस्ट भारत के राज्यों में बारिश होगी। राजस्थान, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 18 से 20 मार्च के बीच बारिश और आंधी-तूफान आने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 18, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान में 19 मार्च और उत्तराखंड में 18 से 21 मार्च के बीच ओलावृष्टि होगा।

मध्य और पश्चिम भारत के राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और विदर्भ में 19 मार्च को भी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। दक्षिण भारत के राज्यों आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक में भी 19 मार्च को भी बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश में 19 मार्च को भारी बारिश का अलर्ट है।


CG Weather Update : छत्तीसगढ़ समेत इन राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों का मौसम बदलने वाला है। इसके प्रभाव से प्रदेश के बस्तर और दुर्ग, रायपुर संभाग में बदली के साथ साथ बारिश होने की संभावना है। एक ट्रफ पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश, विदर्भ और मराठवाड़ा होते हुए दक्षिण मध्य महाराष्ट्र तक जा रही है। एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ 13 मार्च को पश्चिमी हिमालय तक पहुंचेगा।


कुछ राज्यों में बारिश और आंधी तूफान से लोगों को कुछ राहत भी मिली है। केंद्रीय मौसम विभाग ने बताया कि एक नए वेस्टर्न डिस्टर्बेस की वजह से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 12 से 14 मार्च के दौरान बारिश व आंधी-तूफान आएगा। इसके अलावा, दक्षिण भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत में 15-17 मार्च तक बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। इस हिसाब से अगले छह दिनों तक विभिन्न हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
 
 मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 13-16 मार्च और पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में 14-16 मार्च के बीच बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पूर्वी गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में 15-17 मार्च, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 12-14 मार्च, पंजाब में 12 और 13 मार्च,
 

पश्चिमी राजस्थान में 12 से 13 मार्च और पूर्वी राजस्थान में 13 मार्च को बारिश व आंधी तूफान की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, गुजरात में 12-14 मार्च के दौरान बारिश की संभावना जारी की गई है।

मौसम एजेंसी skymetweather के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान, गंगीय पश्चिम बंगाल में हल्की से मध्यम बारिश हुई। बिहार, झारखंड के कुछ हिस्सों और दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण तमिलनाडु में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश हुई। पश्चिमी हिमालय और कोंकण और गोवा के कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 5 डिग्री अधिक रहा है।

 कल अधिकतम तापमान सौराष्ट्र और कच्छ और तटीय कर्नाटक के कुछ स्थानों पर और कोंकण और गोवा के एक या दो स्थानों पर 37 और 38 डिग्री के बीच रहा। अगले 24 घंटों के दौरान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दक्षिण तमिलनाडु और केरल में हल्की बारिश हो सकती है।

 पश्चिमी हिमालय में 12 मार्च से हल्की बारिश शुरू होगी और 13 मार्च से बढ़ेगी। 13 से 15 मार्च के बीच पश्चिमी हिमालय के कुछ हिस्सों में हिमपात संभव है। अगले 2 दिनों तक देश के उत्तर पश्चिमी और मध्य भागों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि हो सकती है और उसके बाद गिरावट आ सकती है।

 
 
 
 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू के लिए अलर्ट जारी

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दुर्ग। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौसम में बदलाव के कारण सभी वर्ग के व्यक्ति प्रभावित होते हैं। प्रमुख रूप से बच्चों में सर्दी, खांसी बुखार व उल्टी दस्त की शिकायते मिलती है। जिले में औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष ग्रीष्म ऋतु में तापमान वृद्धि से लू की संभावना अधिक होती है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू का अलर्ट जारी किया गया है। 

आम जनता को लू के लक्षण से अवगत कराया जाकर जन-जागरूकता लायी जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.पी. मेश्राम तथा जिला नोडल अधिकारी, डॉ. सी.बी.एस. बंजारे द्वारा अवगत कराया गया। जिले में लू-तापघात के लक्षण जैसे सिर दर्द, तेज बुखार, कमजोरी, मुंह का सूखना, चक्कर आना, पेशाब कम आना, भूख न लगना आदि होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों में उपचार करायें एवं स्वास्थ्य लाभ लें। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लू-तापघात से संबंधित प्रचार-प्रसार कर अवगत कराया जा रहा है।

कि बुखार पीड़ित व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी लगाएँ, अधिक पेय पदार्थ का सेवन करें जैसे नारियल पानी, आम का पना, जलजीरा आदि। पीड़ित मरीज को पौष्टिक आहार दें, पूरी नींद लेने दें, शरीर को क्रियाशील रखें, ठंडी हवा दें एवं शुद्ध पेयजल अधिक से अधिक दिया जाना चाहिए, आस-पास का वातावरण स्वच्छ रखें। इस हेतु नगरीय निकाय एवं शुद्ध पेयजल हेतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से निरन्तर समन्वय बनाया जा रहा है। मितानिन व संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध करा दी गयी है।

Wheather Update: बदला मौसम का मिजाज, पड़ रही है कड़ाके की ठंड

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रायपुर। मौसम में अचानक हुए परिवर्तन से प्रदेश के तापमान में गिरावट आई है। आज सुबह से ही राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अनेक जिलों में घना कोहरा छाया रहा। वहीं, कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने के भी समाचार मिले हैं। राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, राजनांदगांव, पेण्ड्रा, बिलासपुर, अंबिकापुर सहित अन्य जिलों में दिन भर बादल छाए रहे और हल्की बारिश भी हुई। 

मौसम में आए इस बदलाव की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में दक्षिण-पूर्व से पर्याप्त मात्रा में नमी आ रही है। इसके कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में विरल से मध्यम घना कोहरा छाया हुआ है। इसके साथ ही बादल भी छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने कल दोपहर तक मौसम के ऐसे ही बने रहने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के तापमान में और गिरावट हो सकती है।

इस बीच, घना कोहरा और शीतलहर की स्थिति बनने के कारण सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, कोरबा और कोरिया जिलों में स्कूलों में सात जनवरी तक छुट्टी का आदेश जारी किया गया है। जिलों के कलेक्टर ने आदेश दिया है कि मौसम सामान्य होने तक स्कूल बंद रहेंगे और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की तारीख भी आगे बढ़ाई जाएगी।

शीतलहर में बच्चों एवं बूढ़ों का विशेष ध्यान रखने स्वास्थ्य विभाग ने की अपील

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धमतरी। जिले में पिछले 4-5 दिनों से तापमान में लगातार गिरावट आई है जिसके चलते शीतलहर का प्रकोप जारी है तथा आने वाले दिनों में इसमें और अधिक गिरावट आने की आशंका है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजनों से अपील की है कि ठण्ड के मौसम में थोड़ी सावधानी बरतते हुए अपने व परिजनों की सेहत और खानपान पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने बूढ़ों व बच्चों के स्वास्थ्य का खास तौर पर से खयाल रखने की सलाह देते हुए कहा है कि शीतलहर के प्रकोप की आशंका को दृष्टिगत करते हुए बूढ़ों और बच्चों को यथासम्भव घर पर ही रहें। स्वास्थ्य केन्द्रों में शीत प्रकोप से बचाव के लिए वन विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यकतानुसार अलाव जलाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही स्वास्थ्य केन्द्रों के अंतःरोगी कक्ष में विशेष तौर पर शिशुरोग वार्ड, प्रसव कक्ष तथा रैन बसेरों में रोगियों व आमजनों के लिए पर्याप्त मात्रा में कम्बल, चादर, एवं गर्म कपड़े उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा है कि शीतलहर के चलते सर्दी, खांसी तथा श्वास लेने में तकलीफ बढ़ जाती है जिसके मद्देनजर दवाओं का भण्डारण एवं समुचित चिकित्सा व्यवस्था करने अधीनस्थ स्वास्थ्य केन्द्रों को निर्देशित किया गया है। इस संबंध में सभी कॉम्बेट दलों को मैदानी स्तर पर लगातार निगरानी एवं चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि शीतलहर के प्रभावित मरीजों की जानकारी प्रतिदिन ली जा रही है जिसे आपदा प्रबंधन विभाग के ई-मेल आईडी cgrelief@gmail.com में प्रेषित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में शीतलहर के कारण किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने की जानकारी नहीं मिली है।

शीतलहर के दौरान क्या करें, क्या नहीं ?

सर्दी से संबंधित कोई प्रभाव शरीर पर दिखाई दे, जैसे नाक-कान, पैर-हाथ की उंगलियां आदि लाल हो जाएं, अत्यधिक कांपना, सुस्ती, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ हो तो तत्काल स्थानीय चिकित्सक से  परामर्श लें।

जितना संभव हो, घर के भीतर रहें। जरूरी कार्य होने पर ही बाहर निकलें। आवश्यकतानुसार गर्म पेय पीते रहें।

वद्ध व्यक्तियों एवं गर्भवती महिलाओं का गम्भीरता से ध्यान रखें और उन्हें अकेला ना छोड़ें।

शीतलहर से बचाव हेतु गर्म कपड़े (स्वेटर, ऊनी कपड़े, टोपी एवं मफलर), कंबल, अलाव आदि का भी उपयोग किया जा सकता है।

स्वास्थ्यवर्धक, ताजा और गर्म भोजन करें। साथ ही बासी भोजन लेने से परहेज करें।

यदि केरोसिन व कोल हीटर का उपयोग करते हैं तो गैस व धुएं निकलने के लिए रोशनदान की व्यवस्था रखें।

समाजसेवी संस्था, दानदाताओं एवं एनजीओ के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित कर मलिन बस्तियों के रहवासियों को गर्म कपड़े, चादर के लिए प्रोत्साहित करें।

मौसम से संबंधित समाचार व संदेशों को सुनकर उनमें विहित सलाहों का अनुसरण करें। स्वास्थ्य संबंधी परामर्श के लिए टोल फ्री नंबर 104 पर डायल कर आवश्यक जानकारी व सुझाव प्राप्त करें।

बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें ध्यान, ठंडी चीजों के खानपान से करें परहेज

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रायपुर। इस समय मौसम में उतार चढ़ाव के कारण कभी पारा बहुत ज़्यादा तो कभी कम हो रहा है। ऐसे समय में बच्चों को मौसमी बीमारी से बचाना जरूरी हो जाता है। सर्दी शुरू होते ही अस्पतालों में बच्चों को मौसमी बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम से इन्‍फेक्‍शन वाले रोगियों की संख्या बढ़ने की सम्भावना रहतीहै। बदलते मौसम के साथ बच्चों की बीमारी से घबराएं नहीं बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें ताकि सही समय पर उचित इलाज मिल सके। इस बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरगांव में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.रश्मि अग्रवाल जैन ने बताया: ‘’मौसम में इन दिनों बदलाव आ रहा है।



जिसके कारण ठंड बढ़ रही है। बदलता मौसम शरीर पर भी असर डालता है। विशेष रूप से ऐसे समय में बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। हल्की ठंडी हवा भी उन्हें नुकसान कर सकती है। अब कुछ दिनों से हल्की ठंड महसूस होने लगी है जिससे बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी सहित अन्य मौसमी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों की त्वचा के साथ ही पूरा शरीर नाजुक होता है। हल्की हवा भी नुकसान कर देती है। इसलिए छोटे बच्चों को ऐसे मौसम में हवा के संपर्क में सीधा नहीं आने दें। इम्यून सिस्टम पर विशेष ध्यान रखें। उम्र और शरीर के हिसाब से खानपान भी होना चाहिए  एवं घर का ही बना खाना खाएं तो बेहतर है।

आगे उन्होंने कहा: बच्चों की डाइट पर ध्यान दिया जाए तो बच्चों को मौसमी फैरिंजाइटिस व लैरिंजाइटिस वायरल से बचाया जा सकता है। इसके लिए बच्चों को प्रोटीन डाइट जरूर दें। इसमें सोयाबीन, पनीर, चने, सूप, हरी सब्जियां भी दे सकते हैं। बच्चों को कोई समस्या होने पर घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि चिकित्सक से सही समय पर सलाह लेना चाहिए। सर्दी, खांसी, बुखार और बच्चों में इंफेक्शन होने पर घबराएं नहीं, तत्काल चिकित्सक के पास लेकर जाए, बच्चों को दूसरे बच्चों से भी दूर रखें, स्कूल नहीं भेजें। चिकित्सक की सलाह से ही दवा दें। बच्चों को तरल पदार्थ जैसे दलिया, दाल, जूस आदि दे सकते हैं, पूरी तरह ठीक होने तक चिकित्सक से सलाह लेते रहें, बच्चों को ठंडा पानी न पिलाएं। बच्चों को बाहर की चीजें जैसे प्लास्टिक बंद नमकीन, आर्टिफ़िशियल रंग वाले फ्रूट्स जूस, उन्हें न दिए जाएं, इनकी वजह से दमा के लक्षण उभरते है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपने 6 वर्षीय बच्चे को लेकर आई सबा खान बताती है: चार दिन पहले बच्चे ने एक विवाह समारोह कार्यक्रम में जिद करके आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक का सेवन कर लिया था कल से  बच्चे को बहुत ज्यादा सर्दी हो गई थी। सांस लेने में तकलीफ हो रही है, अभी डॉक्टर को दिखाया, डॉक्टर ने बताया मौसम के अनुरूप ही खाद्य एवं पेय पदार्थ का प्रयोग करना चाहिए इस मौसम में ठंडी चीजों को खाने से बचना चाहिए और बच्चे को सीधा हवा के सम्पर्क में आने से बचाना चाहिए, ताकि बच्चे को ठंड लगने से बचाया जा सके। बिना कपड़ों के एक दम से बाहर न निकालें एवं रात में पंखा न चलाने की सलाह दी गई ।

इन बातों का भी रखें ध्यान

रोग प्रतिरोधक क्षमता सही रहेगी तो बच्चा किसी बीमारी के चपेट में नहीं आएगा, बच्चा अगर 6 महीने से कम का है तो मां का दूध ही पिलाएं, छोटे बच्चों को उचित आहार दें, समस्या होने पर चिकित्सकों की सलाह लें, 6 महीने से एक साल तक के बच्चे को पतला खाना खिलाएं जिसमें सादी खिचड़ी या आलू को मैश कर के खिलाएं। मौसम अनुरूप वस्त्र पहनाए। हाथ साफ रखें। मास्क लगाने के लिए बच्चों को प्रेरित करें। आसपास साफ सफाई रखें।

Wheather Update : एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने, गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना

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रायपुर। मौसम विभाग के अनुसार एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और तटीय आंध्रप्रदेश के ऊपर स्थित है। इसके असर से प्रदेश में आज एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने अथवा गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। वर्षा का मुख्य क्षेत्र दक्षिण छत्तीसगढ़ रहने की संभावना जताई गई है।



इस बीच, महासमुंद और राजनांदगांव जिले में आज आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार महासमुन्द जिले के बुंदेली गांव में आज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने से दो ग्रामीणों की मौत हो गई।  वहीं, राजनांदगांव जिले के रानीपुर-खड़खड़ी गांव में भी आज दोपहर खेत में काम कर रहे एक किसान की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई।

Wheather Update : छत्तीसगढ़ के इन जिलों में होगी भारी बारिश

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रायपुर। मौसम विभाग ने आगामी चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। बस्तर संभाग के अलावा धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, बालोद, गरियाबंद और उससे लगे हुए जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, बलौदाबाजार और जांजगीर तथा उससे लगे जिलों में यलो अलर्ट की चेतावनी देकर भारी बारिश होने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार भारी और अति भारी बारिश का मुख्य केन्द्र मध्य छत्तीसगढ़ रहेगा।



इस बीच, तेज बारिश के कारण बीजापुर और जगदलपुर के बीच सड़क संपर्क आज भी टूटा हुआ है। बांगापाल इलाके में पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण यहां की सड़क कट गई है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-तिरसठ पर आवागमन बाधित हुआ है और सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। वहीं, जगदलपुर शहर की निचली बस्तियों के अलावा पॉश कॉलोनियों में भी पानी भर गया है। जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्थिति का जायजा लिया और प्रभावितों के साथ बातचीत की। 

देखिए : मौसम विभाग की चेतावनी


वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-तीस में काकड़ी घाट के पास नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने के कारण आज दोपहर करीब तीन घंटे तक यातायात बाधित रहा। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसी तरह, धमतरी में भी सोंढूर नदी उफान पर है। पुल के ऊपर से पानी का बहाव काफी तेज होने की वजह से आज सामान से भरा हुआ एक ट्रक बह गया। पुलिस और लोगों की मदद से ट्रक चालक और परिचालक की जान बचा ली गई है। 

इस पुल पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। नगरी ब्लॉक में कई रपटे भी उफान पर हैं। वहीं, राजनांदगांव जिले में भी तेज बारिश का दौर जारी है। शहर के हाउसिंग बोर्ड कॉम्प्लेक्स, जिला अस्पताल और कचहरी परिसर में जलजमाव हो गया है। राजधानी रायपुर में भी बीते दो दिनों से रूक-रूककर बारिश का दौर जारी है। आज दिनभर तेज बारिश होती रही, जिससे कई निचले इलाकों के साथ ही सड़कों पर पानी भर गया है।

छत्तीसगढ़ के इन स्थानों में भारी बारिश की संभावना

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रायपुर। प्रदेश में आगामी बहत्तर घंटों के दौरान बस्तर संभाग सहित अनेक स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस संबंध में रेड और यलो एलर्ट जारी किया है। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, कांकेर और नारायणपुर जिले में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान इन सभी जिलों में भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है। वहीं, बस्तर संभाग सहित धमतरी और गरियाबंद जिले में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान इन जिलों में भी गरज-चमक के साथ भारी वर्षा होने के आसार है।


 

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, पेण्ड्रारोड, बालासोर और उसके बाद दक्षिण पूर्व की ओर मध्य बंगाल की खाड़ी तक स्थित है। वहीं, एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास तक बना हुआ है। इसके प्रभाव से एक निम्नदाब का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना है। इसके असर से छत्तीसगढ़ में अगले चौबीस घंटों के दौरान अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी से अतिभारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है।

इस बीच, खबर मिली है कि जांजगीर-चांपा जिले में आकाशीय बिजली गिरने की चार अलग-अलग घटनाओं में एक किशोरी सहित तीन लोगों की मौत हो गई है। बिजली गिरने की यह घटना अकलतरा, मुलमुला और पामगढ़ क्षेत्र में हुई है। इन घटनाओं में तेईस भेड़ें भी मारी गई हैं। बिजली गिरने से झुलसी एक बच्ची को बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर भेजा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने मौसमी बीमारियों से सतर्क रहने की अपील

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रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने लोगों से मंकीपॉक्स, कोरोना संक्रमण और स्वाइन फ्लू के साथ ही बारिश के मौसम में होने वाली मौसमी बीमारियों से सतर्क रहने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सिविल सर्जन्स को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वहीं, सभी जिलों को भी अलर्ट कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू के ग्यारह प्रकरणों की पहचान हुई है,



जिनमें से दो मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बाकी मरीजों का इलाज रायपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सिंहदेव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग अवश्य करें। साथ ही हाथों की साफ-सफाई और कोरोना से बचाव संबंधी नियमों का गंभीरता से पालन करें। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू भी कोरोना की तरह फेफड़ों को प्रभावित करता है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सुकमा जिले में किडनी रोगों से पीड़ित लोगों के गांव के पानी की प्रारंभिक जांच की गई, जिसमें आयरन और फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। वहां के जल में अन्य भारी तत्वों की जांच के लिए सैंपल को प्रयोगशाला भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट तीन दिन में आने की उम्मीद है। उन्होंने सुकमा जिला प्रशासन को इस संबंध में अलर्ट करने के साथ ही प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

इस बीच, प्रदेश के संचालक महामारी नियंत्रण डॉक्टर सुभाष मिश्रा ने स्वाइन फ्लू के कारणों और इसके लक्षणों के बारे में बताया कि यह वायरस वायु कण और संक्रमित वस्तुओं को छूने से फैलता है। डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार के साथ खांसी, नाक बहना, गले में खराश, सिर दर्द, बदन दर्द, थकावट, उल्टी-दस्त, बलगम के साथ खून आना और नाखूनों के नीला पड़ने के लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बच्चे और बुजुर्ग जल्दी संक्रमित हो जाते हैं, इसलिए उन्हें खासतौर से सावधानी बरतने की जरूरत है।

आकाशीय बिजली से बचाएगा दामिनी एप्प बिजली गिरने से पहले करेगी अलर्ट

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जशपुरनगर. अब आकाशीय बिजली गिरने से पहले ही लोगों को सूचना प्राप्त हो सकेगा। साथ ही किसान घर बैठे मौसम की पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त करेंगे। भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे द्वारा मोबाइल एप्प ‘‘दामिनी’’ लांच किया गया है. 



किसानों को मिलेगा मौसम पूर्वानुमान की जानकारी

जिससे आकाशीय बिजली गिरने की अलर्ट मिलने के साथ ही किसानों को मौसम के हर पल की जानकारी मिलेगी. इस एप्प से खेतों में काम कर रहे किसानों या खुले में काम करने वाले अन्य लोगों को बिजली गिरने से पहले ही सावधान रहने की सूचना मिल जाएगी और वे सुरक्षित स्थान पर जा सकेगे.

एप्प को प्ले स्टोर से किया जा सकता है डाउनलोड

दामिनी एप्प की विशेषता यह है कि एप्प 20 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की चेतावनी देगा. इस एप्प से मोबाईल फोन पर लोगों को वज्रपात के बारे में अलर्ट मिलेगा. यह एप्प नेटवर्क बिजली की गड़गड़ाहट और वज्रपात की गति के बारे में सटीक जानकारी देगा. एप्प में लाल रंग प्रदर्शित हो रहा हो तो 0 से लेकर 5 मिनट के अंदर बिजली गिरने की संभावना होगी. पीला रंग होने पर 5 से 10 मिनट के भीतर नीले रंग में 10 से 15 मिनट के भीतर बिजली गिरने की संभावना होती है. दामिनी एप्प को बड़ी आसानी से अपने मोबाईल के प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.

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